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31 March 2022

उल्टा सशत्र से बदली सशत्र || Last rites || shok parade

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने सलामी सशत्र से उलटे सशत्र के बारे में जानकारी प्राप्त की और अब इस पोस्ट में हम उलटे सशत्र से बदली सशत्र के बारे में जानकारी प्रकट करेंगे ! उलटे सशत्र बदली सशत्र लास्ट राईट (अंतिम संस्कार)के समय दिया  जाने वाला एक   सशत्र  क़वैद का ड्रिल होता है !

इस ब्लॉग पोस्ट को अच्छी तरह से समझने के लिए हमने इसे हमने निम्न पार्ट में बाँट दिया है :

Shok Sashtr parade
शोक सशत्र 
  • लास्ट राईट ड्रिल उल्टा सशत्र से बदली  का  उद्देश्य (Funeral drill ulta sashtr ka uddeshy)
  • लास्ट राईट ड्रिल उल्टा सशत्र से बदली  का जरुरत (Funeral drill ulta sashtr ka jarurat)
  • लास्ट राईट ड्रिल उल्टा सशत्र से बदली  का वर्ड ऑफ़ कमांड (Funeral drill ulta sashtr ka word of command)
  • लास्ट राईट ड्रिल उल्टा सशत्र से बदली  का वर्ड ऑफ़ कमांड गिनती से(Funeral drill ulta sashtr ka ginti se word of command) 
  • लास्ट राईट ड्रिल उल्टा सशत्र से बदली  का गिनती और व्यान से करवाई (Funeral drill ulta sashtr kaGinti aur vyan se karwai)

1. लास्ट राईट ड्रिल उल्टा सशत्र से बदली  का  उद्देश्य

इस पोस्ट में हम लास्ट राईट ड्रिल क़वैद का एक सबक जिसमे हम जानेगे की उलटे सशत्र से बदली सशत्र के बारे में !

2. लास्ट राईट ड्रिल उल्टा सशत्र से बदली  का जरुरत

 जब शमशान भूमि  दूर हो तो फायरिंग पार्टी उलटे सशत्र से थक जाने पर बदली सशत्र की करवाई कतरी है !

3. लास्ट राईट ड्रिल उल्टा सशत्र से बदली  का वर्ड ऑफ़ कमांड 

वर्ड ऑफ़ कमांड सशत्र क़वैद बदली सशत्र एक-दो तीन-एक, दो-तीन-एक. जैसे थे 

4. लास्ट राईट ड्रिल उल्टा सशत्र से बदली  का वर्ड ऑफ़ कमांड गिनती से 

वर्ड ऑफ़ कमांड गिनती से सशत्र क़वैद बदली एक एक , स्क्वाड दो दो, स्क्वाड तीन तीन. जैसे थे 

5. लास्ट राईट ड्रिल उल्टा सशत्र से बदली  का गिनती और व्यान से करवाई 
  1. उलटे सशत्र से वर्ड ऑफ़ कमांड मिलता है गिनती से सस्त्र क़वैद बदली सशत्र एक तो इस वर्ड ऑफ़ कमांड पर दाहिने हाथ को राइफल से छोड़ कर सावधान पोजीशन में लाये और उसी समय बाए हाथ से राइफल को स्माल ऑफ़ द बट पर पकडे इसप्रकार से की राइफल की मजल आगे की ओर स्विंग कर जाये और राइफल लम्बवत सीधी रहे ! आपकी बाया हाथ शर्ट की उपरी पॉकेट के लाइन में होनी चाहिए  .
  2. स्क्वाड दो इस वर्ड ऑफ़ कमांड पे राइफल को बाए हाथ से दाहिने हाथ में जल्दी से बदली इस प्रकार से करे की राईट हैण्ड की पकड़ स्माल ऑफ़ द बट पे हो और दाहिने हाथ का पोजीशन शर्ट के पॉकेट के लाइन में और उसी समय लेफ्ट को साइड में कट करे !
  3. स्क्वाड तीन राइफल को दाहिने कंधे में ले जाए बगल सज की पोजीशन में और आगे को मार्च जरी रखेंगे !
इस प्रकार यहा  उलटे सशत्र से बदली सशत्र की ड्रिल की करवाई पूरी  हुई !

इस प्रकार उल्टा सशत्र से बदली सशत्र  ड्रिल कवायद की जनकारी  से सम्बंधित यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा उम्मीद है की यह ब्लॉग पोस्ट आपलोगों को पसंद आएगा !इस ब्लॉग को सब्सक्राइब या फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे! 

इसे भी  पढ़े :
  1. भारतीय पुलिस ड्रिल ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाले परेड कमांड का हिंदी -इंग्लिश रूपांतरण
  2. ड्रिल में अच्छी पॉवर ऑफ़ कमांड कैसे दे सकते है
  3. ड्रिल का इतिहास और सावधान पोजीशन में देखनेवाली बाते
  4. VIP गार्ड ऑफ़ ऑनर के नफरी और बनावट
  5. विश्राम और आराम से इसमें देखने वाली बाते !
  6. सावधान पोजीशन से दाहिने, बाएं और पीछे मुड की करवाई
  7. आधा दाहिने मुड , आधा बाएं मुड की करवाई और उसमे देखने वाली बाते !
  8. 4 स्टेप्स में तेज चल और थम की करवाई
  9. फूट ड्रिल -धीरे चल और थम
  10. खुली लाइन और निकट लाइन चल

30 March 2022

सलामी सशत्र से उलटे सशत्र की जरुरत और ड्रिल करवाई

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने सलामी शास्त्र के बारे में डिटेल जानकारी प्राप्त किये और अब इस नई ब्लॉग पोस्ट में हम सलामी  शास्त्र से उल्टा शास्त्र  के बारे में जानेगे ! ए ड्रिल उस समय की जाती है जब डेड बॉडी को शमशान घाट ले जाते है उस समय इस ड्रिल को अख्तियार करते है !Salami Shastr se ulta shastr parade drill , last rites drill

इस ब्लॉग पोस्ट को अच्छी तरह से समझने के लिए हमने इसे निम्न भागो में बाँट दिया है :

Salami Sashtr se Ulte sashtr ki karwai
Salami Sashtr se Ulte sashtr

  • उल्टा शास्त्र की  उदेश्य (Ulta shastr ki uddeshy )
  • उल्टा शास्त्र की  जरुरत ((Ulta shastr ki jarurat)
  • उल्टा शास्त्र की  वर्ड ऑफ़ कमांड (Ulta shastr ki word of command)
  • उल्टा शास्त्र की  वर्ड ऑफ़ कमांड गिनती से नमूना   (Ulta shastr ki word of command ginti se)
  • उल्टा शास्त्र की   गिनती से कारवाही (Ulta shastr ki ginti se karwai)
1. उल्टा शास्त्र की  उदेश्य (Ulta shastr ki Uddeshy )

इस ब्लॉग पोस्ट का उद्देश है शोक परेड की एक करवाई शालामी शास्त्र से उल्टा शास्त्र के बारे में जानकारी प्राप्त करना !

2.उल्टा शास्त्र की  जरुरत ((Ulta shastr ki jarurat)

फायर पार्टी  डेड बॉडी के आगे धीरे चाल से उलटे शास्र में मार्च करती है 

3. उल्टा शास्त्र की  वर्ड ऑफ़ कमांड (Ulta shastr ki word of command)

वर्ड ऑफ़ कमांड शास्त्र क़वैद उलटे शस्त्र एक-दो-तीन, एक-दो-तीन-चार,दो-तीन-चार-एक -दो-तीन-एक ! जैसे थे 

4. उल्टा शास्त्र की  वर्ड ऑफ़ कमांड गिनती से नमूना   (Ulta shastr ki word of command ginti se)

वर्ड ऑफ़ कमांड गिनती से शास्त्र क़वैद उलटे शास्त्र एक -एक , स्क्वाड -डोडो- एक-दो-तीन-चार , स्क्वाड तीन -तीन , स्क्वाड चार-चार ! जैसे थे 

5.उल्टा शास्त्र की   गिनती से कारवाही (Ulta shastr ki ginti se karwai)

करवाई इस प्रकार से करे 

  1. सलामी शास्त्र से वर्ड ऑफ़ कमांड मिलता है गिनती से शास्त्र क़वैद उलटे शास्त्र एक तो वर्ड ऑफ़ कमांड पर दिहिने पांव को सावधान पोजीशन में लाये और दोनों बाजुओ को से साथ 90 डिग्री पर रखते हुए बदन के सामने सीधा करे , शोउटिंग करे एक !इस पोजीशन में देखने वाली बातें दोनों पांव सबधन पोजीशन में , राइफल बदन के सामने 90 डिग्री पर दो बाजु सीधा !
  2. वर्ड ऑफ़ कमांड मिलता है स्क्वाड दो तो एक से चार तक की स्लो गिनती करते हेदहिने हाथ से राइफल के बट की दाहिने कंधे की तरफ से निचे से ऊपर और बाए हाथ से फ़्लैश हाईडर को आगे निचे की तरफ घुमाये , साथ ही इसी जगह से हाथो की पोजीशन को बदली करते जाये ! इस पोजीशन में देखने वाली बाते  दाहिना हाथ स्माल ऑफ़ द बट पर और बाए हाथ हैण्ड गार्ड पर , फ़्लैश हिधेर निचे और बट ऊपर की तरफ , मग्जिन सीलिंग अपनी , राइफल 90 डिग्री पर, बाकि पोजीशन सावधान !
  3. वर्ड ऑफ़ कमांड मिलता है स्क्वाड तीन तो इस वर्ड ऑफ़ कमांड पर दोनों हाथों की पोजीशन बदली करे और शोउटिंग करें तीन ! इस पोजीशन में देखने की बाते , दाहिना हाथ हैण्ड गार्ड पर और बाए हाथ स्माल ऑफ़ द बट पर !
  4. वर्ड ऑफ़ कमांड मिलता है चार तो दाहिने हाथ से राइफल को बाए बगल की तरफ धकेले और दाहिने हाथ को छोड़कर पीठ के पीछे से राइफल के हैण्ड गार्ड को पकड़े , बाए हाथ से राइफल को बाए बगल में जमाये और शोउटिंग करे चार ! इस पोजीशन में देखनेवाली बाते राइफल बाए बगल में 45 डिग्री के एंगल पर बट आगे फ़्लैश हाईडर पीछे, मगज़ीन बगल के निचे , बाए हाथ स्माल ऑफ़ द बट पर अंगुली  निचे से अंगूठा ऊपर से , कोहनी राइफल के साथ जमी हुई , दाहिना हाथ फोरहैंड गार्ड पर अंगुलिया निचे से अंगूठा ऊपर से पकड़ा हुवा और दाहिना कोहनी पीठ के साथ लगी हुई , बाकि की पोजीशन सावधान !
   इस प्रकार से यहाँ उलटे सशत्र ड्रिल  की करवाई पूरी हुई !

इस प्रकार सलामी सशत्र से उल्टा सशत्र की  ड्रिल कवायद की जनकारी   से सम्बंधित यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा उम्मीद है की यह ब्लॉग पोस्ट आपलोगों को पसंद आएगा !इस ब्लॉग को सब्सक्राइब या फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे! 

इसे भी  पढ़े :
  1. भारतीय पुलिस ड्रिल ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाले परेड कमांड का हिंदी -इंग्लिश रूपांतरण
  2. ड्रिल में अच्छी पॉवर ऑफ़ कमांड कैसे दे सकते है
  3. ड्रिल का इतिहास और सावधान पोजीशन में देखनेवाली बाते
  4. VIP गार्ड ऑफ़ ऑनर के नफरी और बनावट
  5. विश्राम और आराम से इसमें देखने वाली बाते !
  6. सावधान पोजीशन से दाहिने, बाएं और पीछे मुड की करवाई
  7. आधा दाहिने मुड , आधा बाएं मुड की करवाई और उसमे देखने वाली बाते !
  8. 4 स्टेप्स में तेज चल और थम की करवाई
  9. फूट ड्रिल -धीरे चल और थम
  10. खुली लाइन और निकट लाइन चल

27 March 2022

पुलिस स्टेशन के रजिस्टरस और उसमे की जाने वाली इंट्री जिसे सभी पुलिसमैन को जानना चाहिए

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने गिरफ्तारी से सम्बंधित मुख्य नियम जो सभी पुलिस मैन को जानना चाहिए से सम्बंधित  जानकारी प्राप्त की जैसे की बीट पट्रोलिंग क्या होता है और उसके फायदे  और अब इस ब्लॉग पोस्ट में हम पुलिस स्टेशन में मेन्टेन होने वाली बहुत तरह के रजिस्टर के बारे में जानेगे !

किसी भी पुलिस स्टेशन को तरतीब से चलने के लिए यह सबसे जरुरी हो जाता है की पुलिस स्टेशन का डॉक्यूमेंटेशन सही तरह से हो क्यों की पुलिस स्टेशन के ज्यादातर कार्य क़ानूनी होता है जिसका कोर्ट में भी बहुत बार इस्तेमाल किया जाता है और साथ ही इन रजिस्टर के सहायता से हम क्रिमनल कार्य रोकने तथा उसे इन्वेस्टीगेट करने में बहुत ही सहायक साबित होते है ! इसलिए यह हरेक पुलिस स्टेशन इन चार्ज के लिए परम कर्तव्य हो जाता है की यह सुनिश्चित करे की पुलिस स्टेशन के सभी रजिस्टर सही तरह से लिखे जा रहे हो !

पुलिस स्टेशन के जितने भी रजिस्टर  होते है उनका सबसे पहले इंग्लिश में पेज नंबर डाला हुवा होना चाहिए और रजिस्टर के लिखावट को साफ साफ लिखना चाहिए अगर कोई गलती हो जाये तो उसे वाइट इंक या इरेज़र से नहीं मिटाना चाहिए बल्कि गलत एंट्री के ऊपर एक सीधी लाइन खीच देनी चाहिए और उसके बगल या ऊपर में सही सब्द या अंक लिख देना चाहिए !गलत एंट्री के ऊपर कोई पेपर नहीं चिपकाना चाहिए ! सभी एंट्री साफ और सही लिखी हुई और उसके ऊपर लिखनेवाले पुलिस ऑफिसर का सिग्नेचर किया हुवा होना चाहिए!

निम्नलिखित रजिस्टर पुलिस स्टेशन में मेंटेन होना चाहिए :

Police station register entry 

1.रजिस्टर नंबर-1  फर्स्ट इनफार्मेशन रजिस्टर (FIR Register): यह रजिस्टर एक प्रिंटेड बुक लेट इन्फॉर्म ऑफ़ 24.5 (1) और इसमें कुल 200 पजेज होते है ! एक रजिस्टर को पूरी तरह से भर जाने के बाद ही दूसरा रजिस्टर ओपन करना चाहिए !FIR नंबर का पैटर्न होता है जिसमे किसी भी पुलिस स्टेशन में लिखे जाने वाले गुनाह का सालाना सीरियल नंबर और उसके साथ उस साल को भी लिखा जाता है है की 1/2021 यानि साल 2021 का पहला फिर नम्बर !

FIR की टोटल 4 कॉपी बने जाती है जो की कार्बोन पेपर लगाकर एक साथ ही लिखी जाती है ! इन 4 कॉपी मेसे एक कॉपी SP/DCP ऑफिस को भेजा जाता है , एक कॉपी उस मजिस्ट्रेट को भेजा जाता है जो उस केस के ऊपर कोग्निज़ंस लेगा उसके ऑफिस को भेजा जाता है , एक कॉपी FIR लिखने वाले को तथा एक ऑफिस कॉपी रख लिया जाता है ! FIR की सभी एंट्री सही सही लिखना चाहिए  गलत फैक्ट FIR में लिखना IPC धरा 218 के अधीन आपराध है  !

2.रजिस्टर नंबर-2 डेली डायरी रजिस्टर (General Diary Register): यह रजिस्टर फॉर्म नो 22.48 में मेंटेन किया जाता है !इसकी दो कॉपी होती है जो की कार्बोन पेपर रख कर लिखी जाती है !इसकी ओरिजिनल कॉपी पुलिस स्टेशन में राखी जाती है तथा कार्बोन कॉपी अपने नजदीकी हेड क्वार्टर  ACP/DCP/SP ऑफिस को भेजी दी जाती है !SP/DCPजनरल डायरी को ओपन तथा क्लोज होने का टाइम फिक्स करते है और उसी फिक्स टाइम पर जनरल डायरी  प्रत्येक दिन ओपन और क्लोज होता है!इस डायरी के अंदर पुलिस स्टेशन इन चार्ज /ड्यूटी ऑफिसर या पुलिस स्टेशन क्लर्क एंट्री करता है !सभी तरह के होनेवाले मूवमेंट और इंसिडेंट का एंट्री तरतीब बार और समयनुसार की जाती है ! 

3. रजिस्टर नो-3 (Register No-3 ): PPR 22.53 के अनुसार यह रजिस्टर के दो पार्ट होते है जिनमे पहला पार्ट स्टैंडिंग आर्डर तथा दूसरा पार्ट सर्कुलर तथा दूसरा आर्डर होता है !

पार्ट-1 - स्टैंडिंग आर्डर : इस रजिस्टर में जोभी स्टैंडिंग आर्डर या इंस्ट्रक्शन कमिश्नर ऑफ़ पुलिस, एडिशनल कमिश्नर ऑफ़ पुलिस या डीसीपी की द्वारका इशू होता है उसका एंट्री पार्ट-1 रेस्टर में किया जाता है !

पार्ट-2 - सर्कुलर तथा दूसरा ऑर्डर्स - इस पार्ट में जो कोई सर्कुलर या आदेश आते है जोकि स्टैंडिंग आर्डर के अलावा होते है उसे इसमें इंटर किया जाता है !जिसे समय समय पर डिस्ट्रॉय भी कर दिया जाता है !

4. रजिस्टर नंबर -4 भगोड़ा रजिस्टर (Absconder Register): यह रजिस्टर निम्नलिखित तीन पार्ट में होता है :

पार्ट-I- इस पार्ट में उन सभी भगोड़ो का एंट्री किया जाता है जिनका केस होम पुलिस स्टेशन में रजिस्टर हुवा हो इसको फॉर्म 22.54 में लिखा जाता है !

पार्ट-II- इस रजिस्टर में उन भगोड़ो का एंट्री किया जाता है जिनका केस तो दुसरे किसी पुलिस स्टेशन में इंटर है लेकिन उनका निवास  होम पुलिस स्टेशन के अन्दर हो !

पार्ट-3 इस रजिस्टर में आर्म्ड फाॅर्स से भागो हुए लोगो का एंट्री किया जाता है जिनका निवास होम पुलिस स्टेशन में पड़ता हो !

जैसे ही कोई अपराधी CrPc के सेक्शन 83 के तहत भगोड़ा घोषित हुवा या आर्मी/नेवी/एयरफोर्स के द्वारा भगोड़ा घोषित हुवा वैसे ही उनका नाम तथा पता इन रजिस्टर में लिख लिया जाता है 

5. घोषित अपराधी रजिस्टर (PROCLAIMED OFFENDERS, REGISTER): घोषित अपराधी रजिस्टर सभी पुलिस स्टेशन में मेन्टेन होता है और घोषित अपराधी लोगो का लिस्ट हर एक पुलिस स्टेशन में लटका हुवा रहता है !घोषित अपराधी रजिस्टर 2  पार्ट में  होता है !

पार्ट-1 - इस पार्ट में उन घोषित अपराधियो के नाम जो उस थाने के क्षेत्र में रहते है !

पार्ट-2 - इस पार्ट में उन घोषित अपराधियो का नाम होता है जो की उस पुलिस स्टेशन के बाहर रहते है !

6. रजिस्टर नॉ 5 सामान्य डाक रजिस्टर  (REGISTER OF CORRESPONDENCE): यह रजिस्टर भी दो पार्ट में लिखा जाता है !

पार्ट -1 - इस रजिस्टर में सामान्य डाक जो थाने में आया और थाने से बाहर भेजा गया पत्र का इंट्री किया जाता है !

पार्ट-2-  इसमें वारंट और समन का एंट्री किया जाता है !

7. रजिस्टर नॉ-6 (MISCELLANEOUS REGISTER)  इस रजिस्टर का 4 पार्ट होता है 

पार्ट-1 - इस रजिस्यटर में सरकारी नौकरी का वेरिफिकेशन से सम्हबंधित एंट्री किया जाता है ! यह  पार्ट अब पुलिस स्टेशन में नहीं मेन्टेन होता है  अब यह स्पेशल ब्रांच में मेन्टेन होता है !

पार्ट-2 - इस रजिस्टर में उनलोगों का डिटेल लिखा जाता है जिनको नियमतः सिक्यूरिटी दिया गया हो !

पार्ट-3 इस रजिस्टर में कलंदर (कम्पलेंट) की डुप्लीकेट कॉपी राखी जाती है !

पार्ट-4- इस रजिस्टर में इन्कुएसट का कार्बोन कॉपी रखा जाता है !

8 रजिस्टर नॉ 7 & 8 नहीं मेन्टेन किया जाता है !

9. रजिस्टर नॉ-9 गाँव क्राइम रिकॉर्ड रजिस्टर ( VILLAGE CRIME REGISTER): यह रजिस्टर 4 पार्ट्स में लिखा जाता है !

10 रजिस्टर-10 सुर्वेल्लांस रजिस्टर (SURVEILLANCE REGISTER): यह रजिस्टर दो पार्ट A & B में मेन्टेन किया जाता है !

11 रजिस्टर नॉ-11 इंडेक्स रजिस्टर (INDEX REGISTER)

ऐसे तो तक़रीबन 25 रजिस्टर से भी ज्यादा रजिस्टर पुलिस स्टेशन में मेन्टेन किया जाता है ! बाकि बचे रजिस्टर को हम अगले ब्लॉग पोस्ट में जानेगे !

इसके साथ ही पुलिस स्टेशन में मेन्टेन की जाने वाली रजिस्टर से सम्बंधित ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई ! उम्मीद है की आपलोगों के ए पोस्ट पसंद आएगी !इस ब्लॉग को सब्सक्राइब या फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे!

इसे भी  पढ़े :

  1. भारतीय पुलिस ड्रिल ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाले परेड कमांड का हिंदी -इंग्लिश रूपांतरण
  2. ड्रिल में अच्छी पॉवर ऑफ़ कमांड कैसे दे सकते है
  3. ड्रिल का इतिहास और सावधान पोजीशन में देखनेवाली बाते
  4. VIP गार्ड ऑफ़ ऑनर के नफरी और बनावट
  5. विश्राम और आराम से इसमें देखने वाली बाते !
  6. सावधान पोजीशन से दाहिने, बाएं और पीछे मुड की करवाई
  7. आधा दाहिने मुड , आधा बाएं मुड की करवाई और उसमे देखने वाली बाते !
  8. 4 स्टेप्स में तेज चल और थम की करवाई
  9. फूट ड्रिल -धीरे चल और थम
  10. खुली लाइन और निकट लाइन चल


20 March 2022

गिरफ्तारी से सम्बंधित मुख्य नियम जो सभी पुलिस मैन को जानना चाहिए

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने शिनाख्त परेड(TIP) के बारे में जानकारी प्राप्त की और अब इस ब्लॉग पोस्ट में हम गिरफ्तारी और बेल से सम्बंधित कुछ बेसिक बाते जानेगे जो की हर एक पुलिसमैन(Arrest se relate kanun jise ek policeman ko janana chahie) को जननी चाहिए !

गिरफ्तारी साधारणतः एक पुलिस या किसी कानून व्यवस्था लागु करने वाली एजेंसी के द्वारा किया जाता है लेकिन बहुत से विशेष  परिस्थिया है जहा की एक आम आदमी भी किसी व्यक्ति का  गिरफ्तारी कर सकता है !गिरफ्तारी का मतलब होता है किसी व्यक्ति की मौलिक आजादी है स्वक्छंद घुमने और कही भी अपने मर्जी  से आने जाने तथा मिलने जैसी आजादी से उसे बिमुक्त कर देना ! गिरफ्तार करलेना किसी का अपराधी होने का साबुत नहीं है  बल्कि उसे कोर्ट में साबित करना जरुरी होता है की गिरफ्तार  किया गया व्यक्ति ही गुनहगार है !

इसे भी पढ़े :इनक्वेस्ट और इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय किन किन बातो का ख्याल रखना चाहिए सभी पुलिस अधिकारी को

इस पोस्ट को अच्छी तरह से समझने के लिए हमने इसे निम्न भागो में बाँट दिया है :

Girftari se sambandhit laws
Arrest

  • गिरफ्तारी क्यों (Girftari kyo jaruri ) ?
  • गिरफ्तारी से सम्बंधित कानून(Girftari se sambandhit laws)
  • गिरफ्तारी  कौन कौन कर सकता है   (Girftari kaun kaun kar sakta hai)
1. गिरफ्तारी से सम्बंधित कानून(Girftari se sambandhit laws)
गिरफ्तारी से सम्बंधित जो मुख्य कानून है और जिसके बेस पर ही और दुसरे नियम बने है वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 22 में दिया गया है और इन्ही दोनों अनुच्छेद को ध्यान में रखते हुए और जितने भी नियम बने है ! अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 22 नाग्रिओके मौलिक अधिकार जो हमारे संविधान में दिया गया है उसके अंतर्गत आते है इसलिए अगर इन दोनों अनुच्छेद का अनुपालन सही तरीके से नहीं किया गया तो गिरफ्तार व्यक्ति भारत के उच्चतम न्यालय या उंच न्यालय में जा सकता है !
अनुच्छेद 20 के अनुसार :
  • किसी भी व्यक्ति को नियम लागु होने से पहले के गुनाह केलिए सजा नहीं दिया जा सकता है और कोई नया कानून बना के ज्यादा सजा नहीं दिया जा सकता है ! (Art-20(1))
  • किसी भी अपराधी को एक गुनाह के लिए दो बार सजा नहीं दी जाकती है !(Art-20(2))
  • किसी भी अपराधी से जबरदस्ती गुनाह काबुल नहीं कराया जा सकता है !(Art-20(3))
अनुच्छेद 22  के अनुसार :
  • गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारन,वकील रखने तथा क़ानूनी सलाह लेने का अधिकार के बारे में जानकारी देना उस गिरफ्तार व्यक्ति का मौलिक अधिकार है !(Art-22(1))
  • जो कोई व्यक्ति गिरफ्तार किया गया हो उसे 24 घंटे के अन्दर किसी मजिस्ट्रेट के सामने पेस किया जाना चाहिए बिना मजिस्ट्रेट के पास पेस किया 24 घंटे से ज्यादा नहीं रखा जा सकता है !(Art-22(2))
  • उपरोक्त दोनों बाते इन केसों में लागु नहीं होती है :(Art-22(3))
    • गिरफ्तार व्यक्ति दुश्मन देश का हो 
    • या किसी व्यक्ति को प्रिवेंटिव डीटेंसन में रखा गया हो 

2. गिरफ्तारी क्यों (Girftari kyo jaruri ) ?
किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करना उसके मौलिक अधिकारों का हनन करना होता है लेकिन कुछ ऐसे कारन होते है जिनमे गिरफ्तारी करनी पड़ती है और वह कुछ कारन इस प्रकार से है :
  • किसी व्यक्ति जिसके ऊपर अपराधिक केस रजिस्टर हुआ है और उसे कोर्ट में हाजिर करने के लिए !
  • किसी अपराधी को अपराध करने से रोकने के लिए किसी विशेष केस में 
उपरोक्त कारणों के अलावा अगर ब्यक्ति खतरनाक और उग्र परवृति का है तो उसे भी गिरफ्तार किया जा सकता है जिससे समाज को भय मुक्त बनाने के लिए करना पड़ता है ! और ऐसे करने से समाज में भय का वातावरण संपत होता है और एक अच्छा मेसेज भी जाता है !

3. गिरफ्तारी  कौन कौन कर सकता है   (Girftari kaun kaun kar sakta hai)

गिरफ्तारी दो तरह से हो सकती है :
  • वारंट के साथ 
  • वारंट के बिना 
निम्नलिखित व्यक्तिओ या अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी की जा सकती है ! ए गिरफ्तारी वारंट और बिना वारंट दोनों प्रकार के हो सकते है ! 
(a)पुलिस के द्वारा गिरफ्तारी : निम्नलिखित नियम के अंतर्गत पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है :
  • वारंट के बिना Cr.PC सेक्शन  41 और  सेक्शन . 151
  • वारंट के साथ Cr.PC Sec. 72 सेक्शन  से सेक्शन  151
  • पुलिस थाना इन चार्ज के लिखित आदेश से Cr.PC सेक्शन  55 और  सेक्शन 157
  • मजिस्ट्रेट के आदेश से Cr.PC सेक्शन  44 और असंज्ञे अपराध में Cr.PC सेक्शन  42 
(b)वरिष्ट पुलिस अधिकारी के द्वारा Cr.PC सेक्शन  36 
(c)थाना इन चार्ज के द्वारा Cr.PC सेक्शन  42
(d)एक मजिस्केट्रेट  द्वारा  Cr.PC सेक्शन  44
(e)एक मिलिट्री के कमीशंड अधिकारी के द्वारा Cr.PC सेक्शन  130 और 131
(f)एक आम आदमी के द्वारा 
  • वारंट के बिना   Cr.PC सेक्शन  43
  • वारंट के साथ Cr.PC सेक्शन  72 और 73 
  • पुलिस अधिकारी के आदेश पर Cr.PC सेक्शन  37
  • मजिस्ट्रेट के आदेश पर Cr.PC सेक्शन  37 और 44 

इस प्रकार से गिरफ्तारी  से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

इन्हें भी  पढ़े :

  1. पुलिस ड्यूटी
  2. फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट में होनेवाली कुछ कॉमन गलतिया
  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
  4. क्राइम सीन पे सबसे पहले करनेवाले काम एक पुलिस ऑफिसर के द्वारा
  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट


13 March 2022

शिनाख्त परेड(TIP) की जरुरत और ध्यान देनेवाली बाते

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने इनक्वेस्ट और उसकी जरुरत के बारे में जानकारी प्राप्त  की थी और अब इस ब्लॉग पोस्ट में हम शिनाख्त परेड की जरुरत और ध्यान देनेवाली बाते जिन्हें सभी पुलिस ऑफिसर  को मालूम होनी चाहिए उसके (Test Identification Parade in hindi) के बारे में जानेगे !

पहचान परेड जाँच अधिकारी को अपने आप को किसी केस को ट्रायल के लिए  भेजने से पहले अपने आप को संतुष्ट करने के लिए एक शिनाख्त परेड है जिसके करने के बाद जाँच अधिकारी अपनी जाँच को अच्छी तरह से कोर्ट में रख सके !

इस विषय को अछि तरह से समझने के लिए हमने इसे निम्न भागो में बाँट दिया है :

Test Identification Parade
Test Identification Parade

  • शिनाख्त परेड कब  किया जाता है ?(Test of Identification Kab kiya jata hai)
  • शिनाख्त परेड क्यों किया जाता है ?(Test of Identification Kyo kiya jata hai)
  • शिनाख्त परेड कौन करता है ?(Test of Identification Kaun karta hai)
  • शिनाख्त परेड करते समय मजिस्ट्रेट को ध्यान में रखने वाली बाते (Test of Identification karte samay magistrate ko dhyan me rakhne wali baate)
  • शिनाख्त परेड करने से पहले ध्यान में रखने वाली बाते (Test of Identification karne se pahle dhyan me rakhne wali baate)

1. शिनाख्त परेड कब  किया जाता है ?(Test of Identification Kab kiya jata hai)

शिनाख्त परेड ज्यादातर अपराधिक केस में ही किया जाता है जब केस का जाँच किया जा रहा है !शिनाख्त परेड का एक अहम उद्देश्य होता है विटनेस की यदाश्य को चेक के अपराधी को पहचान करना जो की अपराधिक घटना में सम्मिलित हो ! इस प्रकार की शिनाख्त परेडसभी प्रकार की डकैती , या लोगो के समूह में उपस्थित व्यक्तियो जो किसी रायटिंग या संज्ञे अपराध में सामिल हो आदि का पहचान करने के लिए किया जाता है !

इस का एक और उद्देश्य होता है की जो गवाह है को एक मौका देना की उसे अपराधी को कभी भी मिलने पर उस अपराधी को पहचान सकता है !शिनाख्त करना एक दिमागी कार्य है जो की तथ्य और दिमाग में बने छवि जो की उसने अपराधी द्वारा परध करते समय देखा है उसके आधार पर बनती है ! इसी लिए जरुर हो की :
  • गवाह को अपराधी को देखने का मौका मिला हो 
  • अपराधी को देखते समय माकूल प्रकास और पहचान पाने जितना दुरी हो 
  • शिनाख्त परेड ज्यादा दिनों के बाद नहीं कराया जा रहा हो 
  • गवाह विश्वनीयता और देखने की शक्ति 
  • पुलिस और गवाह के बीच कोई साठ गाठ न हो 
2.शिनाख्त परेड क्यों किया जाता है ?(Test of Identification Kyo kiya jata hai)
शिनाख्त परेड दोनों प्रकार के केसों में किया जाता है ओ चाहे अपराधिक केस हो या सिविल केस जब जाँच अधिकारी किसी की पहचान करानी हो :

  • मृत्य या जिन्दा या जान या अनजान व्यक्ति को पहचान करने के लिए 
  • पकड़ी गई सम्पति, सामान या हथियार की पहचान करने के लिए 
  • फोटोग्राफ , फिंगर प्रिंट्स , फूट प्रिंट्स, हैण्ड राइटिंग या वौइस् का पहचाना कराने के लिए !
अधिकतर शिनाख्त परेड  अपराधिक केस में ही किये जाते है जिससे की अपराधी को प्रमाणितया अप्रमाणित और सामान के संदर्भ में पहचान कराया जा सके !

3. शिनाख्त परेड कौन करता है ?(Test of Identification Kaun karta hai): किसी कानून में यह नहीं लिखा हुवा है की शिनाख्त परेड कौन करा सकता है कोई ऑफिस अधिकारी भी शिनाख्त परेड करा सकता है ! शिनाख्त परेड का कोई अहमियत नहीं रहती है जब उसे पुलिस अधिकारी करे! कुछ अहमियत दी जाती है जब उसे  या कोई आम व्यक्ति करे तो  इसलिए मजिस्ट्रेट को शिनाख्त परेड करने के लिए कहा जाता है  और उनका शिनाख्त मेमो रिकॉर्ड करजाता है जो  CrPC 164 में अंतर्गत आता जाता है और  एविडेंस एक्ट सेक्शन 80 में एविडेंस  के तौर पे मान लिया जाता है !
मजिस्ट्रेट के अनुपस्थिति में पांच भी शिनाख्त परेड करा सकता है !
4. शिनाख्त परेड करते समय मजिस्ट्रेट को ध्यान में रखने वाली बाते (Test of Identification karte samay magistrate ko dhyan me rakhne wali baate)

  • शिनाख्त परेड को खुले जगह पे नहीं करना चाहिए  व्यक्ति की प्राइवेसी को बनाये रखा जाए !
  • कोई पुलिस ऑफिसर वह उपस्तिथ न रहे !
  • अगर जेल के अन्दर कराया जा रहा हो तो कोई जेल के अधिकार मजिस्ट्रेट के  आस पास न हो !
  • नॉन सस्पेक्ट को ऐसा चुनाव किया जाय जिनका कद काठी सस्पेक्ट के कद काठी के जैसा ही हो और उन्हें सस्पेक्ट के साथ मिक्स्ड करके खड़ा करे !अगर अम्भाव हो तो सस्पेक्ट और नॉन सस्पेक्ट का रेश्यो 1:9 हो !
  • मजिस्ट्रेट को यह भी सुनिश्चित करनी चाहिए की कोई एक व्यक्ति विचित्र ड्रेस ना पहना हो !
  • सस्पेक्ट से यह पूछ लेना चाहिए की उसे इन सारी प्रक्रियाओ में कोई ऑब्जेक्शन है !
  • सस्पेक्ट को शिनाख्त परेडखड़ा होने की जगह  खुद सेलेक्ट करने का मौका देना चाहिए !
  • जो गवाह शिनाख्त परेड में शिनाख्त करने आ रहा है वह सस्पेक्ट को शिनाख्त परेड पहले  नहीं देखना चाहिए !
  • गवाह से यह पूछ लेना चाहिए की क्या आप सस्पेक्ट को पहले से जानते हो !
  • एक एक करके गवाह को  शिनाख्त परेड में शिनाख्त करने के लिए बुलाना चाहिए !
  • अगर किसी भी सस्पेक्ट का कोई भी ऑब्जेक्शन शिनाख्त परेड के दौरान हो तो उसे रिकॉर्ड करी चाहिए !
  • और भी कोई बाते जो शिनाख्त परेड के सम्बन्ध में उसे भी रिकॉर्ड करी चाहिए !

5. शिनाख्त परेड करने से पहले ध्यान में रखने वाली बाते (Test of Identification karne se pahle dhyan me rakhne wali baate): सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य गवाह के द्वारा दियागया बयान जो ओ कोर्ट के अन्दर देता है !शिनाख्त  के दौरान सस्पेक्ट को गवाह पहचान करता है तो उसका ज्यादा अहमियत नहीं होती है क्यों की बहुत से चांसेस होते है की गवाह सस्पेक्ट को कोर्ट आते देख लिया ओ या कोई पहचाना करा दिया हो इसलिए यह जरुरी है को सस्पेक्ट का शिनाख्त परेड पहले ही करा ली जाये ! इस संदर्भ में उच्चतम न्यालय का रेम्श्वर सिंह बनाम स्टेट ऑफ़ जम्मू & कश्मीर (Rameswar Singh V s. State of Jammu & Kashmir reported in 1972 (SC 102)) के लॉ है! 

 इस प्रकार से यह शिनाख्त परेड से सम्बंधित यह भाग संपत हुवा शिनाख्त परेड बाकी के जो भाग है उसे अगले ब्लॉग पोस्ट में सामिल करेंगे !

इस प्रकार से  शिनाख्त परेड से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

इन्हें भी  पढ़े :

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  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
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  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

06 March 2022

इनक्वेस्ट और इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय किन किन बातो का ख्याल रखना चाहिए सभी पुलिस अधिकारी को

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने F.I.R. से सम्बन्धित बाते जो एक पुलिस अधिकारी को मालूम होना चाहिए उसके बारे में जानकारी प्राप्त की और इस ब्लॉग पोस्ट में हम इनक्वेस्ट (Inquest) के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे और जानेगे की इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय किन किन बातो का ख्याल रखना चाहिए(Inquest ki basic jankari aur Inquest karte samay dhyan ke rakhnewali bate jo sabhi police officer ko malum hon chahie ) !
इस विषय को अच्छे से समझने के लिए हमने इसे निम्नलिखित सब-भागो में बाँट दिया है :
Inquest kya hota hai ?
Inquest
  • इनक्वेस्ट (Inquest) क्या है ?Inquest kya hota hai ?
  • इनक्वेस्ट (Inquest) कौन करता है ?Inquest kaun karta hai?
  • इनक्वेस्ट (Inquest) के क़ानूनी प्रावधान ?Inquest ka kanuni prawdhan kya hai ?
  • इनक्वेस्ट (Inquest) कब कब किया जाता है ?Inquest kab kab kiya jata hai ?
  • इनक्वेस्ट (Inquest) कब नहीं किया जाता है ?Inquest kab nahi kiya jata hai ?
  • मृत्य शारीर को पोस्ट मोर्टेम के लिए कब भेजा जायेगा ? (Dead body ko post mortem ke lie kab
  • इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय ध्यान में रखने वाली बाते ?Inquest karte samay dhyan me rakhnewali bate
  • इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय होने वाली गलतिया Inquest karte samay hone wali common mistake
1.इनक्वेस्ट (Inquest) क्या है ?(Inquest kya hota hai ?)
इनक्वेस्ट का मलतब होता है जब मरने(Death) का कारन मालूम न होतो इन्क्वारी कर के पता लगाना !यह शब्द  अंग्रेजी लॉ (Coroner law) के Inquisition शब्द से बना है  जिसका अर्थ होता है हिंसा या अस्वाभाविक कारणों से होने वाली मृत्यु की जाँच करना ! 
2. इनक्वेस्ट (Inquest) कौन करता है ?Inquest kaun karta hai?
इनक्वेस्ट रिपोर्ट एक बहुत ही इम्पोर्टेन्ट डॉक्यूमेंट होता है जिसके द्वारा मृत्यु के करना और परिस्थियों के बारे में जानकारी मिलती !इनक्वेस्ट ऑफिसर इन चार्ज पुलिस स्टेशन या कोई और पुलिस अधिकारी जो इस कार्य में निपुण हो और उन्हें इस कार्य के लिए अधिकृत किया गया हो ! CrPc की धरा 174 के अनुसार इनक्वेस्ट रिपोर्ट में सभी प्रकार के  डेथ बॉडी(Scene of Offence) से  सम्बंधित डिटेल्स होने चाहिए!अगर मृत्यु पुलिस कस्टडी में हुई है तो इनक्वेस्ट की करवाई मजिस्ट्रेट के द्वारा किया जायेगा ! 


3. इनक्वेस्ट (Inquest) के क़ानूनी प्रावधान ?Inquest ka kanuni prawdhan kya hai ?

इनक्वेस्ट  से  रिलेटेड क़ानूनी प्रावधान CrPc की सेक्शन 174  से 176  के अन्दर दिया गया है  जिसका डिटेल्स इस प्रकार से है :
  • सेक्शन 174  CrPc के अंतर्गत :इस सेक्शन के अंतर्गत ऑफिसर इन चार्ज पुलिस स्टेशन या कोई और पुलिस अधिकारी जो विशेषकर अधिकृत किया गया हो राज्य सरकार के द्वारा की मृत्यु के कारण का पता लगाये (Investigate) करे जब :
    • मृत्यु आत्महत्या के द्वारा हुई हो,
    • या किसी दुसरे या जानवर या किसी मशीन या किसी दुर्घटना से मृत्यु हुई हो 
    • किसी ऐसी परिस्थिति में मौत हुई हो जहा की संदेह हो की मृत्यु किसी और के द्वारा की गई है !
  •  इनक्वेस्ट (Inquest) की करवाई :किसी की अचानक, अप्राकृतिक तरीके से , या संदेहात्मक मृत्यु की खबर मिलने पे , ऑफिसर-इन- चार्जसर्व प्रथम सुचना अपने एरिया के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट जो इनक्वेस्ट (Inquest) करने के लिए अधिक्रिताधिकृत है उन्हें इतला करेगे या किसी और किसी नियम या आर्डर के द्वारा कोई अलग निर्देश दिया गया हो सब डिवीज़नल मजिस्ट्रेट वह जायेंगे है मृत्य व्यक्ति का शारीर पड़ा है और वह पहुचने पर पड़ोस के दो या उससे ज्यादा रेस्पेक्ट्फुल व्यक्तिओ के उपस्थिति में मृत्य व्यक्ति शारीर केलागे हुवा घाव या कोई दूसरा तरह का इंजुरी मृत्य के शारीर  पर निशान और किसी हथियार आदि का हो सकता है ए सब पूरी डिटेल्स के साथ लिखना चाहिए और पुलिस अधिकारी और दो  सम्मानीय व्यक्ति हस्ताक्षर उस के ऊपर लेकर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को भेजना चाहिए !
  • सेक्शन 175  CrPc के अंतर्गत :इस सेक्शन के अंतर्गत एक पुलिस ऑफिसर को अधिकार देता है सेक्शन 174 CrPc के अतर्गत करवाई के लिए किसी भी व्यक्ति जिसके पास वह मानती है की उस व्यक्ति के पास उस घटना से सम्बंधित अगर कोई जानकारी है तो उसे सम्मन कर सकती है और जिन व्यक्ति को सम्मन किया गया वह बाउंड है की जाँच में सहयोग करे और सभी सवालों को जवाब दे केवल उन सवालो को छोड़ कर जिनसे उनकी खुद की दोषी सिद्ध होने की सम्भावन हो ! 
  • सेक्शन 176 CrPc के अंतर्गत: पुलिस कस्टडी या कोई औरत जो अपनी शादी के सात साल के अन्दर अत्महत्य कर्लेती है उन केसों का इनक्वेस्ट  मजिस्ट्रेट के द्वारा ही किया जायेगा जब की दुसरे केसों में यह ऑप्शनल है !और उस तरह की इनक्वेस्ट  डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट या SDM या दूसरा को मजिस्ट्रेट जिनको इस काम के लिए अधिकृत किया गया है !

4. इनक्वेस्ट (Inquest) कब कब किया जाता है ?Inquest kab kab kiya jata hai ?
सेक्शन 174  CrPc  के अंतर्गत ऑफिसर इन चार्ज पुलिस स्टेशन या कोई और पुलिस अधिकारी जो विशेषकर अधिकृत किया गया हो राज्य सरकार के द्वारा की मृत्यु के कारण का पता लगाये (Investigate) करे और इन परस्थितियो में  इनक्वेस्ट  करना कानूनन जरुरी है !  :
    • मृत्यु आत्महत्या के द्वारा हुई हो,
    • या किसी दुसरे या जानवर या किसी मशीन या किसी दुर्घटना से मृत्यु हुई हो 
    • किसी ऐसी परिस्थिति में मौत हुई हो जहा की संदेह हो की मृत्यु किसी और के द्वारा की गई है !
5. इनक्वेस्ट (Inquest) कब नहीं किया जाता है ?Inquest kab nahi kiya jata hai ?
 इनक्वेस्ट   सेक्शन 174 CrPc के अंतर्गत किया जाता है लेकिन अगर मृत्य शारीर  नहीं मिलने के सूरत में इनक्वेस्ट   नहीं किया जायगा इस सम्बन्ध में कोर्ट का साफ निर्णय है  गुलाम हसन बनाम एम्परर के में  (Ghulam Hassan Vs. emperor, 9 Cr.Ll. 105, 1908 P.RNo) 
6. मृत्य शारीर को पोस्ट मोर्टेम के लिए कब भेजा जायेगा ? (Dead body ko post mortem ke lie kab bheja jayega): इनक्वेस्ट    करने वाली अधिकारी को निम्न परिस्थियों में शारीर को पोस्ट मोर्टेम  भेजना चाहिए :
  • जब मौत के कारन में कोई शंका हो 
  • जब एक औरत अपने शादी के 7 सालो के अन्दर आत्महत्या कर लेती और परिस्थिया ऐसा शंका उत्पन्न करे के किसी और ने यह हत्या की है !
  • जब कोई औरत उसके सात साल के शादी के अंतर्गत मृत्य पाई जाती है और उसके रिलेटिव पोस्ट मोर्टेम कराने का अनुरोध करते है !
  • अगर किसी केस में एक पुलिस ऑफिसर को ए लगता है की पोस्ट मोर्टेम करना जरुरी है मृत्यु के कारन जानने के लिए तो इस परिस्थिति में भी कराया जा सकता है !
लेकिन अगर किसी केस में अगर पुलिस ऑफिसर को लगता है की मौत का कारन में कोई विरोधबहस नहीं है और मौत का कारन साफ है तो इस परिस्थिति में पोस्ट मोर्टेम नहीं भी करा सकता है !
7.इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय ध्यान में रखने वाली बाते ?Inquest karte samay dhyan me rakhnewali bate:इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय निम्न बातो का ध्यान रखना चाहिए :
  • मृत्य शारीर जहा पाया गया है उस जगह के चारो अच्छी तरह से देखे और पूरी विस्तृत में जाकारी को लिखे  अगर हो सके तो अलग अलग कोण से फोटोग्राफ ले !
  • अगर बॉडी का टुकड़े कर के अलग अलग जगह फेका गया हो तो सभी जगहों की अलग अलग इनक्वेस्ट करना चाहिए और अंत में शारीर के सभी हिस्सों को एक जगह ला कर भी इनक्वेस्ट करानी  चाहिए  !
  • सभी जगहों का फोटोग्राफी कराये 
  • अगर जरुरी हो तो डॉक्टर का भी सहायता लिया जा सकता है !
  • जहा जरुरी हो  जगह का स्केच बनाये !
  • नम्बर को नोट  करे जिस पोजीशन में बॉडी पड़ी हुई हो आजू बाजु के फिक्स्ड ऑब्जेक्ट से बॉडी की दुरी को लिखे !
  • पोजीशन ऑफ़ हाथ, पैर , हेड यदि को लिखे !
  • अगर कोई वस्तु बॉडी के पास पड़ी हो या मृत्य शारीर के द्वारा पकड़ी गई हो या शारीर पर गिरी हुई हो सब जानकारी लिखे !
  • शारीर में कैसा ड्रेस है सभी तरह के ड्रेस और  पहनने के तरीका आदि को लिखे 
  • बॉडी और क्लॉथ पर के सभी तरह के मार्क को नोट कर जैसे जला हुवा या गोली लगा हुवा !
  • सभी प्रकार के जख्म को लिखे यह बताते हुवे की यह जख तरफ और किस प्रकार से हुवा होगा !
  • सावधानीपूर्वक उसन सभी चीजो को लिखे जिससे यह पता लगाने मदद हो की मृत्यु का समय क्या होगा !
  • बॉडी के सभी अंगो को ऊपर से निचे तक देखे और किसी मिसिंग बॉडी पार्ट के बारे में लिखे !
  • बॉडी पर घडी, और आभूषण यदि के देखे और घडी के अन्दर कोई टाइम बता रहा है उसे लिखे !
  • बॉडी का फिंगर प्रिंट और नेल क्लिप्पिंग ले और अगर बॉडी ज्यादा दिन होने के कारन ख़राब हो गई हो तो डॉक्टर का सहायता लिया जा सकता है !
  • हो सके तो बॉडी का पहचान लगाये और पूरा विवरण लिखे फोटे के साथ !
  • बॉडी की पहचान हो जाने के बाद मृत्य व्यक्ति के रिश्तेदारों को इतला करे !
8..इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय यह नहीं करना चाहिए :
  • संकोचित नहीं होना चाहिए बॉडी को पूरी तरह से अन कवर  करके पूरी तरह देखना चाहिए  
  • प्राइवेट पार्ट को चेक करने नहीं भूलना चाहिए !
  • इनक्वेस्ट रिपोर्ट लिखते समय बड़ी बड़ी मेडिकल शब्दों का इस्तेमाल से बचना चाहिए क्यों की गलत गलत मेडिकल शब्द लिखने के कारन अनावश्यक जटिलता पैदा होगा   ! 
  • यह लिखना ना भूले को मृत्य व्यक्ति कैसा ड्रेस पहना था क्यों की उससे यह पता लगाने में सहायता मिल सकती है की आत्महत्या है या हत्या विशेषकर औरतो के मामले में  !
  • बॉडी का फोटोग्राफ लिए बिना बॉडी का पोजीशन का बदली नहीं करना चाहिए !जो व्यक्तिओ ने बॉडी को पहचाना किया है उनका नाम लिखना ना भूले !
  • कोई भी बस्तु जैसे चर्को बॉडी के ऊपर न रखे बॉडी को खराब होने से रोकने के लिए  अगर जरुरी हो तो बॉडी को कपडे में लपेट कर चारकोल रखे !
इनक्वेस्ट (Inquest) रिपोर्ट लिखते समय होने वाली सामान्य गलतिया :
  • बॉडी का गलत सेक्स का लिखा जाना जैसे मर्द के जगह औरत या औरत के जगह पे मर्द 
  • व्यस्क व्यक्ति का प्रवाते पार्ट का फोरस्किन के बारे में नहीं लिख जाना की खतना हुवा या नहीं हुवा वाला बॉडी था !
  • चोट और उसका पोजीशन के बारे में गलती !
  • क्या कोई संघर्स का निशान था या नहीं 
  • आत्महत्या के केस में लार बॉडी के मुह से किस कोण से गिरा था या कोई उलटी हवी थी  !
  • आत्म हत्या के केस में बॉडी की जीभ का स्तिथि क्या था या उस पर दन्त का कट मार्क था 
  • वीर्य (Semen)  का रहना या नहीं रहना के बारे में भी नहीं लिखा रहता है !औरत के प्राइवेट पार्ट के ऊपर कोई मार्क होतो उसके बारे में पूरा डिटेल नहीं लिखना !
  • जब एक से ज्यादा बॉडी को पोस्ट मोर्टेम के लिए भेटे समय बॉडी के ऊपर proper आइडेंटिफिकेशन मार्क नहीं लिखना 
  • अगर बिना पहचान वाली बॉडी होते बॉडी के ऊपर उपस्थित मार्क जैसे कट, या मोले यदि का नहीं लिखा जाना !
  • अगर बॉडी किसी रूम के अन्दर मिला तो रूम अन्दर से या बहार से बंद था इसके बारे में डिटेल्स नहीं लिखा होना !और रूम के अन्दर के फर्नीचर और वह मौजूद डिसत्रवेंस के बारे में नहीं लिखा होना !
  • कभी कभी IO को की मार्क को चोट के रूप में मान  लेना !
  • इनक्वेस्ट के दौरान अगर कोई छोटी सी पूछताछ की गई हो जिससे यह पतालागें का कोसिस किया गया हो की मौत का क्या कर्ण हो सकता है उसके बारे में नहीं लिखा जाना भी एक गलती के रूप में ही मन जाता है  
इस प्रकार से  इनक्वेस्ट की बेसिक जानकारी से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

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  1. पुलिस ड्यूटी
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  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
  4. क्राइम सीन पे सबसे पहले करनेवाले काम एक पुलिस ऑफिसर के द्वारा
  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट