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17 August 2022

7.62 mm एल एम् जी से शिस्त लेना और फायर करना के IWT सरल भाषा

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने  7.62 mm एल एम् जी को मैगज़ीन को भरना , एल एम् जी को भरना और साईट लगाना आदि के बारे जानकारी प्राप्त की और अब इस इंटीग्रेटेड वेपन ट्रेनिंग के इस लेसन में हम 7.62 mm एल एम् जी से शिस्त लेना और फायर करना   के IWT सरल भाषा में जानेगे(7.62 mm LMG se shist lena aur fire karna IWT saral bhasha me  ) ! इस पोस्ट को आसान बनानके लिए हमने इसे कांस्टेबल के बेसिक ट्रेनिंग में जिस क्रमबद्ध तरीके से सिखाया जाता है उसी क्रम में लिखेगे !

एल एम् जी
एल एम् जी 
1. शुरू-शुरू का काम :-

  • (क) क्लास की गिनती और युपों में बाँट
  • (ख) हथियार और सामान का निरीक्षण
  • (ग) बंदोबस्ती की कार्रवाई

2 दोहराई- दोहराई पिछले पाठ से (एल.एमजी. को भरना, खाली करना, साइट लगाना और मेकसेफ

3. पहुँच-एल.एम.जी.सेक्शन का खास हथियार है । लड़ाई में सेक्शन के किसी भी जवान को एल.एम.

जी. फायर करने का मौका मिल सकता है। इसलिए किस किस्म के टारगेट पर किस किस्म का फायर

करना है, उसे मालूम होना चाहिए. ताकि टारगेट को बर्बाद कर सके ।

4. उद्देश्य - एल.एम.जी. से फायर करने का तरीका सिखाना है।

5. सामान - एल.एमजी. मैगजीन होल्डल, स्पेयर पार्ट बैटेल, युटिलिटी पाउच ड्रील काट्रिज, टारगेट

और ग्राउण्डशीट।

6. भागों में बाँट -

  • भाग 1- पकड़ हासिल करना ।
  • भाग 2- शिस्त लेने का तरीका ।
  • भाग 3- फायर करने का तरीका ।
  • भाग 4-लिम्बर अप ।
 भाग 1- पकड़ हासिल करना 

पकड़ हासिल करना:- एल.एम.जी. से दो जवान टीम के तौर पर फायर करते हैं । एल.एमजी. में बायपॉट होने के कारण एल.एम.जी. को फायर में स्थिरता मिलती है और फायरर को बायें हाथ से आगे पकड़ने की जरूरत नहीं होती है ।

दुरुस्त पकड़ लाइन पोजीशन और रेंज का आदेश मिलने पर लाइन पोजीशन में जाएं और एल.एम. जी. को रेडी करें । कोहनियों की हरकत से पोजीशन को दुरुस्त करें छाती को कद के मुताबिक ऊपर करें ताकि टारगेट पर शिस्त लेने में आसानी हो।

पकड़ हासिल करने के लिए शरीर के अलग-अलग अंगों काम इस प्रकार है-

  • (क) कंधा- एलएमजी. के बट को जगह देता है तथा एलएम.जी को पीछे जाने से रोकता है । बट को कंधे में अच्छी प्रकार बैठाया जाय । बट का लगाव कंधे से सही नहीं हो तो एलएम.जी को पीछे नहीं खींचा जाय । बदन को हरकत देना चाहिए ।
  • (ख) बायाँ हाथ-बायाँ हाथ एलएम.जी को पीछे और नीचे जाने से रोकता है। बायें हाथ से बट को इस प्रकार पकड़ें कि चारो अंगुलियों ऊपर से, अंगूठा नीचे से तथा बायें हाथ की छोटी अँगुली का मिलाप बफर के साथ होना चाहिए। ऐसा करने से आई रिलीज ज्यादा नहीं होगा ।
  • (ग) सिर-सिर को वट के ऊपर इस प्रकार रखें कि दाहिना गाल बायें हाथ की कलमे वाली अंगुली से मिलाप करे । हड्डी का लगाव बट के साथ न हो. आँख बैकसाइट से 3 से 4 इंच पीछे हो।
  • (घ) सही पकड़ हासिल करना सही पकड़ हासिल करने के लिए गाल से बायें हाथ को वट के साथ दबाते हुए दोनों कलाइयों को अंदर की तरफ मोड़ें तथा बट को मजबूती के साथ कंधे पर जमाएँ।
भाग 2- शिस्त लेने का तरीका

शिस्त लेने का तरीका - दो जवान राइफल और एलएमजी. पर पोजीशन लें तथा अनुदेशक अंतर समझाएँ। राइफल की साइट बैरल के ऊपर होने के कारण फायरर कोई भी आँख बंद कर सकता है। राइफल में पोजीशन और पकड़ के कारण आई रिलीज कम है। राइफल का बैकसाइट अपरचर एल.एम.जी. के बनिस्बत छोटा है परंतु इसका फील्ड ऑफ यू बढ़ा है।

एल.एम.जी. का साइट बायें है तथा मैगजीन ऊपर से लगा है. इसके कारण फायर को बायीं आँख बंद करनी पड़ती है । एल.एम.जी. का आई रिलीज ज्यादा है लेकिन फील्ड ऑफ व्यू कम है । एल.एम.जी. के बट फायर के दौरान थरथराहट ज्यादा होती है, जिससे फायरर को साइट अलाइनमेन्ट की कार्रवाई पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है।

शिस्त का कायदा - एल.एम.जी. के शिस्त का कायदा राइफल की तरह ही है परंतु एल.एम.जी. में बायीं आँख ही बंद करनी पड़ती है. क्योंकि साइटिंग सिस्टम बायें है। आई रिलीज ज्यादा होने के कारण एल.एम.जी. का अपरचर बड़ा होते हुए भी फील्ड ऑफ ब्यू कम होता है, जिससे शिस्त लेने में आसानी होती है। बाकी शिस्त लेने का कायदा राइफल की तरह ही है ।

हटकर शिस्त लेना-हरकती टारगेट पर शिस्त लेने का तरीका राइफल की तरह ही है परंतु राइफल में ट्रिपिंग का तरीका इस्तेमाल नहीं किया जाता और एल.एम.जी. में ट्रिपिंग का तरीका इस्तेमाल किया जाता है।

  • (क) टारगेट का रेंज मालूम करें, साइट लगायें. टारगेट की चलनेवाली दिशा में कोई निशान चुनें और एल.एम.जी. को उस निशान पर करें।
  • (ख) टारगेट की रफ्तार को मध्य में रखकर POAचुनें ।
  • (ग) टारगेट और निशान के बीच में कोई निशान चुनें, निकल गये POA की दूरी पर एक मदद का निशान चुनें । जब टारगेट चुने हुए निशान के पास से निकलता है तो 6 से 8 राउण्ड का बट फायर करें । 
  • (घ) एल.एम.जी. के बायपॉट को फोल्ड करके सैंड बैग के ऊपर रखकर ट्रिपिंग का तरीका भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
भाग 3- फायर करने का तरीका
फायर करने का तरीका - एल.एम.जी से सिंगल शॉट और बट फायर करते हैं। सिंगल शॉट-लाइन पोजीशन ले. साइट पर रेंज लगायें। सिंगल शॉट फायर करने के लिए चेंज लीवर को आर पर करें और ट्रिगर का पहला दबाव लें. अब दुरुस्त साइट एलाइनमेन्ट व साइट पिक्चर हासिल होती है तो ट्रिगर को पूरा दबा दें और भार’ पुकारें यदि जरूरत हो तो शिस्त बदली करके दोबारा फायर करे। इस प्रकार एक फायर एक मिनट में एक मैगजीन फायर करता है।

स्टॉप - स्टॉप की कार्रवाई उस वक्त करते हैं. जब फायर के दौरान टारगेटवाले इलाके में अचानक जानदार वस्तु निकल आये या ट्रेनिंग के दौरान आदेश मिले। स्टॉप कार्रवाई इस प्रकार करें (नमूना से)- कलमे वाली अंगुली ट्रिगर से बाहर निकालें. एलएम.जी को कंधे से नीचे लाएँ और चेज लीवर का पोजीशन एस पर करें । यदि मैगजीन बदली करनी हो तो बदली करें । एलएमजी. को कंधे में ले जायें,

जारी कर:-इस आदेश पर एलएमजी. को कंधे पर ले जायें चेन्ज लीवर को पहले के पोजीशन में ले जाये और फायर जारी करें।

ब्रस्ट फायर:-चेन्ज लीवर का पोजीशन ए' पर करके ट्रिगर को इतना दबाओ कि दो या इससे ज्यादा राउण्ड फायर हो. इसे ब्रस्ट फायर कहते हैं । ब्रस्ट फायर कितना लम्बा करना है. यह टारगेट के रेंज तथा किस्म और फायर के काबिलियत पर निर्भर करता है 12 या 3 राउण्ड का बट फायर करने से टारगेट पर अच्छा युप बनता है, जबकि 4 या 5 राउण्ड का ब्रस्ट फायर फैलकर लगता है । हरकती टारगेट पर 6 से 8 राउण्ड ब्रस्ट सबसे अच्छा होता है। इस प्रकार ब्रस्ट फायर के दौरान फायरर एक मिनट में एक मैगजीन फायर करता है।

रैपिड फायर :- तबतक फायरर लगातार ब्रस्ट फायर करता है. जबतक टारगेट बर्बाद न हो जाय । इसे रैपिड फायर कहते हैं. परंतु तेजी में दुरुस्ती को नहीं खोया जाय । इसमें एक मिनट में चार मैगजीन फायर कर सकते हैं।

भाग 4-लिम्बर अप

लिम्बर अप :- फायरिंग से पहले जरूरी है कि लिम्बर अप की कार्रवाई कर ली जाय, फायर से पहले फायरर अपने हथियार तथा बदन को टारगेट के लिहाज से अलाइन करता है तथा पोजीशन को आरामदेह बनाता है. इस कार्रवाई को लिम्बर अप कहते हैं । लिम्बर अप करते समय फायर को टारगेट पर शिस्त लेना चाहिए । फोरसाइट पर निगाह जमाकर एल.एम.जी. को आगे-पीछे की हरकत इस प्रकार देनी चाहिए जैसा फायरिंग के दौरान होता है । पोजीशन को ठीक करने के लिए बदन को दायें-बाये की हरकत देकर दुरुस्त करें । इस कार्रवाई के बाद फायर को अपनी कोहनी के पोजीशन को नहीं बदलना चाहिए। ऐसा करने से पोजीशन खराब हो सकता है । फायर के दौरान लिम्बर अप की कार्रवाई अवश्य कर लेना चाहिए।

बयान से नमूना देने के बाद क्लास से अभ्यास और सवाल-जवाब किया जाय ।

इसके साथ ही 7.62 mm एल एम् जी की शिस्त लेना तथा फायर करने  से  सम्बंधित IWT का पाठ समाप्त हुवा !उम्मीद है की आपलोगों के ए पोस्ट पसंद आएगी !

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