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20 December 2021

आपराध शास्त्र तथा अपराध शास्त्र का पुलिस के लिए महत्व

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने हथकड़ी तथा एस्कॉर्ट गार्ड के बारे में जानकारी प्राप्त की और अब इस ब्लॉग पोस्ट में हम जानेगे की पुलिस के लिए अपराध शास्त्र की जानकारी होना क्यों जरुरी है(Police ke lie Apradh Shastr ka Mahatw) ! तो इस विषय को हम निम्न शीर्ष के अंतर्गत जानेगे :

अपराध शास्त्र
अपराध शास्त्र

1.अपराध शास्त्र क्या है(Apradh shastr Kya hai) :अपराध शास्त्र की वह शाखा है जिसमें अपराध एवं अपराधी बनने के कारणों उनके उपचार एवं निवारण के तरीकों का अध्ययन किया जाता है। 

2. अपराध शास्त्र का क्षेत्र(Apradh shastr ka area)

  • अपराध क्या है?
  •  अपराध एवं अपराधिक व्यवहार के क्या कारण हैं ?
  • अपराधों का निवारण कैसे किया जा सकता है वर्तमान में इसमें दंड के साथ-साथ सुधारवादी दृष्टिकोण पर विशेष बल दिया जाता है। 

3. अपराध की परिभाषा(Apradh ki Paribhasha): किसी समय में लागू किसी कानून के अंतर्गत जिस कार्य को करने की मनाही है उसे करना या जिस कार्य के करने के लिए व्यक्ति अबैद्ध  है उसे ना करना अपराध है। दोनों ही दशाओं में यह दंडनीय है। 

4.अपराध के कारक: अपराध के लिए कोई एक कारण अकेले जिम्मेदार नहीं होता बल्कि इसके पीछे कई कारण मिलकर जिम्मेदार होते हैं। 

(a)जैविक कारक(Biological Factors) :

  • अनुवांशिकता माता-पिता तथा अन्य पूर्वजों से हस्तांतरित होने वाले गुण दोष। 
  • अंत स्रावी ग्रंथियों में दोष
  • शारीरिक रचना 

(b).मनोवैज्ञानिक कारक(Psychological Factors) :

  • मानसिक दुर्बलता सही व गलत में भेद करने में अक्षम
  • मानसिक विकार: उत्साह मनोवृति  मनोग्रस्त बाध्यता  प्रतिक्रियाएं(Obsessive Compulsive Reactions) कलैपटॉपमेंमियां, पायरोमानिया आसयोजन व्यक्तित्व विकास सामाजिकता लैंगिक विचलन नशे का आदी होना। 
  • अज्ञानता: नैतिक शिक्षा का अभाव अपराध व कानूनों के बारे में जानकारी ना होना कानूनों का भय ना होना पीड़ित व्यक्ति द्वारा सुरक्षा के उपाय ना करना व संभावित अपराधियों को आकर्षित करना। 
(c).आर्थिक कारक(Economic Factors): 

  • बेरोजगारी व गरीबी 
  • भौतिकवाद 
  • धन इकट्ठा करने की लालसा। धन की असमान वितरण 

(d)सामाजिक कारक (Social Factors)

  • खराब परिवारिक बातावरण 
  •  वर्ग संघर्ष अमीर व गरीब के बीच या जातियों के बीच। 
  • समाजिक प्रतियोगिता। 
  • अंधविश्वास। 
  • बुरी संगत व स्लम बस्तियों जैसा खराब बताबरण। 

(e)राजनैतिक कारक(Political Factors) 

  • अपराधिक राजनीतिक गठजोड़। 
  • राजनीतिक प्रतिद्वंदता 
  • अपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने की इच्छा में कमी। 
  • विधि पालक संस्थाओं के कार्यों में राजनीतिक नेताओं का हस्तक्षेप  । 

5.अपराधियों का निवारण 

दंड :दंड राज्य द्वारा कानूनी विरोधी कार्यो के लिए अपराधी को दी जाने वाली पीड़ा या कष्ट है। 

आधुनिक धारणा क्योंकि अपराध के लिए केवल व्यक्तिगत कारण ही नहीं बल्कि परिस्थितियां भी जिम्मेदार होती है इसीलिए अपराध को कम से कम दंड देकर सुधारने का प्रयास करना चाहिए। 

6.दंड का उद्देश्य :

  • मानवीय व्यवहार पर नियंत्रण करने के लिए दंड का भय। 
  • अपराधी का सुधार कारावास में नैतिक आध्यात्मिक व व्यवसायिक शिक्षा। अपराधी को समाज में पुनर्वास के लिए तैयार रखना। 
  • सामाजिक सुरक्षा कारावास में होने के कारण समाज को और ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाता सकता।
  • प्रतिरोध आत्मक उपाय उन लोगों में दंड का भय पैदा करना ताकि वे अपराध ना करें। 
  • क्षतिपूर्ति जुर्माना आदि लगाकर पीड़ित व्यक्तियों को क्षतिपूर्ति अपराधी को दंड मिलने से पीड़ित को मानसिक संतुष्टि। 

7.अपराधियों को सुधार एवं उपचार :चुकी अपराध के लिए कई प्रकार की मानसिक बीमारियां, व्यक्तित्व विकार व सामाजिक समायोजन भी जिम्मेदार होते हैं। इसीलिए अपराधियों को एक मानसिक रोगी मानकर उनका उपचार करना चाहिए। 

  • परिवीक्षा (Probations): दोषसिद्ध  अपराधी के दंड को निलंबित या स्थगित करके उसे जेल में दूषित वातावरण से बचाकर समाज में रहकर सुधारने का अवसर देना। 
  • पैरोल(Parole):जेल में संतोषजनक एवं अच्छा व्यवहार करने वाले दोषसिद्ध  अपराधी को सजा का कुछ भाग पूरा करने के बाद कुछ शर्तों के अधीन मुक्त कर देना ! जेल मैनुअल में प्रधान।

8. सुधारात्मक संस्थाएं 

  • बाल अपराधियों से संबंधित संस्थाएं :किशोर गृह, विशेष गृह ,प्रवेक्षण गृह  । किशोर न्याय अधिनियम 1986 के तहत स्कूली शिक्षा के साथ-साथ व्यवसायिक शिक्षा व चरित्र विकास की व्यवस्था। 
  • महिलाओं के लिए नारी निकेतन :निर्मल छाया ,अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956 की धारा 21 के अनुसार 
  • गैर सरकारी संस्थाओं ज्योति प्रयास। 
9. अन्य उपाय:

  • घर का स्वच्छ स्वस्थ वातावरण। 
  • अच्छा स्कूल अच्छी संगत नैतिक शिक्षा व कानूनों के बारे में जानकारी। 
  • स्वस्थ मनोरंजन। 
  • मानसिक बीमारियों का इलाज। 
  • आर्थिक सहायता के लिए प्रयास 
  • संप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के प्रयास 
  • परामर्श व मार्गदर्शन। 
  • दीवानी व फौजदारी सभी कानूनों को का ठीक प्रकार लागू करना। 
  • अपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने का प्रयास। 
10.पुलिस कर्मियों के लिए अपराध शास्त्र का महत्व :

  • अपराधियों के व्यवहार को समझने में सहायक। 
  • अपराध का मकसद ढूंढने में सहायक। 
  • अपराध के संभावित पीड़ितों को अनुमान लगाने में सहायक। 
  • किसी क्षेत्र विशेष के अपराध जन्म कारकों को समझ कर उनके रोकथाम के उपाय अपनाने में सहायक
  • अपराधियों के प्रति पुलिसकर्मियों के दृष्टिकोण से उचित विकास में सहायक। 
  • अपराध के पीड़ितों के साथ उचित व्यवहार करने में मार्ग मार्गदर्शक 
इस प्रकार से आपराध शास्त्र तथा अपराध शास्त्र का पुलिस के लिए महत्व  से सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !
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