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24 दिसंबर 2021

अपराधी सुधार में प्रोबेशन और पैरोल का महत्व

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने दण्ड शास्त्र के बारे में जानकारी प्राप्त और इस नई  पोस्ट में हम अपराधी सुधर जैसे पैरोल और परिवीक्षा(Parole & Probation) आदि के बारे में जानेगे ! ए पोस्ट विशेषकर ट्रेनिंग सेण्टर में लेक्चर देने वालो उस्ताद के लिए लेसन प्लान(Lesson Plan Banana) बनाने में बहुत उपयोगी साबित होगा ऐसा मेरा उम्मीद है और यह दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल के ट्रेनिंग सिलेबस के अनुसार है जो उनके प्रेसिज में दिया हुवा है ! 

इसे भी पढ़े : दण्ड शास्त्र के ऊपर लेसन प्लान 

चुकी अपराध के लिए केवल व्यक्तिगत कारण ही नहीं बल्कि परिस्थितियां भी जिम्मेदार होती है इसीलिए अपराधी को कम से कम दंड देकर सुधारने का प्रयास करना चाहिए। क्योंकि अपराध के लिए कई प्रकार की मानसिक बीमारियां व्यक्तिगत विकास और सामाजिक और समायोजन भी जिम्मेदार होता है इसलिए अपराधी को एक मानसिक रोगी मानकर उसका सुधर के  प्रयास भी करना चाहिए । 

Difference between Parole and Probation
Parole
 अपराधी का सुधार व उपचार की विधियां 

1.  परीविक्षा(Probation) : दोष सिद्ध  अपराधी के दंड को निलंबित या स्थगित करके उसे जेल के दूषित वातावरण से बचाकर समाज में रहकर सुधारने का अवसर देना होता है । 

  • अपराधी जन्म से ही पैदा नहीं होते हैं की धारणा पर आधारित है। 
  • एक उपचारात्मक कार्यक्रम जो अपराधी को सामाजिक समायोजन की सुविधा प्रदान करता है। 
  • परिवीक्षा  न्यायालय द्वारा प्रदान की जाती है! 
  • इसका मांग  करने पर न्यायालय न्यायालय परीक्षा अधिकारी से अपराधी के जन्म से लेकर अदालत तक पहुंचने तक की अवधि का पूरा अध्ययन करवाती है। 
  • परीविक्षा अधिकारी का निगरानी से रहते हुए अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों के अनुसार सदव्यवहार करने का अपराधी द्वारा वचन दिया जाता है। 

2. परीविक्षा के उद्देश्य (Aim of Probation)

  • पहली बार अपराध करने वाले अपराधियों को बाल अपराधियों को व कमजोर अपराधियों को दंड का भय दिखाकर व चेतावनी देकर सुधारना। 
  • कलंकित जीवन एवं जेल के दूषित वातावरण से छुटकारा दिलाना 
  • कम अवधि की सजा का  विकल्प है क्योंकि कम अवधी की सजा जेल का डर  समाप्त कर देती है 
  • जेल में छोटी अवधि में अपराधी का सुधार संभव नहीं होता है और कलंक  भी लग जाता है। 
  • सामाजिक परिस्थितियों में समायोजन व पुनर्वास परिवीक्षा  अधिकारी के माध्यम से सहायता देना !
  • अपराधिक न्याय प्रणाली सहयोग एवं तालमेल। 
3. परिवीक्षा  की शर्तें  (Probation ki conditions ) :
  • परिवीक्षा  अधिनियम 1958 की धारा 3 के अनुसार आईपीसी की धारा 379, 380, 381, 420 के तहत दोषी सिद्ध या  आईपीसी या किसी अन्य कानून के तहत 2 साल की अवधि से दंडित अपराधी के पहली बार दोष सिद्धि  अपराधियों को चेतावनी के बाद 
  • या उपरोक्त अधिनियम की धारा 4 के अनुसार मृत्युदंड या आजीवन कारावास एवं दंड से दंडित अपराधी के दंड की कुछ समय तक निलंबित करने के लिए परिवीक्षा  या निम्न शर्तों पर छोड़ने का प्रावधान  है:
    •  परीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट पर अदालत विचार करती है। 
    • प्रोबेशनर  को भविष्य में शब्द व्यवहार बनाए रखने के लिए बाध्य पर बांड भरना पड़ता है 
    • तथा किसी व्यक्ति की जमानत देनी पड़ती है। 
    • परिवीक्षा  अधिकारी की आज्ञा के बिना निवास स्थान नहीं बदलेगा तथा नशे आदि से दूर रहेगा।
    • परिवीक्षा अवधि के दौरान प्रोबेशनर  परिवीक्षा  अधिकारी से निरंतर संपर्क रखेगा और उसके नियंत्रण एवं निर्देश में कार्य करेगा
  • अधिनियम की धारा 5 के तहत अदालत अपराधी को परिवीक्षा  पर छोड़ते समय पीड़ित व्यक्ति को मुआवजा अदा करने का हुक्म दे सकती है। 
  • धारा 9 के अनुसार यदि अपराधी परिवीक्षा  अधिकारी की शर्तों का उल्लंघन करता है तो अपराध की निर्धारित सजा का आदेश अदालत दे सकती है 
नोट: सीआरपीसी की धारा 360 व 361 में भी इसका उल्लेख किया गया है। 

4. पैरोल (Parole):जेल में संतोषजनक एवं अच्छा व्यवहार करने वाले दोषसिद्ध  अपराधी को सजा का कुछ भाग पूरा करने के बाद कुछ शर्तों के अधीन मुक्त कर देना कुछ हद तक परिवीक्षा  से मिलती-जुलती भी दी है। 

5. पैरोल की शर्तें(Parole ki condition):
  • पैरोल अधिकारी के संरक्षण में रहकर अच्छा व्यवहार करेगा वह किसी कानून का उल्लंघन नहीं करेगा।
  • पैरोल अधिकारी के संपर्क में रहेगा वह अपने बारे में सही सही सूचनाएं निरंतर देते रहेगा। 
  • पैरोल अधिकारी के आज्ञा के बिना निवास स्थान और नौकरी नहीं बदलेगा राज्य से बाहर जाएगा और ना ही विवाह करेगा। 
  • नशीली वस्तुओं व औषधियों का सेवन नहीं करेगा 
  • पैरोल  की शर्तों का उल्लंघन करने पर बकाया सजा काटने के लिए जेल भेज दिया जाता है। 
6. पैरोल के लाभ (Parole ke benefits)
  • दूसरे कैदियों को जेल में अच्छा व्यवहार करने की प्रेरणा देता है। 
  • सरकारी धन की बचत कराता है। 
  • अपराधी का परिवार टूटने से बचाता है 
  • पैरोल अधिकारी के निर्देश व नियंत्रण अपराधी को समाज में समायोजन व पुनर्वास का अवसर मिलता है।

 7परिवीक्षा  और पैरोल में अंतर (Difference between Probation and Parole) 
  • परिवीक्षा (Probation)
    •  परिवीक्षा  न्यायालय द्वारा सजा सुनाते वक्त मुक्त किया जाना। 
    • परिवीक्षा  अधिकारी द्वारा अपराधी के जन्म से लेकर सजा सुनाने तक की अवधि के दौरान के आचरण के मूल्यांकन पर आधारित है न्यायालय द्वारा स्वीकृत। 
    • परिवीक्षा  अधिनियम 1958 सीआरपीसी की धारा 360 के तहत 
    • यह सुधार का सबसे पहला कदम है। 
    • धारा 361 सीआरपीसी की रोशनी में एक अधिकार की तरह मांगा जा सकता है। 
  • पैरोल (Parole)
    • न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा का कुछ भाग जेल में बिताने के बाद मुक्त किया जाता है 
    • जेल अधिकारी द्वारा अपराधी के जेल में किए गए आचरण का मूल्यांकन के आधार पर दिया जाता है।
    •  प्रशासकीय बोर्ड या सलाहकार  बोर्ड द्वारा स्वीकृत की जाती है। 
    • जेल मैनुअल के तहत इसका विवरण दिया गया होता है। 
    • यह सुधार का आखरी कदम है।
    •  यह जेल प्रशासन का अपराधी पर एक एहसान है कि अपराधी का अधिकार है। 

8.सुधारात्मक संस्थाएं 

  • बाल अपराधियों से संबंधित संस्थाएं किशोर ,(Juvenile Home)गृह तिरस्कृत या उपेक्षित(Neglected) बच्चों के लिए(Sec 9 of J.J. Act 1986) किशोर न्यायालय अधिनियम के अंतर्गत स्थापित किया गया है 
  • विशेष गृह (Special Home) दोष सिद्बाध बाल अपराधियों के लिए(Sec 10 of J.J. Act) 
  • पर्यवेक्षण गृह (Observation Home) विचाराधीन बाल अपराधियों के लिए 
  • उपरोक्त तीनों गृहों में स्कूली शिक्षा के साथ-साथ व्यवसायिक शिक्षा व चरित्र विकास की व्यवस्था होती है।

 9. महिलाओं के लिए 
नारी निकेतन जैसे  निर्मल छाया आदि  अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम(The Immoral Traffic Prevention Act 1956) की धारा 21 के अनुसार 

10. गैर सरकारी संस्थाएं 
  • जैसे नज्योति  नशा उन्मूलन संस्था 
  • प्रयास बेसहारा व शोषित बच्चों के लिए 
  • SOS चिल्ड्रन विलेज अनाथ और अपेक्षित बच्चों के लिए
इस प्रकार से पैरोल और परिवीक्षा से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

इन्हें भी  पढ़े :

  1. पुलिस ड्यूटी
  2. फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट में होनेवाली कुछ कॉमन गलतिया
  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
  4. क्राइम सीन पे सबसे पहले करनेवाले काम एक पुलिस ऑफिसर के द्वारा
  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट


23 दिसंबर 2021

दण्ड शास्त्र || Penology

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने अपराध के वर्गीकरण के बारे में जानकारी प्राप्त की और इस नई ब्लॉग पोस्ट में हम दण्डशास्त्र(Penology) के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे ! इस विषय को अच्छी तरह से समझने के लिए हमने इसे छोटे छोटे शीर्षक के अंतर्गत बाँट दिया है !

1. दण्ड शास्त्र क्या है :दण्ड शास्त्र  अपराध शास्त्र का एक प्रभाग है जो अपराध के लिए दंड तथा जेलों के प्रबंधन से संबंधित है। किसी व्यक्ति को उसके अपराध या किसी कथित कार्य के लिए दंडित ठहराना अपराधी घोषित करना।

दण्ड शस्त्र के सिद्धांत
दण्ड शस्त्र 

दण्डशास्त्र अपराधियों को दंड देने से संबंधित विधिओ , सिद्धांतों एवं उनके उपचार का अध्ययन है !उपरोक्त के अलावा इसमें जेल व्यवस्था सुधारात्मक उपाय पुनर्वास व्यवस्था आदि का भी अध्ययन किया जाता है। 


2. दंड शास्त्र का क्षेत्र 

  • दंड 
  • जेल व्यवस्था 
  • सुधार व उपचार 
  • प्रवर्तित आदतन अपराधिक- दंड के बावजूद भी अपराधी का न सुधरना, 
  • अपराधिक न्याय प्रणाली सहयोग एवं तालमेल 
3. दंड शास्त्र के सिद्धांत:

  • परंपरा वादी सिद्धांत: क्योंकि व्यक्ति आनंद या सुख प्राप्त करने के लिए अपराध करता है इसीलिए उसे कष्ट या दुख पहुंचा कर अपराध से विमुख करना चाहिए ! नवपरंपरा दियो ने इसमें यह सुधार किया कि दंड का निर्धारण आयु, लिंग और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। 
  • प्रत्यक्ष वादी सिद्धांत: क्योंकि अपराध के लिए शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक कारण भी जिम्मेदार होते हैं इसलिए दंड का निर्धारण अपराध की अपेक्षा अपराधियों की प्रवृत्ति के अनुसार होना चाहिए। 
  • आधुनिक सिद्धांत :क्योंकि अपराधियों के लिए खुद समाज भी जिम्मेदार है इसलिए अपराधियों को सुधारने का दायित्व भी उसी का है। अपराधी को एक मानसिक रोगी समझ कर उसका सुधार एवं उपचार करना चाहिए। 
4. दंड :- राज्य द्वारा कानून के कानून विरोधी कार्यो के लिए अपराधियों को दी जाने वाली शारीरिक या मानसिक पीड़ा है 

5. दंड के उद्देश्य:

  • मानवीय व्यवहार पर नियंत्रण करने के लिए- दंड का भय परंपरावादी सिद्धांत के अनुसार 
  • अपराधी का सुधार- करवास में नैतिक, आध्यात्मिक, धार्मिक व व्यवसायिक शिक्षा। अपराधी को समाज में पुनर्वास के लिए तैयार करना। 
  • सामाजिक सुरक्षा :-कारवास में होने के कारण समाज को और ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सकता है।
  • प्रतिरोधआत्मक उपाय:- उन लोगों में दंड का भय पैदा करना ताकि वह अपराध न करें। 
  • क्षतिपूर्ति:- जुर्माना आदि लगाकर पीड़ित व्यक्ति को छतिपूर्ति अपराधी को दंड मिलने से पीड़ित को मानसिक संतुष्टि। 
6. दंड के प्रकार 

  • कारवास :- अपराधी को अलग रखकर समाज को हानि पहुंचाने से रोकना। दो प्रकार का होता है  साधारण व कठोर 
  • जुर्माना 
  • शहर बदर करना या तड़ीपार करना क्षेत्र से निकासी करना 
  • चेतावनी या भर्सना  न्यायालय द्वारा 
  • मृत्युदंड :-विवादास्पद मुद्दा मृत्युदंड दिया जाना चाहिए या नहीं 
7. मृत्यु दंड के तर्क 
परिशोध बुरे व्यक्ति को समाज में से हमेशा के लिए हटा देता परिशुद्ध आत्मक अनुवांशिकता का सिद्धांत 
8. मृत्यु दंड के विपक्ष में तर्क :
अमाननीय दंड सुधार विरोधी अपराधों के लिए समाज कई अपराधी के परिवार को असहाय व बेसहारा बना देता है। 

9. निष्कर्ष:- दण्ड  केवल वही दिया  जाना चाहिए जहां अपराध संदेश से परे साबित होता है! अपराध अति क्रूर व जघन्य हो तथा अपराधी के सुधरने की कोई संभावना ना हो।

10. दंड के सिद्धांत :उपरोक्त दिए गए दंड के उद्देश्य ही इसके विभिन्न सिद्धांत है 
  • परिशोधआत्मक सिद्धांत: जैसे को तैसा 
  • प्रतिरोधआत्मक सिद्धांत:- लोगों में दंड का भय पैदा होता कि वह अपराध न करें 
  • प्राश्चित  का सिद्धांत 
  • निरोधात्मक सिद्धांत :अपराधी को समाज से अलग रखकर सामाजिक सुरक्षा कारावास या मृत्युदड 
  • क्षतिपूर्ति का सिद्धांत 
  • सुधारात्मक सिद्धांत अपराधों के लिए समाज उत्तरदाई इसलिए अपराधी को एक मानसिक रोगी समझकर उसका उपचार करके सुधारने पर बल।
इस प्रकार से हम जाने की दण्ड शास्त्र  और उसके सिद्धांत क्या क्या होते है तथा दण्ड क्यों दिया जाता है !इस प्रकार से दण्ड शास्त्र से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

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22 दिसंबर 2021

अपराध के वर्गीकरण || Classification of crime

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने अपराध शास्त्र के सिद्धांत के बारे में जानकारी प्राप्त की और अब इस छोटे से  ब्लॉग पोस्ट में हम अपराध के वर्गीकरण के बारे में जानेगे की अपराध को कितने वर्गों में वर्गीकरण किया जा सकता है !

इस विषय को अच्छी तरह से समझने के लिए हम ने इस पोस्ट को निम्न शीर्ष में बाँट दिया है:

अपराध शास्त्र
अपराध शास्त्र 

1. अपराध की परिभाषाएं: अपराध शब्द जितना प्रचलित है उतना ही मुश्किल है इसकी परिभाषा देना क्योंकि इस परिवर्तनशील भौतिक युग में प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन होते रहते हैं। जिसके कारण अपराध की परिभाषा में भी फेरबदल समयानुसार अवश्यंभावी है फिर भी कुछ प्रमुख अपराध शास्त्रियों द्वारा की गई कुछ परिभाषा ओं का अध्ययन करते हैं। 

कैनी के अनुसार : अपराध उन अवैधानिक कार्यों को कहते हैं जिन के बदले में दंड दिया जाता है और वह क्षम्य नहीं होते हैं। अगर क्षम्य नहीं होते भी हैं तो राज्य  के अलावा अन्य किसी को भी क्षमा प्रदान करने का अधिकार नहीं होता है। 

मिलर के अनुसार :अपराध वो कृत या अकृत उल्लंघन कार्य हैं जिनको की विधि समावेशित अथवा निर्देशित करती है और उन दोनों को सरकार अपने नाम से कार्यवाही  करके दंडित करती है। 

बसंती लाल बाबेल के अनुसार: तत्समय प्रवृत  विधि के अंतर्गत ऐसा कोई भी कार्य  करना जिसे नहीं करने के लिए वह व्यक्ति आबध्य  है अथवा ऐसे कार्य के करने से प्रविरत रहना या लोप करना  जिसके करने के लिए आबध्य  है अपराध है दोनों ही दशाओं में यह दंडनीय है!

अपराध का वर्गीकरण(Classification of Crime): पाश्चात्य अपराध शास्त्रियों का वर्गीकरण अलग आधारों पर किया है जो भारतीय विधि से मेल नहीं खाता है। भारतीय विधि में अपराध का वर्गीकरण प्रमुख तीन आधारों पर किया गया है। 

संख्यिक्यआधार पर (Pre Classical Theory)

  • व्यक्ति विरुद्ध अपराध (Crime against Person)
  • संपत्ति के विरुद्ध अपराध (Crime against Property)
  • राज्य के विरुद्ध अपराध (Crime against State)
  • व्यवस्था के विरुद्ध अपराध (Crime against Order)
  • न्याय के विरुद्ध अपराध (Crime against Justice)
भारतीय दंड संहिता के अनुसार अपराध का वर्गीकरण (Classification on the basis of IPC)

  • मानव शरीर के विरुद्ध अपराध 
  • संपत्ति के विरुद्ध अपराध 
  • लेख से संबंधित अपराध 
  • मानव मस्तिक को प्रभावित करने वाले अपराध 
  • लोग शांति के विरुद्ध अपराध 
  • राज्य के विरुद्ध अपराध 
  • शासकीय सेवको द्वारा अपराध। 
भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता के धारा पर अपराधियों का वर्गीकरण 

साधारण अपराध(Non Cognizable offence) 

  • असंगेय अपराध 
  • समन मामलों से संबंधित अपराध 
  • जमानती अपराध 
गंभीर अपराध (Cognizable Offence)

  • संगेय अपराध 
  • वारंट मामलों से संबंधित अपराध 
  • अजमानती अपराध 
संक्षेप: जैसे के दिल्ली पुलिस ट्रेनिंग प्रेसिज में बताया गया है उसके अनुसार उपरोक्त  संख्यिक्य, प्रवृत्ति व प्रक्रिया के आधार पर वर्गीकरण पर अगर इस संक्षेप में वह दिखाई प्रतीत होता है की अपराध केवल तीन प्रकार के होते हैं एक मानव के विरुद्ध, दूसरा सम्पति  के विरूद्ध और तीसरा राज्य  के विरोध तो अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि उपरोक्त वर्गीकरण से  सभी वर्ग के अपराधो को वर्गीकरण किया जा सकता है  ।

इस प्रकार से आपराध के वर्गीकरण से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

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  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

21 दिसंबर 2021

आपराध शास्त्र के सिद्धांत

 पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने अपराध शास्त्र और उसकी पुलिस के लिए अहमियत के बरेर में जानकारी प्राप्त किये थे और अब इस पोस्ट में हम उसी श्रृखला को आगे बढ़ाते हुए यह जानेगे की अपराध शास्त्र के सिद्धांत क्या होता है(Theory of criminology) और ओ कितने प्रकार के होते है !

(अ) आपराध शस्त्र की परिभाषा बहुत से समाजशास्त्रियो ने दिए है जिन्होंने अपने परिभाषा के द्वारा ए बताया है की अपराध शास्त्र क्या होता है !जिसमे से कुछ निम्न प्रकार से है :

Apradh shsastr
Apradh shsastr 

  • टैफ्ट: टैफ्ट के अनुसार अपराध शास्त्र वह अध्ययन है  जिसक विषय वस्तु में अपराध की व्याख्या और उसके निवारण के साथ अपराधियों एवं बाल अपराधियों के दंड अथवा उपचार शामिल है। 
  • डा. बसंती लाल बाबेल के अनुसार अपराध शास्त्र ज्ञान की वह शाखा है जिसमें अपराध एवं अपराधी बनने के कारण उनके उपचार एवं निवारण के तरीकों तथा अपराध से अपराधी तक पहुंचने की विधि का अध्ययन किया जाता है। 

(ब) अपराध शास्त्र का महत्व :

पुलिस के प्रमुख का कार्य नागरिकों के जान व माल की रक्षा करना कानून व व्यवस्था बनाए रखना अपराधों की रोकथाम करना तथा अपराधियों को न्यायालय के समक्ष ले जाकर सजा दिलवाना आदि! इन  सभी कार्य अपराध शास्त्र के ज्ञान के बिना असंभव है।

(क) अपराध शास्त्र के सिद्धांत 

1. प्री क्लासिकल सिद्धांत(Pre Classical Theory)

प्रमुख मान्यता: इस सिद्धांत  को मनाने वाले के अनुसार अपराध के लिए भूत प्रेत उत्तरदाई होते हैं। 

प्रमुख समर्थक: इस सिद्धांत के समर्थक  अगस्त काम्टे 

2. शास्त्रीय सिद्धांत(Classical Theory):

प्रमुख मान्यता : इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की  स्वतंत्र इच्छा अपराध के लिए उत्तरदाई है। 

प्रमुख समर्थक: जेरेमी बेंथम, सीजर बेकेरिया, आदि!

3. नव  शास्त्रीय सिद्धांत (New Classical Theory)

प्रमुख मान्यता: इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की स्वतंत्र इच्छा अपराध के लिए उत्तरदाई है उसके साथ परंतु संबंध व्यवस्था उचित नहीं है।

प्रमुख समर्थक: रोजी, जोली, टैफ्ट यदि 

4.प्रारूप वादी सिद्धांत(Topological Theory): इसकी प्रमुख तीन विचारधाराएं हैं !

(i) जैविक सिद्धांत(Biological Theory )

प्रमुख मान्यताएं: इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की विशेष शारीरिक संरचनाएं अपराध के लिए उत्तरदाई है। 

प्रमुख समर्थक: लंब्रोसो। 

(ii) मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत(Phycho Analytical Theory )

प्रमुख मान्यताएं: इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की संवेगात्मक अस्थिरता अपराध के लिए उत्तरदाई है। प्रमुख समर्थक: सिमंड फ्राइड ,अडलेर, कलिन्जुंग आदि । 

(iii)मानसिक प्रशिक्षण सिद्धांत(Mental Testers Theory)

प्रमुख मान्यताएं:इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की मानसिक दुर्बलता अपराध के लिए उत्तरदाई है। 

प्रमुख समर्थक: डॉ. गोलार्ड

5. वातावरणीय सिद्धांत(Cartographic Theory) :इसकी भी तीन विचारधाराएं हैं  जो निम्न है 

(i) भौगोलिक सिद्धांत (Ecological Theory)

प्रमुख मान्यताएं:इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की भौगोलिक परिस्थितियां अपराध के लिए उत्तरदाई है।

प्रमुख समर्थक: क्वेटलेट, माउंटेसकू आदि 

(ii) समाजवादी सिद्धांत (Socialistic Theory)

प्रमुख मान्यताएं:इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की आर्थिक असमानता अपराध के लिए उत्तरदाई है। 

प्रमुख समर्थक: मार्क्स , एनिल   आदि 

(iii) समाजशास्त्रीय सिद्धांत(Sociological Theory) 

प्रमुख मान्यताएं:इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की सामाजिक परिस्थितियां अपराध के लिए उत्तरदाई है। प्रमुख समर्थक:  सेलेक्ट ,अग्नि आदि। 

6.विविध कारकवादी सिद्धांत(Multifactor Theory) 

प्रमुख मान्यताएं:इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की कई कारण मिलकर अपराध के लिए उत्तरदाई होते हैं। 

प्रमुख समर्थक:सिसिलावार्ट 

इस प्रकार से हमने देखा की अलग अलग समाज शास्त्रियो  ने अलग अलग समय पे अपराध शसस्त्र का अलग अलग परिभाषाये दी है और सबकी अपनी अपनी मान्यताये और कारन थे अपराध के बारे में और यह देखा गया है की इनलोगों में अपराध का कारन के ऊपर एकमत नहीं थे !

इस प्रकार से आपराध शास्त्र के सिद्धांत  से सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

इन्हें भी  पढ़े :

  1. पुलिस ड्यूटी
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  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

20 दिसंबर 2021

आपराध शास्त्र तथा अपराध शास्त्र का पुलिस के लिए महत्व

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने हथकड़ी तथा एस्कॉर्ट गार्ड के बारे में जानकारी प्राप्त की और अब इस ब्लॉग पोस्ट में हम जानेगे की पुलिस के लिए अपराध शास्त्र की जानकारी होना क्यों जरुरी है(Police ke lie Apradh Shastr ka Mahatw) ! तो इस विषय को हम निम्न शीर्ष के अंतर्गत जानेगे :

अपराध शास्त्र
अपराध शास्त्र

1.अपराध शास्त्र क्या है(Apradh shastr Kya hai) :अपराध शास्त्र की वह शाखा है जिसमें अपराध एवं अपराधी बनने के कारणों उनके उपचार एवं निवारण के तरीकों का अध्ययन किया जाता है। 

2. अपराध शास्त्र का क्षेत्र(Apradh shastr ka area)

  • अपराध क्या है?
  •  अपराध एवं अपराधिक व्यवहार के क्या कारण हैं ?
  • अपराधों का निवारण कैसे किया जा सकता है वर्तमान में इसमें दंड के साथ-साथ सुधारवादी दृष्टिकोण पर विशेष बल दिया जाता है। 

3. अपराध की परिभाषा(Apradh ki Paribhasha): किसी समय में लागू किसी कानून के अंतर्गत जिस कार्य को करने की मनाही है उसे करना या जिस कार्य के करने के लिए व्यक्ति अबैद्ध  है उसे ना करना अपराध है। दोनों ही दशाओं में यह दंडनीय है। 

4.अपराध के कारक: अपराध के लिए कोई एक कारण अकेले जिम्मेदार नहीं होता बल्कि इसके पीछे कई कारण मिलकर जिम्मेदार होते हैं। 

(a)जैविक कारक(Biological Factors) :

  • अनुवांशिकता माता-पिता तथा अन्य पूर्वजों से हस्तांतरित होने वाले गुण दोष। 
  • अंत स्रावी ग्रंथियों में दोष
  • शारीरिक रचना 

(b).मनोवैज्ञानिक कारक(Psychological Factors) :

  • मानसिक दुर्बलता सही व गलत में भेद करने में अक्षम
  • मानसिक विकार: उत्साह मनोवृति  मनोग्रस्त बाध्यता  प्रतिक्रियाएं(Obsessive Compulsive Reactions) कलैपटॉपमेंमियां, पायरोमानिया आसयोजन व्यक्तित्व विकास सामाजिकता लैंगिक विचलन नशे का आदी होना। 
  • अज्ञानता: नैतिक शिक्षा का अभाव अपराध व कानूनों के बारे में जानकारी ना होना कानूनों का भय ना होना पीड़ित व्यक्ति द्वारा सुरक्षा के उपाय ना करना व संभावित अपराधियों को आकर्षित करना। 
(c).आर्थिक कारक(Economic Factors): 

  • बेरोजगारी व गरीबी 
  • भौतिकवाद 
  • धन इकट्ठा करने की लालसा। धन की असमान वितरण 

(d)सामाजिक कारक (Social Factors)

  • खराब परिवारिक बातावरण 
  •  वर्ग संघर्ष अमीर व गरीब के बीच या जातियों के बीच। 
  • समाजिक प्रतियोगिता। 
  • अंधविश्वास। 
  • बुरी संगत व स्लम बस्तियों जैसा खराब बताबरण। 

(e)राजनैतिक कारक(Political Factors) 

  • अपराधिक राजनीतिक गठजोड़। 
  • राजनीतिक प्रतिद्वंदता 
  • अपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने की इच्छा में कमी। 
  • विधि पालक संस्थाओं के कार्यों में राजनीतिक नेताओं का हस्तक्षेप  । 

5.अपराधियों का निवारण 

दंड :दंड राज्य द्वारा कानूनी विरोधी कार्यो के लिए अपराधी को दी जाने वाली पीड़ा या कष्ट है। 

आधुनिक धारणा क्योंकि अपराध के लिए केवल व्यक्तिगत कारण ही नहीं बल्कि परिस्थितियां भी जिम्मेदार होती है इसीलिए अपराध को कम से कम दंड देकर सुधारने का प्रयास करना चाहिए। 

6.दंड का उद्देश्य :

  • मानवीय व्यवहार पर नियंत्रण करने के लिए दंड का भय। 
  • अपराधी का सुधार कारावास में नैतिक आध्यात्मिक व व्यवसायिक शिक्षा। अपराधी को समाज में पुनर्वास के लिए तैयार रखना। 
  • सामाजिक सुरक्षा कारावास में होने के कारण समाज को और ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाता सकता।
  • प्रतिरोध आत्मक उपाय उन लोगों में दंड का भय पैदा करना ताकि वे अपराध ना करें। 
  • क्षतिपूर्ति जुर्माना आदि लगाकर पीड़ित व्यक्तियों को क्षतिपूर्ति अपराधी को दंड मिलने से पीड़ित को मानसिक संतुष्टि। 

7.अपराधियों को सुधार एवं उपचार :चुकी अपराध के लिए कई प्रकार की मानसिक बीमारियां, व्यक्तित्व विकार व सामाजिक समायोजन भी जिम्मेदार होते हैं। इसीलिए अपराधियों को एक मानसिक रोगी मानकर उनका उपचार करना चाहिए। 

  • परिवीक्षा (Probations): दोषसिद्ध  अपराधी के दंड को निलंबित या स्थगित करके उसे जेल में दूषित वातावरण से बचाकर समाज में रहकर सुधारने का अवसर देना। 
  • पैरोल(Parole):जेल में संतोषजनक एवं अच्छा व्यवहार करने वाले दोषसिद्ध  अपराधी को सजा का कुछ भाग पूरा करने के बाद कुछ शर्तों के अधीन मुक्त कर देना ! जेल मैनुअल में प्रधान।

8. सुधारात्मक संस्थाएं 

  • बाल अपराधियों से संबंधित संस्थाएं :किशोर गृह, विशेष गृह ,प्रवेक्षण गृह  । किशोर न्याय अधिनियम 1986 के तहत स्कूली शिक्षा के साथ-साथ व्यवसायिक शिक्षा व चरित्र विकास की व्यवस्था। 
  • महिलाओं के लिए नारी निकेतन :निर्मल छाया ,अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956 की धारा 21 के अनुसार 
  • गैर सरकारी संस्थाओं ज्योति प्रयास। 
9. अन्य उपाय:

  • घर का स्वच्छ स्वस्थ वातावरण। 
  • अच्छा स्कूल अच्छी संगत नैतिक शिक्षा व कानूनों के बारे में जानकारी। 
  • स्वस्थ मनोरंजन। 
  • मानसिक बीमारियों का इलाज। 
  • आर्थिक सहायता के लिए प्रयास 
  • संप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के प्रयास 
  • परामर्श व मार्गदर्शन। 
  • दीवानी व फौजदारी सभी कानूनों को का ठीक प्रकार लागू करना। 
  • अपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने का प्रयास। 
10.पुलिस कर्मियों के लिए अपराध शास्त्र का महत्व :

  • अपराधियों के व्यवहार को समझने में सहायक। 
  • अपराध का मकसद ढूंढने में सहायक। 
  • अपराध के संभावित पीड़ितों को अनुमान लगाने में सहायक। 
  • किसी क्षेत्र विशेष के अपराध जन्म कारकों को समझ कर उनके रोकथाम के उपाय अपनाने में सहायक
  • अपराधियों के प्रति पुलिसकर्मियों के दृष्टिकोण से उचित विकास में सहायक। 
  • अपराध के पीड़ितों के साथ उचित व्यवहार करने में मार्ग मार्गदर्शक 
इस प्रकार से आपराध शास्त्र तथा अपराध शास्त्र का पुलिस के लिए महत्व  से सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !
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19 दिसंबर 2021

एस्कॉर्ट और हथकड़ी कब और किस प्रकार के कैदी को लगाई जाती है

 पिछले  ब्लॉग पोस्ट  हमने वाइटल एरिया में ड्यूटी के दौरान व्हीकल कैसे चेक किया जाता है उसके बारे में हमने जानकरी शेयर किये और अब इस नै ब्लॉग पोस्ट में हम एस्कॉर्ट गार्ड और हथकड़ी किसे कब और कैसे (Escort Guard and Handcluff lagane ka tarika ) लगाया जाता है उसके बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे !

एस्कॉर्ट गार्ड की परिचय :किसी मूल्यवान संपत्ति, विशेष  व्यक्ति या वस्तु को एक जगह से ले जाने और लाने के लिए उनकी सुरक्षा के लिए कुछ पुलिस कर्मियों को ड्यूटी पर लगाई जाती है जिसको एस्कॉर्ट गार्ड कहते हैं। खतरनाक व्यक्ति जिसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर सुरक्षित ले जाने वा लाने के लिए हथकड़ी का प्रयोग किया जाता है। हथकड़ी के प्रयोग के लिए बहूत से पुलिस बल अपना अपना स्टैंडिंग आर्डर बनाया हुआ है जैसे कि दिल्ली पुलिस का स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर 21 व  52 जिसमें हथकड़ी कब और कैसे लगाई जाती है और किन-किन लोगों को हथकड़ी लगाई जाती है तथा एस्कॉर्ट गार्ड के बारे में भी विस्तृत से जानकारी दी गई!

Handcuff ki sharte
Handcuff

 एस्कॉर्ट गार्ड निम्नलिखित स्तिथि  लगाई जाती है 

  • खजाना की रखवाली 
  •  कैदियों की रखवाली 
  •  और महत्वपूर्ण व्यक्तियों

दिल्ली पुलिस के पीपीआर 18 . 37 के में  कैदियों को एस्कॉर्ट गार्ड की संख्या बताई गई है और उस प्रकार खजाने के साथ एक रेल डिब्बा में एक प्रधान सिपाही व दो  सिपाही की ड्यूटी होगी! अगर रेल के डिब्बे दो या दो से अधिक हैं तो उच्च अधिकारी व जरूरी है स्टाफ नियुक्त किया जाएगा। एस्कॉर्ट गार्ड के आने जाने की व्यवस्था संबंधित विभाग करेगा।

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एस्कॉर्ट ड्यूटी में ध्यान देने योग्य बातें

  • ड्यूटी सतर्कता एवं सावधानीपूर्वक दी जाएगी। 
  • रोशनी का पूरा प्रबंध साथ होना चाहिए। 
  • जरूरत अनुसार आर्म्स अमिनेशन होना चाहिए। 
  • गार्ड  एवं कैदी की खाने पीने की व्यवस्था गार्ड इंचार्ज करेगा।
  • गार्केड इन चार्ज  खजाने की सील पैकिंग आदि पहले ही अच्छी प्रकार से चेक करनी चाहिए!
  • हथकड़ी का प्रयोग जरूरी हो तो सही प्रकार से हथकड़ी लगाई जाएगी। 
  • खजाना रेलगाड़ी के जिस डिब्बे में है उसी डिब्बे में गार्ड रहेगी। 
  • अगर रेल गाड़ी खड़ी होती है तो गाड़ी  के दोनों तरफ नीचे उतर कर सुरक्षा की जाएगी। 
  • किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा कैदी को खाने पीने की वस्तु नहीं दी जाएगी। 
  • खजाने की पावती जरूर प्राप्त करें।

हथकड़ी का प्रयोग करने के बाबत निर्देश: प्रेम शंकर शुक्ला बनाम दिल्ली प्रशासन के मामले में उच्चतम न्यायालय AIR 1980 SC 1535 के अनुसार हथकड़ी के प्रयोग के लिए हिदायतें दी है! कि खतरनाक कैदी जिसका पुलिस अभिरक्षा से भागने का अंदेशा है तो उसको हथकड़ी लगाई जाएगी !पुलिस को इस मामले में कैदी पर संगीन जुर्म है तो भी  पुलिस पार्टी अपनी सुविधा के लिए हथकड़ी का प्रयोग नहीं करेगी। इसके लिए अन्य तरीके अपनाएं। जैसे:

  •  पुलिस एस्कॉर्ट की संख्या बढ़ाई जाएगी 
  • और हथियार सहित एस्कॉर्ट लगाई जाएगी 
  • इस पार्टी को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। 
  • कैदियों को सुरक्षित द्वारा ले जाया जाएगा 
सूली बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन AIR 1978 SC 1675  के मामले में उच्चतम न्यायालय ने साधारण अवस्था में हथकड़ी प्रयोग करने के बारे में आदेश दिया। 

किन हालात में हथकड़ी लगाई जाएगी  उसे दिल्ली  पुलिस PPR  26.22 के अनुसार निम्नलिखित व्यक्तियों को हथकड़ी लगाई जाएगी :

  • आज जमानती अपराध जिसमें सजा का प्रावधान कम से कम 3 वर्ष या उससे ज्यादा  हो।
  •  ऐसे व्यक्ति जिन लोगों ने धारा 147 आईपीसी घातक हथियारों के साथ बलवा किया हो। 
  • धारा 75 आईपीसी के अनुसार जिसे अध्याय 12 से 17 के अपराधों में दोबारा दोस्त किया गया हो। 
  • ऐसे खतरनाक व्यक्ति जिनके व्यवहार से लोग भयभीत हो। 
  • सीनाजोरी  करने वाले  कैदी को।
  •  ऐसा व्यक्ति कैदी जो भागने या आत्महत्या करने का प्रयास कर सकता हो। 
  • PPR 26.4 (3) के अनुसार जहां लॉकअप ऐसी हो जिससे कैदियों के निकल भागने का खतरा हो तो हथकड़ी का प्रयोग किया जाएगा।

किन हालात में हथकड़ी प्रयोग नहीं की जाएगी: दिल्ली  पुलिस PPR 26.30 अनुसार निम्नलिखित हालात में हथकड़ी नहीं लगाई जाएगी !
  • हवालात में  हथकड़ी नहीं लगाई जाएगी। 
  • बहुत कमजोर वृद्ध , बच्चे व औरतों को हथकड़ी नहीं लगाई जाएगी। 
  • न्यायालय में हथकड़ी नहीं लगाई जाएगी। 
  • ऐसे व्यक्ति को भी हथकड़ी नहीं लगाई जाएगी जो धारा 124(A) व  153 दंड संहिता के अनुसार पहली बार गिरफ्तार किया गया हो।
  • MP, MLA और डिप्लोमेट आदि को हथकड़ी  नहीं लगाई जाएगी।

हथकड़ी का प्रयोग करते समय सावधानियां :दिल्ली पुलिस PPR 18 . 30 के अनुसार हथकड़ी का प्रयोग करते समय निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए :

  • इंचार्ज एस्कॉर्ट गार्ड हथकड़ी ठीक प्रकार से लगवाने का स्वयं जिम्मेदार होगा। 
  • अगर कैदी  सीनाजोर है तो पीछे हाथ करके हथकड़ी लगाई जाएगी !
  • खाना खाते समय या बाथरूम जाते समय एक हाथ की  हथकड़ी खोली जाएगी व कैदी को विशेष ध्यान रखा जाएगा। 
  • अगर हाथ पतला हो तो चेन  डालकर हथकड़ी लगाई जाएगी।
  •  हथकड़ी का कुंडा  एस्कॉर्ट के सिपाही का बेल्ट से लगा होना चाहिए।
  •  हथकड़ी को लगाने से पहले अच्छी प्रकार से चेक कर लेना चाहिए। 
  • हथकड़ी लगाते समय सतर्क रहें
  •  हथकड़ी की चाबी कैदी की पहुंच से दूर होनी चाहिए

इस प्रकार से एस्कॉर्ट पार्टी तठे हथकड़ी लगाने से सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

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  4. क्राइम सीन पे सबसे पहले करनेवाले काम एक पुलिस ऑफिसर के द्वारा
  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

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