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17 दिसंबर 2025

Map Reading in Hindi | Map ke Itihas | ForPoliceman.in

 

मैप रीडिंग
मैप रीडिंग 

सुरक्षा बलों के लिए मैप रीडिंग (Map Reading) का महत्व और मैप का इतिहास(Map ke Itihas) की संपूर्ण जानकारी

भारत जैसे विशाल और विविध भौगोलिक देश में सुरक्षा बलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सीमाओं की रक्षा हो या आंतरिक सुरक्षा बनाए रखना, हर परिस्थिति में ज़मीन की सही जानकारी होना अनिवार्य है। इसी आवश्यकता को पूरा करता है Map Reading का ज्ञान।

इस ब्लॉग  पर यह विषय इसलिए विशेष रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है ताकि पुलिस, अर्धसैनिक बलों और रक्षा सेवाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी  मेल का इतिहास (Map ke Itihas), उसके उपयोग और व्यावहारिक महत्व को सरल भाषा में समझ सकें।

इसे पढ़े :Basic data of 5.56mm INSAS and It characteristics.

Map Reading क्या है और यह क्यों आवश्यक है

Map Reading का अर्थ केवल नक्शा देखना नहीं, बल्कि नक्शे की सहायता से ज़मीन की वास्तविक बनावट को समझना है। सुरक्षा बलों के लिए यह एक मौलिक सैन्य कौशल है।

Map Reading क्या है और यह क्यों आवश्यक है

Map Reading का अर्थ केवल नक्शा देखना नहीं, बल्कि नक्शे की सहायता से ज़मीन की वास्तविक बनावट को समझना है। सुरक्षा बलों के लिए यह एक मौलिक सैन्य कौशल है।

Map Reading के बिना:

  • अनजान इलाकों में सही दिशा तय करना कठिन हो जाता है

  • जंगल, पहाड़ी या उबड़-खाबड़ क्षेत्रों में मूवमेंट जोखिम भरा हो सकता है

  • ऑपरेशन की योजना अधूरी रह जाती है

Map Reading के माध्यम से जवान बिना ज़मीन देखे भी यह अनुमान लगा सकते हैं कि:

  • रास्ता कहाँ से सुरक्षित है

  • कहाँ छिपाव संभव है

  • दुश्मन किस दिशा से आ सकता है

  • अनजान इलाकों में सही दिशा तय करना कठिन हो जाता है

  • जंगल, पहाड़ी या उबड़-खाबड़ क्षेत्रों में मूवमेंट जोखिम भरा हो सकता है

  • ऑपरेशन की योजना अधूरी रह जाती है

Map Reading के माध्यम से जवान बिना ज़मीन देखे भी यह अनुमान लगा सकते हैं कि:

  • रास्ता कहाँ से सुरक्षित है

  • कहाँ छिपाव संभव है

  • दुश्मन किस दिशा से आ सकता है

सुरक्षा बलों के मुख्य कार्य और नक्शे की भूमिका

सुरक्षा बलों के मुख्य कार्यों में शामिल हैं:

  • देश की सीमाओं की सुरक्षा

  • आंतरिक शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना

  • आतंकवाद और उग्रवाद से निपटना

इन सभी कार्यों में Map Reading एक आधार स्तंभ की तरह काम करता है। नक्शा ज़मीन की वह तस्वीर देता है जिसे हर समय वास्तविक रूप में देख पाना संभव नहीं होता 

Map ke Itihas : नक्शों का विकास

Map ke Itihas को समझना भी उतना ही आवश्यक है, जितना नक्शा पढ़ना।

प्रारंभिक काल

  • पुराने समय में नक्शे हाथ से बनाए जाते थे

  • पहाड़, नदियाँ और रास्ते प्रतीकों से दर्शाए जाते थे

आधुनिक काल

  • सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा वैज्ञानिक नक्शे

  • उपग्रह और डिजिटल मैपिंग

  • सैन्य और पुलिस कार्यों के लिए विशेष टोपोग्राफिकल मैप

Map ke Itihas यह बताता है कि समय के साथ नक्शों की सटीकता और उपयोगिता कैसे बढ़ी।

Map Reading का उद्देश्य

Map Reading सिखाने का मुख्य उद्देश्य है:

  • जवानों और कमांडरों को किसी भी ज़मीन को समझने में सक्षम बनाना

  • बिना स्थल निरीक्षण के भी सही ऑपरेशनल निर्णय लेना

नक्शे की सहायता से:

  • ज़मीन की ऊँच-नीच

  • रास्तों की उपलब्धता

  • सुरक्षा और आक्रमण की संभावनाएँ

का सही आकलन किया जाता है

कमांडर के लिए Map Reading का महत्व

अक्सर बड़े कमांडर स्वयं हर इलाके में जाकर निरीक्षण नहीं कर सकते। ऐसे में:

  • पूरी योजना नक्शे के आधार पर बनाई जाती है

  • ऑपरेशन की गोपनीयता बनी रहती है

  • समय और संसाधनों की बचत होती है

Map Reading कमांडर को यह क्षमता देता है कि वह:

  • ज़मीन की बनावट समझे

  • यूनिट की तैनाती तय करे

  • दुश्मन के संभावित मार्गों का अनुमान लगाए

Map Reading के मुख्य लाभ

Map Reading के लाभ निम्नलिखित हैं:

  • अनजान इलाके में आत्मविश्वास

  • सटीक नेविगेशन

  • जोखिम में कमी

  • ऑपरेशन की सफलता की संभावना अधिक

इसी कारण इस ब्लॉग  पर इस विषय को विशेष प्राथमिकता दी जाती है।

इसे पढ़े : 9 mm पिस्तौल ब्राउनिंग का बेसिक टेक्नीकल डाटा

Map Reading की शिक्षा के भाग

दस्तावेज़ के अनुसार, Map Reading की शिक्षा को दो मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है

map-1

:

1. सैद्धांतिक ज्ञान

  • नक्शे के प्रतीक

  • पैमाना

  • दिशा और उत्तर संकेत

2. व्यावहारिक कौशल

  • ज़मीन और नक्शे का मिलान

  • रास्तों की पहचान

  • वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग

दोनों का आपस में गहरा संबंध है।

ज़मीन की बनावट को समझने में Map Reading

नक्शा देखने के बाद जवान यह समझ पाते हैं:

  • पहाड़ी इलाका कितना कठिन है

  • जंगल में मूवमेंट कैसे होगा

  • खुले मैदान में सुरक्षा कैसे रखी जाए

इससे ऑपरेशन के दौरान:

  • नुकसान कम होता है

  • रणनीति अधिक प्रभावी बनती है

गुप्त ऑपरेशन और Map Reading

सुरक्षा बलों के कई ऑपरेशन अत्यंत गोपनीय होते हैं। ऐसे में:

  • नक्शे के आधार पर योजना बनती है

  • रास्ते पहले से तय होते हैं

  • अचानक बदलाव के लिए विकल्प तैयार रहते हैं

Map Reading यहाँ निर्णायक भूमिका निभाता है।

पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लिए उपयोगिता

केवल सेना ही नहीं, बल्कि:

  • पुलिस

  • सीआरपीएफ

  • बीएसएफ

  • आईटीबीपी

सभी के लिए Map Reading आवश्यक है। इसी लिए यहाँ  पर यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं में Map Reading

आज के समय में:

  • पुलिस भर्ती

  • अर्धसैनिक बल परीक्षा

  • विभागीय परीक्षाएँ

इन सभी में Map Reading और Map ke Itihas से प्रश्न आते हैं। सही तैयारी उम्मीदवार को बढ़त दिलाती है।

Map Reading से जुड़ी सामान्य गलतियाँ

अभ्यर्थियों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियाँ:

  • प्रतीकों को याद न रखना

  • पैमाने की अनदेखी

  • दिशा निर्धारण में गलती

इनसे बचने के लिए निरंतर अभ्यास आवश्यक है।

इस ब्लॉग वेब साईट  : सही मार्गदर्शन का मंच

और हमारा  का उद्देश्य है:

  • पुलिस और सुरक्षा बल अभ्यर्थियों को सटीक जानकारी देना

  • कठिन विषयों को सरल भाषा में समझाना

  • व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से सीखने में सहायता करना

Map Reading और Map ke Itihas जैसे विषयों पर यह मंच विश्वसनीय मार्गदर्शन प्रदान करता है।

निष्कर्ष

Map Reading केवल एक विषय नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों के लिए जीवन रक्षक कौशल है। Map ke Itihas से लेकर आधुनिक उपयोग तक, नक्शा हर ऑपरेशन की नींव होता है।

जो अभ्यर्थी या जवान इस कौशल में निपुण होते हैं, वे:

  • बेहतर निर्णय लेते हैं

  • ज़मीन का सही उपयोग करते हैं

  • मिशन को सफल बनाते हैं

इसीलिए यहाँ  पर Map Reading को समझना और अभ्यास करना हर सुरक्षा बल अभ्यर्थी के लिए अनिवार्य है।

SEO-Friendly FAQ Section (Police & Security Forces Focused)

FAQ 1: Map Reading क्या होता है?

उत्तर:
Map Reading का अर्थ है नक्शे की सहायता से ज़मीन की वास्तविक बनावट, दिशा, रास्तों और महत्वपूर्ण स्थानों को समझना। यह कौशल पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए अत्यंत आवश्यक होता है।

FAQ 2: पुलिस भर्ती परीक्षाओं में Map Reading क्यों जरूरी है?

उत्तर:
पुलिस और अर्धसैनिक बलों की परीक्षाओं में Map Reading से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके अलावा फील्ड ड्यूटी के दौरान अनजान इलाकों में सही निर्णय लेने में यह मदद करता है।

FAQ 3: Map ke Itihas का अध्ययन क्यों किया जाता है?

उत्तर:
Map ke Itihas से यह समझ आता है कि नक्शों का विकास कैसे हुआ और आज के आधुनिक नक्शे कितने सटीक और उपयोगी हैं। इससे नक्शों की उपयोगिता और सीमाएँ समझने में मदद मिलती है।

FAQ 4: क्या Map Reading केवल सेना के लिए है?

उत्तर:
नहीं। Map Reading पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और अन्य सुरक्षा बलों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है, विशेषकर ऑपरेशन और गश्त के समय।

FAQ 5: Map Reading कैसे सीखें?

उत्तर:
Map Reading सीखने के लिए पहले सैद्धांतिक ज्ञान जैसे प्रतीक और दिशा समझनी चाहिए, फिर व्यावहारिक अभ्यास करना चाहिए। इस वेबसाइट पर इससे संबंधित सरल नोट्स उपलब्ध हैं।

पुलिस भर्ती और सुरक्षा बलों की तैयारी से जुड़े ऐसे ही नोट्स के लिए www.forpoliceman.in को नियमित रूप से विज़िट करें।

और ज्यादा जानकारी पुलिस से सम्बंधित दुसरे पोस्ट के लिए आप इस वेबसाइट को भी विजिट कर सकते है 


18 मार्च 2021

नक्शा के ऊपर उत्तर दिशा कैसे ज्ञात करे

पिछले पोस्ट में मैंने अपने एक पाठक की मैप रीडिंग का सवाल का जवाब दिया था जिसका विषय था मैग्नेटिक बेअरिंग को ग्रिड बेअरिंग में बदना आज मै फिर  एक और पाठक ने  सम्बंधित सवाल पूछा   नक्शा के ऊपर उत्तर दिशा कैसे  ज्ञात करे या पता लगाये (Naksha me disha ka pta kaise lagaye) !

इसे  भी पढ़े :सर्विस प्रिज्मैटिक लिक्विड कम्पास mk-iii के 20 पार्ट्स और उनके काम

जैसे की  मैंने  आपने पिछले ब्लॉग पोस्ट्स में जमीन पर उत्तर दिशा कैसे ज्ञात करे उसके बारे में बहुत से पोस्ट लिखा है!जैसे की  जमीन के ऊपर दिशा का ज्ञान हम बहुत से तरीके है जिस्सके सहायता से हम उत्तर दिशा ज्ञात कर सकते है जैसे  कंपास, सूरज, मंदिर , मस्जिद , यदि लेकिन इस बार जो सवाल आया है उसमे पूछा गया है की मैप  के ऊपर दिशा का ज्ञात कैसे करे(How to find north on map?) !

Naksha me Disha ka pta kaise lagaye
मैप के उत्तर  दिशा कैसे ज्ञात करना हो तो सबसे पहले मैप के ऊपर देखे उसके ऊपर उत्तर दिशा की एरो मार्क दिया होता है  जिसके द्वारा उत्तर बताया गया होता है और अगर एरो मार्क नहीं दिया गया हो तो यह हमेशा समझे की मैप को अगर सीधा पकड़ा जाए तो उसका  ऊपर का भाग उत्तर दिशा को इंगित करता है और एक बार उत्तर दिशा प्राप्त होगया तो उसके सहायता से बाकि सभी दिशा को हम आसानी से जान सकते है !
यानी एक बार उत्तर दिशा मालुम पड गया तो आप उत्तर की तरफ मुह कर के खड़ा  हो जाए और आप को दाहिने हाथ के तरफ पूर्व और बाए हाथ की तरफ पश्चिम दिशा होगा  तथा मैप का निचला हिस्सा दक्षिण दिशा होता है ! यानि दुसरे शब्दों में कहे तो नक्शा में उत्तर दिशा नक्शा के  उपरी भाग होता है और दक्षिण दिशा निचे के भाग में होता है और उसी तरह से दाहिने साइड में पूर्व तथा बाये हाथ के साइड में पश्चिम दिशा होता है !

इसे  भी पढ़े :अपना खुद का लोकेशन मैप पे जानना और नार्थ पता करने के तरीके

इस प्रकार से यहाँमैप के ऊपर उत्तर दिशा प्राप्त करने  सम्बंधित ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई !उम्मीद है कि यह आप लोगों को लिए उपयोगी साबित होगा। अगर यह मेरा ब्लॉक ब्लॉक पोस्ट आपको पसंद आया हो तो मेरे ब्लॉक को शेयर और सब्सक्राइब करें और अगर कोई सुझाव मेरे ब्लॉक पोस्ट के बारे में हो तो नीचे के कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें इस ब्लॉग को सब्सक्राइब और फेसबुक पर लाइक करें और हम लोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
इन्हे भी पढ़े :
  1. मैप रीडिंग की अवाश्काताये तथा मैप का परिभाषा
  2. 15 जरुरी पॉइंट्स मैप को सही पढने के लिए
  3. मैप कितने प्रकार के होते है ?
  4. कंपास को सेट करना तथा इस्तेमाल करने का तरीका
  5. कंटूर रेखाए क्या है ? एक मैप की विश्वसनीयता और कमिया किन किन बाते पे निर्भर करती है ?
  6. मैप रीडिंग में दिशाओ के प्रकार और उत्तर दिशा का महत्व
  7. दिन के समय उत्तर दिशा मालूम करने का तरीका
  8. कन्वेंशनल सिग्न ,कन्वेंशनल सिग्न के प्रकार , कन्वेंशनल सिग्न बनाने का तरीका
  9. रात के समय उत्तर मालूम करने का तरीका
  10. सर्विस प्रोटेक्टर का परिभाषा और सर्विस प्रोटेक्टर का प्रकार
  11. सर्विस प्रोटेक्टर का उपयोग और सर्विस प्रोटेक्टर से बेक बेअरिंग पढने का तरीका

12 मार्च 2021

मैग्नेटिक बेअरिंग को ग्रिड बेअरिंग में बदना

 मैप रीडिंग के पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने टोपोग्राफिकल फॉर्म के बारे में जानकारी प्राप्त किये और उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए आज एक एन सी सी के छात्र द्वारा ग्रिड बेअरिंग को मैग्नेटिक बेअरिंग में कैसे बदले है के बरे में पूछे गए सवाल का जवाब देने के लिए यह पोस्ट लिख रहा हु !

जैसे की हम जानते है कन्वर्शन और बेअरिंग यानि बेअरिंग को कन्वर्ट करने की जरुरत बहुत पड़ती है जब हम मैप रीडिंग की ट्रेनिंग लेते है इसीलिए यह बहुत ही जरुरी है की ओ चाहे एन सी सी के छात्र हो या यूनिफार्म फाॅर्स के जवान सभी को कन्वर्शन ऑफ़ बेअरिंग जिसमे की ग्रिड बेअरिंग  को  मैग्नेटिक बेअरिंग या ट्रू नोठे , मैग्नेटिक नार्थ या ग्रिड नार्थ को आपस में बदली करने जरुर आना चाहिए नहीं तो इसके बिना आप मैप को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर सकते है !

जैसे की सवाल है की ग्रिड बेअरिंग को मैग्नेटिक बेअरिंग में कैसे बदली करते है तो इसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए कुछ जरुरी बेअरिंग के बारे में जानकारी होनी चैये जैसे की :

  • ट्रू नार्थ  किसे कहते है(True north kise kahte hai/ What is true north?) : ध्रुव तारे के सहायता से ज्ञात किया हुवा नार्थ को ट्रू नार्थ कहते है ! तथा ट्रू नार्थ की ओर खिची गई रेखायो को ट्रू नार्थ की रेखाए कहते है ! सर्वे मैप पर ये रेखाए दक्षिण से उत्तर की ओर काले रंग से खिंची जाती है !
  • ग्रिड नार्थ किसे कहते है(Grid north kise kahte hai/ What is Grid north?) : सर्वे मैपो पर बैगनी रंग से दक्षिण से उत्तर की खिंची गई रेखाए जिस उत्तर की ओर इशारा करती है वह ग्रिड नर्थ कहलाता है !
  • मैग्नेटिक नार्थ किसे कहते है(MAgnetic north kise kahte hai/ What is Magnetic north?) ?: कंपास की सुई अर्थात मैग्नेटिक सुई जिस उत्तर की ओर इशारा करता है उसे मैग्नेटिक नोएथ कहते है ! सर्वे मैप पर मैग्नेटिक नार्थ को दिखने के लिए कोई रेखा नहीं होती है !
  • मैग्नेटिक वेरिएशन किसे कहते है (Magnetic variation kise kahte hai/ What is magnetic variation?)?: किसी स्थान पर जब ट्रू नार्थ और मैग्नेटिक नार्थ की रेखाए आपस में मिलती है तो उस स्थान पर इन दोनों के बीच की कोणात्मक दुरी को मैग्नेटिक वेरिएशन कहते है !
  • एंगल ऑफ़ कन्वर्जेन्स किसे कहते है(Angle of convergence kise kahte hai / What is angle of convergence?):किसी स्थान पर  जब ट्रू नार्थ और ग्रिड नार्थ की रेखाए आपस में मिलती है तो उस स्थान पर इन दोनों नार्थ रेखाओ के बीच की कोणात्मक दुरी को एंगल ऑफ़ कन्वर्जेन्स कहते है !
  • लोकल वेरिएशन किसे कहते है (Local variation kise kahte hai? /What is local variation?)?:किसी स्थान पर मिलते समय ग्रिड नार्थ और मैग्नेटिक नार्थ रेखाओ के बीचजो कोणात्मक दुरी बनती है उसे लोकल वेरिएशन कहते है ! 
जैसे की हम हम जानते हैं कि मैप पर एंगल आफ कन्वर्जेंस तथा मैग्नेटिक वेरिएशन संबंधी जानकारी तो दी जाती है परंतु ग्रिड नार्थ  रेखा और मैग्नेटिक नॉर्थ रेखा का अंतर नहीं दिया जाता है। इसका ज्ञान वास्तविक उत्तर यानी ट्रू नॉर्थ की स्थिति से हिसाब लगाकर ही कर सकते हैं। 

मैग्नेटिक बेयरिंग कंपास से तथा ग्रिड बेअरिंग  सर्विस प्रोटेक्टर से नापी जाती है। परंतु ट्जारू बेअरिंग नने के लिए हमें अन्य किसी बेयरिंग को उस में बदलना पड़ता है!

 जमीन पर काम करते समय कंपास या मैग्नेटिक बेयरिंग से काम चल जाता है तथा मैप  पर काम करते समय सर्विस प्रोटेक्टर द्वारा ली गईग्रिड बेअरिंग  से काम चल जाता है !परंतु जमीन से मैप और मैप से जमीन पर की कार्रवाई में मैग्नेटिक बेयरिंग को ग्रिड बेअरिंग  और ग्रिड बेअरिंग को मैग्नेटिक बेअरिंग  में बदलना अवश्य होता है 
मैप पर मैग्नेटिक नार्थ और  ग्रिड नार्थ  का अंतर  नहीं लिखा होता है! इसे मैग्नेटिक वेरिएशन तथा एंगलऑफ़ कन्वर्जेन्स की मदद से  मालूम करते हैं!


बेयरिंग के रूम रूपांतरण की विधि:-एक बेअरिंग को  किसी दूसरी दूसरी बेरिंग या बेअरिंगो  में परिवर्तन करने से पहले निम्न बातों को ध्यान में रखना पड़ता है:-
  • सभी बेयरिंग की एक रेखा कोई एक नार्थ लाइन होती है। 
  • सभी बेअरिंगो  को घड़ी के सुलटे रुख  डिग्री ,मिनटों  और सेकंडो में नापा जाता है। परंतु पृथ्वी के स्थान सदैव एक ही स्थान पर रहते हैं। उनके बेरिंग में अंतर केवल इसलिए होता है कि इन स्थानों की नॉर्थ रेखा एक स्थान पर ना होकर एक दूसरे से थोड़ा पूर्व या पश्चिम में हटकर होती है। इनके पूर्व या पश्चिम में होने से बेअरिंगो  पर प्रभाव पड़ता है! उसे जानने की विधि यह है कि यदि किसी बेयरिंग की नॉर्थ रेखा दूसरे बेयरिंग की नार्थ  रेखा से पश्चिम में है तो उस बेयरिंग दूसरी बेरिंग में उतना ही अधिक होगी जितनी डिग्री पश्चिम में उसकी नाथ रेखा है। यदि किसी स्थान की नॉर्थ रेखा के पूर्व में है तो उसकी बेयरिंग दूसरी बेरिंग से उतना ही डिग्री कम होगी कितना डिग्री उसकी देखा पूर्व में है!
  • मैप  के ऊपर एंगल ऑफ़ कन्वर्जेन्स और मैग्नेटिक वेरिएशन दिया हुवा रहता है और उसी के मदद से हम ग्रिड बेअरिंग को मैग्नेटिक बेअरिंग तथा मैग्नेटिक बेअरिंग को ग्रिड बेअरिंग में बदलते है ! उदाहण के लिए 
1. मैग्नेटिक बेअरिंग को ग्रिड बेअरिंग में बदना(Magnetic bearing ko grid bearing me badlna. Convergence of magnetic bearing to grid bearing)) : यदि मैप का लोकल वेरिएशन 1 डिग्री 30 मिनट पश्चिम है ! यदि कम्पस से यानि किसी स्थान के मैग्नेटिक बेअरिंग 230 डिग्री है तो उस स्थान का ग्रिड बेअरिंग कितनी होगी ?

मैग्नेटिक बेअरिंग को ग्रिड बेअरिंग में बदलना
उत्तर:-  चुकी मैग्नेटिक नार्थ , ग्रिड नार्थ के 1 डिग्री 30 मिनट पश्चिम में है ! इसलिए ग्रिड बेअरिंग भे मैग्नेटिक बारिन से 1 डिग्री 30 मिनट कम अर्थात 230 डिग्री  - 1 डिग्री 30 मिनट = २२८ डिग्री 30 मिनट होगी ! यदि मैग्नेटिक नार्थ ग्रिड नार्थ से 1 दिगी 30 मिनट पूर्व का होता तो ग्रिड बेअरिंग 1 डिग्री 30 मिनट अधिक अर्थात 230 डिग्री  + 1 डिग्री 30  मिनट = 231 डिग्री 30 मिनट होता !


2. ग्रिड बेअरिंग को मैग्नेटिक बेअरिंग में बदलना(Grid bearing ko Magnetic bearing me badlna. Convergence of grid bearing to magnetic bearing) :यदि मैप पर लोकल वेरिएशन 1 डिग्री 38 मिनट पश्चिम यानि ग्रिड नार्थ से मैग्नेटिक नार्थ पश्चिम में है ! तो उस मैप पर सर्विस प्रोटेक्टर से ग्रिड बेअरिंग 290 डिग्री नापा गया है मैग्नेटिक बेअरिंग कितना  होगा ! यानि ग्रिड बेअरिंग को मैग्बेनेटिक बेअरिंग में बदलना है !

ग्रिड  बेअरिंग को मैग्नेटिक  बेअरिंग में बदलना
उत्तर :- चुकी मैग्नेटिक नार्थ ग्रिड नार्थ से 1 डिग्री 38 मिनट पश्चिम में है ! अतः स्पस्ट है की मैग्नेटिक बेअरिंग ग्रिड बेअरिंग से 1 डिग्री 38 मिनट अधिक होगी अर्थात 290 डिग्री + 1 डिग्री 38 मिनट = 288 डिग्री 22 मिनट !




इस प्रकार से यहाँ ग्रिड बेअरिंग को मैग्नेटिक बेअरिंग तथा मैग्नेटिक बेअरिंग को ग्रिड बेअरिंग में बदलने से सम्बंधित ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई !उम्मीद है कि यह आप लोगों को लिए उपयोगी साबित होगा। अगर यह मेरा ब्लॉक ब्लॉक पोस्ट आपको पसंद आया हो तो मेरे ब्लॉक को शेयर और सब्सक्राइब करें और अगर कोई सुझाव मेरे ब्लॉक पोस्ट के बारे में हो तो नीचे के कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें इस ब्लॉग को सब्सक्राइब और फेसबुक पर लाइक करें और हम लोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
इन्हे भी पढ़े :
  1. मैप रीडिंग की अवाश्काताये तथा मैप का परिभाषा
  2. 15 जरुरी पॉइंट्स मैप को सही पढने के लिए
  3. मैप कितने प्रकार के होते है ?
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  5. कंटूर रेखाए क्या है ? एक मैप की विश्वसनीयता और कमिया किन किन बाते पे निर्भर करती है ?
  6. मैप रीडिंग में दिशाओ के प्रकार और उत्तर दिशा का महत्व
  7. दिन के समय उत्तर दिशा मालूम करने का तरीका
  8. कन्वेंशनल सिग्न ,कन्वेंशनल सिग्न के प्रकार , कन्वेंशनल सिग्न बनाने का तरीका
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11 जनवरी 2021

टोपोग्राफिकल फॉर्म्स | टेकरी क्या होता है ?| NCC कैडेट के लिए भी उपयोगी

 पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने कुछ टोपोग्राफिकल टर्म्स जैसे सैडल क्या होता है और उसे मैप पे कैसे दिखाया जाता है उसके बारे में जेकरि शेयर की और आज के इस पोस्ट में हम उसी शृंखला को आगे बढ़ाते हुए  हुए जानेगे की टेकरी और डिवाइड क्या होता है और उसे मैप पर कैसे दिखया जाता है ! 

इस  ब्लॉग पोस्ट को पढ़ने के बाद आप निम्न टोपोग्राफिकल फॉर्म के बारे में पूरी तरह से वाकिफ हो जायेगे ! जो की निचे दी हुई है :

1. टेकरी या नॉल क्या होता है और उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है ?

2. डिवाइड क्या होता है ?

3. जल विभाजक या वाटर शेड क्या होता है ?

4. जल प्रवाह मार्ग या वाटर सोर्स क्या होता है ?

5. डिफायल क्या होता है ?

इसे  भी पढ़े :अपना खुद का लोकेशन मैप पे जानना और नार्थ पता करने के तरीके

 टेकरी या नोल (Knoll): वह अकेली पहाड़ी नोल कहलाती है जिसका किसी पहाड़ी सिलसिले से कोई सम्बन्ध नहीं होता है ! इसकी कंटूर रेखाए गोल होती है और ऊंचाई कम होने से आमतौर पर एक ही कंटूर से दिखाई जाती है ! इस मैप के ऊपर निम्न तरीके से दिखाया जाता है :

Tekari 
2.   डिवाइड(Divide):-लंबी और ऊंची पर्वत श्रेणी कि उस  ऊँची उठी  पीठ को डिवाइड कहते हैं जहां से पानी दो अलग-अलग दिशाओं को बहने लगता है।

 जल विभाजक या वाटर सेड(Water Shed):-जब किसी पर्वत श्रेणी का ऊंचा भाग जो जल प्रवाहो को अलग करें उसे जल विभाजक या वाटर सेड कहते हैं। यह जरूरी नहीं कि वाटर शेड के लिए पर्वतीय श्रृंखला का सबसे ऊंचा भाग हो। इसे मैप पर निम्न प्रकार से दिखाते है !

Water Shed 

4. जल प्रवाह मार्ग या वाटर कोर्स(Water Course):-किसी इलाके में सबसे नीची जगह जल प्रवाह मार्ग कहलाती है जहां से होकर उस इलाके का पानी बहता  है। यह  सुखा भी हो सकता है और पानी से भरा भी हो सकता है!

 5. डिफायल(Defile) : किसी रास्ते के उस तंग भाग को डिफायल कहते है जिससे पार  होने के लिए सेना को अपनी फॉरमेशन छोटी करनी पड़े. डिफायल कुदरती वह बनावटी दोनों होती है:-
  • कुदरती पहाड़ियों के तंग रास्ते या दर्रा घने जंगल आदि  
  • बनावटी पूल सुरंग आदि

इस प्रकार से टोपोग्राफिकल फॉर्म जैसे टेकरी , डिवाइड आदि  से सम्बंधित या ब्लॉक पोस्ट समाप्त हुआ और उम्मीद है कि यह आप लोगों को लिए उपयोगी साबित होगा। अगर यह मेरा ब्लॉक ब्लॉक पोस्ट आपको पसंद आया हो तो मेरे ब्लॉक को शेयर और सब्सक्राइब करें और अगर कोई सुझाव मेरे ब्लॉक पोस्ट के बारे में हो तो नीचे के कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें इस ब्लॉग को सब्सक्राइब और फेसबुक पर लाइक करें और हम लोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करें।

इन्हे भी पढ़े :
  1. मैप रीडिंग की अवाश्काताये तथा मैप का परिभाषा
  2. 15 जरुरी पॉइंट्स मैप को सही पढने के लिए
  3. मैप कितने प्रकार के होते है ?
  4. कंपास को सेट करना तथा इस्तेमाल करने का तरीका
  5. कंटूर रेखाए क्या है ? एक मैप की विश्वसनीयता और कमिया किन किन बाते पे निर्भर करती है ?
  6. मैप रीडिंग में दिशाओ के प्रकार और उत्तर दिशा का महत्व
  7. दिन के समय उत्तर दिशा मालूम करने का तरीका
  8. कन्वेंशनल सिग्न ,कन्वेंशनल सिग्न के प्रकार , कन्वेंशनल सिग्न बनाने का तरीका
  9. रात के समय उत्तर मालूम करने का तरीका
  10. सर्विस प्रोटेक्टर का परिभाषा और सर्विस प्रोटेक्टर का प्रकार
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03 जनवरी 2021

सैंडल किसे कहते हैं और मैप पर कैसे दिखाते हैं?Saddle kise kahte hai aur use map par kaise dikhya jata hai?

पिछले ब्लॉक पोस्ट में हमने रिज किसे कहते हैं और उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है उसके बारे में जानकारी प्राप्त की और अब हम आज के इस ब्लॉग पोस्ट में टोपोग्राफिकल फॉर्म जैसे पास सैंडल, क्रेस्ट, माउंड,  पठार, ड्यून किसे कहते हैं तथा उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप निम्नलिखित टोपोग्राफिकल फॉर्म तथा उसे मैप के ऊपर दिखाने की विधि के बारे में अच्छी जानकारी प्राप्त करेंगे ;
  1. दर्रा या पास किसे कहते हैं और उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है(Darra ya Pass kise kahte hai)?
  2.  सैंडल किसे कहते हैं और उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है (Saddle kise kahte hai)?
  3. क्रेस्ट किसे कहते हैं और उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है(Crest kise kahte hai)?
  4. पठार किसे कहते हैं और उसे मैप पर किस विधि से दिखाया जाता है?
  5. माउंड  किसे कहते हैं और उसका क्या उपयोग होता है(Mount kise kahte hai)?
  6. ट्यून किसे कहते हैं और यह कहां पाया जाता है(Dyune kise kahte hai)?
1. दर्रा या पास किसे कहते हैं और मैप पर कैसे दिखाते हैं? किसी पर्वतमाला की दो चोटियों के बीच जो नीचे और तंग जगह होती है उसे पास या दर्रा कहते हैं। इस जगह से पहाड़ के दूसरी ओर जाया जा सकता है। दर्रा पहाड़ की दो चोटियों को अलग अलग करता है। इसी प्रकार इसके कंटूर भी खींचे जाते हैं। इससे मैप के ऊपर निम्न प्रकार से दिखाया जाता है।

Pass (दर्रा )
2. सैंडल किसे कहते हैं और मैप पर कैसे दिखाते हैं? लगभग दो समान ऊंचाई वाली दो पहाड़ियों के बीच में या एक पर्वत की दो चोटियों के बीच में दबे हुए फोड़े समतल से भाग को सैंडल या कॉल कहते हैं। दूर से देखने पर या यह घोड़े की काठी की तरह दिखाई देता है। सैंडल का आकार दर्रा से मिलता जुलता रहता है इनमें एक पर किया है कि सैंडल दर्रा से ज्यादा चौड़ा और कम दबा हुआ होता है। इसे मैप पर निम्न प्रकार से दिखाया जाता है।


३. क्रेस्ट  किसे कहते हैं और उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है? लंबी और दूर तक फैली हुई पर्वत श्रृंखलाओं की चोटियों को मिलाने वाली कल्पनिक रेखा को क्रस्ट कहते हैं। जहां पहाड़ की खड़ी ढलान समाप्त होकर जब गोल चोटी शुरू होती है उसे श्रृंग या क्रश कहते हैं। मैप पर छोटी से छोटी गोल कार कंटूर रेखा जिसके भीतर दूसरी रेखा ना हो श्री या कैसे बनाती है। क्रेस्ट को मैप के ऊपर निम्न प्रकार से दर्शाया जाता है।


4. पठार या प्लेटो किसे कहते हैं और उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है? पहाड़ के ऊपर बने समतल भाग को पठार कहते हैं। इस पर खेती बाड़ी की जा सकती है। मैप पर इस भाग में कंटूर रेखाएं नहीं होती है इसके चारों तरफ छोटी-छोटी पहाड़ियां होती है।

5. माउंट किसे कहते हैं और इसका क्या उपयोग मैप रीडिंग में किया जा सकता है? मैदानी भाग में उभरा हुआ वह अकेला सा टीला माउंट कहलाता है जिस पर खड़े होकर चारों ओर का इलाका दिखाई देता है। मैप रीडिंग में माउंट का उपयोग एरिया ऑब्जर्वेशन करने के लिए किया जाता है। आमतौर पर मैप के ऊपर माउंट को रिलेटिव हाइट से दिखाया जाता है।
6. ड्यून किसे कहते हैं और यह कहां पाया जाता है? रेतीले इलाके में हवा द्वारा वह मिट्टी या रेट उड़ने से बनने वाले टीले ड्यूल कहलाते हैं। यह हवा के बहाव से बनते बिगड़ते रहते हैं और पहाड़ी के समान दिखाई देते हैं उनकी स्थित स्थाई नहीं होता है इसीलिए इन्हें मैप पर नहीं दिखाया जा सकता।


इस प्रकार से टोपोग्राफिकल फॉर्म जैसे सैंडल माउंट ड्यूल दर्रा से संबंधित या ब्लॉक पोस्ट समाप्त हुआ और उम्मीद है कि यह आप लोगों को लिए उपयोगी साबित होगा। अगर यह मेरा ब्लॉक ब्लॉक पोस्ट आपको पसंद आया हो तो मेरे ब्लॉक को शेयर और सब्सक्राइब करें और अगर कोई सुझाव मेरे ब्लॉक पोस्ट के बारे में हो तो नीचे के कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें इस ब्लॉग को सब्सक्राइब और फेसबुक पर लाइक करें और हम लोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करें।

इन्हें  भी  पढ़े :
  1. मैप रीडिंग में दिशाओ के प्रकार और उत्तर दिशा का महत्व
  2. दिन के समय उत्तर दिशा मालूम करने का तरीका
  3. कन्वेंशनल सिग्न ,कन्वेंशनल सिग्न के प्रकार , कन्वेंशनल सिग्न बनाने का तरीका
  4. रात के समय उत्तर मालूम करने का तरीका
  5. सर्विस प्रोटेक्टर का परिभाषा और सर्विस प्रोटेक्टर का प्रकार
  6. सर्विस प्रोटेक्टर का उपयोग और सर्विस प्रोटेक्टर से बेक बेअरिंग पढने का तरीका
  7. 13 तरीके मैप सेट करने का !
  8. 5 तरीका मैप पे ऊपर खुद का पोजीशन को पता करने का
  9. 5 तरीको से मैप टू ग्राउंड और ग्राउंड टू माप जाने
  10. मैप रीडिंग के उद्देश्य तथा मैप रीडिंग के महत्व

01 जनवरी 2021

रिज किसे कहते हैं और उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है ?What is ridge, spur, re-entrant and basin

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने कोनिकल हिल और उसे मैप पे कैसा दिखया जाता है उसके बारे में जानकारी प्राप्त की और अब आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम टोपोग्राफिकल फॉर्म के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे और आज जिन टोपोग्राफिकल फॉर्म के बारे में इस ब्लॉग पोस्ट में हम जानकारी प्राप्त करेंगे को निम्नलिखित है
  1. रिज  किसे कहते हैं और मैप पर कैसे उसे कैसे दिखते है(What is ridge ) ?
  2.  स्पर  पर किसे कहते हैं और मैप पर कैसे उसे कैसे दिखते है ?(What is spur ) 
  3. रीएंट्रेंट किसे कहते हैं और मैप पर कैसे उसे कैसे दिखते है ? (What is re -entrant  ) 
  4. बेसिन किसे कहते हैं औऔर मैप पर कैसे उसे कैसे दिखते है ?(What is Basin ) 

ऊपर बताए गए चार  टोपोग्राफिकल फॉर्म के बारे में हम डिटेल से इस ब्लॉग पोस्ट में जानकारी प्राप्त करेंगे:
1 . रिज किसे कहते हैं और उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है:- किसी ऊंचे पहाड़ी का सिकुड़ा हुआ लंबाई और लगभग समान ऊंचाई वाली पर्वतीय पहाड़ी की श्रेणी को रीच कहते हैं !जहां दोनों ओर को  उस पहाड़ी की ढलान शुरू हो जाता है। रिच को दिखाने वाली कंटूर लाइन लंबाई और क्रम से होती है !
यानी दूसरे शब्दों में कहें तो वह उस  सिकुड़ी हुई पहाड़ी जिसकी लंबाई लगभग समान हो और उसकी ढलान दोनों तरफ शुरू हो एक समान तो उस पहाड़ी को जो ढलान है उसको हम रिज कहते  हैं उसे मैप पर निम्न लिखित तरीके से दिखाया जाता है!

2. स्पर किसे कहते हैं और उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है: जिस प्रकार से हमारे शरीर से बाहे  नीचे की ओर निकलती  है उसी प्रकार से पहाड़ी इलाकों में पहाड़ का कुछ भाग नीचे मैदान की ओर बढ़ता चला जाता है। पहाड़ का वह भाग जो बाजू की तरह  जमीन के साथ निकला हुआ चला जाता है उसे स्पर  या पर्वत स्कंध कहते हैं!स्पर  की कंटूर V  आकार की होती है और V  की नोक मैदान की ओर रहती है। स्पर  को मैप पर कंटूर की सहायता से निम्न प्रकार से दिखाएं जाता है!


3. रीएंट्रेंट किसे कहते हैं और उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है: दो पर्वत स्कंध या स्पर   के बीच दबे हुए भाग को रीएंट्रेंट कहते हैं! इसका मोड पहाड़ी की ऊंचाई की ओर  कम होता चला जाता है! रीएंट्रेंट से आमतौर पर नाले निकलते हैं। इसे कंटूर के सहायता से मैप के ऊपर निम्न प्रकार से दिखाया जाता है।

Re-entrant Kise kahte hai aur use map par kaise dikhaya jata hai ?
Re -Entrant 

4. बेसिन किसे कहते हैं और उसे मैप पर कैसे दिखाया जाता है: बेसिन का दो मतलब होता है:

  • पहाड़ों से घिरे हुए उस भाग को बेसिन कहते हैं जो समतल या लगभग समतल होता है।
  • नदिया नदी की सीखा सिखाओ द्वारा जिस इलाके की सिंचाई होती है उसे नदी का बेसिंग कहते हैं।
बेसिन को कंटूर की सहायता से मैप पर निम्न प्रकार से दिखाया जाता है।
Basin Kise kahte hai aur use map par kaise dikhaya jata hai ?
Basin 

इस प्रकार से टोपोग्राफिकल फॉर्म पार्ट- 2 का एक छोटा सा ब्लॉक पोस्ट यहां समाप्त हुआ। उम्मीद है कि यह पोस्ट आपको पसंद आएगा अगर यह पोस्ट पसंद आए तो हमारे पोस्ट को लाइक शेयर और सब्सक्राइब करें!और कोई सुझाव होतो निचे के कमेंट कर के जरूर बताये !इस ब्लॉग को सब्सक्राइब और फेसबुक पर लाइक करें और हम लोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करें।

इन्हें  भी  पढ़े :
  1. मैप रीडिंग में दिशाओ के प्रकार और उत्तर दिशा का महत्व
  2. दिन के समय उत्तर दिशा मालूम करने का तरीका
  3. कन्वेंशनल सिग्न ,कन्वेंशनल सिग्न के प्रकार , कन्वेंशनल सिग्न बनाने का तरीका
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  5. सर्विस प्रोटेक्टर का परिभाषा और सर्विस प्रोटेक्टर का प्रकार
  6. सर्विस प्रोटेक्टर का उपयोग और सर्विस प्रोटेक्टर से बेक बेअरिंग पढने का तरीका
  7. 13 तरीके मैप सेट करने का !
  8. 5 तरीका मैप पे ऊपर खुद का पोजीशन को पता करने का
  9. 5 तरीको से मैप टू ग्राउंड और ग्राउंड टू माप जाने
  10. मैप रीडिंग के उद्देश्य तथा मैप रीडिंग के महत्व

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