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Saturday, March 31, 2018

एंगल ऑफ़ अटैक तथा एडवांस प्राइमर इग्निशन क्या होता है ?

पिछले पोस्ट में हमने रायट कण्ट्रोल ड्यूटी में राइफल मैन का काम के बारे में जानकारी प्राप्त किये इस पोस्ट में हम हथियार से सम्बंधित कुछ हथियार के टेक्निकल टर्म्स है के बारे में जानकारी  प्राप्त करेंगे !


किसी भी विषय को अच्छी तरह से समझने की लिए जरुरी है की उसके अन्दर इस्तेमाल  होने वाली छोटी छोटी जो टेक्निकल टेम्स है उसका अर्थ सभी के मालूम  हो ताकि जब कभी उसे कीसी  ऑपरेशन या ब्रीफिंग में इस्तेमाल किया जाय तो उसका  अर्थ  अच्छी  तरह से समझा जा सके और उसे लागु किया जा सके !


जरुर पढ़े : 9 mm पिस्तौल ब्राउनिंग का बेसिक टेक्नीकल डाटा

इस पोस्ट को  हमने  निम्न टेक्निकल टर्म्स के बारेमे जानेगे  :
1. एडवांस प्राइमर इग्निशन क्या होता है ?(Advance primer ignition kya hota hai?)
2. एंगल ऑफ़ अटैक क्या होता है ?(Angle of attack kya hota hai?)
3. एंगल ऑफ़ इम्पैक्ट क्या होता है ?(Angle of impact kya hota hai?)
4. एनविल क्या होता है ?(Anvil kya hota hai?)
5. अक्सिक्स ऑफ़ बैरल क्या होता है (Axix of barrel kya hota hai)
1. एडवांस प्राइमर इग्निशन क्या होता है ?(Advance primer ignition kya hota hai?):जब ब्रिज की आगे की चाल पूरा होने से पहले या राउंड के चैम्बर में पूरी तरह से बैठ जाने से पहले ही गोली फायर हो जाती है तो उस सिस्टम को एडवांस प्राइमर इग्निशन कहते है !लगभग सभी SSG में यह तरीका इस्तेमाल किया जाता है !कार्बाइन 9 mm इसका एक उदहारण है ! इस तरीके से ब्रिज ब्लाक को हल्का बनाया जा सकता है ! यह ब्लो बेक के एक किस्म है !
2. एंगल ऑफ़ अटैक क्या होता है ?(Angle of attack kya hota hai?):पॉइंट ऑफ़ एम , लाइन ऑफ़ अर्रिवल और टारगेट के सरफेस के समनांतर डाले गए बम के बिच जो कोण बनता है उसे एंगल ऑफ़ अटैक कहते है !
3. एंगल ऑफ़ इम्पैक्ट क्या होता है ?(Angle of impact kya hota hai?):एंगल ऑफ़ इम्पैक्ट हम उस कोण को कहते है जो गोली लगने की जगह पर लाइन ऑफ़ साईट और ट्रेजेक्ट्री के टेन्जेंट के बिच बनता है !
4. एनविल क्या होता है ?(Anvil kya hota hai?):कार्ट्रिज का वह भाग जिसके द्वारा परकुशन कैप के अन्दर भरा इगिनिटिंग मटेरियल दबता है ! जब की कार्ट्रिज पर फायरिंग पिन चोट मरती है ! यह कार्ट्रिज  केस में परकुशन कैप या कार्ट्रिज का रीम भी हो सकता है !
5. अक्सिक्स ऑफ़ बैरल क्या होता है (Axix of barrrel kya hota hai?):अक्सिक्स ऑफ़ बैरल उस काल्पनि रेखा को कहते है जो चैम्बर से मजल तक बैरल के बीचोबीच आती है !
इस प्रकार से यह पोस्ट  हथियारों से सम्बंधित टेक्निकल टर्म्स का संपत हुवा !उम्मीद है की पोस्ट आपको पसंद आएगा ! अगर कोई  या ब्लॉग के बारेमे हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे ! और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक शेयर तहत लिखे करके हमलोगों को प्रोतसाहित करे और अच्छा करने के लिए 
इन्हें भी पढ़े :
  1. 7.62 mm एसएलआर का बेसिक डाटा -I
  2. 7.62 Self Loading Rifle basic data-II?
  3. 7.62 Self Loading Rifle basic data-III?
  4. अच्छे राइफल फायर कैसे बने ? 
  5. फायरिंग के दौरान फायरर द्वारा की जानेवाली कुछ गलतिया ? 
  6. 7. 62 mm राइफल में पड़ने वाले रोके कौन कौन से है ?
  7. 7.62mm LMG के बारे में कुछ जानकारिय
  8. 7.62mm ki chal. एस एल आर कैसे काम करता हा(एसएलआर की चाल). 
  9. Basic data of 5.56mm INSAS and It characteristics.
  10. 5.56mm INSAS ki chal in hindi , 5.56mm INSAS की चाल हिंदी में.

समन और वारंट में अंतर

पिछले पोस्ट में हमने पुलिस यूनिफार्म पहनने के  बारे में जानकारी प्राप्त की इस पोस्ट में हम समन और वारंट में क्या अंतर (Summon aur warrant me antar) जानेगे !


समन और वारंट जो की कोर्ट द्वारा जरी किये गए है उन्हें तमिल करना पुलिस का एक अहम कार्य है और यह कार्य ज्यादातर समय पुलिस का आरक्षक , मुख्य आरक्ष  या कोई और पुलिस अधिकारी के द्वारा किया जाता है ! इस लिए यह सिपाही के बेसिक ट्रेनिं में ही सिखलाई दी जाती है की समन या वारंट को तमिल कैसे किया जाता  जाता है!


इस पोस्ट में हम जानेगे की समन और वारंट में क्या अंतर होता है !बेसिक ट्रेनिंग के दौरान होने वाले परीक्षा में ही इसके ऊपर एक दो सवाल पूछे जाते है ! इस लिए हर पुलिस अधिकारी  को यह मालूम होना चाहिए की समन या वारंट में क्या फर्क है और इसे कैसे तमिल किया जाता है !

इस पोस्ट में हम केवल समन और वारंट के अंतर के बारे में जानेगे !


समन  और वारंट में निम्न अंतर है(Summon aur warrant me antar) :
  •  न्यायालय द्वारा जरी किया गया प्रत्येक समन की दो प्रतियो में जारी होता है जबकि  न्यायालय द्वारा जारी किया गया प्रत्येक वारंट की एक  प्रति में ही जरी होती है !
  • समन  का प्रारूप दंड प्रक्रिया संहिता के धरा 61 में दिया गया है जबकि वारंट का प्रारूप दंड प्रक्रिया संहिता के धरा 70 दिया गया है !
  • समन  पर न्यायाधिष के अलावा उच्च न्यायालय के आदेश से एनी अधिकारी भी हस्ताक्षर कर सकता है !जबकि वारंट पर केवल जारी करनेवाले न्यायालय के पीठासीन आधिकारी का ही हस्ताक्षर  होता है !
  • समन  का तामिल किसी भी पुलिस अधिकारी या राज्य सर्कार के आदेश पर एनी लोक सेवक द्वारा भी की जा सकती है  जबकि प्राय वारंट की तामिल किसी पुलिस अधिकारी द्वारा की जाती है लेकिन विशेष परिस्थिति में  न्यालय किसी एनी व्यक्ति को भी तामिल करने का आदेश दे सकता है !
  • समन का तामिल केवल एक व्यक्ति के द्वारा की जाती है जबकि वारंट की तामिल एक या एक से ज्यादा व्यक्तियो द्वारा एक साथ की जा सकती है !
  • समन में जमानत या गिरफ्तारी का कोई प्रश्न नहीं उठता है जबकि वारंट जमानतीय या अजमानतीय होती है जिसका तमिल गिरफ्तारी के साथ होता है !
  • समन एक बुलावा  पत्र है जिसमें न्यायलय किसी व्यक्ति को किसी निश्चित समय, स्थान और तारीख पर हाजिर होने का बोल सकता है 
  • समन का तामिल समन की एक प्रति एनी व्यक्ति को देकर या घर पे चिपकाकर भी की जा सकती है जबकि वारंट की तमिल एक मात्र और एक मात्र केवल उस व्यक्ति की गिरफ्तारी करना ही है !
  • समन एक निर्धारित अवधि के पश्चात् अपने आप रद्द हो जाता है जबकि वारंट तभी रद्द हो सकता है जब या तो जरी करने वाले न्यायलय द्वारा रद्द कर दिया जाये या उसकी जब तक तामिल न कर दी जाय  !
ऊपर जो समन और वारंट के अंतर बताये गए यह केवल सिपाही के बेसिक ट्रेनिंग के दौरान बताने के लिए  है !


इस के साथ ही समन और वारंट से सम्बंधित पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! अगर ब्लॉग या पोस्ट से सम्बंधित कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब या फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे !
इन्हें भी  पढ़े :

  1. पुलिस ड्यूटी
  2. फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट में होनेवाली कुछ कॉमन गलतिया
  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
  4. क्राइम सीन पे सबसे पहले करनेवाले काम एक पुलिस ऑफिसर के द्वारा
  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

Thursday, March 29, 2018

CI ऑपरेशन के दौरान की पेट्रोलिंग करते समय ध्यान में रखनेवाली कुछ मुख्य बाते

पिछले पोस्ट में हमने CI पेट्रोलिंग कितने प्रकार के होते है उसके  के बारे में जानकारी प्राप्त की ! इस पोस्ट में हम जानेगे की  असरदार काउंटर इन्सेर्जेंसी पेट्रोलिंग के लिए कुछ ध्यान में रखनेवाली मुख्य बातें क्या है( Asrdar CI Patrolling ke bate) !


जैसे कहा जाता है की " गस्ती पार्टी कितनी भी सिखलाई क्यों न पाई हो एक न एक दिन उसे सरप्राइज होना पड़ता है "! इस लिए पेट्रोलिंग पार्टी में ऐसे जवानों को भेजते है जो अपने काम में माहिर हो और फिजिकली पूरी तरह से फिट हो की अगर सरप्राइज हो भी गए तो भी वह दुश्मन  को अपने एक्शन से मार गिराए !

जरुर पढ़े :फायर कण्ट्रोल आर्डर और फायर डिसिप्लिन के मुख्या बाते क्या है ?
कन्वेंशनल ऑपरेशन में पेट्रोलिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से खबरे हासिल करने तथा दुश्मन को अपनी खबर हासिल करने से रोकने के लिए किया जाता है जबकि एंटी इंसरजेंसी ऑपरेशन में पेट्रोलिंग आतंकवाद को रोकने का एक मुख्य तरीका है !


इस पोस्ट को अच्छी तरह से समझने के लिए हमने इसे निम्न भागो में बाँट दिया है :
CI Patrolling
CI Patrolling
1. CI पेट्रोलिंग की नफरी कितनी होनी चाहिए (CI Patrolling ke Nafari kitni honi chahie)!

2. असरदार CI पेट्रोलिंग के कुछ बाते (Asrdar CI Patrolling ke bate)


1. CI पेट्रोलिंग की नफरी कितनी होनी चाहिए (CI Patrolling ke Nafari kitni honi chahie)!:पट्रोल की नफरी उसके टास्क, तय की जानेवाली दुरी, इलाके की भौगोलिक बनावट तथा उस इलाके में आतंकवादियो के काम करने के तरीके पर निर्भर करती है !

अगर पट्रोल ज्यादा बड़ी भी ठीक नहीं होती है क्यों की उसका टारगेट बहुत  बड़ा बनता है और उसका मूवमेंट दूर से ही नजर आ जाता है !और यह जरुरी नहीं की बड़ा पट्रोल जमीन को वैसे हो डोमिनेंट करे जैसे की एक छोटी पट्रोल करती है !


इसलिए अगर कोई विशेष टास्क को अचीव ना करना होतो छोटी पट्रोल जिसकी  नफरी एक सेक्शन की हो उसी को भेजना चाहिए !अगर कोई इंटेलिजेंस मिला हो तब एक सेक्शन से बड़ा पट्रोल पार्टी भेजे नहीं तो कमांड और कण्ट्रोल तथा एरिया डोमिनेंट के हिसाब से एक सेक्शन की पट्रोल कभी कारगर तरीके से कम करती है !


2. असरदार CI पेट्रोलिंग के कुछ बाते (Asrdar CI Patrolling ke bate):CI ऑपरेशन की पट्रोल को असरदार बनाने के लिए तथा पेट्रोलिंग से अच्छे परिणाम हासिल करने के लिए कुछ मुख्य बाते है जैसे :
  • पेट्रोलिंग के आने और जाने के रास्ते  अलग अलग होने चाहिए !
  • पेट्रोलिंग में सभी हरकते टैक्टिकली की जाये और स्काउट हमेशा आगे रहे !
  • हरकत के दौरान रस्ते में आने  वाले सभी साक़िया  जगह की तलाशी की जाय !जैसे  पुल, रोड ट्रैक जंक्शन , रेल क्रासिंग ,बस स्टेशन यदि !
  • असमय गाडियो के मूवमेंट को शकिये निगाह से देखा जाय 
  • क्रॉस कंट्री रास्तो का ही इस्तिमाल किया जाय और पैर सूखे रखने  की आदत से परहेज किया जाय 
  • रात के समय चांस एनकाउंटर होने पे ज्यादा से ज्यादा आटोमेटिक वेपन का इस्तेमाल किया जाय !
  • पेट्रोलिंग में जाने से पहले पट्रोल कमांडर द्वारा पट्रोल की तयारी को चेक किया जाय !
  • यह पट्रोल के सभी नफरी को जान लेना चाहिए की पट्रोल की छोटी सी भिलाप्र्वाही के कारन आतंकवादी पट्रोल को भरी नुकशान पंहुचा सकते है !
  • हरकत के दौरान खेती तथा फसलो को नुकशान से बचाए !
  • पट्रोल को हमेशा अलग अलग समय पे निकलना चाहिए!
  • खासी या दमा से ग्रसित जवान को पट्रोल की पार्टी नहीं  बनना चाहिए !
  • पट्रोल के स्काउट एक अच्छा  ऑब्जरबर के साथ साथ अच्छा सूटर भी हो !
आतंकवाद  इलाके में पट्रोल सुरक्षा बालो का मुख्य ऑपरेशन है इसी के द्वारा सुरक्षा बल अतंकवादियो को फ्री मूवमेंट करने में बाधक बन उन्हें उनके उद्देश्यों के पूर्ति करने से रोकता है ! इसलिए एक पट्रोल क आतंकवादियो के अम्बुश करने में अभ्यस्त होनी चाहिए !


इस तरह से CI ऑपरेशन के एरिया में असर डर पेट्रोलिंग के मुख्य बातो से सम्बंधित पोस्ट यहाँ समाप्त हुई !उम्मीद है की पोस्ट आपको पसंद आएगा ! अगर कोई  या ब्लॉग के बारेमे हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे ! और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक शेयर तहत लिखे करके हमलोगों को प्रोतसाहित करे और अच्छा करने के लिए 
इन्हें भी पढ़े :
  1.  सेक्शन बैटल ड्रिल और उसे सफल बनाने वाली बातें
  2. 4 बाते शत्रु के कारगर फायर के अंदर आने पे करनी चाहिए
  3. 3 तरीके दुश्मन के फायर पोजीशन को पता लगने के
  4. सेक्शन फार्मेशन और सेक्शन फार्मेशन का बनावट
  5. आतंक प्रभावित इलाके में सिक्यूरिटी पोस्ट लगान
  6. रात के संतरी तथा स्काउट की ड्यूटी क्या होता है
  7. फील्ड फोर्टीफीकेसन में इस्तेमाल होने वाले फौजी टेकटिकल शब्दों का क्या मतलब
  8. फौजी टैक्टिकल शब्द जैसे फर्स्ट लाइट फ्लैंक गार्ड यदि क मतलब
  9. अम्बुश की जुबानी हुक्म क्या होता है और इसमें सामिल होने वाले मुख्य बाते
  10. रोड ओपनिंग पार्टी/पट्रोल और उसके महत्व के बारे

Tuesday, March 27, 2018

CI पेट्रोलिंग के प्रकार और CI पेट्रोलिंग के लिए जरुरी बाते

पिछले पोस्ट में हमने काउंटर इन्सेर्जेंसी पेट्रोलिंग और कन्वेंशनल पेट्रोलिंग के अंतर के बारे में जानकारी प्राप्त की ! इस पोस्ट में हम जानेगे की काउंटर इन्सेर्जेंसी पेट्रोलिंग कितने प्रकार के होता है और काउंटर इन्सेर्जेंसी में सफल पेट्रोलिंग के लिए जरुरी बाते क्या है(CI Patrolling ke type aur CI Patrolling ke bate) !


जैसे कहा जाता है की " गस्ती पार्टी कितनी भी सिखलाई क्यों न पाई हो एक न एक दिन उसे सरप्राइज होना पड़ता है "! इस लिए पेट्रोलिंग पार्टी में ऐसे जवानों को भेजते है जो अपने काम में माहिर हो और फिजिकली पूरी तरह से फिट हो की अगर सरप्राइज हो भी गए तो भी वह दुश्मन  को अपने एक्शन से मार गिराए !

जरुर पढ़े :फायर कण्ट्रोल आर्डर और फायर डिसिप्लिन क्या है ?

कन्वेंशनल ऑपरेशन में पेट्रोलिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से खबरे हासिल करने तथा दुश्मन को अपनी खबर हासिल करने से रोकने के लिए किया जाता है जबकि एंटी इंसरजेंसी ऑपरेशन में पेट्रोलिंग आतंकवाद को रोकने का एक मुख्य तरीका है !

इस पोस्ट को अच्छी तरह से समझने के लिए हमने इसे निम्न भागो में बाँट दिया है :
Patrolling in CI Ops
Patrolling in CI Ops
1. CI पेट्रोलिंग कितने प्रकार के होते है ?(CI Patrolling kitne prakar ke hote hai)!

2.CI पेट्रोलिंग को कामयाब बाने वाली बाते  (CI Patrolling ke kamyab bananewali bate)!

जरुर पढ़े :अम्बुश का परिभाषा और अम्बुश की पार्टिया

1. CI पेट्रोलिंग कितने प्रकार के होते है ?(CI Patrolling kitne prakar ke hote hai)!जैसे की हम जानते है की कन्वेंशनल पेट्रोलिंग दो प्रकार की होती है जैसे  की रेक्की पट्रोल और प्रोटेक्टिव पट्रोल उसी प्रकार से काउंटर इन्सेर्जेंसी की पट्रोल के तीन निम्न प्रकार होते है !
  • फूट पट्रोल 
  • मोबाइल पट्रोल 
  • एयर पट्रोल 

2.CI पेट्रोलिंग को कामयाब बाने वाली बाते  (CI Patrolling ke kamyab bananewali bate)!CI ऑपरेशन के पेट्रोलिंग के लिए निम्न बाते अति महत्वपूर्ण मानी जाती है और बहुत ही अहम रोल प्ले करती है CI पेट्रोलिंग को कामयाब बनाने में :
  • उच्चे दर्जे के जूनियर लीडरशिप 
  • जवानों का फिजिकल फिटनेस 
  • जमीन एवं निवासिओ के बारे में पूर्ण जानकारी 
  • लोकल जनता के साथ अच्छा एवं सद्भावपूर्ण व्यवहार 
  • ट्रूप्स की विस्तृत ब्रीफिंग 
  • सबी ट्रूप्स को पट्रोल के टास्क एवं तरीके के बारे में जानकारी होनी चाहिए !
  • पट्रोल निकलने से पहले किसी शक या सुभा के बारे में क्रोस्स्चेक कर ऐना चाहिए 
  • दिन और रत के समय क्रॉस कंट्री हरकत की काबिलियत होनी चाहिए !
  • उच्छे दर्जे की तेज और स्टिक शूटिंग की काबिलियत सभी जवानोमे होनी चाहिए !
  • अच्छा रेडियो मिलाप 
  • साधार एवं कुशल बंदोबस्त कार्वाही 
  • उच्चे दार्जे का मनोबल एवं स्तिथि क बारे में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए !
  • किसी भ परिस्थिति से निपटने की क्षमता होनी चाहिए !
ये कुछ बाते है जिसका अगर ख्याल रखा गया तो CI ऑपरेशन के दौरान की पेट्रोलिंग काफी कामयाब रहेगी !
जरुर पढ़े :कामौफ्लाज और कांसिल्मेंट के ऊपर एक संक्षिप्त जानकारी
इस प्रकार से यहाँ  CI ऑपरेशन के पेट्रोलिंग के प्रकार और उसे कामयाब बनाने वाली बातो से सम्बंधित पोस्ट समाप्त हुई !उम्मीद है की पोस्ट आपको पसंद आएगा ! अगर कोई  या ब्लॉग के बारेमे हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे ! और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक शेयर तहत लिखे करके हमलोगों को प्रोतसाहित करे और अच्छा करने के लिए 
इन्हें भी पढ़े :


  1. सेक्शन बैटल ड्रिल और उसे सफल बनाने वाली बातें
  2. 4 बाते शत्रु के कारगर फायर के अंदर आने पे करनी चाहिए
  3. 3 तरीके दुश्मन के फायर पोजीशन को पता लगने के
  4. सेक्शन फार्मेशन और सेक्शन फार्मेशन का बनावट
  5. आतंक प्रभावित इलाके में सिक्यूरिटी पोस्ट लगान
  6. रात के संतरी तथा स्काउट की ड्यूटी क्या होता है
  7. फील्ड फोर्टीफीकेसन में इस्तेमाल होने वाले फौजी टेकटिकल शब्दों का क्या मतलब
  8. फौजी टैक्टिकल शब्द जैसे फर्स्ट लाइट फ्लैंक गार्ड यदि क मतलब
  9. अम्बुश की जुबानी हुक्म क्या होता है और इसमें सामिल होने वाले मुख्य बाते
  10. रोड ओपनिंग पार्टी/पट्रोल और उसके महत्व के बारे

काउंटर इन्सेर्जेंसी पेट्रोलिंग और कन्वेंशनल पेट्रोलिंग में अंतर

पिछले पोस्ट में हमने आसानी से जमीनी निशान देने के तरीका के बारे में जानकारी प्राप्त की थिस अब इस पोस्ट में हम काउंटर इनसरजेंसी पेट्रोलिंग और कन्वेंशनल पेट्रोलिंग के अंतर (conter insurgency patrolling aur conventional patrolling me antar) के बारे में जानेगे !


जैसे कहा जाता है की " गस्ती पार्टी कितनी भी सिखलाई क्यों न पाई हो एक न एक दिन उसे सरप्राइज होना पड़ता है "! इस लिए पेट्रोलिंग पार्टी में ऐसे जवानों को भेजते है जो अपने काम में माहिर हो और फिजिकली पूरी तरह से फिट हो की अगर सरप्राइज हो भी गए तो भी वह दुश्मन  को अपने एक्शन से मार गिराए !
जरुर पढ़े :सेक्शन फार्मेशन एंड प्लाटून फार्मेशन के फायदे और नुकशान


कन्वेंशनल ऑपरेशन में पेट्रोलिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से खबरे हासिल करने तथा दुश्मन को अपनी खबर साहिल करने से रोकने के लिए किया जाता है जबकि एंटी इंसरजेंसी ऑपरेशन में पेट्रोलिंग आतंकवाद को रोकने का एक मुख्य तरीका है !

इस पोस्ट को अच्छी तरह से समझने के लिए हमने इसे निम्न भागो में बाँट दिया है :
पेट्रोलिंग
1.इन्सेर्जेंसी एरिया में पेट्रोलिंग क्यों की जाती है ? (Insurgency Area me patrolling kyo ki jati hai)

2. काउंटर इन्सेर्जेंसी पेट्रोलिंग और कन्वेंशनल  में क्या अंतर है ?(Counter Insurgency patrolling aur conventional patrolling me antar)

जरुर पढ़े :कामौफ्लाज और कांसिल्मेंट के ऊपर एक संक्षिप्त जानकारी


1.इन्सेर्जेंसी एरिया में पेट्रोलिंग क्यों की जाती है ? (Insurgency Area me patrolling kyo ki jati hai):इन्सेर्जेंसी ऑपरेशन के दौरान पेट्रोलिंग इस लिए की जाती है ताकि :
  • अपने एरिया को डोमिनेट करने के लिए 
  • आतंकवादियो को पकड़ने तथा अतंकवादियो को मरने के लिए 
  • जनता के डील में सुरक्षा का भावना पैदा करने के लिए !
  • पट्रोल को ROP, VA/VP की सुरक्षा करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है !

जरुर पढ़े :पेट्रोलिंग के परिभाषा और पेट्रोलिंग के प्रकार
  • बड़े जिम्मेवारी के इलाके में डोमिनेट करके रखने के लिए !
  • मुश्किल जमीनी हालात और खराब मौसम में आतंकवादियो के खबरे हासिल करने तथा उन्हें ढूढने के लिए !
  • गहन पेट्रोलिंग कर के अतंकवादियो से सामान होने की बहुत ज्यदा सम्भावनाये होती है जो की एक एंटी इन्सेर्जेसी  ऑपरेशन के सफलता के लिए काफी जरुरी होता है !
  • ज्यादा पेट्रोलिंग करने से आतंकवादियो को अपना मूवमेंट करने में दिकत होती है और ओ अपना उद्देश्य  हासिल नहीं कर पाते  है !

जरुर पढ़े :पेट्रोलिंग पार्टी को ब्रीफिंग देने का तरीका ?


कंटर इन्सेर्जेंसी ऑपरेशन को सफलता में पेट्रोलिंग एक बहुत ही अहम् किरदार प्ले करता है !
2. काउंटर इन्सेर्जेंसी पेट्रोलिंग और कन्वेंशनल  में क्या अंतर है ?(Counter Insurgency patrolling aur conventional patrolling me antar):इन दोनों पेट्रोलिंग के उद्देश्य और कार्य में बहुत ही अंतर है क्यों की ये दोनों पेट्रोलिंग दो बहुत ही अलग माहौल में ऑपरेट करते है !कुछ मुख्य अंतर निम्न है :
  • CI पेट्रोलिंग आतंकवादियो को पकड़ने या मरने के लिए और एरिया को डोमिनेट करने के लिए किया जाता है जबकि कन्वेंशनल पेट्रोलिंग दुश्मन की खबरे हासिल करना तथा उष्मन को अपनी खबर  हासिल करने से रोकने के लिए किया जाता है !
  • CI पेट्रोलिंग अपने इलाके में की जाती है जैसे आतंकवाद ग्रस्त गाँव और शहर जबकि कन्वेंशनल पेट्रोलिंग ज्यादातर नो मैनलैंड (No Man Land) में की जाती है !

जरुर पढ़े :अम्बुश का परिभाषा और अम्बुश की पार्टिया
  • CI पेट्रोलिंग में डीफेनडेड  लोकेलिटी(Defended Locality) या  डीफेनडेड एरिया(Defended Area) नहीं होता है जबकि कन्वेंशनल पेट्रोलिंग में यह दोनों होता  है !
  • CI पेट्रोलिंग में माइन फील्ड का खतरा बहुत कम होता है जबकि कन्वेंशनल पेट्रोलिंग में माइन फील्ड का बहुत ही खतरा रहता है !
  • आतंकवादियो के पास ज्यादातर घातक हथियार नहीं होते है इसलिए CI पेट्रोलिंग में घातक हथियारों का खतरा उतना नहीं रहता है जबकि कन्वेंशनल पेट्रोलिंग के दौरान  हर तरह के घातक हथियार होता है !
  • CI पेट्रोलिंग तीन प्रकार की होती है जबकि कन्वेंशनल पेट्रोलिंग दो प्रकार  की होती है !
  • CI पेट्रोलिंग के लिए नो मैन लैंड या कोई मार्क की हुई सीमा नहीं होती है जबकि कन्वेंशनल पेट्रोलिंग में नो मैन लैंड और मार्क की हुई सीमा होती है !

जरुर पढ़े :फायर कण्ट्रोल आर्डर और फायर डिसिप्लिन क्या है ?


इस प्रकार से काउंटर इसेर्जेंसी पेट्रोलिंग तथा कन्वेंशनल पेट्रोलिंग के अंतर से सम्बंधित पोस्ट समाप्त हुई !उम्मीद है की पोस्ट आपको पसंद आएगा ! अगर कोई  या ब्लॉग के बारेमे हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे ! और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक शेयर तहत लिखे करके हमलोगों को प्रोतसाहित करे और अच्छा करने के लिए 

इन्हें भी पढ़े :

  1. सेक्शन बैटल ड्रिल और उसे सफल बनाने वाली बातें
  2. 4 बाते शत्रु के कारगर फायर के अंदर आने पे करनी चाहिए
  3. 3 तरीके दुश्मन के फायर पोजीशन को पता लगने के
  4. सेक्शन फार्मेशन और सेक्शन फार्मेशन का बनावट
  5. आतंक प्रभावित इलाके में सिक्यूरिटी पोस्ट लगान
  6. रात के संतरी तथा स्काउट की ड्यूटी क्या होता है
  7. फील्ड फोर्टीफीकेसन में इस्तेमाल होने वाले फौजी टेकटिकल शब्दों का क्या मतलब
  8. फौजी टैक्टिकल शब्द जैसे फर्स्ट लाइट फ्लैंक गार्ड यदि क मतलब
  9. अम्बुश की जुबानी हुक्म क्या होता है और इसमें सामिल होने वाले मुख्य बाते
  10. रोड ओपनिंग पार्टी/पट्रोल और उसके महत्व के बारे

Sunday, March 18, 2018

पुलिस यूनिफार्म पहनते समय ध्यान में रखने वाली बाते

पिछले पोस्ट में हमने पुलिस की छवि और पुलिस ड्यूटी के बारे में जानकारी प्राप्त  की इस पोस्ट में हम पुलिस ड्रेस के पहने और ड्रेस पहनते समय ध्यान में रखने वाली बाते(Dress pahnna aur turn out ke lie dhyan me rakhnewali bate ) !


ड्रेस पहनने और ड्रेस पहनते समय ध्यान में रखने वाली बाते इस विषय के बारे में जानकारी आम तौर पर पुलिस ट्रेनिंग के दौरान दिया जाता है जिसमे  पुलिस फाॅर्स  को नये ज्वाइन करने वाले जवानों को यूनिफार्म पहनने के बारे में शिक्षा दी जाती है ! वह भी कोई एक पीरियड ही होता है लेकिन उसको ड्रिल के दौरान बड़ी सख्ती के साथ आमल में लाया जाता है !


मै इस पोस्ट में उसी अपनी पुराणी सिखलाई की बाते को एक लिखित रूप देने का कोशिश करूँगा की यूनिफार्म पहनते समय किन मुख्य बातो को ध्यान में रखा जाय !


जरुर पढ़े :V.I.P. सिक्यूरिटी बंदोबस्त ड्यूटी में पुलिस की भूमिका 

इस पोस्ट को अच्छी तरह से समझने के लिए हमने निम्न भागो में बाँट दिया है :
1. सर का पहनावा (Head Gear pahnne ki janakari)
2.शर्ट पहन ने का तरीका  (Shirt pahnne ki janakari)
3. बेल्ट पहनने का तरीका (Belt Pahnte samay dhyan me rakhne wali bate)
4. नेकर और फुल पेंट पहने के समय ध्यान में रखने वाली बाते (Full pent pahnte samay dhyan me rakhne wali bate)
5. बूट या जूता पहनने का तरीका (Boot/Shoes pahnte samay dhyan me rakhne wali bate
6. एंकलेट पहनने का तरीका(Ancklet pahnne ka tarika) :


1. सर का पहनावा (Head Gear pahnne ki janakari): सर के ऊपर टोपी , कैप, या पगड़ी पहनते समय निम्न बातो को ध्यान में रखना चाहिए ! यह पूरी लिस्ट नहीं है लेकिंन  इन बातो को ध्यान में रखे उच्च अधिकारिओ या उस्तादों के द्वारा टूकाइ नहीं होगी और आपका टर्न आउट उचित तरह का होगा !
(a) सामने ने से देखने वाली बाते 
  • का टोपी आप पहन रहे है व साफ सुथरी और तेल मुक्त है !
  • क्या हेड गियर ठीक रखा हुवा है अथवा ओ बे तरतीब आगे पीछे या साइड में झुका हुवा तो नहीं है !
(a) पीछे से से देखने वाली बाते 
  • .क्या हेड गियर पीछे से साफ सुथरा है
  • .क्या बाल  कटे है. यदि सक है तो जवान की टोपी उतरने को कहा जय ताकि यह देखा जा सके की सर का बल ठीक से कटा हुवा है.
  • .चेहरा और गर्दन साफ सुथरी और हजामत /शेव बनी हवी.
  • .हाथ के नाख़ून कटे हुवे और हाथ में तमाकू या पण की दाग नहीं होनी चाहिए.
  •   मुह में गुटका , पान या कोई और पदार्थ तो  नहीं रखा है !.

2.शर्ट पहने का पहनावा (Shirt pahnne ki janakari): शर्ट पहनते हुए निम्न बातो को ख्याल रखना चाहिए !यह पूरी लिस्ट नहीं है लेकिंन  इन बातो को ध्यान में रखे उच्च अधिकारिओ या उस्तादों के द्वारा टूकाइ नहीं होगी और आपका टर्न आउट उचित तरह का होगा !

(a)आगे से देखने वाली बाते :
  • कमीज ठीक से आयरन की हुई और ठीक से पहनी हुई होनी चाहिए !
  • .अच्छी तरह से कलफ लगी हवी हो आस्तीन ठीक तरह मुड़ी हवी हो यदि लम्बी बाजु की हो तो.
  • .बटन ठीक से टेक हुवे हो.
  • .रैंक के बैज साफ और दुरुस्त से सिला हुवा होना चाहिए.
  • .सिलाई के धागे दिखाई नहीं देना चाहिए.
  • .यदि टुनिक पहनी जाय  तो यह देख लेना चाहिए की कमीज का कलर और टाई साफ और दुरुस्त हो.
  • .यह भी देख लेन चाहिए की बटन साफ और ठीक तरह से लगे है.
(b) पीछे से
  • क्या कॉलर साफ है.
  • .क्या कमीज पीछे से खिची हुयी है और ठीक से तंगी हवी है.

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3. बेल्ट पहनने का तरीका (Belt Pahnte samay dhyan me rakhne wali bate):बेल्ट पहनते हुए निम्न बातो को ख्याल रखना चाहिए !यह पूरी लिस्ट नहीं है लेकिंन  इन बातो को ध्यान में रखे उच्च अधिकारिओ या उस्तादों के द्वारा टूकाइ नहीं होगी और आपका टर्न आउट उचित तरह का होगा !

  • .इसे इतना टाइट फिट होना चाहिए की परेड के बिच संगीन का वजन इसे एक तरफ निचे न खीच सके.
  • .बकल बीचो बिच सामने की ओर कपड़ो के बटन की लाइन में होनी चाहिए. 
  • यदि वेब बेल्ट तो पीतल का हुक बकसुल से एक इंच की दुरी पे हीनी चाहिए.
  • .बेल्ट में पीतल का जो हिंसा हो ओ अच्छी तरह से पौलिस किया हुवा होना चाहिए.
  • .वेबिग और स्ट्रेप टाइट बंधे हो.
  • .बकसुल अगर पीतल के हो तो पोलिस किया हुवा हो चाहिए.
  • .यदि टुनिक पर क्रॉस बेल्ट पहनी जाय  तो यह देख लेना चाहिए की यह कालर के सिरे से पहले दो बटन के बिच क्रॉस बेल्ट क्रॉस  करती हो.
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4. नेकर और फुल पेंट पहने के समय ध्यान में रखने वाली बाते 
(Full pent pahnte samay dhyan me rakhne wali bate): निकर या फुल पेंट पहनते हुए निम्न बातो को ख्याल रखना चाहिए !यह पूरी लिस्ट नहीं है लेकिंन  इन बातो को ध्यान में रखे उच्च अधिकारिओ या उस्तादों के द्वारा टूकाइ नहीं होगी और आपका टर्न आउट उचित तरह का होगा !

  • यह देखना चाहिए की वह स्वकृत रंग के है.
  • यह देखना चाहिए की वह ड्रेस  के नियमानुसार  बने है!
  • और ठीक तरह  आयरन किये हुवे हो.
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5. बूट या जूता पहनने का तरीका (Boot/Shoes pahnte samay dhyan me rakhne wali bate )बूट या जूता पहनते हुए निम्न बातो को ख्याल रखना चाहिए !यह पूरी लिस्ट नहीं है लेकिंन  इन बातो को ध्यान में रखे उच्च अधिकारिओ या उस्तादों के द्वारा टूकाइ नहीं होगी और आपका टर्न आउट उचित तरह का होगा !

  • .सही पैटर्न का हो 
  • पोलिस किया हुवा होना चाहिए !
  • और सावधान हालत में पैर का कोण  ठीक होना चाहिए(६० डिग्री)
  • और अगर राइफल लिया हो तो राइफल का तो बूट की तो की लाइन में होना चाहिए.
  • .यह देखना चाहिए की एड़िया मिली हवी हो और सीध में हो.

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6. एंकलेट पहनने का तरीका(Ancklet pahnne ka tarika) :
  • यह इतने बड़े माप के होने चाहिए की सिकुडन न पड़े
  • अन्क्लेट का मुह खुला हुवा नहीं होना चाहिए 
  • अन्क्लेट बहार को उठा हुवा नहो होना चाहिए 
  • अन्क्लेट टाइट फिट होने चाहिए की सीधे रहे और टखने पर घूम न जाये

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इस प्रकार से पुलिस यूनिफार्म पहनते समय कुछ बेसिक बातो को ध्यान में रखने से सम्बंधित पोस्ट समाप्त हुई !उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! अगर ब्लॉग या पोस्ट से सम्बंधित कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब या फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे !
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  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
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