17 जनवरी 2022

सम्मन का प्रारूप और उसे तमिल करने के विधिया

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने  पुलिस रेक्रुइट्स के लिए सरकार गठन की परक्रिया के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त की और अब इस नै पोस्ट में हम सम्मन का प्रारूप और उसे तमिल करने के विधिया क्या है उसके बारे में जानकारी प्राप्त जरेंगे !

1. सम्मन   क्या है (what is Summon?): न्यायिक प्रक्रिया में साक्षी के रूप में शामिल होने के लिए न्यायालय द्वारा भेजे गए लिखित बुलावे को ही सम्मन  कहते हैं! सम्मन  अभिप्राय न्यायालय के द्वारा साक्षी को बुलाने के लिए दिए गए नोटिस से है !

2.कानूनी प्रावधान(What is law regarding issue of Summon?): सीआरपीसी की धारा 61 से लेकर 69  के बीच और धारा 244 में सम्मन  के बारे में बताया गया है! इस CrPc धाराओ  में बताया गया है की सम्मन को कैसे तामिल करना चाहिए !

3.सम्मन  का प्रारूप(Important points for summon):सम्मन का प्रारूप इस प्रकार से होता है :

  • सम्मन लिखित होता है। 
  • इस की दो प्रतियां होती है।
  •  दोनों प्रतियां असल होती है। 
  • न्यायालय की मुहर लगी  होती है। 
  • मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर होते हैं। 
4.समन की तामील कौन कर सकता है (Who can be asked to  implement  the summon?):सम्मन  को तमिल निम्न एजेंसियां कर सकती है:

  • पुलिस 
  • राज्य सरकार द्वारा निर्मित नियमानुसार संबंधित न्यायालय के किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा 
  • अन्य लोक सेवक द्वारा 
5.समन की तामील कैसे की जाएगी(How summon can be implemented?): समन की तामील करने की प्रक्रिया निम्न है 
  • संबंधित व्यक्ति को एक प्रति देकर। 
  • दूसरी प्रति पर संबंधित व्यक्ति के हस्ताक्षर होना चाहिए 
  • हस्ताक्षरित प्रति  की रिपोर्ट सहित न्यायालय को वापस भेजना। 
6.सम्मन तामील की विधियां(Procedure for implementing summon): सम्मन तामील करने की विभिन्न विधियां इस प्रकार से है :
  • निगमित निकाय व सोसायटी पर तमिल  जो की CrPc की धारा  63  में बताया गया  उस के अनुसार होगी !
  • सम्मन किया गया व्यक्ति न मिलने पर तामील  की विधि CrPc की  धारा 64  बताया गया है !
  • जब धारा 63 व 64  के अनुसार तमिल न हो सके तो  तमिल की प्रक्रिया धारा 65 पर बताया गया है!
  • सरकारी लोकसेवक ऊपर सम्मन कैसे तामील की जाएगी उसके बारे में CrPc की धारा  66 में बताया गया है
  • स्थानीय सीमाओं से बाहर की तामील सीआरपीसी की धारा 67 में बताया गया है 
  • अगर तामिल किया गया व्यक्ति  न्यायालय में उपस्थित ना हो तो करवाई क्काया की जाएगी इसकी जानकारी  धारा 68 सीआरपीसी में बताया गया है 
  • साक्षी तथा डाक द्वारा तामिल करने की विधि  धारा 69 सीआरपीसी में बताया गया है 
7. सम्मन को  तमिल के समय ध्यान देने योग्य बातें(Points should be ensure while implementing summon) : सम्मन को तामिल करते समय निम्न बातो को ध्यान में रखना चाहिए :
  • सम्मन तामिल करने वाले  को देख लेना चाहिए की सम्मन बैध्य तो है !
  •  सम्मन की तामिल   समय से पहले होनी चाहिए। 
  • तामिल की गई सम्मन को  यथा समय न्यायालय में भेजें। 
  • जहां तक संभव हो उसी व्यक्ति को सम्मन देना चाहिए जिसके नाम से निकला है। 
  • सम्मन को ठीक से रिपोर्ट करे !
  • सम्मन  का लेखा-जोखा रिकॉर्ड ठीक रखें तथा मासिक लिस्ट तैयार रखना चाहिए ।
इस प्रकार से सम्मन के प्रारूप तथा सम्मन को तामिल करने  से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

इन्हें भी  पढ़े :

  1. पुलिस ड्यूटी
  2. फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट में होनेवाली कुछ कॉमन गलतिया
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  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट


15 जनवरी 2022

पुलिस रेक्रुइट्स के लिए केन्द्रीय और राज्य सरकार के गठन सम्बंधित जानकारी

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने महिला और बच्चो के प्रति होने वाले अपराध के विषय में जानकारी प्राप्त की और अब इस ब्लॉग पोस्ट में पुलिस कांस्टेबल के बेसिक ट्रेनिंग के दौरान दी जाने केन्द्रीय सरकार के गठन से सम्बंधित बेसिक जानकारी यहाँ दी जाएगी जो की एक बेसिक रिक्रूट ट्रेनीज के मालूम होना चाहिए !

Government formation
Government formation

1. इंट्रोडक्शन: भारत एक प्रजातांत्रिक गणराज है जिस की सरकार व्यवस्था संविधान के अनुसार संघीय प्रणाली है। भारतीय संविधान का स्वरूप संघात्मक तथा एकात्मक है। संविधान के अनुसार लोगों के मताधिकार से निर्वाचित केंद्रीय और राज्य सरकारों की व्यवस्था की गई है। इसमें शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों में किया गया है जो निम्न है:

  • संघीय सूची(Union List) - इसमें राष्ट्रीय महत्व के मामले आते हैं। 
  • राज्य सूची(State List)- इसमें राज्य स्तरीय मामले आते हैं। 
  • समवर्ती सूची(Concurrent list)-  यह  संघ और राज्य  की साझी सूची है यदि केंद्र की प्रभुसत्ता है। 
भारतवर्ष में वर्तमान में 28 राज्य और 7 केंद्र शासित प्रदेश है :

जैसे ऊपर बताया गया है कि भारत एक संघीय राज है इस संघीय राज्य का जिसका राष्ट्रपति अध्यक्ष होता है।

2.राष्ट्रपति (President)

  • राष्ट्रपति का चुनाव(President Election) :राष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों राज्य  विधानसभा और विधान परिषद के निर्वाचित सदस्यों द्वारा होता है। इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। राष्ट्रपति अपनी इच्छा अनुसार पद त्याग कर सकता है या इसे महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है।
  • राष्ट्रपति की योग्यताएं(Eligibility for President) :
    • भारतीय नागरिक होना चाहिए। 
    • आयु 35 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
    •  संसद के किसी भी सदन का सदस्य ना हो। 
    • केंद्र सरकार के अधीन किसी भी लाभ के पद पर आसीन ना हो। 
    • वह दिवालिया वह पागल ना हो। 
  • राष्ट्रपति की शक्तियां (Power of President)
    • कार्यपालिका की शक्तियां। 
    • वैधानिक शक्तियां। 
    • न्याय  पालिका की शक्तियां।
    • वित्तीय शक्तियां। 
    • आपातकालीन शक्तियां। 
      • विदेशी मामला या देश के आंतरिक अशांति 
      • राज्यों में सरकारों का असफल होना 
      • वित्तीय संकट 
3. उपराष्ट्रपति(Vice President) :संविधान के अनुसार भारत में उपराष्ट्रपति का भी प्रावधान होता है जो स्थाई सदन यानी राज्यसभा का सभापति होता है। राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यताएं होती है! इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है!परन्तु  संसद को अवधी से पूर्व  भी से हटाने का अधिकार होता है या वह स्वयं भी पद से त्यागपत्र दे सकता है। राष्ट्रपति के पद छोड़ने लंबी   बीमारी पर निधन होने की स्थिति में उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति का कार्यभार संभालता है परंतु 6 महीने के अंदर राष्ट्रपति का चुनाव होना अनिवार्य है। 

4.सरकार के महत्वपूर्ण अंग(Organ of Government)

  • विधान पालिका 
  • कार्यपालिका 
  • न्यायपालिका। 
5.संसद:संविधान के अनुसार भारतीय संसद के दो सदन होते हैं। 

  • लोकसभा(Parliament):लोकसभा यह संसद का निम्न सदन होता है इसमें जनता द्वारा निर्वाचित सदस्य होते हैं इसमें संविधान के अनुसार 545 सदस्य होते हैं। जिन का चुनाव प्रत्यक्ष व गुप्त मतदान से होता है इसमें अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए कुछ स्थान सुरक्षित रखे जाते हैं तथा 2 सदस्य एंग्लो इंडियन जाति का भी प्रतिनिधित्व करते हैं जिन्हें राष्ट्रपति मनोनीत करता है। प्रत्येक 25 वर्षीय भारतीय नागरिक लोकसभा का सदस्य निर्वाचित हो सकता है। लोकसभा के सदस्यों में से ही एक लोकसभा का अध्यक्ष चुना जाता है। 
  • राज्यसभा(Rajy Shabha): यह संसद का स्थाई सदन होता है!  उपराष्ट्रपति इस का पदेन अध्यक्ष होता है इसमें राज्य  विधान मंडलों द्वारा चुने हुए राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते हैं। जिनकी कुल संख्या 250 है जिसमें निर्वाचित 238 व मनोनीत 12 होते हैं! और 2 बर्केष  पश्चात एक तिहाई सदस्य पद मुक्त हो जाते हैं। इसका सदस्य होने के लिए 30 वर्ष की आयु होना अनिवार्य है। 
6.मंत्री परिषद(Council of Minister) 

राष्ट्रपति अपनी सहायता व सलाह के लिए संसद में प्राप्त बहुमत वाले दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है जिस की सलाह से मंत्री परिषद का गठन किया जाता है जो लोकसभा के लिए उत्तरदाई होता है। प्रधानमंत्री मंत्री परिषद का अध्यक्ष होता है जिस की सलाह पर ही मंत्रिपरिषद का गठन होता है। मंत्रिपरिषद का विभिन्न बैठकों में लिए गए महत्वपूर्ण फैसले कानून का रूप लेते हैं। जो सरकारी कामकाज का संचालन करते हैं जो संसद के प्रति उत्तरदाई होते हैं। सरकारी कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए अलग-अलग भागों में बांट दिया जाता है कुछ महत्वपूर्ण विभाग या मंत्रालय निम्न है। 

    • गृह मंत्रालय 
    • रक्षा मंत्रालय 
    • वित्त मंत्रालय 
    • विदेश मंत्रालय 
    • स्वास्थ्य मंत्रालय 
    • रेल मंत्रालय 
    • कृषि मंत्रालय 
    • उद्योग मंत्रालय 
    • खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय
    • विधि एवं न्याय मंत्रालय 
 7. राज्यों का प्रशासनिक ढांचा(Structure of state administration): भारतीय संविधान के अनुसार देश के शासन की जिम्मेदारी केंद्र व विभिन्न राज्यों की सरकारों में विभाजित की गई है। 
  • राज्यपाल(Governor): राज्य का संपूर्ण शासन राज्यपाल के नाम से चलाया जाता है !जो राज्य सरकार के मंत्रिमंडल की सलाह पर कार्य करता है। इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है लेकिन राष्ट्रपति इसे जनहित में समय से पहले भी हटा सकता है। जब किसी राज्य की संविधान द्वारा स्थापित सरकार असफल हो जाती है तो राष्ट्रपति के आदेश अनुसार राज्यपाल राज्य की जिम्मेदारी पूर्ण रूप से संभाल लेता है। 
  • राज्य मंत्रिमंडल का गठन(Council of minister of State Government) :राज्य में विधानसभा से प्राप्त बहुमत वाले दल के नेता को राज्यपाल मुख्यमंत्री नियुक्त करता है तथा उसकी सिफारिश सलाह पर मंत्रियों की नियुक्ति की जाती है जो राज्य के शासन को सुचारू रूप से चलाता है। 
  • राज्य  विधान परिषद(: संविधान के अनुसार विधान परिषद के सदस्यों की संख्या विधानसभा के सदस्यों की संख्या का एक तिहाई होता है। इन का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है तथा कुछ सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करता है। इसके एक तिहाई सदस्य हर  2 बर्ष स बाद रिटायर हो जाते हैं ! इसका पूरा कार्यकाल 6 साल का होता है। 
8.केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासनिक ढांचा(Administrative structure of Union Teritorry)  :केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन की सीधी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होती है। मंत्रिमंडल की सिफारिश पर प्रत्येक क्षेत्र में राष्ट्रपति  उप राज्यपाल या एडमिनिस्कीट्रेटर को  नियुक्ति करता है जो राज्यों की तरह प्रशासनिक कार्यों का चलाता है। 
9.स्थानीय स्वशासन संस्थाएं 
  • नगर निगम: कोलकाता मद्रास मुंबई जैसे बड़े बड़े नगरों में स्थानीय शासन की इकाई को निगम कहते हैं इनकी स्थापना राज्य सरकार के एक विशेष कानून के द्वारा की जाती है जिसके लिए निगम बनाना होता है उसके लिए राज्य विधानमंडल एक कानून पास करता है जिसमें इसके निर्माण एवं कार्य का उल्लेख होता है। निगम तीन प्रकार के सदस्य होते हैं:
    •  मेयर 
    • एल्डरमैन 
    • पार्षद 
  • पार्षद  का चुनाव : पार्षद का चुनाव  नगर की जनता द्वारा होता है। पार्षद एल्डरमैन का चुनाव करते हैं तथा पार्षद एवं एल्डरमैन मिलकर मेयर के चुनाव करते हैं। मेयर निगम का सभापति होता है! निगम का कार्यकाल साधारण तक 5 बरस का होता है। 
  • कार्य 
    • नगर की सफाई 
    • पानी की आपूर्ति का 
    • सड़कों की मरम्मत 
    • बिजली का प्रबंधन 
    • इमारतो के मैप अनुमोदन 
    • शिक्षा का प्रबंधन 
    • स्वास्थ्य सेवाए 
  • नगर पालिका: नगर पालिका नगर के स्थानीय मामलों का  प्रबंधन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा स्थापित की जाती है। इन सदस्यों का चुनाव नगर निवासियों द्वारा होता है। सदस्य अपने में से एक प्रधान चुनते हैं! नगरपालिका का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है परंतु इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है। इसके कार्यों को चार भागों में बांटा जा सकता है :
    • सार्वजनिक सुरक्षा /रखवाली 
    • सार्वजनिक स्वस्थ 
    • सार्वजनिक सुविधाएं 
    • सार्वजनिक शिक्षा। 
  • छावनी बोर्ड :छावनी में सार्वजनिक प्रबंधन के लिए यह बोर्ड होते हैं इनका कार्य नगरपालिका से मिलता-जुलता है। 
पुलिस के दूसरे विभागों से आपसी संबंध 
  • न्यायपालिका :भारतीय प्रशासन प्रणाली के अंतर्गत जिला मजिस्ट्रेट मजिस्ट्री का प्रमुख है और पुलिस अधीक्षक जिला पुलिस का अध्यक्ष होता है। अधिनियम और दंड प्रक्रिया संहिता दोनों द्वारा जिला मजिस्ट्रेट का पुलिस पर नियंत्रण की शक्तियां प्रदान की गई है। पुलिस एक्ट की धारा 4 के अनुसार कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस व न्यायपालिका में मधुर संबंध महत्वपूर्ण है!
  •  राजस्व विभाग: यह विभाग जिला कलेक्टर के अधीन होता है जिला मजिस्ट्रेट जिला कलेक्टर व जिला पुलिस अधीक्षक के बीच अच्छा तालमेल सरकारी कामकाज को सुचारू रूप से चलाते हैं जो कि एक दूसरे के कार्य में परस्पर सहयोग करते हैं। 
  • स्वास्थ्य विभाग: बहूत से पुलिस के कार्य चिकित्सा विभाग से संबंधित होते हैं जैसे घायलों का परीक्षण व स्वास्थ्य जांच आदि इनके आपसी संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय-समय पर पुलिस भी आवश्यकता अनुसार स्वास्थ्य विभाग की सहायता करती है। 
  • सार्वजनिक निर्माण विभाग :सार्वजनिक निर्माण विभाग प्रमुख कार्य भवन निर्माण व मरम्मत करना है पुलिस विभागों की इमारतों का निर्माण व रखरखाव बी पी डब्लू डी करती है। यदि पुलिस विभाग के अधिकारी पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से निरंतर रखेंगे और निर्माणाधीन इमारत की साइट पर जाकर आपस में मिलकर बातचीत करेंगे तो अच्छी इमारत बनेगी ! यदि पुलिस विभाग किसी अन्य स्थान पर किसी प्रकार की असुविधा का अनुभव करता है तो उसे पीडब्ल्यूडी से मिलकर दूर कराया जा सकता है!
  • सीमा शुल्क विभाग :इस विभाग से निरंतर संपर्क से विशेष रूप से नारकोटिक संबंधी अपराधों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण मदद मिलती है! केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग क्षेत्र के अपराध व अपराधियों का रिकॉर्ड रखता है। इस प्रकार पुलिस की मदद कर सकते हैं !
  • रेल विभाग: यदयपि रेलों  में पुलिस की व्यवस्था करना सरकारी रेल पुलिस की सीधी है  जिम्मेवारी है। फिर भी जिला पुलिस रेलवे की सहायता के लिए आती है। त्योहारों मेलो आदि पर भीड़ पर नियंत्रण के लिए साथ दोनों विभागों के बीच अच्छे संबंध जरूरी है। कभी-कभी बिना टिकट चेकिंग ड्राइव में भी पुलिस सहायता करती है। उधर जब कभी समय कम समय में पुलिस को कहीं जाना पड़ता है तो रेलवे विभाग उन्हें सीट देकर पुलिस की मदद करता है।
इस प्रकार से केन्द्रीय और राज्य सरकार के गठन तथा काम  से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

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11 जनवरी 2022

महिला और बच्चो के प्रति हिंसा और पुलिस का कर्तव्य

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने प्रोबेशन और पैरोल के बारे में जानकारी प्राप्त की थी और अब इस नई ब्लॉग पोस्ट में हम महिला और बच्चो के प्रति हिंसा और पुलिस का कर्तव्य  के बारे में हिंदी में जानकारी प्राप्त करेंगे(Mahila aur Bachcho ke prati hinsa aur police ka action) ! इस विषय के अच्छी तरह से सझने के लिए इसे हमने निम्न भागो में बाँट दिया है !

Women Atrocity
Women Atrocity 

1.इंट्रोडक्शन  :प्राचीन काल से महिला केवल एक ग्रहणी ही समझे जाती है जिसका बाह्य समाज से लोग लेश मात्र भी संपर्क नहीं था यद्यपि इसमें अपवाद तो संभव है परन्तु  आधुनिक युग में  महिलाओं की भागीदारी समाज में और समाज की रचना में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है! जिसमें महिलाएं एक प्रेरणा के स्रोत के रूप में कार्य करती आ रही है! आज महिला हर क्षेत्र में सफल भूमिका निभा रही है!

2.महिलाओं के प्रति पुलिस का व्यवहार : 

  • किसी भी प्रकार की पूछताछ एक अन्वेषण के दौरान के दौरान महिला की शालीनता का ध्यान रखा जाए।
  • महिला से पूछताछ करते समय महिला अधिकारी या उसके परिजन को साथ होना आवश्यक है।
  • किसी प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग ना करें। 
  • महिलाओं के साथ पूछताछ के समय अच्छे आचरण का परिचय देना चाहिए। 
  • तलाशी केवल महिला द्वारा ही करवानी चाहिए 
  • महिला की बात को ध्यान पूर्वक सुने एवं अति आवश्यक कार्रवाई करना 
  • छींटाकसी न करे !
 3.स्टॉप महिलाओं पर होने वाले अपराध/हिंसा :

  • छेड़खानी (Eye Teasing) IPC 354 /509 की अपराध 
  • दहेज के लिए प्रताड़ित करना  IPC 498-A की अपराध 
  • दहेज के लिए मौत(Dowry Death) IPC 304 का अपराध  
  • बलात्कार IPC 376 का अपराध 
  • दहेज लेना धारा 4 दहेज अधिनियम 28 1961  का अपराध 

4.बच्चों के प्रति पुलिस का व्यवहार:

  •  बच्चों में पुलिस के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करने के लिए सहानुभूति एवं प्रेम आधारित व्यवहार करना चाहिए !पुलिस की छवि सुधरेगी !
  • स्नेह पूर्व  व्यवहार पुलिस को सहायता मिलेगी 
  • बच्चों की एक उगती हुई  प्रतिभा है इसलिए उनसे कर्कश शब्दों में बात ना करे !
  • बच्चों   पूछताछ करते समय उनके निकतम  संरक्षक की  उपस्थिति में होना चाहिए 
  • किसी भी पुलिस मामले में बच्चों को थाने में ना बुलाये !
  • अपराधी बच्चे को गिरफ्तार कर के ब्यास्क अपराधियो के साथ ना रखे हो सके तो अपने पास रखे अगर किशोर गृह उपलब्ध न हो तो 
  • बच्चो के जहातक हो सके हथकड़ी न लगाये !
  • किशोर अपराधी को जेल में न भेज कर उसे सुधर केंद में भेजे 
  • अपराधी बच्चो के सामने उग्र रूप ना धारण करे !
  • अपराधी बच्चो को धमकी नदे नहीं तो उसके अन्दर का डर निकल जायेगा और वह पथभ्रष्ट हो जायेगा !
  • बच्चो के सामने उसके संरक्षक माता पिता को अपमानित ना करे ! 

इस प्रकार से महिला और बच्चो के प्रति हिंसा और पुलिस का कर्तव्य से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

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07 जनवरी 2022

फील्ड क्राफ्ट तथा फील्ड क्राफ्ट की जरुरत

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने सेक्शन कमांडर के कर्तव्य के बारे में जानकारी प्राप्त किया और अब इस ब्लॉग पोस्ट में हम ब्लॉग पोस्ट में हम  फील्ड क्राफ्ट तथा फील्ड क्राफ्ट की जरुरत के बारे में हिंदी में(Fieldcraft aur fieldcraft ki jarurat ke bareme hindi me jankari ) जानकारी प्राप्त करेंगे ! ऐसे तो फील्ड क्राफ्ट का आर्म्ड फाॅर्स के ट्रेनिंग तथा ऑपरेशन बहुत महत्व है और इसको अलग अलग ट्रेनिंग के दौरान अलग अलग तरह से परिभाषित किया गया होता है लेकिंग उन सभी परिभाषा का एक ही सार होता है !

परिभाषा (Definition of Fieldcraft)- युद्ध के मैदान में जमीन के बनावट के अनुसार अपने तथा अपने हथियार को छुपाते हुए टैक्टिकल हरकत से दुश्मन के नजदीक से नजदीक पहुंच कर अचानक हमला कर अधिक से अधिक सफलता प्राप्त करने को फील्डक्राफ्ट या भूमि कौशल कहा जाता है!

फील्ड क्राफ्ट की महत्वपूर्ण बाते(Important points for fieldcraft) :

फील्ड क्राफ्ट में निम्नलिखित 5 बातों का होना आवश्यक है। 
Fieldcraft
Fieldcraft
  • कैमोफ्लेज (Camoflage-छद्द्म ) 
  • कंसीलमेंट (Concealment-छुपाव) 
  • ऑब्जर्वेशन (Obesrvation-निरीक्षण या देखभाल)
  • कीप साइलेंट (Keep silence-खामोशी)
  • सरप्राइज ( Surprise-एकाएक हमला करना)। 
कैमोफ्लेज (छद्द्म ) :- स्वयं एवं सैनिक महत्व के स्थानों एवं वस्तुओं को ऐसा बनावटी रूप प्रदान कर देना जिससे दुश्मन अपनी तेज नजरो  से भी देखकर ना पहचान सके। 

आवश्यकता (Need of camouflage) : 
  •  कभी-कभी जमीन ऐसी मिलती है कि बनावटी संसाधनों का प्रयोग किए बगैर दुश्मन या अपराधी के पास पहुंचना मुश्किल हो जाता है उस वक्त कैमोफ्लेज की आवश्यकता पड़ती है। 
  • ऐसी जमीन पर पोजीशन लेनी पड़ती है जिसमें जमीन और हवाई आब्जर्वर   से न बच सके  ऐसी जगह पर बनावटी साधनों का प्रयोग कर कैमोफ्लेज  करने की आवश्यकता पड़ती है। 
कैमोफ्लेज करते समय ध्यान देने वाली बातें (Care should be taken while camouflaged)
  • चमकीली वस्तुओं को मिटा देना चाहिए। 
  • स्थानीय वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए 
  • नीली बस्तुओ  का प्रयोग नहीं करनी चाहिए 
  • खुशबूदार तेल य इत्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए
  • हरकत ना की जाए। 
  • मुरझाने  वाली वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए 
  • अधिक देर तक ना किए जाएं। 
कंसीलमेंट (छुपाव):स्वयं की दृष्टि ,शस्त्रों का प्रयोग का क्षेत्र, यूनिट की गतिविधियों में बिना किसी रूकावट पड़े भूमि की प्राकृतिक एवं बनावटी आकृति के पीछे छिपकर दुश्मन की दृष्टि एवं फायर से बचने की कला को कंसीलमेंट कहते हैं। 

आवश्यकता  (Need of concealment)  
अपनी जान बचाकर दुश्मन के नजदीक पहुंचकर उसको पकड़ने या बर्बाद करने के लिए जरूरी है कि उसकी नजर एवं गोली से छुपाओ और बचा जाए। 
कंसीलमेंट के लिए ध्यान देने वाली बातें  (Care should be taken while Concealment)
  • छुपाव के लिए बनावटी कुदरती आड़ में दुश्मन के सामने अपने को छिपाना ही छुपाओ है। 
    • जमीन के बनावट के अनुसार 
    • हथियारों का कैमोफ्लेज  ताकि दुश्मन को ताकि दुश्मन को  शोला व धुवा दिखाई न दे 
ऑब्जर्वेशन :किसी  स्थान व  दुश्मन को बैगर देखकर अन्दुरुनी  हालातों को भाप लेना ही ऑब्जर्वेशन कहलाता है।

कीप साइलेंट :दुश्मन के सामने उसके करीब होते हुए खामोशी अख्तियार कर लेना या जान रहते हुए भी अपने को बेजान साबित करना। 
सरप्राइस (अचानक हमला): ऐसा हमला जिसकी दुश्मन को उम्मीद ना हो या उसकी बनाई हुई तरतीब या स्कीम को बिगाड़ कर कामयाबी हासिल करना ही सरप्राइज कहलाता है। 

कैमोफ्लेज   और कंसीलमेंट में अंतर (Difference between Camouflage and concealment)
कैमोफ्लेज   
  • कैमोफ्लेज   कहीं भी किया जा सकता है। 
  • इसमें केवल नजर से पनाह मिलती है। इ
  • समें हरकत नहीं की जा किया जा सकता है। 
  • अधिक देर तक नहीं किया जा सकता है। 
  • कैमफ्लेज में नजरों के सामने रहते हैं। 
कंसीलमेंट 
  • कंसीलमेंट किसी मजबूत आड़ के पीछे किया जाता है। 
  • इसमें गोली एवं नजर दोनों से पनाह मिलती है। 
  • इसमें हरकत किया जा सकता है। 
  • अधिक देर तक किया जा सकता है। 
  • कंसीलमेंट में आड़ के पीछे रहते हैं।
इस प्रकार से यहाँ फील्ड क्राफ्ट और फील्ड क्राफ्ट की जरुरत की जानकारी हिंदी  से   सम्बंधित यह पोस्ट समाप्त  हुई उम्मीद है की आप को पसंद आएगी !इस ब्लॉग  को सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !
इसे भी पढ़े : 
  1. सेक्शन फार्मेशन और सेक्शन फार्मेशन का बनावट
  2. आतंक प्रभावित इलाके में सिक्यूरिटी पोस्ट लगान
  3. रात के संतरी तथा स्काउट की ड्यूटी क्या होता है
  4. फील्ड फोर्टीफीकेसन में इस्तेमाल होने वाले फौजी टेकटिकल शब्दों का क्या मतलब
  5. फौजी टैक्टिकल शब्द जैसे फर्स्ट लाइट फ्लैंक गार्ड यदि क मतलब
  6. अम्बुश की जुबानी हुक्म क्या होता है और इसमें सामिल होने वाले मुख्य बाते
  7. रोड ओपनिंग पार्टी/पट्रोल और उसके महत्व के बारे
  8. कॉन्वॉय कितने प्रकार का होता है ? कॉन्वॉय प्रोटेक्शन की पार्टिया कौन कौन सी होती ?
  9. कॉन्वॉय कमांडर और कॉन्वॉय मूवमेंट से पहले जानने वाली बातें
  10. रोड ओपनिंग पार्टी की तैनाती करने का तरीका तथा ROP ड्यूटी के दौरान IED से बचा के लिए ध्यान में रखनेवाली बाते

फील्ड क्राफ्ट तथा फील्ड क्राफ्ट की जरुरत

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने सेक्शन कमांडर के कर्तव्य के बारे में जानकारी प्राप्त किया और अब इस ब्लॉग पोस्ट में हम ब्लॉग पोस्ट में हम  फील्ड क्राफ्ट तथा फील्ड क्राफ्ट की जरुरत के बारे में हिंदी में(Fieldcraft aur fieldcraft ki jarurat ke bareme hindi me jankari ) जानकारी प्राप्त करेंगे ! ऐसे तो फील्ड क्राफ्ट का आर्म्ड फाॅर्स के ट्रेनिंग तथा ऑपरेशन बहुत महत्व है और इसको अलग अलग ट्रेनिंग के दौरान अलग अलग तरह से परिभाषित किया गया होता है लेकिंग उन सभी परिभाषा का एक ही सार होता है !

परिभाषा (Definition of Fieldcraft)- युद्ध के मैदान में जमीन के बनावट के अनुसार अपने तथा अपने हथियार को छुपाते हुए टैक्टिकल हरकत से दुश्मन के नजदीक से नजदीक पहुंच कर अचानक हमला कर अधिक से अधिक सफलता प्राप्त करने को फील्डक्राफ्ट या भूमि कौशल कहा जाता है!

फील्ड क्राफ्ट की महत्वपूर्ण बाते(Important points for fieldcraft) :

फील्ड क्राफ्ट में निम्नलिखित 5 बातों का होना आवश्यक है। 
Fieldcraft
Fieldcraft
  • कैमोफ्लेज (Camoflage-छद्द्म ) 
  • कंसीलमेंट (Concealment-छुपाव) 
  • ऑब्जर्वेशन (Obesrvation-निरीक्षण या देखभाल)
  • कीप साइलेंट (Keep silence-खामोशी)
  • सरप्राइज ( Surprise-एकाएक हमला करना)। 
कैमोफ्लेज (छद्द्म ) :- स्वयं एवं सैनिक महत्व के स्थानों एवं वस्तुओं को ऐसा बनावटी रूप प्रदान कर देना जिससे दुश्मन अपनी तेज नजरो  से भी देखकर ना पहचान सके। 

आवश्यकता (Need of camouflage) : 
  •  कभी-कभी जमीन ऐसी मिलती है कि बनावटी संसाधनों का प्रयोग किए बगैर दुश्मन या अपराधी के पास पहुंचना मुश्किल हो जाता है उस वक्त कैमोफ्लेज की आवश्यकता पड़ती है। 
  • ऐसी जमीन पर पोजीशन लेनी पड़ती है जिसमें जमीन और हवाई आब्जर्वर   से न बच सके  ऐसी जगह पर बनावटी साधनों का प्रयोग कर कैमोफ्लेज  करने की आवश्यकता पड़ती है। 
कैमोफ्लेज करते समय ध्यान देने वाली बातें (Care should be taken while camouflaged)
  • चमकीली वस्तुओं को मिटा देना चाहिए। 
  • स्थानीय वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए 
  • नीली बस्तुओ  का प्रयोग नहीं करनी चाहिए 
  • खुशबूदार तेल य इत्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए
  • हरकत ना की जाए। 
  • मुरझाने  वाली वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए 
  • अधिक देर तक ना किए जाएं। 
कंसीलमेंट (छुपाव):स्वयं की दृष्टि ,शस्त्रों का प्रयोग का क्षेत्र, यूनिट की गतिविधियों में बिना किसी रूकावट पड़े भूमि की प्राकृतिक एवं बनावटी आकृति के पीछे छिपकर दुश्मन की दृष्टि एवं फायर से बचने की कला को कंसीलमेंट कहते हैं। 

आवश्यकता  (Need of concealment)  
अपनी जान बचाकर दुश्मन के नजदीक पहुंचकर उसको पकड़ने या बर्बाद करने के लिए जरूरी है कि उसकी नजर एवं गोली से छुपाओ और बचा जाए। 
कंसीलमेंट के लिए ध्यान देने वाली बातें  (Care should be taken while Concealment)
  • छुपाव के लिए बनावटी कुदरती आड़ में दुश्मन के सामने अपने को छिपाना ही छुपाओ है। 
    • जमीन के बनावट के अनुसार 
    • हथियारों का कैमोफ्लेज  ताकि दुश्मन को ताकि दुश्मन को  शोला व धुवा दिखाई न दे 
ऑब्जर्वेशन :किसी  स्थान व  दुश्मन को बैगर देखकर अन्दुरुनी  हालातों को भाप लेना ही ऑब्जर्वेशन कहलाता है।

कीप साइलेंट :दुश्मन के सामने उसके करीब होते हुए खामोशी अख्तियार कर लेना या जान रहते हुए भी अपने को बेजान साबित करना। 
सरप्राइस (अचानक हमला): ऐसा हमला जिसकी दुश्मन को उम्मीद ना हो या उसकी बनाई हुई तरतीब या स्कीम को बिगाड़ कर कामयाबी हासिल करना ही सरप्राइज कहलाता है। 

कैमोफ्लेज   और कंसीलमेंट में अंतर (Difference between Camouflage and concealment)
कैमोफ्लेज   
  • कैमोफ्लेज   कहीं भी किया जा सकता है। 
  • इसमें केवल नजर से पनाह मिलती है। इ
  • समें हरकत नहीं की जा किया जा सकता है। 
  • अधिक देर तक नहीं किया जा सकता है। 
  • कैमफ्लेज में नजरों के सामने रहते हैं। 
कंसीलमेंट 
  • कंसीलमेंट किसी मजबूत आड़ के पीछे किया जाता है। 
  • इसमें गोली एवं नजर दोनों से पनाह मिलती है। 
  • इसमें हरकत किया जा सकता है। 
  • अधिक देर तक किया जा सकता है। 
  • कंसीलमेंट में आड़ के पीछे रहते हैं।
इस प्रकार से यहाँ फील्ड क्राफ्ट और फील्ड क्राफ्ट की जरुरत की जानकारी हिंदी  से   सम्बंधित यह पोस्ट समाप्त  हुई उम्मीद है की आप को पसंद आएगी !इस ब्लॉग  को सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !
इसे भी पढ़े : 
  1. सेक्शन फार्मेशन और सेक्शन फार्मेशन का बनावट
  2. आतंक प्रभावित इलाके में सिक्यूरिटी पोस्ट लगान
  3. रात के संतरी तथा स्काउट की ड्यूटी क्या होता है
  4. फील्ड फोर्टीफीकेसन में इस्तेमाल होने वाले फौजी टेकटिकल शब्दों का क्या मतलब
  5. फौजी टैक्टिकल शब्द जैसे फर्स्ट लाइट फ्लैंक गार्ड यदि क मतलब
  6. अम्बुश की जुबानी हुक्म क्या होता है और इसमें सामिल होने वाले मुख्य बाते
  7. रोड ओपनिंग पार्टी/पट्रोल और उसके महत्व के बारे
  8. कॉन्वॉय कितने प्रकार का होता है ? कॉन्वॉय प्रोटेक्शन की पार्टिया कौन कौन सी होती ?
  9. कॉन्वॉय कमांडर और कॉन्वॉय मूवमेंट से पहले जानने वाली बातें
  10. रोड ओपनिंग पार्टी की तैनाती करने का तरीका तथा ROP ड्यूटी के दौरान IED से बचा के लिए ध्यान में रखनेवाली बाते

01 जनवरी 2022

इंसास राइफल Vs AK-203 राइफल

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने RPG-7 राकेट लांचर के बारे में जानकारी प्राप्त किया था और अब इस नई ब्लॉग पोस्ट में हम हिंदी में  इंसास और AK-203 राइफल (INSAS Rifle Vs AK-203 in Hindi)के बारे में जानेगे !

AK-203 Rifle
AK-203 Rifle
जैसे की हम जानते है की इंसास राइफल के जब में आर्म्ड फोर्सेज में सामिल किया गया तब से ही बहुत तरह के इसके प्रॉब्लम के बारे में फोर्सेज ने बहुत से फोरम पर उठाया  और उसी समय से इंसास के बदले में कौन सं राइफल इस्तेमाल किया जा सकता है उसकी खोज सुरु हो गई थी और अब ए निर्णय लिया गया है अम्रेड फोर्सेज में इंसास के जगह पर रूस निर्मित AK-203 राइफल का इस्तेमाल किया जायेगा ! और इसका निर्माण से सम्बंधित समझौता रूस और भारत सरकार के बीच में फाइनल हो गया है और अब कुछ समय की बात है जब इसे भारतीय फ़ौज में सामिल कर लिया जाएगा !

जरुर  पढ़े :SSG-69 राइफल की रख रखाव और सफाई का तरीका 

इंसास राइफल जो की 1998 में DRDO(Defense Research & Development Organization) के ARDE(Armament Research & Development Establishment ) ने डेवेलोप किया और भारत सरकार की आर्मामेंट निर्माण करने अली फैक्ट्री में  इसका निर्माण किया गया ! श्रुर से ही इस राइफल के ऊपर आर्म्ड फाॅर्स के जवानो ने इसमें पहने वाले रोके और टूट फुट तथा अकुरेसी के कारन किसी भी ऑपरेशन में जाते समय AK-47 को ज्यादा अहमियत दी इंसास के तुलना में विशेष कर अतंकड़ या नक्सलादी ऑपरेशन के दौरान !

जरुर पढ़े  7.62 mm MMG के प्रकार तथा टेक्निकल डाटा 7.62 mm MMG के ?

फील्ड में कामकरने अली फोर्सेज के फीडबैक लेने के बाद 2018 में भारत सरकार ने यह निर्णय लिया की इंसास राइफल के जगह पर AK-203 राइफल का इस्तेमाल किया जायेगा और इंसास राइफल को फेज मैनर में फोर्सेज से हटा दिया जायेगा ! AK-203 जो की एक लेटेस्ट राइफल है जो की रसियन कलाश्निकोह को सरकार-सरकार समझौता (Intergovernmental Agreement (IGA))को भारत के कोरवा आर्डिनेंस  फैक्ट्री  अमेठी उत्तर प्रदेश  में बनाया जायेगा  जो इंडो-रुस्सियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के तहत बनाया जायेगा !

INSAS और AK-203 में अंतर (INSAS Vs AK-203 Rifle

INSAS Rifle vs AK-203 Rifle
INSAS Rifle vs AK-203 Rifle

इसके साथ ही इंसास और AK-203 का तुलनात्मक  से सम्बंधित ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई ! उम्मीद है की आपलोगों के ए पोस्ट पसंद आएगी !इस ब्लॉग को सब्सक्राइब या फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे!

इसे भी  पढ़े :
  1. भारतीय पुलिस ड्रिल ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाले परेड कमांड का हिंदी -इंग्लिश रूपांतरण
  2. ड्रिल में अच्छी पॉवर ऑफ़ कमांड कैसे दे सकते है
  3. ड्रिल का इतिहास और सावधान पोजीशन में देखनेवाली बाते
  4. VIP गार्ड ऑफ़ ऑनर के नफरी और बनावट
  5. विश्राम और आराम से इसमें देखने वाली बाते !
  6. सावधान पोजीशन से दाहिने, बाएं और पीछे मुड की करवाई
  7. आधा दाहिने मुड , आधा बाएं मुड की करवाई और उसमे देखने वाली बाते !
  8. 4 स्टेप्स में तेज चल और थम की करवाई
  9. फूट ड्रिल -धीरे चल और थम
  10. खुली लाइन और निकट लाइन चल

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