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27 March 2021

सावधान के दौरान दोनों पैरों के एंडी बीच कितने डिग्री का कोण बनना चाहिए

पिछले पोस्ट में हमने जाना की सावधान और विश्राम को अंग्रेजी में ड्रिल कमांड कैसे  बोलते हैं और अब इस पोस्ट में हम जानेंगे की ड्रिल या ऐसे  सावधान और विश्राम के दौरान पैर को कितने ऊपर से उठाकर स्टंपिंग किया जाता है और सावधान के दौरान दोनों पैरों के एंडी बीच कितने डिग्री का कोण बनना चाहिए(Savdhan position me panjon ke bich kitni digri ka kon/angle hona chahie)

यह सवाल हमेश उस्ताद या कोई भी पूछता है की ड्रिल में सावधान पोजीशन के लिए को पैरों  कितने ऊपर उठा कर स्टम्पिंग की जाती है तथा दोनों पंजो के बीच कितन का एंगल बनना चाहिए तो उस सवाल का जवाब इस प्रकार से है :

जैसे कि आप जानते हैं की ड्रिल का कोई भी हरकत करनी हो तो हमेशा सावधान पोजीशन से ही शुरू होती है इसके अलावा आप अपने से सीनियर के साथ बात करनी हो तो सावधान पोजीशन से ही बात की जाती है इसीलिए ड्रिल में सावधान पोजीशन का एक बहुत ही बड़ा महत्व है।
सावधान पोजीशन
सावधान पोजीशन 

सावधान पोजिशन की दुरुस्त ड्रिल कार्रवाई इस प्रकार है जब वर्ल्ड ऑफ कमांड मिलता है सावधान तो बाएं पांव को 12 इंच ऊपर उठाते हुए दाहिने पांव की एड़ी के साथ बाए पांव की एड़ी को चटकी के साथ मिलाते हैं!  जब बाएं पांव जमीन पर लगता है तो साउट करते हैं एक। इस पोजीशन(Savdhan position me dekhnewali bate) में देखने की बातें दोनों एरिया मिली हुई और पंजों के बीचका एंगल 30 डिग्री। दोनों घुटनों कसे हुए। दोनों बाजू दाहिने और बाएं तरफ पेंट की सिलाई के साथ मिले हुए और मुखीमुठी  कुदरती तौर पर बंद। पेट अंदर की तरफ छाती उठी हुई कंधे पीछे खींचे हुए गर्दन कॉलर के साथ मिली हुई चीन ऊपर और निगाह सामने। 

तो इस प्रकार से हम सावधान के कमांड पर कार्रवाई करते हैं और इस दौरान  में हमें देखा कि सावधान पोजीशन के लिए बाय पांव को जमीन से 12 इंच ऊपर उठा कर जोर की स्नेटम्पिंग के साथ बाए और दाहिने पाँव की  एड़ी के साथ करते हैं दोनों पैर के पंजों के बीच 30 डिग्री का एंगल बनाते हैं।

इस प्रकार से हमने देखा कि सावधान पोजीशन में बाएं पांव को 12 इंच ऊपर उठाकर दाहिने पांव की एड़ी के पास स्टंपिंग करते हैं और दोनों पांव के पंजों की बीच 30 डिग्री की एंगल बनाकर दोनों एड़ियों को रखते हैं।

इस प्रकार से ड्रिल  का  एक छोटा सा ब्लॉक पोस्ट समाप्त हुआ जिसमें हमने जाना कि सावधान पोजीशन में पैर को कितने ऊपर उठाकर स्टंपिंग करते हैं तथा दोनों पैर के पंजों के बीच कितनी डिग्री का एंगल बनना चाहिए। उम्मीद है की यह पोस्ट पसंद आया होगा और कुछ लाभप्रद जानकारी प्रदान हुई होगी  !इस ब्लॉग को सब्सक्राइब या फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे !
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  1. भारतीय पुलिस ड्रिल ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाले परेड कमांड का हिंदी -इंग्लिश रूपांतरण
  2. ड्रिल में अच्छी पॉवर ऑफ़ कमांड कैसे दे सकते है
  3. ड्रिल का इतिहास और सावधान पोजीशन में देखनेवाली बाते
  4. VIP गार्ड ऑफ़ ऑनर के नफरी और बनावट
  5. विश्राम और आराम से इसमें देखने वाली बाते !
  6. सावधान पोजीशन से दाहिने, बाएं और पीछे मुड की करवाई
  7. आधा दाहिने मुड , आधा बाएं मुड की करवाई और उसमे देखने वाली बाते !
  8. 4 स्टेप्स में तेज चल और थम की करवाई
  9. फूट ड्रिल -धीरे चल और थम
  10. खुली लाइन और निकट लाइन चल



18 March 2021

नक्शा के ऊपर उत्तर दिशा कैसे ज्ञात करे

पिछले पोस्ट में मैंने अपने एक पाठक की मैप रीडिंग का सवाल का जवाब दिया था जिसका विषय था मैग्नेटिक बेअरिंग को ग्रिड बेअरिंग में बदना आज मै फिर  एक और पाठक ने  सम्बंधित सवाल पूछा   नक्शा के ऊपर उत्तर दिशा कैसे  ज्ञात करे या पता लगाये (Naksha me disha ka pta kaise lagaye) !

इसे  भी पढ़े :सर्विस प्रिज्मैटिक लिक्विड कम्पास mk-iii के 20 पार्ट्स और उनके काम

जैसे की  मैंने  आपने पिछले ब्लॉग पोस्ट्स में जमीन पर उत्तर दिशा कैसे ज्ञात करे उसके बारे में बहुत से पोस्ट लिखा है!जैसे की  जमीन के ऊपर दिशा का ज्ञान हम बहुत से तरीके है जिस्सके सहायता से हम उत्तर दिशा ज्ञात कर सकते है जैसे  कंपास, सूरज, मंदिर , मस्जिद , यदि लेकिन इस बार जो सवाल आया है उसमे पूछा गया है की मैप  के ऊपर दिशा का ज्ञात कैसे करे(How to find north on map?) !

Naksha me Disha ka pta kaise lagaye
मैप के उत्तर  दिशा कैसे ज्ञात करना हो तो सबसे पहले मैप के ऊपर देखे उसके ऊपर उत्तर दिशा की एरो मार्क दिया होता है  जिसके द्वारा उत्तर बताया गया होता है और अगर एरो मार्क नहीं दिया गया हो तो यह हमेशा समझे की मैप को अगर सीधा पकड़ा जाए तो उसका  ऊपर का भाग उत्तर दिशा को इंगित करता है और एक बार उत्तर दिशा प्राप्त होगया तो उसके सहायता से बाकि सभी दिशा को हम आसानी से जान सकते है !
यानी एक बार उत्तर दिशा मालुम पड गया तो आप उत्तर की तरफ मुह कर के खड़ा  हो जाए और आप को दाहिने हाथ के तरफ पूर्व और बाए हाथ की तरफ पश्चिम दिशा होगा  तथा मैप का निचला हिस्सा दक्षिण दिशा होता है ! यानि दुसरे शब्दों में कहे तो नक्शा में उत्तर दिशा नक्शा के  उपरी भाग होता है और दक्षिण दिशा निचे के भाग में होता है और उसी तरह से दाहिने साइड में पूर्व तथा बाये हाथ के साइड में पश्चिम दिशा होता है !

इसे  भी पढ़े :अपना खुद का लोकेशन मैप पे जानना और नार्थ पता करने के तरीके

इस प्रकार से यहाँमैप के ऊपर उत्तर दिशा प्राप्त करने  सम्बंधित ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई !उम्मीद है कि यह आप लोगों को लिए उपयोगी साबित होगा। अगर यह मेरा ब्लॉक ब्लॉक पोस्ट आपको पसंद आया हो तो मेरे ब्लॉक को शेयर और सब्सक्राइब करें और अगर कोई सुझाव मेरे ब्लॉक पोस्ट के बारे में हो तो नीचे के कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें इस ब्लॉग को सब्सक्राइब और फेसबुक पर लाइक करें और हम लोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
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  2. 15 जरुरी पॉइंट्स मैप को सही पढने के लिए
  3. मैप कितने प्रकार के होते है ?
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  5. कंटूर रेखाए क्या है ? एक मैप की विश्वसनीयता और कमिया किन किन बाते पे निर्भर करती है ?
  6. मैप रीडिंग में दिशाओ के प्रकार और उत्तर दिशा का महत्व
  7. दिन के समय उत्तर दिशा मालूम करने का तरीका
  8. कन्वेंशनल सिग्न ,कन्वेंशनल सिग्न के प्रकार , कन्वेंशनल सिग्न बनाने का तरीका
  9. रात के समय उत्तर मालूम करने का तरीका
  10. सर्विस प्रोटेक्टर का परिभाषा और सर्विस प्रोटेक्टर का प्रकार
  11. सर्विस प्रोटेक्टर का उपयोग और सर्विस प्रोटेक्टर से बेक बेअरिंग पढने का तरीका

14 March 2021

. 303 इंच राइफल का परिचय उत्पत्ति और विशेषताएं

 पिछले ब्लॉगपोस्ट में हमने VLP (Very Light Pistol) के बारे  में जानकारी शेयर की थी और अब इस blog पोस्ट में हम .303" राइफल के बारे में बेसिक जानकारी जैसे उत्पत्ति, विश्श्ताये और कामिओ के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे !

इस पोस्ट के अच्छे से सझने के लिए मैंने इस पोस्ट को निम्लिखित सब हेडिंग में बाँट दिया है :

.303" राइफल नंबर -1 मार्क- 3
.303" राइफल नंबर -1 मार्क- 3

1..303" राइफल का परिचय 

2. .303" राइफल की उत्पति 

3. .303" राइफल की बेसिक डाटा 

4. .303" की विशेषताए और 

5. .303" राइफल की कमिया 

1..303" राइफल का परिचय : जैसे कि हम जानते हैं कि राइफल इन्फेंट्री या आर्म्ड फोर्स के जवान का एक जाति हथियार होता है। इसलिए हथियारों की  सिखलाई में सबसे पहले राइफल की हैंडलिंग ही सीख लाई जाती है और सिखलाई के दौरान एक जवान को इस काबिल बना दिया जाता है कि वह किसी भी हालात में अपने जातिय हथियार का इस्तेमाल कर सके और उसके अंदर पढडने वाले रोगों को दूर कर सके तथा अपने दिए हुए टास्क को अच्छे से पूरा कर सकें!

.303" राइफल निम्नलिखित में  वेरिएंट आते हैं:-

  • .303" राइफल नंबर -1 मार्क- 3 
  • .303" राइफल नंबर - 3 मार्क (वन स्टार)
  • .303" राइफल नंबर - 4 मार्क 1 
  • .303" राइफल नंबर -4 मार्क -1 (T)
  • .303" राइफल नंबर - 5 मार्क-1(पाराशूट)

2. .303" राइफल की उत्पति  :यह राइफल सन 1880 में ब्रिटिश आर्मी में अलग-अलग राइफल सिस्टम का अध्ययन करने के बाद  ली मेडफोर्ड राइफल "Lee met Ford Rifle" को अपनाया जिसका डिजाइन पॉइंट .303" राइफल मार्क -I की तरह ही था! फिर कुछ समय बाद सन 1920 में शोर्ट मागज़ीने ली इनफील्ड(SMLE) राइफल .303" मार्क-I व मार्क-IIIको इस्तेमस्ल करने के लिए अपनाया ! 

समय-समय पर इस में परिवर्तन किए गए तथा इसी  परिवर्तन के आधार पर इन राइफल को अलग-अलग नाम दे दिया गया जैसे:

  • .303" राइफल नंबर -1 मार्क- 3 
  • .303" राइफल नंबर - 3 मार्क (वन स्टार)
  • .303" राइफल नंबर - 4 मार्क 1 
  • .303" राइफल नंबर -4 मार्क -1 (T)
  • .303" राइफल नंबर - 5 मार्क-1(पाराशूट)

वास्तव में देखा जाए तो इस राइफल का आविष्कार कनाडा के रहने वाले जेम्स पेरिस ली (James Paris Lee)  ने किया था इसीलिए इसका नाम ली इनफील्ड राइफल रखा गया.

3. .303" राइफल की बेसिक डाटा : .303" राइफल के कुछ बेसिक डाटा इस प्रकार से है :

4. .303" राइफल की उत्पति : इस राइफल की विशेषताए निम्न लिखित है :

  • इसके जरिए स्मॉल आर्म्स के दूसरे हथियार सिखाने में आसानी होती है इसलिए इसको बेसिक हथियार कहते हैं। 
  • इसमें कुल 130 पूरे होते हैं जो कि अच्छे किस्म के होते हैं इसीलिए इसमें टूट-फूट नहीं पढ़ते हैं या कम पड़ते हैं।
  • एक राइफल के पुर्जे दूसरे राइफल में बदली किए जा सकते हैं।
  •  राइफल सिंगल शॉट फायर करता है तथा एक अच्छा फायदा 1 मिनट में 10 से 15 राउंड फायर कर सकता है। 
  • यह एक हल्का हथियार है जिससे आसानी से लाया या ले जाया जा सकता है। 
  • इस राइफल में रोके बहुत ही  कम पड़ती है और रोके पड़ने पर अच्छी तरह से सिखलाई पाए हुए जवान उन लोगों को आसानी से दूर कर सकता है!
  • इस राइफल की कारगर रेंज 300 गज है 
  • इस राइफल का इस्तेमाल संगीन लगा के CQB की लड़ाई में की जा सकती है 
  • यह एक फ्लैट त्रजेक्ट्री  हथियार है !

5. .303" राइफल की कमिया :-ऐसे तो यह हथियार अपने समय का सबसे ज्यादा आर्म्ड  फोर्स में इस्तेमाल होने वाला वेपन है लेकिन इसमें कुछ बेसिक कमियां होने के कारण इसे एक तरह से आर्म्ड फोर्स में इस्तेमाल करना बंद कर दिया गया है लेकिन अभी भी कुछ राज्यों की पुलिस इसे इस्तेमाल करती है इस राइफल की कुछ कमियां इस प्रकार से है:

  • इसे बार-बार फायर करने के लिए फायर को लोड और लोड करना पड़ता है। 
  • इससे सिंगल शॉट ही फायर किया जा सकता है 
  • आड़ के पीछे  छुपे हुए दुश्मन को मारना मुश्किल है

इस प्रकार से यहां .303" राइफल की बेसिक जानकारी जैसे की उत्पत्ति विशेषताएं और कमियों से संबंधित यह यहा  ब्लॉक पोस्ट समाप्त हुआ उम्मीद है कि आपको यह ब्लॉग पोस्ट पसंद आएगा !अगर या ब्लॉक को सबको पसंद आए तो मेरे पोस्ट को लाइक शेयर और कमेंट करें और कोई सुझाव हो तो भी आप नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें!

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12 March 2021

मैग्नेटिक बेअरिंग को ग्रिड बेअरिंग में बदना

 मैप रीडिंग के पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने टोपोग्राफिकल फॉर्म के बारे में जानकारी प्राप्त किये और उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए आज एक एन सी सी के छात्र द्वारा ग्रिड बेअरिंग को मैग्नेटिक बेअरिंग में कैसे बदले है के बरे में पूछे गए सवाल का जवाब देने के लिए यह पोस्ट लिख रहा हु !

जैसे की हम जानते है कन्वर्शन और बेअरिंग यानि बेअरिंग को कन्वर्ट करने की जरुरत बहुत पड़ती है जब हम मैप रीडिंग की ट्रेनिंग लेते है इसीलिए यह बहुत ही जरुरी है की ओ चाहे एन सी सी के छात्र हो या यूनिफार्म फाॅर्स के जवान सभी को कन्वर्शन ऑफ़ बेअरिंग जिसमे की ग्रिड बेअरिंग  को  मैग्नेटिक बेअरिंग या ट्रू नोठे , मैग्नेटिक नार्थ या ग्रिड नार्थ को आपस में बदली करने जरुर आना चाहिए नहीं तो इसके बिना आप मैप को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर सकते है !

जैसे की सवाल है की ग्रिड बेअरिंग को मैग्नेटिक बेअरिंग में कैसे बदली करते है तो इसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए कुछ जरुरी बेअरिंग के बारे में जानकारी होनी चैये जैसे की :

  • ट्रू नार्थ  किसे कहते है(True north kise kahte hai/ What is true north?) : ध्रुव तारे के सहायता से ज्ञात किया हुवा नार्थ को ट्रू नार्थ कहते है ! तथा ट्रू नार्थ की ओर खिची गई रेखायो को ट्रू नार्थ की रेखाए कहते है ! सर्वे मैप पर ये रेखाए दक्षिण से उत्तर की ओर काले रंग से खिंची जाती है !
  • ग्रिड नार्थ किसे कहते है(Grid north kise kahte hai/ What is Grid north?) : सर्वे मैपो पर बैगनी रंग से दक्षिण से उत्तर की खिंची गई रेखाए जिस उत्तर की ओर इशारा करती है वह ग्रिड नर्थ कहलाता है !
  • मैग्नेटिक नार्थ किसे कहते है(MAgnetic north kise kahte hai/ What is Magnetic north?) ?: कंपास की सुई अर्थात मैग्नेटिक सुई जिस उत्तर की ओर इशारा करता है उसे मैग्नेटिक नोएथ कहते है ! सर्वे मैप पर मैग्नेटिक नार्थ को दिखने के लिए कोई रेखा नहीं होती है !
  • मैग्नेटिक वेरिएशन किसे कहते है (Magnetic variation kise kahte hai/ What is magnetic variation?)?: किसी स्थान पर जब ट्रू नार्थ और मैग्नेटिक नार्थ की रेखाए आपस में मिलती है तो उस स्थान पर इन दोनों के बीच की कोणात्मक दुरी को मैग्नेटिक वेरिएशन कहते है !
  • एंगल ऑफ़ कन्वर्जेन्स किसे कहते है(Angle of convergence kise kahte hai / What is angle of convergence?):किसी स्थान पर  जब ट्रू नार्थ और ग्रिड नार्थ की रेखाए आपस में मिलती है तो उस स्थान पर इन दोनों नार्थ रेखाओ के बीच की कोणात्मक दुरी को एंगल ऑफ़ कन्वर्जेन्स कहते है !
  • लोकल वेरिएशन किसे कहते है (Local variation kise kahte hai? /What is local variation?)?:किसी स्थान पर मिलते समय ग्रिड नार्थ और मैग्नेटिक नार्थ रेखाओ के बीचजो कोणात्मक दुरी बनती है उसे लोकल वेरिएशन कहते है ! 
जैसे की हम हम जानते हैं कि मैप पर एंगल आफ कन्वर्जेंस तथा मैग्नेटिक वेरिएशन संबंधी जानकारी तो दी जाती है परंतु ग्रिड नार्थ  रेखा और मैग्नेटिक नॉर्थ रेखा का अंतर नहीं दिया जाता है। इसका ज्ञान वास्तविक उत्तर यानी ट्रू नॉर्थ की स्थिति से हिसाब लगाकर ही कर सकते हैं। 

मैग्नेटिक बेयरिंग कंपास से तथा ग्रिड बेअरिंग  सर्विस प्रोटेक्टर से नापी जाती है। परंतु ट्जारू बेअरिंग नने के लिए हमें अन्य किसी बेयरिंग को उस में बदलना पड़ता है!

 जमीन पर काम करते समय कंपास या मैग्नेटिक बेयरिंग से काम चल जाता है तथा मैप  पर काम करते समय सर्विस प्रोटेक्टर द्वारा ली गईग्रिड बेअरिंग  से काम चल जाता है !परंतु जमीन से मैप और मैप से जमीन पर की कार्रवाई में मैग्नेटिक बेयरिंग को ग्रिड बेअरिंग  और ग्रिड बेअरिंग को मैग्नेटिक बेअरिंग  में बदलना अवश्य होता है 
मैप पर मैग्नेटिक नार्थ और  ग्रिड नार्थ  का अंतर  नहीं लिखा होता है! इसे मैग्नेटिक वेरिएशन तथा एंगलऑफ़ कन्वर्जेन्स की मदद से  मालूम करते हैं!


बेयरिंग के रूम रूपांतरण की विधि:-एक बेअरिंग को  किसी दूसरी दूसरी बेरिंग या बेअरिंगो  में परिवर्तन करने से पहले निम्न बातों को ध्यान में रखना पड़ता है:-
  • सभी बेयरिंग की एक रेखा कोई एक नार्थ लाइन होती है। 
  • सभी बेअरिंगो  को घड़ी के सुलटे रुख  डिग्री ,मिनटों  और सेकंडो में नापा जाता है। परंतु पृथ्वी के स्थान सदैव एक ही स्थान पर रहते हैं। उनके बेरिंग में अंतर केवल इसलिए होता है कि इन स्थानों की नॉर्थ रेखा एक स्थान पर ना होकर एक दूसरे से थोड़ा पूर्व या पश्चिम में हटकर होती है। इनके पूर्व या पश्चिम में होने से बेअरिंगो  पर प्रभाव पड़ता है! उसे जानने की विधि यह है कि यदि किसी बेयरिंग की नॉर्थ रेखा दूसरे बेयरिंग की नार्थ  रेखा से पश्चिम में है तो उस बेयरिंग दूसरी बेरिंग में उतना ही अधिक होगी जितनी डिग्री पश्चिम में उसकी नाथ रेखा है। यदि किसी स्थान की नॉर्थ रेखा के पूर्व में है तो उसकी बेयरिंग दूसरी बेरिंग से उतना ही डिग्री कम होगी कितना डिग्री उसकी देखा पूर्व में है!
  • मैप  के ऊपर एंगल ऑफ़ कन्वर्जेन्स और मैग्नेटिक वेरिएशन दिया हुवा रहता है और उसी के मदद से हम ग्रिड बेअरिंग को मैग्नेटिक बेअरिंग तथा मैग्नेटिक बेअरिंग को ग्रिड बेअरिंग में बदलते है ! उदाहण के लिए 
1. मैग्नेटिक बेअरिंग को ग्रिड बेअरिंग में बदना(Magnetic bearing ko grid bearing me badlna. Convergence of magnetic bearing to grid bearing)) : यदि मैप का लोकल वेरिएशन 1 डिग्री 30 मिनट पश्चिम है ! यदि कम्पस से यानि किसी स्थान के मैग्नेटिक बेअरिंग 230 डिग्री है तो उस स्थान का ग्रिड बेअरिंग कितनी होगी ?

मैग्नेटिक बेअरिंग को ग्रिड बेअरिंग में बदलना
उत्तर:-  चुकी मैग्नेटिक नार्थ , ग्रिड नार्थ के 1 डिग्री 30 मिनट पश्चिम में है ! इसलिए ग्रिड बेअरिंग भे मैग्नेटिक बारिन से 1 डिग्री 30 मिनट कम अर्थात 230 डिग्री  - 1 डिग्री 30 मिनट = २२८ डिग्री 30 मिनट होगी ! यदि मैग्नेटिक नार्थ ग्रिड नार्थ से 1 दिगी 30 मिनट पूर्व का होता तो ग्रिड बेअरिंग 1 डिग्री 30 मिनट अधिक अर्थात 230 डिग्री  + 1 डिग्री 30  मिनट = 231 डिग्री 30 मिनट होता !


2. ग्रिड बेअरिंग को मैग्नेटिक बेअरिंग में बदलना(Grid bearing ko Magnetic bearing me badlna. Convergence of grid bearing to magnetic bearing) :यदि मैप पर लोकल वेरिएशन 1 डिग्री 38 मिनट पश्चिम यानि ग्रिड नार्थ से मैग्नेटिक नार्थ पश्चिम में है ! तो उस मैप पर सर्विस प्रोटेक्टर से ग्रिड बेअरिंग 290 डिग्री नापा गया है मैग्नेटिक बेअरिंग कितना  होगा ! यानि ग्रिड बेअरिंग को मैग्बेनेटिक बेअरिंग में बदलना है !

ग्रिड  बेअरिंग को मैग्नेटिक  बेअरिंग में बदलना
उत्तर :- चुकी मैग्नेटिक नार्थ ग्रिड नार्थ से 1 डिग्री 38 मिनट पश्चिम में है ! अतः स्पस्ट है की मैग्नेटिक बेअरिंग ग्रिड बेअरिंग से 1 डिग्री 38 मिनट अधिक होगी अर्थात 290 डिग्री + 1 डिग्री 38 मिनट = 288 डिग्री 22 मिनट !




इस प्रकार से यहाँ ग्रिड बेअरिंग को मैग्नेटिक बेअरिंग तथा मैग्नेटिक बेअरिंग को ग्रिड बेअरिंग में बदलने से सम्बंधित ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई !उम्मीद है कि यह आप लोगों को लिए उपयोगी साबित होगा। अगर यह मेरा ब्लॉक ब्लॉक पोस्ट आपको पसंद आया हो तो मेरे ब्लॉक को शेयर और सब्सक्राइब करें और अगर कोई सुझाव मेरे ब्लॉक पोस्ट के बारे में हो तो नीचे के कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें इस ब्लॉग को सब्सक्राइब और फेसबुक पर लाइक करें और हम लोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
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  1. मैप रीडिंग की अवाश्काताये तथा मैप का परिभाषा
  2. 15 जरुरी पॉइंट्स मैप को सही पढने के लिए
  3. मैप कितने प्रकार के होते है ?
  4. कंपास को सेट करना तथा इस्तेमाल करने का तरीका
  5. कंटूर रेखाए क्या है ? एक मैप की विश्वसनीयता और कमिया किन किन बाते पे निर्भर करती है ?
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  10. सर्विस प्रोटेक्टर का परिभाषा और सर्विस प्रोटेक्टर का प्रकार
  11. सर्विस प्रोटेक्टर का उपयोग और सर्विस प्रोटेक्टर से बेक बेअरिंग पढने का तरीका


11 March 2021

सावधान तथा विश्राम को ड्रिल की कमांड

ड्रिल के हम अपने  पिछले ब्लॉग पोस्ट में  केन ड्रिल के बारे में जानकारी प्राप्त की और आज के इस पोस्ट में हम जानेगे की सावधान तथा विश्राम को ड्रिल  की कमांड इंग्लिश  समय क्या बोलते है(Savdhan vishram RULES in English) !

जैसे की हम जानते है की ड्रिल डिसिप्लिन की बुनियाद है इस लिए यूनिफार्म फाॅर्स में ड्रिल की बहुत ही ज्यादा अहमियत ट्रेनिंग के दौरान दी जाती है ! और ड्रिल के दौरन हम जिन वर्ड ऑफ़ कमांड को सुनते है उसमे सबसे ज्याद अगर कोई कमांड सुनाई देता है ओ है सावधान , विश्राम ! भारत के किसी भी स्टेट में चले जयी ज्यदा टार राज्यों में ड्रिल की कमांड हिंदी में दी जाती है लेकिन कुछ एक में इंग्लिश में भी कमांड दी जाती है ! इस लिए आज हम जानेगे की सव्दहं और विश्राम को अग्रेजी में क्या बोला जाता है और उस कमांड पर क्या करिवाई की जाती है !  
  1. सावधान को इंग्लिश अटेंशन (attention) बोला जाता है ! कुछ हमारे पाठक है उन्होंने ने अनुरोध किया था की सावधान या attentionअटेंशन ड्रिल करवाई को इंग्लिश में वीरान दे इसलिए मै सावधान और विश्राम का वीरान इंग्लिश मेंयहाँ दे रहा हु !
According to BPR&D drill manual:-
Command: Squad Attention
Action: on this command spring up to the following position :
  • Heels together and in line . 
  • Feet turned out at an angle of about 30digree. 
  • Knee straight 
  • body erect and carried evenly over the thighs with the shoulders (which should be level and square in front ) down  moderately back  this should bring the chest to the natural forward position  without any straining or stiffening.
  • Arms hanging from shoulders as straight as the natural bend of arms will allow.
  • Wrists straight , hand closed and slightly clenched back of fingers slightly touching the thigh, thumbs to the front and close to the forefinger.
  • thumb immediately behind the seams of the trousers/shorts.
  • Neck erect.
  • Head balanced evenly on the neck and not poked forward.
  • eyes looking their own height and straight to the front.
  • the weight of the body should be balanced evenly on the both feet and evenly distributed between the forepart of the feet and the heels
  • the breathing must not in any way be restricted and no part of the body should be either drawn in or pushed out.
  • The position is one of the readiness in expectation of the word of command and is also adopted when speaking to or being address by superior officer.
Common fault while in Savdhan position:
  • A strained and exaggerated position causing breathing to restricted.
  • Unsteadiness and movement of the eyes.
  • Feet and body no square to front 
  • heels not close, 
  • one foot more extended the the other
  • Arms slightly bend and creeping forward
  • Backs of the hands to the front thereby opening the shoulder blades and constricting the chest

2. विश्राम को इंग्लिश में स्टैंड एट  इज (Stand  at  Ease ) बोलते है :
Command: Stand  at  Ease 
Action: on this command spring up to the following position :
  • Carry the left foot about 12 inches to the left so that the weight of the body rests equally on both feet.
  • at the same time carry the hands behind the back and place the back of the righthand palm in the left grasping it lightly with the finger and thumb and allowing the arms to hand at their full extent.
Common fault while in Stand  at  Ease  position:
  • Failure to carry the foot off 12 inches.
  • Movement of the right foot with consequent loss of dressings 
  • Bending at the waist when picking the foot. 
  इसके साथ ही स्पेशल अनुरोध किया हुवा मेरा ब्लॉग  उम्मीद है की यह पोस्ट आपलोगो को पसंद आएगा !उम्मीद है की यह पोस्ट पसंद आया होगा और कुछ लाभप्रद जानकारी प्रदान हुई होगी  !इस ब्लॉग को सब्सक्राइब या फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे !
इसे भी  पढ़े :
  1. भारतीय पुलिस ड्रिल ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाले परेड कमांड का हिंदी -इंग्लिश रूपांतरण
  2. ड्रिल में अच्छी पॉवर ऑफ़ कमांड कैसे दे सकते है
  3. ड्रिल का इतिहास और सावधान पोजीशन में देखनेवाली बाते
  4. VIP गार्ड ऑफ़ ऑनर के नफरी और बनावट
  5. विश्राम और आराम से इसमें देखने वाली बाते !
  6. सावधान पोजीशन से दाहिने, बाएं और पीछे मुड की करवाई
  7. आधा दाहिने मुड , आधा बाएं मुड की करवाई और उसमे देखने वाली बाते !
  8. 4 स्टेप्स में तेज चल और थम की करवाई
  9. फूट ड्रिल -धीरे चल और थम
  10. खुली लाइन और निकट लाइन चल


सावधान की स्थिति में कितने डिग्री पंजे खुले

 पिछले पोस्ट में हमने सावधान पोजीशन को इंग्लिश में क्या बोलते है तथा पूरी ड्रिल करवाई इंग्लिश में लिख कर बताया था और अब इस पोस्ट में जो की ड्रिल विषय से सम्बंधित है जिसमे एक पाठक जानना चाहते है की ड्रिल में सावधान पोजीशन में दोनों पैरो के बिच कितने का कोण बनता है !

जैसे की हम जानते है की ड्रिल डिसिप्लिन की बुनियाद है और सभी यूनिफार्म के जवान को ड्रिल की ट्रेनिंग दी जाती है जिससे उनके अन्दर ड्रेस पहनने से लेकर सभी तरह के डिसिप्लिन का माजदा पैदा किया जाता है और एक अच्छा ड्रिल करने वाला जवान एक डिसिप्लिन जवान भी वह होता है ! कुछ ही समय में किसी यूनिट का मोरल और डिसिप्लिन के बारे में पता करने हो तो इस बात से पता किया जा सकता है की यूनिट का जवान का ड्रिल यानि मर्ची तथा सलूट करने का तरीका कैसी है उसे देख कर एक यूनिफार्म फाॅर्स की डिसिप्लिन का पता लगाया जा सकता है !

ऐसे मेरे ब्लॉग पे बहुत से पाठक आते है और सवाल पूछते है पुलिस ट्रेनिंग से सम्बंधित उन सवालो का जवाब समय समय पे मई देते रहता हु उसी कड़ी में एक पाठक ने सवाल किया है "सावधान की स्थिति में कितने डिग्री पंजे खुले"(Savdhan  position me dono pairo ke bich kitna ka angle banta hai?). BPR&D ड्रिल मैन्युअल के अनुसार सावधान पोजीशन में दोनों पंजो के बीच 30 डिग्री का कोण बना हुवा होना चाहिए  और बॉडी एकदम सीधी होनी चाहिए !

सावधान विश्राम की डिटेल ड्रिल करवाई इंग्लिश में  आप इस लिंक को क्लिक कर के पढ़ सकते है ! तथा हिंदी पे पढने के लिए यहाँ क्लिक करे !

इसके साथ के ड्रिल में सावधान पोजीशन में दोनों पैरो के बीच कोण काटना का बनता है उससे सम्बंधित ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई! इसके साथ ही स्पेशल अनुरोध किया हुवा मेरा ब्लॉग  उम्मीद है की यह पोस्ट आपलोगो को पसंद आएगा !उम्मीद है की यह पोस्ट पसंद आया होगा और कुछ लाभप्रद जानकारी प्रदान हुई होगी  !इस ब्लॉग को सब्सक्राइब या फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे !

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