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01 March 2022

प्रथम सुचना रिपोर्ट(F.I.R.) तथा उससे सम्बंधित बाते जो सभी पुलिस ऑफिसर को जननी चाहिए

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने पुलिस स्टेशन के कार्य प्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त की और जाना की पुलिस स्टेशन में एक ऑफिसर इन चार्ज के अलावा कौन कौन से अधिकारी होते है और उनका क्या क्या काम होता है ! और इस नई ब्लॉग पोस्ट में हम प्रथम सुचना रिपोर्ट या ऍफ़ आई आर (F.I.R.) और उससे से सम्बंधित बाते जो की हर के पुलिस के जवान जो पुलिस स्टेशन में काम करता है उसे मालूम होना चाहिए(FIR aur usse sambandhit bate jo har policewale ko malum hona chahie )उसके बारे में जानेगे !

इस विषय को अच्छे से समझने के लिए हमने इसे निम्न भागो में बाँट दिया है 

प्रथम सुचना रिपोर्ट के लिए जरुरी बाते
FIR

  • प्रथम सुचना रिपोर्ट के लिए जरुरी बाते(Essentials of FIR) 
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट  किसी भी इंसिडेंट के इन्क्वायरी को सुरु करने का पहला रिपोर्ट होना चाहिए(First in time) !
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट अभियुक्त के द्वारा लिखाने पर (FIR by accused) 
  • स्वाम सज्ञान लेकर कर पुलिस द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट  लिखना(Information by Police officer / suo-motto registration of FIR u/s 157 Cr.PC) 
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट में होने वाली आम गलतिया जिससे की अभियुक्त बरी हो जाते है (General defects relating to the FIR which may cause acquittal)
  • एक विस्तृत प्रथम सुचना रिपोर्ट की बाते(How to make FIR comprehensive?) 
  • देरी से प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखने की समस्याए (Problem arising due to delay in registering FIR)
  • देरी से प्रथम सुचना रिपोर्ट को कोर्ट में भेजने पे समस्याए (Problem arising due to delay in sending FIR to Court and other places)
जैसे के हम जानते है की साधारणतः केवल गोपिस, या सुनी सुनाई या अफवाह CrPC के सेक्शन 154 के अंतर्गत नहीं आते है और उसके ऊपर प्रथम सुचना रिपोर्ट नहीं लिखी जा सकता है लेकिन पुलिस स्टेशन में कोई भी सुनिश्चित इनफार्मेशन किसी संज्ञेय अपराध के होने के बारे में मिलता है तो उसके ऊपर CrPC 154 के अंतर्गत प्रथम सुचना रिपोर्ट जरुर लिखी जाएगी !

1. प्रथम सुचना रिपोर्ट के लिए जरुरी बाते(Essentials of FIR) : प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखते समय निम्न बाते खा ख्याल रखना चाहिए :
  • समय लिखते समय विशेष ध्यान देना चाहिए और सभी एक्शन समय के क्रम अनुसार लिखा जाना चाहिए !
  • इधर उधर की सुनी सुनाई बाते को विशेष महत्व न देते हुए बताई गई सभी सही बाते जो की तथ्यपूर्ण हो उसे सामिल करना चाहिए !
  • जो भी इनफार्मेशन प्रथम रिपोर्ट में सामिल किया जाय ओ सभी उस संज्ञेय अपराध से सम्बंधित होने चाहिए जिसके बारे में यह प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखी जा रही है !
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट थाना इन चार्ज या उनके द्वारा नामित पुलिस ऑफिसर के द्वारा लिखा जाना चाहिए !
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट केवल और केवल लिखित ही होना चाहिए अगर किसी ने बोल कर इनफार्मेशन दे रहा है तो भी उस इनफार्मेशन को लिख कर इनफार्मेशन देने वाला व्यक्ति पढ़ कर सुनाने के बाद प्रथम सुचना में समिलित करना चाहिए !
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट इनफार्मेशन देने वाले के द्वारा हस्ताक्षरित जरुर होना चाहिए !
  • सभी प्रथम सुचना रिपोर्ट का एंट्री जनरल डैयरी में जरुर करना चाहिए !
  • अगर कोई इनफार्मेशन टेलीग्राम के द्वारा प्राप्त हुवा हो तो केवल और केवल ओरिजिनल टेलीग्राम जिसके ऊपर हस्ताक्षर या अंगूठा का मार्क होता है वही प्रथ सूचना रिपोर्ट बन सकता है लेकिन अगर एक टेलीग्राम पाने के बाद एके पुलिस ऑफिसर समझता है की टेलीग्राम में दी हुई बाते सही है तो वह स्वाम सज्ञान लेकर प्रथम सुचना रिपोर्ट लिख सकता है !वासे ही टेलीफोन से प्राप्त सुचना के ऊपर भी कर सकता है 
2. प्रथम सुचना रिपोर्ट  किसी भी इंसिडेंट के इन्क्वायरी को सुरु करने का पहला रिपोर्ट होना चाहिए(First in time):
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट वह सूचना है जो की पुलिस के सबसे पहले मिलती है न की वह सूचना जो पुलिस चाहए अपने अनुसार रिकॉर्ड कर ले  इसका मतलब यह हुवा के संज्ञेय अपराध से सम्बंधित जो जाकारी पुलिस स्टेशन में सबसे पहले मिली और जिसके ऊपर रिपोर्ट लिखा गया वही  प्रथम सुचना रिपोर्ट होगा !
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखने के बाद ही इन्वेस्टीगेशन सुरु होता है 
3. प्रथम सुचना रिपोर्ट अभियुक्त के द्वारा लिखाने पर (FIR by accused) : अगर कोई व्यक्ति खुद ही आकर अपराध स्वीकरण खुद हो करता है तो इस संदर्भ में उसके द्वारा दिया गया कोई भी बक्तब्य उसके खिलाफ साक्ष्य नहीं मन जायेगा कोर्ट के द्वारा लेकिन उसके द्वारा दिए गये सुचना के आधार पर अगर कोई साक्ष्य की डिस्कवरी होती है तो उसे साक्ष्य माना  जायेगा !

4. स्वाम सज्ञान लेकर कर पुलिस द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट  लिखना(Information by Police officer / suo-motto registration of FIR u/s 157 Cr.PC) : निम्नलिखित कुछ स्थतिया जिसमे पुलिस स्वाम संज्ञान लेकर प्रथम सुचना रिपोर्ट लिख सकती है !
  • जब पुलिस ऑफिसर को कोई गोपनीय , अज्ञात व्यक्ति के द्वारा , या टेलीग्राम या टेलीफोन के द्वारा किसी संज्ञेय अपराध की सुचना मिलती है तो पुलिस स्वाम सज्ञान लेकर प्रथम सुचना रिपोर्ट लिख सकती है !
  • जब पुलिस ड्यूटी के दौरान किसी संज्ञेय अपराध के बारे में पता चलता है !
  • या जब किसी पुलिस ऑफिसर के उपस्थिति में कोई संज्ञेय अपराध होता है!
ऊपर बताई गई परिस्थितियो में पुलिस स्वाम संज्ञान लेकर प्रथम सुचना रिपोर्ट लिख सकती है !

5. प्रथम सूचना रिपोर्ट में होने वाली आम गलतिया जिससे की अभियुक्त बरी हो जाते है (General defects relating to the FIR which may cause acquittal): प्रथम सुचना रिपोर्ट  कुछ निम्लिखित गलतिया है जिसके कारन अभियुक्त का बरी होने की संभावना ज्यादा रहती 
  • बिना किसी कारन प्रथम सुचना रिपोर्ट को लिखने में देरी करना 
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट या स्टेटमेंट के ऊपर  शिकायत कर्ता का हस्ताक्षर का न होना !
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट को कोर्ट में देरी से भेजना !
  • गवाह या धायल शिकायतकर्ता के द्वारा अपराध का पूरा विवरण न देना !
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट के अन्दर विरोधाभाष तथ्यों का होना !
  • शिकायतकर्ता के द्वारा दिए गए तथ्यों को इन्वेस्टीगेशन और ट्रायल  के दौरान चेक नहीं करना
  • शिकायतकर्ता  जिन्होंने शिकायत की है उनकी जाँच ट्रायल के दौरान नहीं करना !
  • जिस पुलिस ऑफिसर ने शिकायत रजिस्टर की उसकी ट्रायल के दौरान एग्जामीन नहीं करना !  
  • जिस कांस्टेबल ने प्रथम सुचना रिपोर्ट कोर्ट में सबमिट  की उसकी ट्रायल के दौरान एग्जामीन नहीं करना !  
6. एक विस्तृत प्रथम सुचना रिपोर्ट की बाते(How to make FIR comprehensive?) : थाना इन चार्ज के यह सुनिश्चित  करना चाहिए की प्रथम सुचना रिपोर्ट में लिखी हुई सारी शिकायतकर्ता के द्वारा बता गयी  अनुसार है !और उन्हें अपनी ओर से कोई भी तथ्य या शब्दावली नहीं डालनी चाहिए !प्रथम सुचना रिपोर्ट की पूरी बाते शिकायत करता के द्वारा बताई गई बाते ही होने चाहिए ! प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखते समय निम्नलिखित 11 "W" का ध्यान रखना चाहिए :
  • क्या बताना चाहते हो(What information have you got to convey? )
  • बताने वाला कौन है , भुक्त भोगी , चास्म्दिद गवाह या सुनी सुनाई बात वाला(What is his capacity - eye witness victim or hear say?)
  • अपराध कौन किया होगा(Who possibly committed crime?)
  • अपराध का विक्टिम या भुक्त भोगी कौन है (Who is the victim of the crime?)
  • कब हुवा ?   (When did it occur?)
  • कहा हुवा ? (Where did it occur? (the spot)
  • क्यों हुवा ?(Why? (Motive of crime)
  • कैसे हुवा? (Which way? Describe the incident. The role played by each accused-weapon used, etc.)
  • कौन कौन वह मजूद था ?(Who else was present then?)
  • अपराध के जगह से क्या क्या ले गया गया है ? (What was taken away by the accused? (any article/property)
  • क्या साक्ष्य अपराधी द्वारा छोड़ा गया है ? What traces were left by accused? (physical clues)
उपरोक्त बातो को प्रथम सुचना रिपोर्ट लिहते समय ध्यान में रखने पर एक रिपोर्ट को सही और विस्तृत बनाया जा सकता है !
7. देरी से प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखने की समस्याए (Problem arising due to delay in registering FIR): प्रथम सुचना रिपोर्ट को देरी से लिखने पर निम्नलिखित समस्याए आ सकती है :
  • देरी से लिखी गई प्रथम सुचना रिपोर्ट सेजिसका देरी से लिखने का कोई कारन न हो तो शंका उत्पन्न करती है की की मनगढ़ंत होने के बारे में !
  • अगर देरी का  सही कारन होतो उसे सही विवरण के साथ बताना चाहिए !
8.देरी से प्रथम सुचना रिपोर्ट को कोर्ट में भेजने पे समस्याए (Problem arising due to delay in sending FIR to Court and other places): देरी से FIR कोर्ट में सबमिट करना कोई कारन नहीं हो सकता है की FIR रिजेक्ट हो जाए अगर देरी से सबमिट करने का सही कारन होतो ! इसके संदर्भ में कोर्ट के बहुत सारे निर्णय है जो की पक्ष और विपक्ष दोनों में जैसे :

  • हरपाल सिंह बनाम हिमाचल सरकार(Harpal Singh Vs. State of H.P. -AIR 1981 SC 361) का एक केस था जिसमे रेप से सम्बंधित एक FIR को 10 दिन के देरी से रजिस्टर किया गया था और उसके सम्बन्ध में जो कारन दिया गया थक की यह देरी परिवार के सदस्यों के द्वारा परिवारिक प्रेस्टीज के कारन हुवा तो उसे कोर्ट ने सही कारन मान कर परमिट किया ! 
  • जब की एक दुस्र्रे केस में रामजग (Ramjag- AIR 1974 SC 607-61) जिस में देरी के कारन को अपर्याप्त मानते हुए FIR को ख़ारिज कर दिया था !
इस लिए यह जरुरी है की सभी पुलिस ऑफिसर्स को प्रथम सुचना रिपोर्ट और उससे सम्बंधित कोर्ट के आदेश के बारे में जानकारी रखनी चाहिए और ऊपर बताई गई बाते को प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखते समय ध्यान में रखे तो बहुत सहूलित मिलेगा !

इस प्रकार से  प्रथम सुचना रिपोर्ट तथा उससे सम्बंधित जानने वाली बाते एक पुलिस ऑफिसर   से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

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  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
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  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
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  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

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