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Tuesday, June 21, 2016

कन्वेंशनल सिग्न ,कन्वेंशनल सिग्न के प्रकार , कन्वेंशनल सिग्न बनाने का तरीका

पिछले पोस्ट में हमने दिन और रात्रि के समय उत्तर मालूम करने के कुछ तरीके और साधन के बारे में जानकारी हासिल की , इस पोस्ट में हम कन्वेंशनल सिग्न, कन्वेंशनल सिग्न के प्रकार और कन्वेंशनल सिग्न बनाने की विधि(Conventional sign, conventional sign ke prakar aur conventional sign banane ki vidhi) के बारे में जानकारी हासिल करेंगे !

जरुर पढ़े : मैप रीडिंग और मैप रीडिंग का महत्व

 मैं पोस्ट की सुरुआत से पहले इस ब्लॉग के विजिटर्स के द्वारा कुछ शब्द  मैप रीडिंग से समबन्धित ढूंढे गए है उनका जवाब हम दे देते है !

सवाल : 

  1. री-सेक्शन क्या होता है ?(Re-section method kya hai): मैप पर अपनी जगह निश्चित करने की उस विधि को रे सेक्शन कहते है जिसमे मैप  पर हम दो या अधिक जाने हुए स्थान से अपनी जगह की रेखाए खीचते है !
  2. इंटर सेक्शन क्या है ?(Inter section method kya hai): किसी अनजाने स्थान की जगह को मालूम करने के लिए जब माँ पर किन्ही दो या तीन जाने हुए स्थानो से रेखाए खीचते है तो उस पारकर अनजाने स्थान की जगह मालूम करने की विधि को इंटर सेक्शन की विधि कह्ते है !

आब हम ब्लॉग पोस्ट को आगे बढ़ाते है !

कन्वेंशनल सिग्न का परिचय :जैसे की हम जानते है की मैप किसी जमीनी इलाके का छोटे रूप में चित्रण है लेकिन मैप में इतना जगह नहीं हिते है की ज़मीन की सभी आकृतिया और बनावट चाहे ओ कृतिम हो या प्रकितिक को मैप पे हु-ब-हु मैप के ऊपर दिखा दी जाय !इसीलिए जमीनी आकृतियो को मैप पे दिखने के लिए कुछ निश्चित चिन्हों का प्रयोग किया जाता है जिनकी मदद से से छोटे शक्ल में ज़मीनी  की बनावट को मैप पर दिखाया जाता है !

कन्वेंशनल सिग्न का परिभाषा(Conventional sign ka paribhasha) : सर्वे ऑफ़ इंड़िया द्वारा निश्चित किये गए उन निशानों को कन्वेंशनल सिग्न या रूधि चिन्ह कहते है जिनकी मदद से ज़मीं की कुदरती या बनावट अक्रितियो को मैपों पर दिखाया जाता है !


Conventional Sign
Conventional Sign
कन्वेंशनल सिग्न के प्रकार : कन्वेंशनल सिग दो प्रकार के होते है!

जरुर पढ़े : कम्पास के प्रकार और इसके अहमियत

  1. सर्वे सिग्न(Survey sign) : सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा निश्चित किये हुए होते है !
  2. मिलिट्री सिंबल(Military symbol) : सेना मुख्यालय द्वारा निश्चित किये जाते है !यह गोपनीय रखे जाते है इसके द्वारा सेना सम्बंधित जानकारियो को दर्शाते है !
कन्वेंशनल सिग्न बनाने का तरीका(Conventional sign banane ka tarika) : कन्वेंशनल सिग्न बनाने का तीन तरीका है !

  • आकृतिया बनाकर (aakriti banake):  आकृतिया बनाने के तीन प्रकार होते है

  1. पड़े रुख में(Pade rukh me) : पड़े रुख में कन्वेंशनल सिग्न उसी रूप में बनाये जाते है जिस रूप में ओ जमीनी निशान जमीं पे है जैसे : रेलवे लाइन, नदी, नहर, झील , तलब, माकन, शहर आदि !  
  2. खड़े रुख में (khade rukh me): इस विधि में कन्वेंशन सिग्न उन ज़मीनी निशानों का बनाते है जो निशान सामने दिखाई देते है जैसे , चर्च, मकबरा , ईदगाह , मदिर, मस्जिद  आदि
  3. सामान्य रूप में(Sadharan rup me) : साधारण रूप में कन्वेंशनल सिग्न्स ऐसी सकल में बने जाता है जिससे उन ज़मीनी निशानों का भाव प्रकट होता हो जैसे लड़ाई के मैदान के लिए दो तलवारों का मेल का सिंबल , कटाई, भारी, सुरंग आदि सामान्य विधि के द्वारा दिखाई जाती है !

  • आकृतियो के साथ नाम लिखकर (aakriti ka naam likh kar) : इस बिधि में उन ज़मीनी निशानों के सिग्न बनाये जाते है जिनकी बनावट लगभग एक जैसे होती है इसलिए इसकी आकृति बना कर उसके साथ अंग्रेजी अक्षर कैपिटल लैटर मेलिख देते है जैसे : PO(Post office), PS(Police Station), RH(Rest House), DB(Dak Bungalow) IB(Inspection Bungalow) आदि
  • रंग भर कार(Rang bhar kar) : कुछ ज़मीनी निशानों को रंग भर कर भी दिखाया जाता है ! रंग के प्रयोग करते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है की रंग उस ज़मीनी निशान का सही भाव प्रकट करे जैसे : पानी को नील रंग से ,जंगले को हरे रेंज से, पहाड़ी वाले भूभाग को भूरे रेंज से हॉस्पिटल के + सिग्न को लाल रंग से आदि !
स्केल के आधार पर कन्वेंशनल सिग्न(Scale ke adhar pe conventional sign) : स्केल के आधार पर कन्वेंशनल सिग्न दो प्रकार से बनाया जाता है :

जरुर पढ़े : मैप कितने प्रकार के होते है 

  1. मैप के स्केल के आधार पर(Map ke scale ke adhar par) : कुछ ज़मीनी निशानों को मैपों को उनकी स्केल के अनुसार दिखाया जाता है अर्थात कोई सहर अगर जमीं पे 10 किलोमीटर में फैला हित ओ उसे मैप में उसी अनुपात में दिखाते है में मैप का एरिया 10 किलोमीटर के दर्शाए !  इस बिधि से नदी, बांध , गाँव आदि को दिखाते है !
  2. मैपके स्केल से बड़ा कर के(Map ke scale se bada kar ke) : कुछ ज़मीनी निशान जो छोटे होते है अगर उसको हम मैप के स्केल के अनुसार दिखाए तो हो सकता है की ओ इतने छोटे हो की जिसे हम देख भी न पाए इस लिए ऐसे निसानो के हम मैप के स्केल से बड़ा कर के दिखाते है जैसे :कुआ , अकेला माकन , पुल , रेलवे लाइन , सड़क आदि !

कन्वेंशनल सिग्न  का साइज़(Conventional sign ka size) : आम तौर पर कन्वेंशनल सिग्न 4 x 4 mm साइज़ के होते है कुछ कन्वेंशनल सिग्न 2 mm की चौड़ाई से भी दिखाए जाते है से दिखाई जाती है जोलाम्बे रुख में होती है !

मिलिट्री सिंबल(Miltary symbol) : मिलिट्री  सिंबल चार प्रकार के होते है

  1. सेना की टुकरी के समन्धित
  2. सामान के  सम्बंधित
  3. हथियार से सम्बन्धित
  4. किला से सम्बंधित
इस प्रकार से हमने कन्वेंशनल सिग्न  और उसके बनाने का तरीका  और कन्वेंशनल सिग्न के आकार के बारे में जानकारी हासिल किये अगर पोस्ट के बारे में कोई सजेसन हो तो निचे कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे 

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