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05 सितंबर 2017

वर्बल आर्डर में जमीनी निशान देने का तरीका क्या होना चाहिए ?

पिछले पोस्ट में हमने वर्बल आर्डर देने के तरतीब के बारे में जानकारी प्राप्त की इस पोस्ट में हम वर्बल आर्डर में जमीनी निशान देते समय ध्यान में रखने वाली बाते कौन कौन सी है(Jameeni Nishan dete samay dhyan me rakhnewali kaun kaun si bate hai?) उसके बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे !





किसी भी ऑपरेशन की सफलता अधिकतर कमांडर के बनाये हुए प्लान पर निर्भर करती है साथ ही इस बात पर की  कमांडर  अपने प्लान को अपने अधिनस्त कार्मिको को किस प्रकार बयाँन  करता है ! इस क्रिया को पूरा करने के लिए एक तरीका आदेश पास करने का बनाया गया है जिससे आदेशो को पास करने में एक रूपता बनी रहे एवं सभी को ये पता रहे की उसे क्या करना है !
ऑपरेशन ब्रीफिंग
ऑपरेशन ब्रीफिंग 
जरुर पढ़े : किसि ऑपरेशन का मूल्यांकन करने का तरीका


उसी को ध्यान में रखते हुए जब एक कमांडर वर्बल आर्डर देता है उस वर्बल आर्डर में जो जमीनी निशान है(Jameeni Nishan batane ke mahatwpurn bate) उसके ब्यान करते समय निम्न बातो को ध्यान में रखे तो उसका ब्यान उसके अधिनस्त को समझने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगा :

  • सभी जमीनी निशानों का नाम दिया जाय : जो जमीनी निशान आप बता रहे है उसके नाम दिए जाने जरुरी है ! नाम उस निशान से सम्बंधित ही दिया जाना चाहिए ! कई बार एक जैसे दो निशान हो सकते है तब उन दोनों का अलग अलग नाम देना चाहिए ! जैसे :- दाहिने गोल छतरी नुमा दरख्त , नाम छतरी !
  • जमीनी निशान हमेशा क्लॉक -वाइज डायरेक्शन में ही देना चाहिए ! जमीन पर आमरुख से स्टार्ट कर लेफ्ट तो राईट चलना चाहिए फिर आमरुख पर आकर ख़त्म करना चाहिए !
  • किसी मॉडल पर जमीनी निशान देते समय मौजूदा पोजीशन से स्टार्ट करना चाहिए तथा वही पर समाप्त करना चाहिए !
  • जमीनी निशान एक बार बताने के बाद , नाम दुबारा बताना चाहिए ! जमीनी निशान बताते समय यदि किसी प्राप्त करता को जमीनी निशान दिखाई न दे तो ओ नोट सीन  बोल सकता है ! कमांडर को उसे क्लियर करने के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए !
  • जमीनी निशानों के दौरान ही प्राप्त कर्ता बीच में संदेह होने पर पूछ सकता है बाकी आर्डर के दौरान नहीं !
ऐसे ऑपरेशन जो पलटन के स्तर पर होते है या जिसमे कम ट्रूप्स भाग ले रहे हो उसमे आर्डर के दौरान सभी ट्रूप्स को शामिल किया जा सकता है और यह काफी फायदेमंद होता है और ऐसे ऑपरेशन आर्डर को ब्रीफिंग बोलते है ! यानि आर्डर देते समय केवल O ग्रुप सामिल हो तो उसे हम वर्बल आर्डर कहते है लेकिंग जब आर्डर लेने के लिए उस ऑपरेशन में  सामिल होने वाले सभी ट्रूप्स आर्डर लेने के लिए सामिल हो तो उसे हम ब्रीफिंग कहते है !

इस प्रकार से वर्बल आर्डर देने के दौरान जमीनी निशान बताने के तरीके  से सम्बंधित  एक संक्षिप  ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई! उम्मीद है की पोस्ट आपको पसंद आएगा ! अगर कोई  या ब्लॉग के बारेमे हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे ! और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक शेयर तहत लिखे करके हमलोगों को प्रोतसाहित करे और अच्छा करने के लिए 
इन्हें भी पढ़े :
  1. सेक्शन बैटल ड्रिल और उसे सफल बनाने वाली बातें
  2. 4 बाते शत्रु के कारगर फायर के अंदर आने पे करनी चाहिए
  3. 3 तरीके दुश्मन के फायर पोजीशन को पता लगने के
  4. सेक्शन फार्मेशन और सेक्शन फार्मेशन का बनावट
  5. आतंक प्रभावित इलाके में सिक्यूरिटी पोस्ट लगान
  6. रात के संतरी तथा स्काउट की ड्यूटी क्या होता है
  7. फील्ड फोर्टीफीकेसन में इस्तेमाल होने वाले फौजी टेकटिकल शब्दों का क्या मतलब
  8. फौजी टैक्टिकल शब्द जैसे फर्स्ट लाइट फ्लैंक गार्ड यदि क मतलब
  9. अम्बुश की जुबानी हुक्म क्या होता है और इसमें सामिल होने वाले मुख्य बाते
  10. रोड ओपनिंग पार्टी/पट्रोल और उसके महत्व के बारे

15 मार्च 2017

4 बाते चारो ओर ज़मीनी निशान देने के

पिछले पोस्ट में  हमने जमीनी निशान को बयान कैसे करना चाहिए इसके बारे में जानकारी  थे इस पोस्ट में उन जमीनी निशान को देनें के बारे में जानकारी हासिल करेंगे  जो जमीनीं निशान चारो ओर फैले हो (Charo or faile hue zameeni ko byan karne ka tartib)!


इस पोस्ट को पढ़ने के बाद इन सवालो का ज सकेंगे :
  • चारो ओर  ज़मीनी निशान देने तरतीब 
  • आटोमेटिक हथियारों के जिम्मेवारी के इलाके  बाटने  तरतीब (Automatic hathiyar jimmewari ke ilake batne ka tarik ka tartib)
  • जमीनीं निशान देते समय ध्यान में रखने वाली बाते (Jameeni nishan dete samy dhyan me rakhnewali bate )
लड़ाई या किसी आपरेशन के दौरान जुबानी हुकुम देने के लिए या टारगेट पर फायर डलवाने के लिए टारगेट और ज़मीनी निशान का बयान   जरुरत पड़ती है !किसी  आपरेशन के  दौरान इसमें अधिक मुश्किल पेश आती है !

क्यों की टारगेट को ढूढना मुश्किल होता है और बहुत कम समय के  लिए  टारगेट दिखाई देता है !  आर्म्ड फाॅर्स  या पुलिस ज़मीनी निशान के बयान के लिए एक स्टैण्डर्ड प्रोसीजर बनाया गया है ताकि कमांडर जमीनी निशानों का बयान जल्दी और एक्यूरेसी  सके और जवान उन्हें उन्हें आसानी से  पहचान सके !

चारो ओर  ज़मीनी निशान देने के तरतीब (Charo or zameeni nishan dene ke tartib):   चारो ओर ज़मीनी निशान को बयान करने का तरतीब इस प्रकार से है !
  • सबसे पहले आम रुख बताया जाय 
  • उसके बाद घडी के सीधे रुख सभी ज़मीनी निशान दिए जाए  जो दिखाई दे रहे हो !
  • वापिस आम रुख 
  • ज़मीनी निशान को दोहराये जाए 
  • आखिर में उन ज़मीनी निशानों  को बताया जाय जो दिखाई न दे रहे हो 

आटोमेटिक वेपन के जिम्मेवारी  के इलाके बाटने के तरतीब(Automatic waepon ke jimmewari ke ilake batne ka tartib) : समय आटोमेटिक वेपन को जब हम "ले" करते है तो उसको एक जिम्मेवारी का इलाका  दिया जाता है जिसके अंदर निकलने वाले टारगेट को सबसे पहले उस आटोमेटिक वेपन बर्बाद करेगा ! इस  को बाटने का तरतीब इस प्रकार है :
  • पहले आमरुख बताया जाए 
  • बाएं हद और दाहिनी हद से जिम्मेवारी के इलाके बताया जाए 
  • जिम्मेवारी के इलाके में मौजूद मदद के निशान  
  • फिर प्राइमरी आर्क , सेकेंडरी आर्क  फिक्स्ड लाइन बताया जाए 
  • फायर खोलने की हद  दिन में और रात  में  !

ज़मीनी निशान देते समय ध्यान में रखनेवाली बाते(Jamini nishan dete samay dhyan me rakhne wali bate ) : ज़मीनी निशान को देते समय कुछ बातो को ध्यान में रखना चाहिए  से है :
  • बयान छोटा , सदा और साफ हो 
  • कठिन निशान सभी तरीको की मदद से दे 
  • दिशा हमेशा आमरुख से ली जाये 
  • दिए गए हदो में ज़मीनी निशान बाएं से दाहिने बयान करना चाहिए 
  • कमांडर द्वारा दिए गए निशान का नाम बदली नहीं  
  • जो निशान दिखाई नहीं दे रहा हो उसे आखरी में बताये !
  • अगर जमीनी  निशान का फालाव 1 डिग्री से ज्यादा हो तो उसका कोई किनारा लिया जाए !
  •  उन्ही जमीनी निशानों का बयान करे जो आप के  जुबानी हुकुम से सम्बंधित हो !
  • पहले अपना अपना ज़ुबानी  तैयार करे और फिर उसके मुताबिक ज़मीनी निशाने चुने !

इस प्रकार से यहाँ ज़मीनी निशान देते समय ध्यान रखने वाली बाते से सम्बंधित संक्षिप्त ब्लॉग  हुई ! इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप इन  जवाब प्राप्त कर लिए होंगे :
  • ज़मीनी निशान का बयान   जरुरत कब  पड़ती है?
  • क्यों ज़मीनी निशान के बयान के लिए एक स्टैण्डर्ड प्रोसीजर बनाया गया है  ?
  • टारगेट और ज़मीनी निशान का बयान की   जरुरत क्यों  पड़ती है?
अगर यह पोस्ट के बारेमे में कोई तो निचे कमेंट बॉक्स में लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज लिखे कर के हमलोगों को प्रोतोसाहित करे !
विशेषकर आप के लिए  :
  1. फिल्डक्राफ्ट और उसके फायदे
  2. फासले का अनुमान लगाना और अनुमान लगाने का तरीका
  3. चीजे क्यों दिखाई देती है टारगेट को कैसे बयान करते है ?
  4. कामोफ्लाज और कांसिल्मेंट तथा फायर कण्ट्रोल आर्डर की जानकारी
  5. कमोफ्लाज के सिद्धांत , और कामोफ्लाज करने का तरीका
  6. कोसिल्मेंट क्या है और उसका तरतीब
  7. स्टाकिंग क्या है ? और स्टाकिंग के फायदे तथा और जाननेवाली बाते !
  8. आवाज़ तथा बेअरिंग के मेथड से फासले का अनुमान लगाने का तरीका

04 अगस्त 2016

जमीनी निशान ब्यान करने का तरीका और ब्यान करते समय ध्यान में रखनेवाली बातें

पिछले पोस्ट में हमने जमीनी निशान का ब्यान और आमरुख के बारे में जानकारी शेयर किये थे ! इस पोस्ट में हम जमीनी निशान को ब्यान करने का तरीका और ध्यान में रखने वाली बाते(Jamini  nishan ko byaan karne ka tarika aur  jamini nishan ko byaan karte samay dhyan me rakhne wali bate) के बारे में जानकारी शेयर करेंगे !


जैसे की हम जानते है की जमीनी निशान दिखने के लिए सबसे सीधा और साधारण तरीका जिससे निशान जल्द से जल्द बताया जा सके  का प्रोयोग करना चाहिए ! जमीनी निशान दिखने(Jamini nishan ko dikhane ka tarika) का कुछ तरीके इस प्रकार से है !

जरुर पढ़े :एक लाइन, दो लाइन और तीन लाइन कब और कैसे बनाया जाता है
  • सीधा तरीका (Direct Method for indicating Target): यह सबसे साधारण और अच्छा तरीका है ! इसमें दिशा के अलावा और किसी मदद का सहयोग नहीं लिया जाता है और सबसे असं जमीनी निशान दिखने में काम आता है !
  • दिशा का तरीका (Direction Method for indicating Target): इस तरीके में जमीनी निशान की दिशा दी जाती है  आम रुख , मदद का निशान , या ज़मीनी निशान से , यदि बताया न गया हो तो सभी दिशा आम रुख से ही मानी जाती है !
  • निचे लिखी गई दिशाओ का ही प्रयोग किआ जाता है:  निचे दिए दिशाओ का डिग्री में कितना वैल्यू होता है दिया गया है !   
    (क) थोडा बाएँ या दाहिने का तरीका(Thoda baen ya dahine ka tarika) - 10 डिग्री 
    (ख) एक चौथाई बाएँ या दाहिने का तरीका(Ek chauthai baen ya dahine ka tarika) - 22 डिग्री 
    (ग) आधा बाएँ या दाहिने का तरीका(Aadha baen aur dahine ka tarika) - 45 डिग्री 
    (घ) तीन चौथाई बीन या दाहिने का तरीका(Teen chauthai baen ya dahine ka tarika) - 67 डिग्री 
    (ड) पूरा बाएँ या दाहिने का तरीका(Pura baen ya pura dahine ka tarika) - 90 डिग्री 
  • मदद का निशान का तरीका (The Reference Point Method): यह तरिकताब इस्तेमाल किया जाता है जब सीधे तरीके से निशान दिखाया न जा सके ! इस तरीके में निशान की दिशा किसी और जमीनी निशान या मदद की निशान से देते है ! जो की  पहले से ही चुना हुआ रहता है और पहले से ही बताया गया होता है !

         मदद का  निशान चुनते वक्त ध्यान में रखने वाली बातें(Madad ke nishan chunte samay dhyan              merakhne wali bate ) :
         (क) निशान मशहूर हो
         (ख) 19 डिग्री के फासले से अधिक दूर न हो दो मदद के निशान 
         (ग) मदद का निशान के नाम पहले से मुकरर किया हो !
         (घ) कितने निशान चुने जायेंगे वह जिमेवारी के इलाके के चौड़ाई पर निर्भर करेंगा 
         (ड) निशान अलग अलग प्रकार के चुने जाये
  • घडी का तरीका (The Clock ray Method): यह तरीका मदद के निशान के तरीके के साथ इस्तेमाल किया जाता है ! घडी के बीच वाले हिस्से को उस निशान पर रखो जिससे आप मदद के निशान के तौर पर इस्तेमल कर रहे हो ! घडी के जितने बजे अगला निशान परता है दिया जाए !
           घडी का तरीके को इस्तेमाल करते समय (Ghadi ka tarika ko istemal karte samay dhyan me                 rakhne wali baten): 
           (क) घडी का छे बजे का रुख अपनी तरफ रखे 
           (ख) घडी का बजे  बताने से पहले बाएँ या दाहिने का प्रयोग किआ जाए !
           (ग)  6 और 12 बजे के लिए निचे और ऊपर का प्रयोग किया जाये !
           (घ) टुकड़ी नजदीक हो ताकि घडी की सुइओ का ठीक अनुमान लगा सके !
           (ड) उची जमीं से निचे देख रहे हो तो घडी जमीं के साथ समतल हो !
           (च ) नीची जमींन से उची जमीं देख रहे हो तो घडी खड़े रुख में हो !

जरुर पढ़े :  सलूट की महत्व और सलूट कैसे कब करने का तरीका
  • डिग्री का तरीका (The Degree  Method): अगर घडी के समय की रुख में एक ही दिशा में ज्यादा निशान हो तब टारगेट को जाहिर करने के लिए घडी के साथ डिग्री का भी इस्तेमाल किया जाता है !
          डिग्री को नापने के लिए हमारे पास निम्न  साधन है(Degree napte ke liye sadhan) 
          (क) बाएँ हाथ से - 1, 3, 5,8, 12 और 19 डिग्री 
           (ख) दूरबीन से - 4 डिग्री 
          (ग) राइफल के फोरे साईट प्रोटेक्टर और बेक साईट लीफ से - 3 डिग्री 
          (घ ) LMG फोरे साईट प्रोटेक्टर - 2 डिग्री   
  • टारगेट का सत्यापन (Verification): यह यकीं करने के लिए की कोई मुश्किल ज़मीनी निशान जो बताया गया हो उसे सब जवान ने समझ लिया है , कमांडर उसे चेक बेक करवा सकता है ! इसके लिए वोह चेक बेक शब्द का प्रयोग करता है ! जो जवान चेक कर रहा है वोह दी हुए ज़मीनी निशान से कोई और जमीनी निशान का ब्यान करता है ! मुश्किल जमीनी निशान दिखने के बाद कमांडर "सीन(Seen) " पूछ सकता है ! जिसे निशान समझ आया हो चुप रहेगा और निशान नहीं देखा है ओ "नोट सीन(Not seen) " का प्रयोग करेगा !
  • चारो और ज़मीनी निशान देने का तरीका(Charo or jameeni nishan dene a tarika) : यह इस तरतीब में दिया जाय 
         (क) सबसे पहले आमरुख
         (ख)फिर घडी के सीधे रुख सभी ज़मीनी निशान दिए जाएँ जो दिखाई दे रहे हो !
         (ग)वापिस आमरुख  में जो जमीनी निशान दिखाई न दे रहे हो उन्हें बताया जाए !
  • हथियारों के जिम्मेवारी के इलाके को बताने की तरतीब(Hathiyaro ke jimmewari ke ilake ka vyaan karne ka tartib) : इस तरतीब में बताया जाये ! 
          (क) आम रुख(Aamrukh) 
          (ख) बाएँ हद(Baen had) और दाहिने हद(Dahini had) 
          (ग) मदद के निशान(Madad ke nishan) (जिम्मेवारी के इलाके में)
          (घ) प्राइमरी अर्क(Primary arc) , सेकेंडरी अर्क(Secondary Arc) और फिक्स्ड लाइन(Fixed line) 
          (ड) फायर खोलने के हद दिन में और रात में 
  • जमीनी निशान देते समय ध्यान में रखने वाली बातें(Jamini nishan dete samay dhyan me rakhne wali baten)  : यह निम्न लिखित है :
         (क) ब्यान छोटा , सादा और साफ़ हो 
         (ख) कठिन निशान सही तरीको की मदद से बताया जाय 
         (ग) दिशा हमेशा आम रुख से दी जाए 
         (घ) दिए गए हदों में जमीनी निशान बाएँ से दाहिने बयान किया जाय !
         (ड) कमांडर द्वारा दिए गए  निशान का नाम बदली नहीं करना चाहिए !
         (च) जो जमीनी निशान दिखाई न देता हो उसे आखिरी में ब्यान करे !
         (छ) अगर जमीनी निशान का फैलाव 1 डिग्री  से ज्यादा है तो फिर उसका कोई किनारा लिया जाय !
         (ज) उन्ही जमीनी निशानों का बयान करें जो आप के ज़ुबानी हुकुम से सम्बंध रखते हो ! पहले अपने                   ज़ुबानी तैयार करें और फिर  उसके  मुताबिक ज़मीनी निशान चुने !  


इस प्रकार से जमीनी निशान और टारगेट दिए जाते है ! उम्मीद है की ये पोस्ट पसंद आएगा , अगर कोई कमेंट या सजेसन हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब  करके हमलोगों को सपोर्ट करे!

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विशेषकर आप के लिए  :
  1. फिल्डक्राफ्ट और उसके फायदे
  2. फासले का अनुमान लगाना और अनुमान लगाने का तरीका
  3. चीजे क्यों दिखाई देती है टारगेट को कैसे बयान करते है ?
  4. कामोफ्लाज और कांसिल्मेंट तथा फायर कण्ट्रोल आर्डर की जानकारी
  5. कमोफ्लाज के सिद्धांत , और कामोफ्लाज करने का तरीका
  6. कोसिल्मेंट क्या है और उसका तरतीब
  7. स्टाकिंग क्या है ? और स्टाकिंग के फायदे तथा और जाननेवाली बाते !
  8. आवाज़ तथा बेअरिंग के मेथड से फासले का अनुमान लगाने का तरीका

03 अगस्त 2016

जमीनी निशान ब्यान करने का तरीका

पिछले पोस्ट में हमने फील्ड क्राफ्ट के जिस विषय पे बात किआ था वह " आवाज़ तथा  बेअरिंग के मेथड से  फासले का अनुमान लगाना " इस पोस्ट में हम बात करेगे "जमीनी निशान का बयान करना(jameeni nishan byan karna) "और  पहचान करने का तरतीब क्या होता है


जैसे की हम जानते है की किसी ऑपरेशन के दौरान ज़ुबानी हुकुम देने के लिए या टारगेट पर फायर डलवाने के लिए टारगेट की बयान और पहचान की ज़रूरत पड़ती है ! ऑपरेशन के दौरान इसमें अधिक मुश्किल आती है , क्यों की टारगेट को ढूढना मुश्किल होता है और कभी टारगेट कोई दिखाई भी देता है तो बहुत ही कम समय के लिए दिखाई देता है और छुप जाता है !

जरुर पढ़े : पुलिस यूनिफार्म पहनते समय देखनेवाली बातें

इस लिए आर्म्ड फ़ोर्स में ज़मीनी निशान का बयान करने के लिए एक स्टैण्डर्ड प्रोसीजर  बनाया गया है ताकि कमांडर ज़मीनी निशानों का बयां जल्दी और सही कर सके और जवान उन्हें आसानी से पहचान सके !

ज़मीनी निशान का बयान करते समय उपयोग होने वाले कुछ शब्द और उनके परिभाषा( jamini nishan byan karte samay upyog hone wale kuchh shabd aur unke paribhasha)
  • आमरुख(Aamrukh ka paribhasha) :  आमरुख दूर स्तिथ वह मशहूर जमीनी निशान होता है जो दिए गए जिम्मेवारी की इलाके को दो बराबर भागो में  बाटता है और जिसके सहायता से कमांडर अपने इलाके के और निशानों को पहचान करता है  !
  • मदद का निशान(maad ka nishan paribhasha ) :पहले से मुकरर किए हुए निशान जिनकी मदद से किसी दुसरे निशान या टारगेट का ब्यान किया जाता है ! ये बाकि निशानों के वानस्पत ज्यादा मशहूर होना चाहिए !
  • ज़मीनी निशान(jamin nishan ka paribhasha) :  ये पहचान में आने वाले निशान है जिनको कमांडर ज़ुबानी हुकुम में इस्तेमाल करता है !
  • टारगेट(target ka paribhasha) : वह निशान जहा पर किसी हथियार का फायर गिराया जाता है या फायर के लिए मुकरर किआ जाता है उसे हम टारगेट कहते है !

ज़मीनी निशान देने का तरतीब(Jamini Nishan dene ka tartib) : फ़ौज की सहुलियत के लिए एक तरतीब बनाया गया है जिसके इस्तेमाल से जमीनी निशान का बयाँन  आसानी से किया जा सकता है और उस तरतीब  को शोर्ट फॉर्म में GRAD कहते है ! GRAD का फुल फॉर्म होता है G-Group( ग्रुप ), R-Range(रेंज) , A- Aid(मदद ), D-discription(विवरण)
  • Group(ग्रुप)- जिस टुकड़ी को ज़मीनी निशान दिखाना है उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए , जैसे - क्लास , सेक्शन , एलेमजी ग्रुप , ओ ग्रुप यदि ,
  • Range( रेंज )-अपनी जगह से ज़मीनी निशान जिसको दिखा रहे है उसका रेंज गज में कितना है ! रेंज कम से कम 50 गज होना चाहिए !
  • Aid(मदद)- ज़मीनी निशान को ब्यान करन के लिए जिस तरीके का मदद लिए ! अगर दिशा का मदद लिया जाए तो रेंज दिशा के बाद दी जाती है !
  • Discription(विवरण)- ज़मीनी निशान का व्यान करे ताकि देखने वालों को समझ में आ जाये ! उदहारण के लिए :-  सेक्शन,  सामने देख  500 , गाँव  का बाएँ किनारा  पर  एक पेड़ जिसका पत्ता गहरे रंग के है और उसके दाहिने एक सफ़ेद माकन है , नाम गोल पेड़ " अगर इस ब्यान  को  GRAD पे देखे तो इस प्रकार से होगा !Group- सेक्शन , Range- सामने 500 गज , Aid- गाँव का बाया किनारा , Discription-एक पेड़ जिसका पत्ता गहरे रंग के है और उसके दाहिने एक सफ़ेद माकन है , नाम गोल पेड़!

आम रुख बयान करने का तरीका(Aamrukh byan karne ka tarika):- आम रुख भी हम GRAD के तरतीब से ही ब्यान करते है ! ज़मीनी निशान या व्यू पॉइंट ब्रीफिंग में सबसे पहले हम आम रुख ही कायम करते है ! आमरुख ब्यान करने का उदहारण (Example of aamrukh):
" सेक्शन  सामने स्काइलाइन पे एक गुम्बदनुमा पहाड़ नाम टेकरी !  खुदका पोजीशन  (own position ), टेकरी इसी की लेने दूर तक आमरुख "

आमरुख देते समय ध्यान  में रखने वाली बाते(aamrukh dete samay dhyan me rakhne wali baten) :
  • एक मशहूर ज़मीनी निशान हो 
  • अचल हो ,
  • दूर डिस्टेंस पे हो  और यदी हो सके तो स्काइलाइन पे हो 
  • यदि चौड़ाई  एक डिग्री से ज्यादा हो तो उसका एक किनरा लिया जाय !
  • दिन और रत के समय दिखाई देने वाला हो 

इस प्रकार से हम ज़मीनी निशान और आम रुख का व्यान करते है ! उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा !अगर कोई  कमेंट या सजेसन हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे !और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब  करके हमलोगों को सपोर्ट करे!

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  1. फिल्डक्राफ्ट और उसके फायदे
  2. फासले का अनुमान लगाना और अनुमान लगाने का तरीका
  3. चीजे क्यों दिखाई देती है टारगेट को कैसे बयान करते है ?
  4. कामोफ्लाज और कांसिल्मेंट तथा फायर कण्ट्रोल आर्डर की जानकारी
  5. कमोफ्लाज के सिद्धांत , और कामोफ्लाज करने का तरीका
  6. कोसिल्मेंट क्या है और उसका तरतीब
  7. स्टाकिंग क्या है ? और स्टाकिंग के फायदे तथा और जाननेवाली बाते !
  8. आवाज़ तथा बेअरिंग के मेथड से फासले का अनुमान लगाने का तरीका

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