16 अगस्त 2018

कार्डों एंड सर्च ऑपरेशन क्या होता है ?

पिछले पोस्ट में हमने सेक्शन बैटल ड्रिल में कितना स्टेज है के बारे में जानकारी प्राप्त की इस पोस्ट में हम कार्डों एंड सर्च (Cordon and Search Operation ki basic jankari) क्या होता है उसके बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे !


CASO (Cordon and Search Operation ki basic jankari) एक एंटी टेररिस्ट ऑपरेशन होता  है जो ज्यादातर आतकवाद प्रभावित एरिया में कंडक्ट किया जाता है !जैसे की हम जानते है की आतंवादी अक्सर गांवो में सुरक्षा बलो द्वारा पकडे जाने के भय  से या किसी शक से बचने के लिए शरण लेते है क्यों की गाँववासियो का व्यवहार आतंकवादियो के प्रति या तो नरम (sympathy)होता है या फिर भय के कारण वे उनकी खबर सुरक्षा बालो को नहीं देते !

जरुर पढ़े:सेक्शन बैटल ड्रिल और उसे सफल बनाने वाली बातें

CASO(Cordon and Search Operation ki basic jankari) आतंकवाद के खिलाफ एक काफी सफल ऑपरेशन होता है और इसको सही तरीके से नहीं किया जाए तो सामान्य नागरिको  आर्म्ड फाॅर्स के खिलाफ होने की होने का खतरा रहता है !

इसीलिए आतंकवादियो की गाँव में मौजूदगी  के बारे में पक्की खबर मिलते सुरक्षा बालो को शीघ्र ही कार्डों और सर्च(CASO) ऑपरेशन का योजना तैयार करनी चाहिए ताकि वे मिली खबर का पूरा फायदा उठा सके !योजना ऐसा बनाने चाहिए जिससे की आम लोगो को परेशानी कम  से कम  हो !

इस पोस्ट को पढने के बाद आप निम्न बातो को जान पाएंगे :
CASO Operation Deployment
1. CASO(Cordon and Search Operation ki basic jankari) का उद्देश्य
2.आतंकवादियो के काम करने का तरतीब (Aatankwadio ke kaam karne ka tartib)
3.CASO के दौरान सुरक्षा बालो के लिए ध्यान में रखनेवाली बाते (CASO ke dauran surksha balo ke lie dhyan me rakhnewali baate ) 

जरुर पढ़े:4 बाते शत्रु के कारगर फायर के अंदर आने पे करनी चाहिए

1. CASO(Cordon and Search Operation ki basic jankari) का उद्देश्य : CASO का उद्देश्य गांवो की तलासी एवं उनमे छिपे हुए आतंकवादियो को घेरने का होता है !  गांवो की तलाशी के निम्न उद्देश्य होते है :
  • आतंकवादियो को पता लगाना , पकड़ना या उन्हें मारना 
  • हथियार , गोला बारूद एवं डाक्यूमेंट्स बरामद करना या कब्जे में लेना 
  • आतंकवादियो एवं उनसे हमदर्दी रखने वाले गाँववासियो के दिलो में डर पैदा करने के लिए !
  • गैर क़ानूनी कामो जैसे हथियारों एवं गोला बारूद बनाने  तथा नकली नोटों एवं अश्लील पुस्तकों को छापने  वाले लोगो का भाडा फोड़ करना उन्हें पकड़ना या मरना !
अभियान का उद्देश्य सुरक्षा बलो को बिलकुल स्पस्ट होना चाहिए क्यों की यह अभियान  नतीजे पर असर डालती है !

जरुर पढ़े:3 तरीके दुश्मन के फायर पोजीशन को पता लगने के

यदि उद्देश्य गाँववासिओ की शिनाख्त करना है तो ऐसे में गाँव का घेराव रात में लग जाना चाहिए तथा गाँववासियो की शिनाख्त उजाला होने पर करनी चाहिए क्यों की गांववासी ज्यादातर दिन के समय में अपने खेतो में या फिर धंधो के लिए बहार चले जाते है और शाम को लौटते है !इसलिए अगर गाँव का घेराव दिन के समय किया जाए तो ज्यादातर गांववासी गाँव में नहीं मिलेंगे !

2.आतंकवादियो के काम करने का तरतीब (Aatankwadio ke kaam karne ka tartib): आतंकवादियो के गाँव में आने का मोडस ओपेरंडी (Modus Operandi) कुछ इस प्रकार से होते है :
(a) गाँव आने का उद्देश्य : आतंकवादी आमतौर पर अपने कैंप या हाईड आउट जो की दूर जंगलो या ऊँची पहाड़ो या अन्तराष्ट्रीय सीमओं के दूसरी तरफ बने होते है यहाँ से अपनी करवाई करते है! आतंकवादी गाँववासियो या लोकल जनता की मदद के बगैर अपनी करवाई नहीं कर सकते , इसलिए वे गांवो में खाने की तलाश में, रहने की जगह ढूढने, सुरक्षा बालो के बारे में खबरे हासिल करने , पैसा लेने अथवा गलत सूचनाये फ़ैलाने के इरादे से आते !

जरुर पढ़े:सेक्शन फार्मेशन और सेक्शन फार्मेशन का बनावट

(b)आतंकवादियो के द्वारा अपनाये जाने वाले तरीका :जब भी आतंकवादी गाँव में आते है वे ऐसे तरीके अपनाते है जिसमे उन्हें पकड़ जाने का खतरा न हो व उसका टास्क भी आसानी से पूरा हो जाये ! आतंकवादियो के लगभग हर गाँव में मददगार होते है जोकि उन्हें खाना, रहने के लिए जगह तथा सुरक्षा बलों के बारे में तथा उनकी गतिविधिओ के बारे में खबरे देते है !

आतंकवादियो  द्वारा अपनाये जाने वाले कुछ तरीके , इस प्रकार है :

  • वे ऐसे गाँव में नहीं जाते जहा उनके मददगार  न हो !
  • वे गाँव में खुलेआम हथियार लेकर नहीं घूमते न ही वे वर्दी पहनते है !
  • आतंकवादी ज्यादातर रात के अँधेरे में गाँव में आते है व उजाला होते ही गाँव छोड़कर चले जाते है ! उनका मकसद गाँव में कम से कम समय गुजरने का होता  है !
  • जब आतंकवादियो को पकडे जाने का खतरा होता है तो वे सुरक्षा बलों को गुमराह करने के उद्देश्य से हवा में कुछ राउंड फायर कर बचकर निकल भागने की कोशिस करते है ! यदि वे इसमें कामयाब नहीं होते तो वे लोकल जनता है साथ मिल जाते है या फिर गाँव के नजदीक किसी जगह छुप जाते है !


  • वे अक्सर गाँव वालो को संतरी के रूप में उपयोग करते है जोकि सुरक्षा बलो की गतिविधियों एवं उनके आने की खबर तुरंत आतंकवादीओ को देते है !
  • आतंकवादी गाँव में अक्सर ऐसे मकानों में रहना पसंद करते है जो या तो खाली पड़े हो और गाँव के बाहरी किनारों में बने हुए हो  ताकि सुरक्षा बलों के आने की सुचना मिलने पर वे आसानी से भाग सके !
  • वे ऐसे माकन भी ढूढ़ते है जिनके चारो तरफ पेड़ , झाडिया तथा ऊँची उंगी हुई खेती हो जो उन्हें भागने में सहायता करे !
  • यदि वे फिर भी सुरक्षा बलों के घेरे में फंस जाते है तो वे कार्डों (Cordon)  में खली जगह देख भागने की कोशिश करते है , असफल होने पर वे सुरक्षा बलों का मुकाबला भी कर सकते है !



3.CASO के दौरान सुरक्षा बालो के लिए ध्यान में रखनेवाली बाते (CASO ke dauran surksha balo ke lie dhyan me rakhnewali baate ) इस ऑपरेशन के लिए सुरक्षा बालो को निम्न बातो के ऊपर ध्यान रखना चाहिए :
  • ऐसे अभियान पक्की सुचना मिलने के बाद ही करने चाहिए ताकि अभियान में सफलता  मिले और गाँव वासिओ को भी बेवजह परेशानी न हो !
  • कार्डों(Cordon) को दर्जो (tiers)में लगाना चाहिए ताकि  जैसे की बहरी कार्डों तथा अन्दर का कार्डों (Inner Cordon) ताकि भागने  के सभी रास्तो की तलाशी से पहले बंद किया जा सके !कार्डों लगाते समय रस्ते बड़ी सावधानी के साथ चुनने चाहिए ताकि सरप्राइज बरक़रार रखा जा सके !
  • कार्डों को लगाते समय किसी भी आदमी को गाँव के अन्दर या गाँव से बाहर नहीं निकलने देना चाहिए ! यदि कोई आदमी कार्डों लगते समय ऐसी कोशिश करता है तो उसे वही पकडकर पूछताछ करनी चाहिए !
  • तलाशी के लिए गाँव में घुसने से पहले सर्च पार्टी को लौन्चिंग बेस गाँव के बहार बना लेना चाहिए और वही से तलाशी के लिए तर्तिबबार बढ़ना चाहिए !

  • मकानों की तलाशी मकान मालिक तथा लोकल पुलिस की उपस्तिथि में होनी चाहिए इसके आलावा गाँव का मुखिया तथा लेडी पुलिस या पंचायत की महिला सदस्य साथ में होनी चाहिए !
  • बिल्ट उप एरिया की तलाशी बहुत ही सावधानी तथा तरतिबबार  करनी चाहिए ! इसमें जल्दी नहीं करनी चाहिए ! सर्च पार्टी को दो ग्रुप में बिभाजित कर देना चाहिए ! सपोर्ट ग्रुप और सर्च ग्रुप , सपोर्ट ग्रुप तलाशी वाले मकान को कार्डों करेगा या सपोर्ट देगा तथा दूसरा ग्रुप माकन की तलाशी  लेगा !
  • जूनियर लीडर्स , सेक्शन कमांडर तथा प्लाटून कमांडरो को अपने ट्रूप्स को विस्तारपुर्वक ब्रीफ  करना बहुत जरुरी है ताकि वे हर उत्पन्न होने वाले हालत से निपट सके , उन्हें यह भी मालूम होना चाहिए की वे भागते हुए आतंकवादियो के खिलाफ क्या करवाई करनी है !
  • अभियान में जाने से पहले यह यकीनकर लेना चाहिए की सभी ट्रूप्स ने बुलेट प्रूफ जैकेट तथा हेलमेट पहना हुवा है ! यदि बुलेट प्रूफ जैकेट पर्याप्त मात्र में नहीं है तो पहले सर्च पार्टी के जैकेट दिए जाये और शेष कार्डों पार्टी को दिए जाए !
  • अभियान में जाने से पहले पर्याप्त मात्र में ग्रेनेड , स्टन ग्रेनेड स्मोक कंटेनर तथा आसू गैस शेल भी साथ में लेने चाहिए !
  • सर्च करने पहले आतंकवादियो द्वारा लगाई गई माइंस एवं बूबी ट्रूप्स के खिलाफ सावधान रहना चाहिए !
इस प्रकार से कार्डों एंड सर्च क्या होता है से सम्बंधित पहला पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की ये पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज लाइक करके हमलोगों को और प्रोतोसाहित करे बेहतर लिखने के लिए !

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  1. पेट्रोलिंग और नाईट पेट्रोलिंग और उसके टास्क और नफरी
  2. अम्बुश और काउंटर अम्बुश, अम्बुश का उद्देश्य , अम्बुश का पार्टिया , अम्बुश का टारगेट
  3. सेक्शन फार्मेशन एंड प्लाटून फार्मेशन के फायदे और नुकशान
  4. टेक्टिकल वर्ड्स और उसका मतलब हिंदी में -II
  5. टेक्टिकल वर्ड्स और उसका मतलब हिंदी में -I
  6. कामौफ्लाज और कांसिल्मेंट के ऊपर एक संक्षिप्त जानकारी
  7. पेट्रोलिंग के परिभाषा और पेट्रोलिंग के प्रकार
  8. पेट्रोलिंग पार्टी को ब्रीफिंग देने का तरीका ?
  9. अम्बुश का परिभाषा और अम्बुश की पार्टिया
  10. अम्बुश  की पार्टियो को ब्रीफिंग देने के तरीका

10 अगस्त 2018

सेक्शन बैटल ड्रिल की स्टेज और करवाई

पिछले पोस्ट में हमने टैक्टिस के पोस्ट में हमने संतरी के ब्रीफिंग के बारेमे जानकारी प्राप्त किये और अब  इस पोस्ट में सेक्शन बैटल ड्रिल  के कितने स्टेज होते है(Section Battle Drill ke Stage) और उस दौरान क्या करवाई की जाती है उसके बारे में जानकारी प्राप्त करेगे !


हम आये दिन सुनते है की कही आतंकवादी  से तो कही नक्सालाइट से रोज ब रोज कही न कही आर्म्ड फाॅर्स से मुठभेड़ की खबरे आये दिन न्यूज़ पेपर्स या टीवी पे हम देखते और सुनते है तो कही खुद उस ऑपरेशन में सामिल भी हम  रहते है ! इसलिए हमे सेक्शन बैटल ड्रिल के बारे में अच्छी जानकारी होनी बहुत जरुरी है !

जरुर पढ़े:अम्बुश की जुबानी हुक्म क्या होता है और इसमें सामिल होने वाले मुख्य बाते

ऐसे ऑपरेशन में सेक्शन बैटल ड्रिल  की सिखलाई जो बेसिक ट्रेनिंग के दौरान दी जाती है वह काफी अहमियत रखती है! क्यों की एंटी नक्सालाइट या एंटी टेररिस्ट ज्यादातर ऑपरेशन हम पट्रोलिंग या एक जगह से दुसरे जगह पैदल चलकर ही करते है !और उस मूवमेंट के दौरान सेक्शन बैटल ड्रिल के दौरान सिखलाई गई फार्मेशन और हिदायते ही काम आती है !

इस पोस्ट को पढने के बाद  हम सेक्शन बैटल ड्रिल से सम्बंधित निम्न बातो को जान पाएंगे :
असाल्ट की करवाई
असाल्ट की करवाई 
1.सेक्शन बैटल ड्रिल के कौन कौन से स्टेज होते है ?(Section Battle Drill ke kaun kaun stage hote hai ?)
2.सेक्शन बैटल ड्रिल  के दौरान दुश्मन को कैसे पता लगा कर बर्बाद करते है ?(Section Battle drill ke dauran dusman ko kaise pta lagate aur barbad karte hai )
3.सेक्शन बैटल ड्रिल में हमला के दौरान किन किन बातो का ध्यान रखना चाहिए ?(Section Battle Drill me attck ke dauran kin kin baato ka dhyan rakhna chahie)
4.सेक्शन बैटल ड्रिल में रि-ओरगानईज के दौरन क्या क्या करवाई की जाती है ?(Section Battle Drill me reorganise ke dauran kya kya karwai ki jaati hai?) 

जरुर पढ़े:अम्बुश की जुबानी हुक्म क्या होता है और इसमें सामिल होने वाले मुख्य बाते
   
1.सेक्शन बैटल ड्रिल के कौन कौन से स्टेज होते है ?(Section Battle Drill ke kaun kaun stage hote hai ?): सेक्शन बैटल ड्रिल की पूरी करवाई चार भंगो में पूरी होती है :

  • प्रथम स्टेज - दुश्मन के कारगर फायर के अन्दर आने पर करवाई 
  • द्वितीय स्टेज- दुश्मन को पता लगा और बर्बाद करना !
  • तृतीय स्टेज - हमला 
  • चतुर्थ  स्टेज - पुनर्गठन(रि-ओर्ग नाईज)  की करवाई   

2.सेक्शन बैटल ड्रिल के दौरान दुश्मन को कैसे पता लगा कर बर्बाद करते है ?(Section Battle drill ke dauran dusman ko kaise pta lagate aur barbad karte hai ): जब हम सेक्शन फार्मेशन अख्तियार करके किसी ऑपरेशन के दौरान मूव करते है और दुश्मन की होने की अंदेशा होने पर दुशमन का पता लगाने और बर्बाद करने के लिए निम्न करवाई की जाती है :

  • देखभाल के द्वारा(By Observation) : फायर के आवाज सुनने के बाद सभी को अपने अपने जिम्मेवारी के एरिया में देखना चाहिए और जहा से फायर का शोला दिखाई दिया और फायर की आवाज़ सुनाई देने में लगा समय के अनुसार  दुश्मन का लोकेशन और दुरी का पता लगते है ! अगर आधा मिनट तक कुछ भी दिखाई नहीं दिया तो समझ लेना चाहिए की दुश्मन को हम देख कर नहीं पता लगा सकते!
  • फायर के द्वारा(By Fire) : अगर दुश्मन का पता देखकर नहीं लगाया जा सका तो सेक्शन कमांडर को चाहिए की अपने सेक्शन के दो राइफल मैन कवर में रहते हुए दो राउंड्स फायर करने का फायर कण्ट्रोल आर्डर देना चाहिए और सेक्शन के बाकि के जवान अपने अपने एरिया में दुश्मन के हरकत या फायर को देखना चाहिए ! क्यों की हो सकता है की दुश्मन हमारे फायर का जवाब अपने फायर से दे और उसका पोजीशन पता चल जाए !  यदि दुश्मन हमारे फायर का जवाब अपने फायर से नहीं दिया तो सेक्शन कमांडर को चाहिए की एक बार और कोशिस करे और अपने सेक्शन के दो दुसरे राइफल मैन को दो दो राउंड्स फायर करने के लिए फायर कण्ट्रोल आर्डर दे और अगर इस बार भी दुशमन ने हमारेर फायर का जबाब नहीं दिया तो समझ लेना चाहिए की दुश्मन या तो भाग गया है या बहुत अच्छा सिखाई प्राप्त किया हुवा है ! 
  • मूवमेंट के द्वारा(By Movement) : सेक्शन कमांडर अपने सेक्शन के दो जवानों को आर्डर देंगा की खड़े होगर दौड़ते हुए दुसरे किसी आड़ जो की 10 गज दूर हो उसको पकडे ! वो लोग को हो सकता है की ऐसी करवाई एक दो बार करनी पड़े और फिर भी दुश्मन का फायर नहीं आता है तो समझले की दुश्मन बहुत अच्छी तरह से ट्रेनिंग पाया हुवा है और ओ हमारे ऐसे ट्रिक्स में नहीं फसना चाहता है ! अगर इतना करने के बाद भी दुश्मन का फायर नही आता है तो सेक्शन कमांडर को चाहिए की अपना एडवांस की करवाई जारी रखे और आगे बढे !
इस प्रकार से दुश्मन को पता लगते और बर्बाद करते है !



3.सेक्शन बैटल ड्रिल में हमला के दौरान किन किन बातो का ध्यान रखना चाहिए ?(Section Battle Drill me attck ke dauran kin kin baato ka dhyan rakhna chahie):असाल्ट या हमला के दौरान केलिए निम्न महत्वपूर्ण बाते है जिसको अमल में लाना चाहिए :
  • सेक्शन कमांडर राइफल ग्रुप को लीड करेगा ! वह समानतः राइफल ग्रुप के बिच में रहता है !
  • सभी मूवमेंट के लिए कवरिंग फायर के द्वारा ही करना चाहिए ! कवरिंग फिरेर का एंगल जहा तक हो सके चौड़ा रखना चाहिए !
  • जब राइफल ग्रुप मूव करके दुसरे बाउंड पर फायर पोजीशन ले लेता है तो LMG ग्रुप को चाहिए की वह भी आगे बढ़कर दूसरी बाउंड के ऊपर अपना पोजीशन लेलेना चाहिए !एक फायर LMG ग्रुप अपना पोजीशन लेली और कवरिंग सपोर्ट फायर तो फिर राइफल ग्रुप को चाहिए के आगे को एडवांस की करवाई करे !यह करवाई तब तक करे जब तक की असाल्ट लाइन के पास न पहुच जाये !
  • समानतः हमाल दौते हुए कमर(Hip fire) के ऊपर राइफल रख के फायर करते हुए किया जाता है ! सेक्शन कमांडर जब आर्डर देता है चार्ज तो सेक्शन दौड़ते हुए हमला करती है ! यह समानतः 100 से 50 यार्ड के दुरी से की जाती है !
  • LMG नम्बर 1 और नम्बर 2 उचित मात्र में मग्जिन और अमुनिसन अपने साथ रखते है सेक्शन अटैक के लिए !
  • असाल्ट या हमला के दौरान LMG जहा तक संभव हो फायर कवर देता है यह निश्चित करते हुए की अपने राइफल ग्रुप फायर के अन्दर न आजाये !

4.सेक्शन बैटल ड्रिल में रि-ओरगानईज के दौरन क्या क्या करवाई की जाती है ?(Section Battle Drill me reorganise ke dauran kya kya karwai ki jaati hai?) रि-ओरगानईज की करवाई इस प्रकार से की जाती  है :
  • राइफल ग्रुप हमला के बाद जैसे ही ऑब्जेक्टिव पे कब्ज़ा कर अपना पोजीशन लेलेता है वैसे ही LMG ग्रुप दौड़ते हुए उनको ऑब्जेक्टिव के ऊपर ज्वाइन करता है !
  • सेक्शन कमांडर ऑब्जेक्टिव के एरिया को सर्च करवाता है की कोई दुश्मन कही घायल या छुपा हुवा तो नहीं है !सभी राइफल नम्बर सर्च में नहीं लगाये जाते है कुछ सर्च करते है और कुछ उनको कवर करते है !
  • उसके बाद सेक्शन कमांडर अपने ग्रुप को ऑब्जेक्टिव के ऊपर लगता है और राइफलमैन तथा LMG ग्रुप को अर्क ऑफ़ ऑब्जरवेशन बताता है तथा निशान बताता है !
  •  सेक्शन को ऑब्जेक्टिव पर लगाने के बाद निम्न बातो को खुद चेक करता है 1(i) कासुअलिटी (ii) अमुनिसन की स्टॉक को चेक्क करता है (iii) LMG के मगज़ीन को फिर से रेइफ़िल्लिन्ग करता है और अपने प्लाटून कमांडर को इन्फॉर्म करता है 
  • और अपने प्लाटून कमांडर के अगले आदेश का इतेंजर करता है !

इस प्रकार से सेक्शन बैटल ड्रिल के दौरान की करवाई सम्बंधित ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई ! उम्मीद है की ये पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज लाइक करके हमलोगों को और प्रोतोसाहित करे बेहतर लिखने के लिए !

इन्हें  भी  पढ़े :
  1. वर्बल आर्डर में जमीनी निशान देने का तरीका क्या होना चाहिए ?
  2. फौजी टैक्टिकल वर्ड गुरिल्ला बैंड और गुरिल्ला बेस क्या होता है ?
  3. काउंटर इन्सेर्जेंसी पेट्रोलिंग और कन्वेंशनल पेट्रोलिंग में अंतर
  4. CI पेट्रोलिंग के प्रकार और CI पेट्रोलिंग के लिए जरुरी बाते
  5. CI ऑपरेशन के दौरान की पेट्रोलिंग करते समय ध्यान में रखनेवाली कुछ मुख्य बाते
  6. ड्राइव एंड हंट ऑपरेशन क्या होता है ?
  7. ड्राइव एंड हंट ऑपरेशन की पहले स्टेज में की जानेवाल...
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09 अगस्त 2018

योग करने के समय ध्यान में रखने वाली बाते

पीछले पोस्ट में हमने योग के शाब्दिक अर्थ क्या होता है इसके बरे में जानकारी प्राप्त किये थे और इस पोस्ट में हम जानेगे की योग करने का सही तैयारी और तरीका क्या है ?


जैसे की हम जानते है की योग के अलग अलग सम्प्रदायों , परम्परा , दर्शनों, धर्मो एवं गुरु शिष्य परम्परा के चलते भिन्न  भिन्न पारंपरिक पठाशालाओ का मार्ग होते हुए आज इतने उचाई पर पंहुचा है  ! इनमे ज्ञानयोग , भक्तियोग, कर्मयोग , पतंजल योग , कुंडलिनीयोग , हठयोग , ध्यानयोग , मन्त्र योग , राजयोग , जैन योग , बौध योग आदि नाम के समूह या पाठशाला सम्मिलित है !इन  प्रत्येक समप्रदाय के अपना अलग दृष्टिकोण और अभ्यास  क्रम है जिसके माध्यम से प्रत्येक योग सम्प्रदायों या समूहों ने  योग के मूल उद्देश्य और लक्ष्य तक पहुचने में सफलता प्राप्त कराने में एक अहम भूमिका अदा की  !

जरुर पढ़े:पीटी का इतिहास, सिस्टम, पीटी का उद्देश्य और पीटी का उसूल

निम्नलिखित यौगिक अभ्यास है जो की  सर्वाधिक अभ्यास किये जाते और उसका महत्व  :
Yoga Position
Yoga Pic src-Google
यम : यह प्रतिरोधक एवं नियम अनुपलिनीय है ! इसे योग अभ्यासों को शुरू करने से पहले करना आपेक्षित और अनिवार्य माना  जाता है !
  • आसन :इस का अभ्यास शारीर एवं मन में स्थायित्व लाने में सक्षम है ! आसन का अभ्यास महत्वपूर्ण समय सीमा तक मनोदैहिक विधि पूर्वक अलग अलग करने से स्वाम के अस्तित्व के प्रति दैहिक स्थिति एवं स्थिर जागरूकता बनाये रखने की योग्यता प्रदान करती है !
  • प्राणायाम : श्वास - प्रश्वास प्रक्रिया का सुव्यवस्थित एवं नियमित अभ्यास है ! यह श्वसन प्रकिर्या के पार्टी जागरूकता उत्पन्न करने एवं उसके पश्चात् मन के प्रति सजगता उत्पन्न करने तथा मन पर नियंत्रण स्थापित करने में सहायता करता है !इस अभ्यास की परम्भिक अवस्था में श्वास - प्रश्वास प्रक्रिया को सजगता पूर्वक किया जाता है !बाद में यह क्रिया नियमित रूप से नियंत्रित एवं निर्देशित प्रकिया के माध्यम से नियमित हो जाती है !प्राणायाम का अभ्यास नासिका , मुख एवं शारीर के अन्य छिद्रों तथा शारीर के आतंरिक एवं बहरी मार्गो तक जागरूकता बढ़ता है !प्राणायाम अभ्यास के दौरान नियमित , नियंत्रित और निरीक्षित प्रिकिर्य द्वारा श्वास   के अन्दर लेना पूरक कहलाता है !नियमित , नियंत्रित और निरीक्षित प्रक्रिया द्वारा स को शारीर के अन्दर रोकने की अवस्था को कुंभक  नियमित , नियंत्रित और निरीक्षित प्रक्रिया द्वारा स को शारीर के बहार छोड़ना रेचक कहलाता है !
  • प्रत्याहार : इस प्रक्रिया के अभ्यास से व्यक्ति अपनी इन्द्रियो के मध्यम से सांसारिक विषय का त्याग कर अपने मन तथा चैतन्य केंद के एकीकरण का प्रयास करता है !
  • धारणा: इस प्रक्रिया के अभ्यास से मनोयोग के व्यापक आधार क्षेत्र के एकीकरण का प्रयास करता है, यह एकीकरण बाद में ध्यान में परिवर्तित हो जाता है !
  • ध्यान : इस प्रक्रिया में चिंतन एवं एकीकरण रहने पर कुछ समय पश्चात् यह समाधि की अवस्था में परिवर्तित हो जाता है !
  • बांध एवं मुद्रा : यह ऐसे अभ्यास है जो प्राणायाम से सम्बंधित है ! ये उच्च यौगिक अभ्यास के प्रसिद्द रूप माने जाते है जो मुख्य रूप से नियंत्रित श्वसन के साथ विशेष शारीरिक बंधो एवं विभिन्न मुद्राओ के द्वारा किया जाता है ! यही अभ्यास आगे चलकर मन पर नियंत्रण स्थापित करता है और उच्चतर यौगिक सिद्धियों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है ! हलाकि ध्यान का अभ्यास जो व्यक्ति को आत्मबोध एवं श्रेष्ठता की ओर ले जाता है ! योग साधना पद्धति का सार मन जाता है !
  • षट्कर्म : शारीर एवं मन शोधन का सुव्यवस्थित एवं नियमित अध्यास है जो शारीर में एकत्रित हुए विषैले पदार्थो को हटाने में सहायता प्रदान करता है !
  • युक्ताहार : स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त सुव्यवस्थित एवं नियमित भोजन का समर्थन करता है !
  • मन्त्र जाप : मंत्रो का चिकित्सीय पद्धति से उच्चारण ही जाप अथवा दैवीय नाम कहलाता है !मन्त्र जाप सकारात्मक मानसिक उर्जा की सृष्टि करता है जो धीरे धीरे तनाव से  बहार आने में सहायता करता है !
  • युक्त कर्म : स्वास्थ्य जीवन के लिए सम्यक कर्म की प्रेरणा देता है !

योग करने के लिए उचित दिशा निर्देश  निम्न है : योग तो हम सभी आज कर करने लगते है या तो किसी के देख रेख में या विडियो देख कर योग करते है ! लेकिंग योग करने के लिए कुछ खास निर्देश है उसे हमे जरुर पालन करना चाहिए जिससे की योग का सही प्रतिफल प्राप्त हो सके !

योग अभ्यास से पहले :
  • शौच : शौच का अर्थ है शोधन , यह योग अभ्यास के लिए एक महत्वपूर्ण एवं पूर्व आपेक्षित a है ! इसके अंतर्गत आसपास का बातावरण शारीर एवं मन की शुद्धि की जाता है !
  • योग अभ्यास शांत वातावरण में आराम के साथ शारीर एवं मन को शिथिल करके किया जाना चाहिए !
  • योग अभ्यास खाली पेट अथवा अल्पाहार लेकर करना चाहिए ! यदि अभ्यास के समय कमजोरी महसूस होतो गुनगुने पानी थोडा सी शहद मिलाकर लेना चाहिए !
  • योग अभ्यास मल एवं मूत्र का विशार्जन करने के उपरांत प्रारम्भ करना चाहिए !
  • अभ्यास करने के लिए चटाई , दरी कम्बल अथवा योग मत का प्रयोग करना चाहिए !
  • अभ्यास करते समय शारीर की गतिविधि आसानी से हो इसके लिए सूती के हल्के और आरामदायक वस्त्र पहनना चाहिए !
  • थकावट , बीमारी, जल्दीबाजी एवं तनाव की स्थति में योग नहीं करना चाहिए !
  • यदि पुराने रोग , पीड़ा एवं हृदय सम्बंधित समस्या होतो एसी स्थिति में योग अभ्यास शुरू करने से पहले चिकित्सक अथवा योग विशेषग्य से परामर्श लेना चाहिए !

योग अभ्यास के दौरान :
  • अभ्यास सत्र प्रार्थना अथवा स्तुति से प्रारम्भ करना चाहिए क्योकि प्रार्थना अथवा स्तुति मन एवं मस्तिष्क को विश्राम प्रदान करने के लिए शांत वातावरण निर्मित करता है !
  • योग अभ्यास आरामदायक स्थिति में शारीर एवं श्वास प्रश्वास की सजगता के साथ धीरे धीरे प्रारम्भ करना चाहिए !
  • अभ्यास के समय श्वास - प्रश्वास की गति रोकनी नहीं चाहिए जब तक की आपको ऐसा करने के लिए विशेष रूप से खा न जाए !
  • श्वास प्रश्वास सदैव नासारर्न्ध्रो से ही लेना चाहिए जब तक की आपको अन्य विधि से श्वास प्रश्वास लेने के लिए न कहा जाय !
  • अभ्यास के समय शारीर को शिथिल रखे और शारीर को सख्त नहीं करे ! शरीर को किसी भी प्रकार से झटके से बचाए !
  • अपनी शारीर एवं मानसिक क्षमता के अनुसार ही योग अभ्यास करना चैये ! अभ्यास के अच्छे परिणाम आने में कुछ समय लगता है ! इसलिए लगातार और नियमित अभ्यास बहुत आवश्यक है !
  • प्रत्येक योग अभ्यास के लिए ध्यातव्य निर्देश एवं सावधानिया तथा सीमाए होती है !
  • योग सत्र का समापन सदैव ध्यान एवं गहन मौन तथा शांति पाठ से करना चाहिए !
अभ्यास के बाद 
  • अभ्यास के 20-30 मिनट के बाद स्नान करना चाहिए !
  • अभ्यास के 20-30 मिनट बाद ही आहार ग्रहण करना चाहिए !
इस प्रकार से योग करने के निर्देश से सम्बंधित ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई !उम्मीद है की ये पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे  और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज  लाइक करके हमलोगों को और प्रोतोसाहित करे बेहतर लिखने के लिए !
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  • पीटी का इतिहास, सिस्टम, पीटी का उद्देश्य और पीटी का उसूल
  • फिजिकल ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाले इक्विपमेंट और उसका अहमियत
  • पुलिस फिजिकल ट्रेनिंग के सिद्धांत, उसूल और हादसे रोकने के तरीका
  • योग और शारीरिक व्याम में इसका महत्व
  • पीटी ट्रेनिंग कोर्स से सम्बंधित कुछ बेसिक जानकारिया
  • बैडमिंटन के इतिहास और बैडमिंटन के कोर्ट का नापजोख
  • 10 बेसिक जानकारी बास्केट बॉल खेल के बारे में
  • 21 जून को योग दिवस को क्यों मनाया जाता है ?

  • 04 अगस्त 2018

    योग क्या है और योग का शाब्दिक अर्थ क्या होता है ?

    योग के पिछले पोस्ट में हमने योग दिवस को 21 जून को मनाया जाता है उसके बारे में जानकारी प्राप्त किया इस पोस्ट  में हम योग क्या है और उसका शाब्दिक अर्थ क्या होता है इसके बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे  !


    जैसे की आप जानते है की 21 जून को योग दिवश मनाया जाता है इसी से सम्बंधित एक योग वर्कशॉप में मुझे भी जाने का मौका मिला और वहा पे जो सिखने को मिला उसी को मै सोचा की क्यों नहीं एक ब्लॉग पोस्ट लिख कर शेयर किया जाए, उसी को एक ब्लॉग के रूप में शेयर कर रहा भाग   !


    आज के इस पोस्ट के माध्यम से हम योग के निम्न बातो को जानेगे :
    1. योग का शाब्दिक अर्थ (Yog ka shabdik arth)
    2. योग का इतिहास और विकाश (Yog ka itihas aur vikash)
    3. योग के कुछ चमत्कारिक बाते (Yog ke kuchh adybhut bate)

    1. योग का शाब्दिक अर्थ (Yog ka shabdik arth): सार  के रूप  कहे तो योग आध्यात्मिक अनुशासन एवं अत्यंत सूक्ष्म विज्ञान पर आधारित ज्ञान है जो मन और शारीर के बिच सामंजस्य स्थापित करता है !

    यह स्वस्थ जीवन की कला विज्ञान है पाणिनीय व्याकरण के अनुसार यह तीन अर्थो में प्रयुक्त होता है :
    1. यूज समाधौ = समाधि
    2. युजिर योगे = जोड़ 
    3. यूज संयमने = सामंजस्य
    यौगिक ग्रंथो के अनुसार , योग अभ्यास व्यक्तिगत चेतनता को सार्वभौमिक चेतनता के साथ एकाकार कर देता है !आधुनिक वैज्ञानिको के अनुसार ब्रह्माण्ड में जो कुछ भी है वह परमाणु का प्रकटीकरण मात्र है !


    योग  का प्रयोग आतंरिक विज्ञान के रूप में भी किया जाता है , जो विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाओ को सम्मिलन है , जिसके माध्यम से मनुष्य शारीर एवं मन के बिच सामंजस्य स्थापित कर आत्म साक्षत्कार करता है ! 

    2. योग का इतिहास और विकाश (Yog ka itihas aur vikash): योग विद्या का उद्भव हजारो वर्ष प्राचीन है ! श्रुति परम्परा के अनुसार भागवान  शिव को  योग विद्या के प्रथम आदि गुरु , योगी या आदियोगी है ! हजारो हजार वर्ष पूर्व हिमालय में कांति सरोवर झील के किनारे आदियोगी के योग का गूढ़ ज्ञान पौराणिक सप्त ऋषियों को दिया था !

    इस सप्त ऋषयो ने इस अत्यंत महत्वपूर्ण योग विद्या को एशिया , मध्य पूर्व , उतारी अफ्रीका एवं दक्षिण अमेरिका सहित विश्व के अलग अलग भागो में प्रसारित किया !


    आधुनिक विद्वान सम्पूर्ण पृथ्वी की प्राचीन संस्कृतियों में एक समानता मिलने पर अचंभित है , यह एक अत्यंत रोचक तथ्य है ! वह भारत भूमि ही है , जहा पर योग की विद्या पूरी  तरह अभिव्यक्त हुई !

    भारत उपमहाद्वीप में भ्रमण करने वाले सप्त ऋषियों एवं अगस्त्य मुनि ने इस योग संस्कृति को जीवन के रूप में विश्व के प्रत्येक भाग में प्रसारित किया !

    योग  का व्यापक स्वरुप तथा उसका परिणाम सिन्धु एवं सरस्वति नदी घाटी सभ्यताओ 2700 ई.पू  की अमर  संस्कृति का प्रतिफलन मन जाता है ! योग ने मानवता के मूर्त और आध्यात्मिक दोनों रूपों को महत्वपूर्ण बनाकर स्वाम को सिद्ध किया है !

    सिन्धु सरस्वती घटी सभ्यता में योग साधना करती अनेक आकृतियो के साथ प्राप्त ढेरो मुहरे एवं जीवाश्म अवशेष इस बात के प्रणाम है की प्राचीन भारत में योग अस्तित्व था !सरस्वती घाटी सभ्यता में प्राप्त देवी एवं देवताओ की मुर्तिया एवं मुहरे तंत्र योग का संकेत करती है !


    योग का अभ्यास पूर्व वैदिक काल में भी किया जाता था ! महर्षि पतंजलि ने उस समय के प्रचलित प्राचीन योग अभ्यासों को व्यवस्थित व वर्गीकृत किया और उनके निहित्तार्थ और इससे सम्बंधित ज्ञान को पातंजलयोगसूत्र  नमक ग्रन्थ में क्रमबद्ध तरीके से व्यवस्थित किया !

    3. योग के कुछ अत्यंत रोचक चमत्कारिक बाते (Yog ke kuchh adybhut bate):व्यक्ति की शारीरिक क्षमता , उसके मन व भावनाए तथा उर्जा के स्टार के अनुरूप योग कार्य करता है ! इसे व्यापक रूप से चार वर्गों में विभाजित किया गया जो इस प्रकार से है :
    1. कर्मयोग में हम शारीर का प्रयोग करते है !
    2. ज्ञानयोग में हम मन का प्रयोग करते है !
    3. भक्तियोग में हम भावना का प्रयोग करते है 
    4. क्रियायोग में हम उर्जा योग का प्रयोग करते है !

    योग की जिस प्रणाली का हम अभ्यास करते है वह एक दुसरे से आपस में कई स्तरों पर मिली जुली हुई होती है !प्रत्येक व्यक्ति इन चारो योग कारको का एक अद्वितीय संयोग है ! केवल एक समर्थ गुरु (टीचर) ही योग्य साधक को उसके आवश्यकतानुसार आधारभूत योग सिद्धांतो का सही सयोजन करा सकता है !इसी लिए कहा जाता है की योग की शिक्षा एक योग्य शिक्षक के अधीन ही शुरू करना चाहिए !

    इस प्रकार से योग के शाब्दिक अर्थ तथा योग का इतिहार और विकाश से सम्बंधित ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई !उम्मीद है की ये पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे  और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज  लाइक करके हमलोगों को और प्रोतोसाहित करे बेहतर लिखने के लिए !
    इन्हें  भी  पढ़े :

    1. पीटी का इतिहास, सिस्टम, पीटी का उद्देश्य और पीटी का उसूल
    2. फिजिकल ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाले इक्विपमेंट और उसका अहमियत
    3. पुलिस फिजिकल ट्रेनिंग के सिद्धांत, उसूल और हादसे रोकने के तरीका
    4. योग और शारीरिक व्याम में इसका महत्व
    5. पीटी ट्रेनिंग कोर्स से सम्बंधित कुछ बेसिक जानकारिया
    6. बैडमिंटन के इतिहास और बैडमिंटन के कोर्ट का नापजोख
    7. 10 बेसिक जानकारी बास्केट बॉल खेल के बारे में
    8. 21 जून को योग दिवस को क्यों मनाया जाता है ?

    02 अगस्त 2018

    मैप इन्लार्जमेंट से क्या समझते है ?

    पिछले पोस्ट में हमने सिल्वा कंपास के बारे में जानकारी प्राप्त की इस पोस्ट में हम मैप के प्रक्षेपण यानि इन्लार्जमेंट (Map Enlargement ki jankari hindi me) के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे !


    यदि कोई जवान मैप रीडिंग में निपुणता  प्राप्त करना चाहता है तो उसे  आवश्यक है की वह मैप की हर डिटेल को बारीकी से समझे और इसके लिए जरुरी है की उसे मैप के उसे हिस्से को कागज के ऊपर बनाकर एक बड़े साइज़ में देखा जा सकता है और उसे आसानी से समझा सकता है ! और उस एरिया के बारे में जो भी शक या सुभा हो   उसे अच्छी तरह से समझा जा सकता है !


    इस ब्लॉग पोस्ट को आगे पढने से पहले मै अपने पाठको से यह अनुरोध करूँगा की अगर आप ने मेरा ब्लॉग सब्सक्राइब और फॉलो नहीं किये हो तो उसे सब्सक्राइब औरफॉलो करले वह बहुत ही आसान है और मेरे इस पोस्ट को लाइक और शेयर करे ! आपके इतना करने से हमे और अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है !


    इस पोस्ट में हम मैप इन्लार्जमेंट के से सम्बंधित निम्न विषयों के बारेमे जानकारी प्राप्त करेंगे :
    Map Enlargment
    Map Enlargment
    1. इन्लार्जमेंट का क्या मतलब होता है ?(Enlargement ka kya arth hota hai?)
    2. इन्लार्जमेंट का परिभाषा क्या होता है ?(Enlargement  ka pribhasha kya hota hai ?)
    3.इन्लार्जमेंट की जरुरत क्यों पड़ती है ?(Enlargement  ki jarurat kyo padti hai)


    1. इन्लार्जमेंट का क्या मतलब होता है ?(Enlargement ka kya arth hota hai?): इन्लार्जमेंट का शाब्दिक अर्थ होता है किसी बस्तु को उसके साइज़  से बड़ा कर के  दिखाना !यदि किसी मैप पे दिखाए गए जमीनी इलाके को अगर किसी कागज के ऊपर या ड्राइंग शीट के ऊपर मैप के स्केल से बड़ा करके दिखाया जाये तो उसे एनलार्जमेंट कहा जायेगा !सीधी भाषा में कहे तो किसी चीज को ज़ूम करना इन्लार्जेमेंट है !

    अब प्रश्न यह उठता है की क्या 1/25000 की स्केल का मैप 1/250000 की स्केल का दस गुना एनलार्जमेंट है क्या तो उसका जवाब है नहीं  kyo की अलग अलग स्केल के मैप एक दुसरे के एन्लार्जेमेंट नहीं कहे जायेंगे क्यों की उसमे फर्क दिखाए गए जमीनी एरिया का इलाका भिन्न भिन्न होता है !जब की इन्लार्जमेंट के लिए जरुरी है की यह किसी मैप के केवल एक या कुछ ही वर्गों का चित्रण किसी विशेष उद्देश्य के लिए किया गया होता है !


    2. इन्लार्जमेंट का परिभाषा क्या होता है ?(Enlargement  ka pribhasha kya hota hai ?): जब मैप के एक या एक से अधिक वर्गों के जमीनी इलाके को उस मैप की स्केल से बड़ी स्केल में उसकी पूरी डिटेल्स और मैप की कमियों को पूरा करते हुए किसी कागज के ऊपर स्केच के रूप में बनाया जाता है तो उस स्केच को को एनलार्जमेंट कहते है ! किसी भी चीज को आवशयकता के अनुसार अनुपाती स्केल से बड़ा करके बनाने  को इन्लार्जमेंट कहते है !

    3.इन्लार्जमेंट की जरुरत क्यों पड़ती है ?(Enlargement  ki jarurat kyo padti hai):ट्रेनिंग और किसी रेजिमेंटल आवश्यकता को पूरा करने के लिए इलाके का ज्यादा से ज्यादा जानकारी की आवश्यकता पड़ती है जिनको हम उपयोग करना चाहते है लेकीन  उसे साधारण सामान्य मैप के ऊपर नहीं समझा जा सकता है  इस लिए मैप इन्लार्ग्मेंट की जरुरत पड़ती है ! 


    मैप इन्लार्जमेंट की जरूरत निम्न कामो में पड़ती है :

    (a)जैसे ट्रेनिंग या किसी ऑपरेशन के दौरान उसके प्रयोग का इलाका प्राय 1000 किमी तक हो सकता है  जिसे 1/50000 के सर्वे मैप पर केवल एक वर्ग में ही दिखाया जाता है ! मैप के इस छोटे से वर्ग में समस्त जरुरी डिटेल्स को या जमीनी बनावटो  को नहीं दिखाया जा सकता है इसलिए इन्लार्जेमेंट की जरुरत पड़ती है !

    (b) डिफेन्स की हालत में हमे अपनी यूनिट के सभी हथियार , जवानों तथा सपोर्टिंग आर्म्स को लगाने या दूसरी मोर्चाबंदी करने के लिए ऐसे उचित स्थानों की जरुरत पड़ती है जो सर्वे मैप पर दिखाना संभव नहीं हो सकता है !

    (c) सभी यूनिट कमांडर्स को अपने जिम्मेवारी के इलाके में फॉरवर्ड पोस्ट(Forward post) और उनकी बनावट की पूरी जानकारी रखने के लिए सभी पिकेट के इन्लार्जमेंट अपने पास रख पड़ता है !


    (d) बड़े बड़े कमांडर्स(senior commanders) अपनी योजनाओ को अपने से छोटे कमांडर्स को  समझाने के लिए इन्लार्जमेंट का सहायता लेता है !   

    (e) ऑपरेशन की योजना बनने के लिए भी बड़े कमांडर अपने पास आवश्यक इलाके का इन्लार्जमेंट रखते है !

    (f)  युद्ध सम्बंधित ट्रेनिंग या टैक्टिक्स को सफल बनने के लिए इन्लार्जेमेंट की जरुरत पड़ती है वर्तमान और उस समय की जमीनी बनावट को समझाने के लिए इन्लार्जमेंट की जरुरत पड़ती है !

    (g) मैप की त्रुटी को दूर करने के लिए भी इन्लार्गेमेंट की जरुरत पड़ती है !
    (h) सैंड मॉडल(Sand Model) बनाने  से पहले उसमे दिखाए जाने वाले इलाके का इन्लार्जमेंट बनाना आवश्यक है !
    (i) ट्रेनिंग के दौरान प्रैक्टिस के लिए भी इन्लार्जमेंट बनवाया जाता है !


    इस प्रकार से हम इस पोस्ट के माध्यम से जान पाए की मैप इन्लार्जेमेंट क्या होता है और उसका जरुरत क्यों पड़ता है !उम्मीद है की ये पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे  और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज  लाइक करके हमलोगों को और प्रोतोसाहित करे बेहतर लिखने के लिए !
    इन्हें  भी  पढ़े :
    1. मैप रीडिंग में दिशाओ के प्रकार और उत्तर दिशा का महत्व
    2. दिन के समय उत्तर दिशा मालूम करने का तरीका
    3. कन्वेंशनल सिग्न ,कन्वेंशनल सिग्न के प्रकार , कन्वेंशनल सिग्न बनाने का तरीका
    4. रात के समय उत्तर मालूम करने का तरीका
    5. सर्विस प्रोटेक्टर का परिभाषा और सर्विस प्रोटेक्टर का प्रकार
    6. सर्विस प्रोटेक्टर का उपयोग और सर्विस प्रोटेक्टर से बेक बेअरिंग पढने का तरीका
    7. 13 तरीके मैप सेट करने का !
    8. 5 तरीका मैप पे ऊपर खुद का पोजीशन को पता करने का
    9. 5 तरीको से मैप टू ग्राउंड और ग्राउंड टू माप जाने
    10. मैप रीडिंग के उद्देश्य तथा मैप रीडिंग के महत्व


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