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Wednesday, June 22, 2016

रात के समय उत्तर मालूम करने का तरीका

पिछले पोस्ट में हमने दिन के समय उत्तर दिशा मालूम करने के तरीका और साधन के बारे में जानकारी हासिल किये इस पोस्ट में हम रात के समय कैसे उत्तर दिशा का मालूम कर(Rat ke samay uttar pata karne ka tarika ) सकते है उसके बारे में जानकारी हासिल करेंगे !


 इस विषय कोआगे बढ़ने से पहले पाठको द्वारा मेरे ब्लॉग पे ढूंढे गए कुछ मैप रीडिंग से समबन्धित सवाल को जवाब दे देते है


सवाल :
  1.  मैग्नेटिक वेरिएशन क्या होता है(Magnetic variation kya hai) ?  किसी स्थान की मैग्नेटिक नार्थ और ट्रू नार्थ की कोणात्मक दुरी को मैग्नेटिक वेरिएशन कहते है!
  2. एंगल ऑफ़ कन्वर्शन क्या होता है(Angle of conversion kya hota hai) ?  किसी स्थान की ट्रू नार्थ और ग्रिड नार्थ के बिच की कोणात्मक दुरी को उस स्थान का अन्ग्लेओफ़ कन्वर्शन कहते है ! 
  3. लोकल वेरिएशन क्या होता है (Local variationkya hota hai)?: किसी स्थान की ग्रिड नार्थ और मैग्नेटिक नार्थ के बिच की कोणात्मक दुरी को लोकल वेरिएशन कहते है !


 जैसे की हम जानते है की मैप रीडिंग में सबसे अहम् जो दिशा होता है ओ है उत्तार दिशा इसलिए आइप रीडिंग में हमे बहुत से रस्ते बताये जाता है नार्थ पता करने के लिए , जिसमे हम पिछले पोस्ट में दिन में नार्थ पता करने की विधि के बारे में जानकारी हासिल की ऐसे तो दिन के समय उत्तर दिशा का अनुमान लगाने के जितनी विधा है उनमे से कुछ को छोड़ कर अमूमन सारी विधिया रात में भी काम आती है  कुछ विधिया है जो दिन में नहीं दिखाई देती है और केवल रात समय में ही दिखाई देती है उनके सहायता से भी हम रात के समय में उत्तर ज्ञात कर सकते है और ओ विधिया  निम्नलिखित है !
 
Night ke samay Uttar pata karna
Night ke samay Uttar pata karna 
  •  ध्रुबतारा  से(Dhrubtara se) : रात के समय ध्रुबतारा से उत्तर दिशा ज्ञात कर सकते है ! ध्रुबतारा हमेशा उत्तर दिशा में निकलता है !ये एनी तारो के अपेक्षा बहुत ज्यादा चमकीला होता है और सिर्फ 2.5 डिग्री के अंदर घूमता रहता है इसलिए ये अपने स्थान पे स्थिर लगता है इसके द्वारा ज्ञात उत्तर को भौगोलिक उत्तर कहते है !लेकिन इसके मदद से हम केवल उत्तर गोलार्ध में ही उदिशा ज्ञात कर सकते है क्यों की ये दक्षिण गोलार्ध में दिखाई नहीं देता है !
  • सप्तर्षि तारा(Saptrishi tara se) : रात के समय आकाश में लगभग उत्तर ईशा में तारो का एक समूह दिखाई देता है ! जिसे हम सप्तर्षि कहते है ! इस समूह में सात सारे होते है ! सप्तर्षि जब ध्रुब तारे के चारो ओर चाकर लगातःई तो उस समय उसके पहले दो तारे का रुख हमेशा ध्रुबतारे के ओर ही रहता है !
  • सप्तर्षि मंडल(Saptrishi mandal se): सप्तर्षि मंडल के पहले दो तारो की सहायता से हम ध्रुबतारा क पहचान कर सकते है ! ध्रुबतारा को ज्ञात करने के लिए सप्तर्षि के पहले वाले दो तारो को मिलते हुए  इनके बिच के फासले के 4.5 गुना लम्बी एक कल्पित रेखा किंचे तो वह रेखा एक जैसे उज्जवलमन तारे को काटते हुए गुजरेगी जो अक्सर दुसरे तारो के अपेक्षा चमकीला दिखाई देता है जो ध्रुब्तारा होता है !
  • कोस्सोपिया(Cossopian)  : जब सप्तऋषि  आकाश में दिखाई नहीं देता है तो उस अवस्था में हमे कोस्सोपिया  तारों के समूह से उत्तर दिशा ज्ञात करते है कोस्सोपिया ग्रुप में पांच तारे होते है . इनकी बनावट इंग्लिश की अक्षर डब्लू के बनी होती है ! कोस्सोपिया से उत्तर पत्ता करने के लिए इसके डब्लू आकर में एक एंगल छोटा तथा एक बड़ा इंगले होता है एंगर बड़े एंगल के बीचो बिच अगर एक काल्पनिक रेखा खीचकर आकाश में निचे की तरफ देखे तो एक चमकीला तारा दिखाई देगा तो ध्रुब्तारा है और ध्रुब तारा हमेश उत्तर में इ दिखाई देता है इस प्रकार से हम उत्तर डिश की जानकारी कर सकते है !
  • दक्षिण खटोला(Dakshini khatola se) : उत्तरी गोलार्ध में हम ध्रुबतारा के मदद से उत्तर दिशा ज्ञात करते है लेकिंग दक्षिणी गोलार्ध में ध्रुब्तारा दिखाई नहीं देता है इसलिए दक्षिण गोलार्ध में दक्षिण खटोला की मदद से दक्षिण दिशा ज्ञात करते है ! दक्षिण खटोला एक पतंगे के सामान चार तारों का समूह है ओ हमेशा लगभग दक्षिण में दिखाई देता हैं इस लिययूसके मदद दे हम दक्षिण दिशा ज्ञात करते है और बाद में और सब दिशाए !


इस सब तरीको से हम रात के समय उत्तर दिशा का पता लगा सकते है !उमीद करता हु पोस्ट पसंद आया होगा किसी सजेसन के लिए निचे कमेंट बॉक्स में लिखे !

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