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25 October 2020

पुलिस को शिकायतकर्ता के साथ कैसे व्यवहार करना चाहिए !

पुलिस  के लिए शिकायत करता या फरियादी एक महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है !शिकायतकर्ता के कई रूप हो सकते है जैसे :- स्त्री , पुरुष, बच्चा , स्वय अपराधी , , साधारणएवं प्रभावशाली व्यक्ति आदि ! जैसे की हमने अपने पिछले पोस्ट में एक बीट कांस्टेबल की ड्यूटी के बारे में जानकारी प्राप्त की थी उसी प्रकार से इस पोस्ट में हम जानेगे की एक  कांस्टेबल को एक कम्प्लेनेंट(Police  Constable  and  complainant ) या शिकायतकर्ता के साथ कैसे व्यवहार करना चाहिए ! 

इसे  भी  पढ़े :जनसम्पर्क अधिकारी की ड्यूटी करते समय एक सिपाही को ध्यान में रखने वाली बाते

शिकायतकर्ता या फरियदि द्वारा की गई शिकायत पर पुलिस मुकदमा दर्ज करती है ! प्रभावशाली व्यक्ति  शिकायत पर पुलिस जल्दी अनुशंधान (Investigation ) प्रारंभ कर देती है जबकि साधारण व्यक्तियों की शिकायत पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता है ! उसे डरा  धमकाकर वापस भेज देती है ! कई बार तो अत्यधिक रूप से डरा दिया जाता है जिससे वह ठाणे में आने से डरता है!  

पुलिस प्राय:  अपराधों करके उनको छिपाने की कोशिश करती !शिकायतकर्ता की बात सुनने के समय उससे एवं अपराधी से रिश्वत भी स्वीकार की जाती है ! उसका आर्थिक शोषण भी किया जाता है !  ऐसे कारन है जो पुलिस एवं जनता के आपसी सम्बन्धो में रुकावट डालते है ! क्योकि वह पहले ही आर्थिक या शारीरिक रूप से पीड़ित है ! 

पुलिस अधिकारिओ को चाहिए की वह अपनी छवि सुधरने के लिए शिकायतकर्ता के साथ अच्छे सम्बन्ध स्थापित करने से पूर्व उसके साथ अच्छा व्यवहार करे !

इसे  भी  पढ़े :पुलिस को दुश्चरित्र व्यक्तिओ के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए

ऐसे तो  कैसे व्यवहार किया जय ये तो क्राइम और परिस्थिति के ऊपर निर्भर करता है फिर भी कुछ निम्न लिखित बातो को जो की पूर्ण लिस्ट नहीं है फिरभी पुलिस के छवि  सुधरने तथा शिकायतकर्ता के मन के एक आस जगायेगी।  पुलिस को शिकायतकर्ता के साथ निम्न व्यवहार  करना चाहिए :

पुलिस शिकायतकर्ता 

  • पुलिस थाने आने वाले हर फरियादी को उचित सम्मान देना चाहिए !
  • ऐसे व्यक्तिओ के साथ  अच्छा व्यवहार करे ताकि उनके मन में पुलिस के प्रति विश्वास पैदा हो सके !
  • ऐसे व्यक्ति स्वयं दुर्घटना से परेशां होते है, अतः उन्हें सान्तवना देनी चाहिए और उसे पिने के लिए पानी देनी चाहिए ताकि  आपको सयत महसूस करे !
  • जिस प्रकार का अपराध हो उसी प्रकार का अन्वेषण कार्य प्रारम्भ करना चाहिए ! यदि असज्ञेय मामला हो तो उसके सम्बन्ध में रिपोर्ट लिखकर उसको विनम्रता एवं प्यार से समझा  देना चाहिए !
  • उसकी शिकायत ध्यानपूर्वक सुननी चाहिए ताकि वह पुलिस को अपना सहायक समझे !
  • ऐसे व्यक्तियों से सहानुभूति से  चाहिए ताकि उनमे यह भावना पैदा की जा सके की उनकी शिकायत पर उचित कारवाही की जाएगी साथ ही कारवाही करनी चाहिए !
  • शिकायत के लिए आने वाले व्यक्तियों के साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए ! उन्हें बुरा बात नहीं बोलना चाहिए, बल्कि घटना स्थल पर पहुंच कर अनुसन्धान शुरू करना चाहिए !
  • इस व्यक्तियों को जहातक हो सके पूरी सहायता करनी चाहिए! पुलिस के व्यवहार में मधुरता, शिष्टता और सहनशीलता होनी चाहिए !
  • भेदभाव का ध्यान किये बिना सभी सामान्य नागरिको के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए ! सभी के साथ प्रत्यक्ष एवं अच्छा व्यवहार करना चाहिए !
  • ऐसे व्यक्ति के साथ भूलकर भी मारपीट नहीं करनी चाहिए क्योकि यह गैरकानूनी है !इससे आपके विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही की जा सकती है !
  • यदि कोई व्यक्ति झूठी शिकायत लेके आता है तो उसकी जाँच करने के बाद क़ानूनी कारवाही करे झठी शिकायत के आधार पर किसी को तंग नहीं करनी चाहिए !
  • किसी  रिश्वत न ले ! क्योकि ऐसा करने से  छवि धूमिल होने से बच सकती है ! अतः एक शिकायतकर्ता , फरियादी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए !
अतः शिकायतकर्ता, फरियादी एक महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है ! अपराधो की रोकथाम में भी यह काफी सहायता !  इसीलिए उसके साथ सद्व्यवहार करना चाहिए ! उसको न्याय दिलवाने का पूरा प्रयास करना चाहिए !

उम्मीद है की उपरोक्त बताये गए पॉइंट आपको ड्यूटी के दौरान कुछ उपयोगी साबित होंगे !!उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

इन्हें भी  पढ़े :
  1. पुलिस ड्यूटी
  2. फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट में होनेवाली कुछ कॉमन गलतिया
  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
  4. क्राइम सीन पे सबसे पहले करनेवाले काम एक पुलिस ऑफिसर के द्वारा
  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

22 October 2020

बिट कांस्टेबल को ड्यूटी के दौरान ध्यान रखने वाली बाते

पुलिस को अपने  कर्तव्यों का पालन पृथक पृथक परिस्थियों में करना  पड़ता है !एक परिस्थिति में कार्य करना सुखद एवं सुविधाजनक हो सकता है लेकिन प्रत्येक स्थिति में ऐसा संभव नहीं हो सकता है !पिछले पोस्ट में हमने एक पुलिस कांस्टेबल जनसम्पर्क अधिकारी का ड्यूटी कैसे करता है उसके उसके  बारे में जानकारी प्राप्त किये ! और अब इस पोस्ट में हम बीट  कांस्टेबल की ड्यूटी क्या होता है उसके बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे !

 बीट  ड्यूटी दौरान भी पुलिस कर्मियों को ऐसी ही दुबिधाजनक परिस्थियों का सामना करना पड़ सकता है !क्यों की बीट ड्यूटी के दौरान उसे विभिन्न प्रकार के व्यक्तिओ जैसे सभ्य,सुशिल , शिक्षित , अशिक्षित , आम नागरिको, बच्चे , बुड्ढे महिलाओ  अलावा बदमाशों ,दुश्चरित्र व्यक्तिओ , शरबीओ , नशेडिओ व   इसी प्रकार के आपराधिक कार्यो में  लिप्त व्यक्तिओ के बिच रहकर कार्य करना पड़ता है !

ऐसे व्यक्तिओ के संपर्क में  आने पर पुलिस कर्मियों का व्यवहार सौम्य , सभ्य एवं विनम्र रहे यह आवश्यक नहीं है ! अतः:व्यवहार में  विचलन आना स्वाभाविक ही है क्योकि मानवीय व्यवहार पल पल  परिस्थितियों के साथ परिवर्तित होता रहता है !फिर पुलिस कर्मी भी मनुष्य है जिसका व्यवहार परिवर्तित होना स्वाभाविक है !

बीट  कांस्टेबल की ड्यूटी के दौरान ध्यान में रखने वाले कुछ बाते : परिस्थितिया चाहे कैसे भी हो , पुलिस कर्मियों को  बीट ड्यूटी के दौरान संयम , धैर्य, निष्ठां, निष्पक्षता , सावधानी एवं सतर्कता के साथ कर्तव्य पालन  चाहिए तथा निम्नलिखित बातो का ध्यान रखना चाहिए :-

  • पुलिस कर्मियों को चाहिए की वे अपना कर्तव्य पालन अनुशासन रहकर करे  प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति व पद के अनुरूप उसका सम्मान करे !
  • पुलिस को   कर्तव्यपालन  दौरान सभी व्यक्तिओ साथ विनम्रतापूर्वक सदव्यवहार करना चाहिए!
  • बीट ड्यूटी के दौरान वृद्धो, महिलाओ, बच्चो  असहाय व्यक्तिओ की उचित सहायता करनी चहिए !
  • बदमाशों तथा अपराधी प्रविर्ती  अपराधी कार्य करने वाले के साथ सख्ती से पेश आना चाहिए लेकिन उनके मानवाधिकारों  रख कर कार्य करना चाहिए !
  • बीट अंदर कर्तव्य पालन करते समय गाली गलौज या असभ्य भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए इससे पुलिस की छवि धूमिल हो सकती है !
  • कर्तव्य को सर्वोपरि समझते हुए सभी पुलिस कर्मी को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए !
  • यातायात सुचरूप से चलने की उचित व्यवस्था करना चाहिए !
  • यदि कोई व्यक्ति शिकायत लेकर आता है तो उसकी शिकायत ध्यान से सुने अगर तुरंत समाधान की आवश्यकता हो तो चरण हस्तक्षेप करे अन्यथा निकटतम पुलिस चौकी या ठाणे जाने का सलाह दे!
  • अगर दुर्घटना के कारन किसी व्यक्ति को चोट लग जाये तो उसको तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध करने के लिए सहायता करे !
  • अधराधियो को गिरफ्तार करे ! दुश्चरित्र व्यक्तियों, बदमाशों पर निगरानी रखे व उनके पूर्ण जानकारी रखे !
 ये लिस्ट पूर्ण  है और भी बहुत से बाटे है जो एक बिट कांस्टेबल को ड्यूटी के दौरान  चाहिए  ! उम्मीद है की उपरोक्त बताये गए पॉइंट आपको ड्यूटी के दौरान कुछ उपयोगी साबित होंगे !!उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

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  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
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16 October 2020

जनसम्पर्क अधिकारी की ड्यूटी करते समय एक सिपाही को ध्यान में रखने वाली बाते

प्रायः यह कहा जाता है की पुलिस बिभाग में पुलिस कर्मचारीओ में सिपाही की भूमिका सबसे अधिक उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होती है ! यद्पि सभी नीतिया एवं कार्यक्रम उच्चकोटि के अधिकारिओ द्वारा बनाया जाता हैऔर लागु किया जाता है लेकिंग उन सभी कार्यक्रम और नीतिओ को जमीन पर एक सिपाही ही अमल में लाता है ! दोस्तों की जैसे हमने अपने पिछले पोस्ट में पुलिस को दुश्चरित्र व्यक्तिओ के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए  के बारे में जनकारी प्राप्त की तो अब इस नयी  ब्लॉग पोस्ट में हम  जन संपर्क में एक सिपाही की क्या भूमिका होती है उसके बारे में जाएंगे !

Police Personal Relation officer Duty
सिपाही  संपर्क  पहला पुलिस कर्मी होता है !बात चाहे कानून व्यवस्था लागु करने की हो या अपराधों के रोकथाम की , पुलिस कार्यो में सिपाही की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है क्यों की प्रत्येक कार्य में सिपाही की उपस्थिति आवश्यक होती है ! चाहे किसी आदेश का पालन करना हो, सम्मन या वारंट की तमिल करनी हो , गस्त लगाना हो , यातायात नियंत्रित करना हो , अप्राधिओं  करना हो या गिरफ्तार करना हो , या किसी स्थान का नाकाबंदी, रेड या विशेष ऑपरेशन करना हो, सिपाही की भागीदारी निश्चित है ! इसी कारण से जनता के संपर्क में बार बार आना पड़ता है जबकि उच्च अधिकारी जनता के सीधे संपर्क में उतना नहीं आ  पते जितना सिपाही !

जरुर पढ़े :चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य

यदि यु कहा जाये की एक सिपाही पुलिस विभाग में जान संपर्क अधिकारी के रूप में कार्य करता है तो यह गलत न होगा  क्यों की सर्कार द्वारा जारी कार्यक्रम  लागू करने  नए कानूनों की जानकारी देने के लिए सिपाही एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है उसकी यही भूमिका प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जान संपर्क अधिकारी के रूप में हमारे समक्ष उभरकर आती है !

यदि प्रत्यक्ष  रूप से किसी भी पुलिस सिपाही को एक जान संपर्क अधिकारी   नियुक्ति नहीं  है  वह  के दायित्व का भली भाती  निर्वाह करता है  !   

जनसम्पर्क अधिकारी के रूप  पुलिस सिपाही  कर्तव्य : एक जनसम्पर्क अधिकारी का कार्य किसी भी महकमे के लिए के काफी महत्वपूर्ण  है !इस लिए एक सिपाही को अपने विभागीय कर्तव्यों का पालन  साथ साथ , एक जन संपर्क अधिकारी के रूप मेनिम्नलिखित कर्तव्यों का पालन भी करना चाहिए :

जरुर पढ़े :थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

  • सरकार  द्वारा जारी कानूनों को लागु करने मेंसरकार की सहायता करना तथा उनका पालन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयत्न  करना !
  • सरकार  द्वारा जारी नियमो,कानूनों,सूचनाओं एवं अधिसूचनाओं की आम जनता तक पहुंचना व उनका पालन करना !
  • पुलिस विभाग के प्रतिनिधि के रूप कार्य करते हुवे आम जनता के कष्टों का निवारण करने में सहायता करना !
  • अपराध एवं अप्राधिओं व असामाजिक गुंडा तत्वों का पता लगाना व उनके बारे में सूचनाएं एकत्रित करना !
  • जनता के कष्टों के कारन का पता लगाना उसकी सुचना उच्च अधिकारिओ तक पहुंचना !
  • विभिन्न संस्थानों , संस्थाओ , सरकारी व अन्य विभागों से संपर्क बनाये रखना तथा उनसे सम्बंधित सूचनाएं उच्च अधिकारिओ तो पहुंचना !
  • सरकारी नीतिओ व कार्यकर्मो की जानकारी आम जनता तक पहुंचना 
  • प्रत्येक व्यक्ति का विनम्रता एवं सादगी से सम्मान करते हुए सदव्यवहार करना !
  • पुलिस के कार्यो में आनेवाली कठिनाईओ को आम जनता के सामने रखे और जनता से सहयोग से हल करने में सहायता प्राप्त करे तथा जनता की कठिनाइया से निपटने के लिए उच्च अधिकारिओ तक रिपोर्ट पेश करे या सुचना दे ! 
  • कर्त्तव्यपालन करते समय केवल सच्ची सूचनाएं ही उच्च अधिकारिओ को पहुचाये गलत सूचना व अफवाहों का खंडन करने में अपना योगदान दे !जो व्यक्ति अफवाहे फैलाये उनका पता लगाए और यदि आवश्यक हो तो पूछताछ के लिए गिरफ्तार करे !
  • अपने कर्तवो कपालं निष्पक्षता ईमानदारी एवं सहस के साथ करे !

ये रही कुछ जनसम्पर्क अधिकारी की ड्यूटी करते समय एक सिपाही को ध्यान में रखने वाली बाते !इस प्रकार से जनसम्पर्क अधिकारी की ड्यूटी करते समय एक सिपाही को कैसे व्यवहार करने  के बारे में जानकारी प्राप्त किया !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

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  1. पुलिस ड्यूटी
  2. फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट में होनेवाली कुछ कॉमन गलतिया
  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
  4. क्राइम सीन पे सबसे पहले करनेवाले काम एक पुलिस ऑफिसर के द्वारा
  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

14 October 2020

पुलिस को दुश्चरित्र व्यक्तिओ के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए

पुलिस के संपर्क में प्रतिदिन अनेक व्यक्ति आते है ! अतः: दुश्चरित्र  व्यक्तिओ का सामना करना कोई असाधारण बात नहीं यही !क्यों की समाज में सभी प्रकार के व्यक्ति रहते है ! जैसे के हमने पिछले पोस्ट में पुलिस को रायट /झगडे के दौरान कैसा व्यवहार करना चाहिए उसके बारे में जानकारी प्राप्त किये थे और अब इस पोस्ट में हम पुलिस को दुश्चरित्र व्यक्तिओ के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए इसके बारे में हम जानेगे !


इस पोस्ट को आसानी से समझने के लिए हमने इसे छोटे छोटे भागो में बाँट दिया है जो निम्न प्रकार से है :
1.दुश्चरित्र व्यक्ति किसे कहते है(Notorious vyakti kise kahte hai ) ?
2.दुश्चरित्र व्यक्तिओ के खिलाफ पुलिस करवाई (Notorious vyakti ke khilaf police karwai kaise kare) 
3.दुश्चरित्र व्यक्तिओ के साथ व्यवहार (Notorious vyakti ke sath police kaise behave kare )


1. दुश्चरित्र व्यक्ति किसे कहते है(Notorious vyakti kise kahte hai )  ?: साधारणतः दुश्चरित्र व्यक्ति उस व्यक्ति को कहते है जो समाज द्वारा बनाये गए कानूनों एवं शांति व्यवस्था को भांग करता है और समाज विरोधी कार्य करता है ! ऐसे व्यक्ति किसी न किसी अपराध  है !

2. दुश्चरित्र व्यक्तिओ के खिलाफ पुलिस करवाई (Notorious vyakti ke khilaf police karwai kaise kare)  अतः ऐसा व्यक्ति जो समाज के कानूनों को भांग करता है और समाज के कार्यो में अड़चन पैदा करता है उन पर पुलिस द्वारा निगरानी करना स्वाभाविक है ! ऐसे व्यक्तिओ को ग्रिफ्तारी करने , निगरानी में रखने का अधिकार पुलिस को कानूनन !  CrPc के  धारा 106 , 109 , 110 के अनुसार पुलिस शांति व्यवस्था बनाये रखने  के लिए करवाई कर सकती है !


इनके बारे में अनेक रिकॉर्ड जैसे हिस्ट्रीशीट , पर्चा  बदमाशन, रजिस्टर निगरानी , सुचना पर्चा , भगोड़ा व मुजरिम इस्तिहारी  है !जिच जिच अप्राधिओं की  रखती उनकी सभी सूचनाएं एकत्रित करके एक सूचि बनाई जाती है  जिसके आधार पर निगरानी की जाती है !

इन दुश्चरित्र व्यक्तिओ को कई भंगो में  बांटा जा सकता है जैसे :
  • हिस्ट्रीशीटर 
  • आदतन अपराधी 
  • मिलावट  करने वाले 
  •  तस्करी  करने वाले 
  • ले भागने वाले 
  • सम्पति विरुद्ध अपराध करने वाले 
  • गिरफ्तार शुदा व्यक्ति 
  • साजयपता व्यक्ति जिसे पैरोल या परिवीक्षा या जमानत  गया हो 
पुलिस का प्रमुख कार्य अपराधों की रोकथाम करना है ! उसके पश्च्यात अन्य कार्य अनुसन्धान करना , अपराधियों को पकड़ना, उनकी निगरानी करनी  आदि !है  दुश्चरित्र व्यक्तियों पकड़ना,  निगरानी रखना भी पुलिस का महत्वपूर्ण कार्य है ! जब सिपाही जगता है तो जनता आराम से सोती है और जब सिपाही सोता है  अपराधों की रोकथाम करना एवं कानून  व्यवस्था  रखना जनता का कर्तव्य है 


 3. दुश्चरित्र व्यक्तिओ के साथ व्यवहार (Notorious vyakti ke sath police kaise behave kare )

 पुलिस जब किसी दुश्चरित्र व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही करती  या जब यह दुश्चरित्र व्यक्ति  संपर्क में  तो पुलिस को उसके साथ निम्नलिखित व्यवहार करना चाहिए !
  • किसी भी दुश्चरित्र व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार नहीं  चाहिए ! उसके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए !
  • किसी भी निर्दोष व दुश्चरित्र व्यक्ति को  नहीं फ़साना चाहिए !क्यों की ऐसा एकबार करने पर वह एक अभ्यस्त  आदतन  अपराधी बन जाता है जो समाज अधिक खतरनाक साबित हो सकता है !
  •  पुलिस का कर्तव्य है की वह उसे एक नागरिक होने नाते उसके साथ अच्छा व्यवहार करे  और उसे उचित सम्मान दे !
  • पुलिस को चाहिए की दुश्चरित्र व्यक्ति को भी साधारण नागरिक की भाटी जीवन बिताने में सहायता करे !
  • पुलिस दुश्चरित्र व्यक्तियों को समाज में रहने तथा अच्छा बनने के लिए उसकी सहायता  करे और आपराधिक जीवन को छुड़ाने में उसकी मदद करे !
  • केवल उनअपराधिओं  पर निगरानी रखे जो सुधरे नहीं या जो संदिग्ध गतिविधिओ में लगा रहता रहता है !
  •  दुश्चरित्र  व्यक्तिओ के परिवार को तंग नहीं करना चाहिए !ऐसा करने पर उनके ऊपर मनोबैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है और  वो और खतरनाक हो जाते है !
  • किसी भी व्यक्ति को बार बार तंग नहीं करना चाहिए हो सके तो उसको रोजगार ढूंढने और ईमानदारी से जीविका चलने में मदद करना चाहिए !
  • जितनी अपराधिओं की संख्या काम होगी पुलिस रिकॉर्ड एवं छवि उतना ही अच्छी और प्रभावशाली होगी !
  • दुश्चरित्र व्यक्ति के खिलाफ अधिक  प्रयोग करे केवल उतना ही प्रयोग करे  आवश्यक है क्यों की बार बार बल प्रयोग उसे आदतन अपराधी  सहायक होता है !
  • ऐसे व्यक्ति  सामान्य नागरिक की तरह व्यवहार करे और उनके चरित्र  सुधर ने में उनकी उचित सहायता करे ! 
इस प्रकार से आज हमने पुलिस को दुश्चरित्र व्यक्तिओ के साथ कैसे व्यवहार करने  के बारे में जानकारी प्राप्त किया !उम्मीद है की यह छोटा पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  को सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

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पुलिस कर्मी झगडे के दौरान कैसा व्यवहार

प्रकृति की तरह मानवीय व्यवहार भी परिवर्तनशील !  जिस प्रकार  प्रकृति के  है उसी प्रकार  से मनुष्य  का व्यवहार भी विभिन्न प्रकार  होता है ! व्यक्ति एक पल मेंहँसता तो एक पल में रोने लगता है ! एक पल में ढेर सारा प्यार उड़ेलने लगता है  पल में गुस्से की आग में जलने लगता है ! तो दोस्तों इस पोस्ट में आज हम जानेगें की एक पुलिस कर्मी को मानवीय व्यवहार के बदलाव और उससे होने वाले झगडे के दौरान कैसा व्यवहार (Police behavior while  dealing human conflict) चाहिए !

इसी प्रकार से मानव का विनम्रतापूर्वक व्यवहार  एवं कटु व्यवहार करना ही व्यावहारिक परिवर्तन का का एक विशिस्ट रूप है ! मनुष्य अपने परिजनों , मित्रो , जान पहचान वालो के साथ परस्पर मिलकर रहता है तो वह अनपेक्षित व्यवाहर  या कटु व्यवाहर  किये जाने पर परस्पर झाड़ता भी है !

इस  हम निम्न विषय  जानकारी प्राप्त करेंगे :

1. प्राचीन काल में झगड़ा के कारण 

2. आधुनिक काल में झगड़ा के कारण 

3. झगड़ो के दौरान पुलिस का व्यवहार

1.  प्राचीन काल में झगड़ा के कारण 

रोटी कपडा और माकन की पूर्ति के पश्चात् व्यक्ति अन्य समस्याओ की तरफ ध्यान देता है ! वास्तव में समाज में झगडे का मूल कारन धन , जोरू(स्त्री) और जमींन (सम्पति) जो की प्राचीन काल से चला आ रहा है !

2. आधुनिक काल में झगड़ा के कारण 

आज कल लोगो के   के झगड़ने का स्वरुप में भी काफी बदलाव आ चूका है प्राचीन काल में अधिकतर अपराध पैसे धन  के लिए होते थे लेकिन आज कल झगडे का मूल कारन नैतिकता एवं धैर्य की कमी,झूठी शान , आर्थिक, सामाजिक एवं शारीरिक शोषण तथा दुसरो के सुख को देखकर जलना है !

प्रारंभ  में झगडे केवल व्यक्ति एवं सम्बंधित स्थानीय क्षेत्र ही सिमित थे जबकि आजकल झगड़ने का प्रभाव पुरे राष्ट्र राज्य पर पड़ता है !जैसे से बहुत सालो पहले भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी द्वारा लिखित पुस्तक "शैतान की आयते " पर ईरान में फतवा जारी करके विरोध किया गया जिसके फलस्वरूप हमारे देश के मुंबई में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे ! इस प्रकार एक गांव के किशन कोई झगड़ा करता है तो उसका प्रभाव दूसरे गांवो या राज्य पर पड़ता है!इसका कारण  है प्रेस द्वारा खबरों को तुरंत प्रकाशित करना और लोगो में जाग्रति पैदा करना लेकिन बहतु बार देखा गया है की प्रेस  दरगाह से अफवाह भी फैलता है !

Farmers clash
हमारे देश में अनेक प्रकार की सामाजिक परिस्थिया उत्पन्न होती रही है जिसझगडे होते है जिसका व्यापक प्रभाव राष्ट्र के अन्य भागो में पड़ता है !हमारे देश में कुछ निम्न प्रकार के झगडे है जिसे पुलिस को हमेशा वास्ता पड़ते रहता है !

  • भाषाई झगडे (Linguistic conflict)
  • सांप्रदायिक झगडे (Communal Riot)
  • छात्रों के झगडे (Students clash)
  • मालिक मजदुर झगडे (Laborer unrest)
  • किसानो के बिच झगडे (Farmers clash)
  • यातायात सम्बंधित झगडे (Traffic accident )
  • खिलाड़िओ के बिच झगडे (Players clash)
  • राजनैतिक झगडे (Political clash)
  • व्यक्तिगत झगडे (Personal fight)
भाषाई और सांप्रदायिक झगडे गंभीर प्रकृति के होते है जबकि अन्य लोगो से सम्बंधित झगडे ईतने  गंभीर नहीं होते है!परन्तु यदि ये बड़े पैमाने पर हो तो परिणाम अप्रत्याशित एवं खतरनाक हो सकते है   और अन्य क्षेत्रो में फ़ैल जाते है , जिन्हे नियंत्रित करना काफी मुश्किल होता है ! कई बार दुर्घटना के दौरान यातायात जाम कर दिया जाता है या रास्ता रोको आंदोलन के द्वारा यातायात रोक दिया जाता है ! यदि इन्हे समय रहते न रोका जाये तो इससे पुलिस  दुविधाजनक परिस्थियों का सामना करना पड  सकता है !

3 . झगड़ो के दौरान पुलिस का व्यवहार( Police behavior while  dealing human conflict) : झगड़ो के दौरान पुलिस का व्यवहार त्वरित और दृढ़ होना चाहिए ! कुछ की सूची निम्न है :
  • पुलिस का प्रमुख कर्तव्य अपराधो की रोकथाम करना एवं कानून व्यवस्था को कायम रखना है !
  • पुलिस को किसी भी परिस्थिति का सामना करने से पूर्व सूचनाय एकत्रित करनी चाहिए और योजनाबद्ध तरीके से कर्तव्यपालन करना चाहिए !
  • झगड़ो के दौरान आने वाले व्यक्तिओ की शिकायत पर तुरंत ध्यान दे और उन्हें गंभीरता से ले  और तुरंत  करवाई करे ! क्यों की प्रारम्भिक अवस्था में इन्हे सरलता से नियंत्रित किया जा सकता है !
  • उच्च अधिकारी तथा मजिस्ट्रेट को तुरंत सुचना दे !
  • यदि कोई व्यक्ति घायल हो तो तुरंत अस्पताल भिजवाए !
  • प्रत्येक शिकायतकर्ता और दोषी के साथ अच्छा व्यवहार करे !
  • दोषी व्यक्तिओ को गिरफ्तार करके उचित कारवाही करे !
इस प्रकार से आज हमने झगडे के दौरान पुलिस का कर्तव्य  के बारे में जानकारी प्राप्त किया !उम्मीद है की यह छोटा पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  को सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

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