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21 दिसंबर 2021

आपराध शास्त्र के सिद्धांत

 पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने अपराध शास्त्र और उसकी पुलिस के लिए अहमियत के बरेर में जानकारी प्राप्त किये थे और अब इस पोस्ट में हम उसी श्रृखला को आगे बढ़ाते हुए यह जानेगे की अपराध शास्त्र के सिद्धांत क्या होता है(Theory of criminology) और ओ कितने प्रकार के होते है !

(अ) आपराध शस्त्र की परिभाषा बहुत से समाजशास्त्रियो ने दिए है जिन्होंने अपने परिभाषा के द्वारा ए बताया है की अपराध शास्त्र क्या होता है !जिसमे से कुछ निम्न प्रकार से है :

Apradh shsastr
Apradh shsastr 

  • टैफ्ट: टैफ्ट के अनुसार अपराध शास्त्र वह अध्ययन है  जिसक विषय वस्तु में अपराध की व्याख्या और उसके निवारण के साथ अपराधियों एवं बाल अपराधियों के दंड अथवा उपचार शामिल है। 
  • डा. बसंती लाल बाबेल के अनुसार अपराध शास्त्र ज्ञान की वह शाखा है जिसमें अपराध एवं अपराधी बनने के कारण उनके उपचार एवं निवारण के तरीकों तथा अपराध से अपराधी तक पहुंचने की विधि का अध्ययन किया जाता है। 

(ब) अपराध शास्त्र का महत्व :

पुलिस के प्रमुख का कार्य नागरिकों के जान व माल की रक्षा करना कानून व व्यवस्था बनाए रखना अपराधों की रोकथाम करना तथा अपराधियों को न्यायालय के समक्ष ले जाकर सजा दिलवाना आदि! इन  सभी कार्य अपराध शास्त्र के ज्ञान के बिना असंभव है।

(क) अपराध शास्त्र के सिद्धांत 

1. प्री क्लासिकल सिद्धांत(Pre Classical Theory) : 

प्रमुख मान्यता: इस सिद्धांत  को मनाने वाले के अनुसार अपराध के लिए भूत प्रेत उत्तरदाई होते हैं। 

प्रमुख समर्थक: इस सिद्धांत के समर्थक  अगस्त काम्टे 

2. शास्त्रीय सिद्धांत(Classical Theory):

प्रमुख मान्यता : इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की  स्वतंत्र इच्छा अपराध के लिए उत्तरदाई है। 

प्रमुख समर्थक: जेरेमी बेंथम, सीजर बेकेरिया, आदि!

3. नव  शास्त्रीय सिद्धांत (New Classical Theory)

प्रमुख मान्यता: इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की स्वतंत्र इच्छा अपराध के लिए उत्तरदाई है उसके साथ परंतु संबंध व्यवस्था उचित नहीं है।

प्रमुख समर्थक: रोजी, जोली, टैफ्ट यदि 

4.प्रारूप वादी सिद्धांत(Topological Theory): इसकी प्रमुख तीन विचारधाराएं हैं !

(i) जैविक सिद्धांत(Biological Theory )

प्रमुख मान्यताएं: इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की विशेष शारीरिक संरचनाएं अपराध के लिए उत्तरदाई है। 

प्रमुख समर्थक: लंब्रोसो। 

(ii) मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत(Phycho Analytical Theory )

प्रमुख मान्यताएं: इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की संवेगात्मक अस्थिरता अपराध के लिए उत्तरदाई है। प्रमुख समर्थक: सिमंड फ्राइड ,अडलेर, कलिन्जुंग आदि । 

(iii)मानसिक प्रशिक्षण सिद्धांत(Mental Testers Theory)

प्रमुख मान्यताएं:इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की मानसिक दुर्बलता अपराध के लिए उत्तरदाई है। 

प्रमुख समर्थक: डॉ. गोलार्ड

5. वातावरणीय सिद्धांत(Cartographic Theory) :इसकी भी तीन विचारधाराएं हैं  जो निम्न है 

(i) भौगोलिक सिद्धांत (Ecological Theory)

प्रमुख मान्यताएं:इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की भौगोलिक परिस्थितियां अपराध के लिए उत्तरदाई है।

प्रमुख समर्थक: क्वेटलेट, माउंटेसकू आदि 

(ii) समाजवादी सिद्धांत (Socialistic Theory)

प्रमुख मान्यताएं:इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की आर्थिक असमानता अपराध के लिए उत्तरदाई है। 

प्रमुख समर्थक: मार्क्स , एनिल   आदि 

(iii) समाजशास्त्रीय सिद्धांत(Sociological Theory) 

प्रमुख मान्यताएं:इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की सामाजिक परिस्थितियां अपराध के लिए उत्तरदाई है। प्रमुख समर्थक:  सेलेक्ट ,अग्नि आदि। 

6.विविध कारकवादी सिद्धांत(Multifactor Theory) 

प्रमुख मान्यताएं:इस सिद्धांत मानने वाले का कहना है की कई कारण मिलकर अपराध के लिए उत्तरदाई होते हैं। 

प्रमुख समर्थक:सिसिलावार्ट 

इस प्रकार से हमने देखा की अलग अलग समाज शास्त्रियो  ने अलग अलग समय पे अपराध शसस्त्र का अलग अलग परिभाषाये दी है और सबकी अपनी अपनी मान्यताये और कारन थे अपराध के बारे में और यह देखा गया है की इनलोगों में अपराध का कारन के ऊपर एकमत नहीं थे !

इस प्रकार से आपराध शास्त्र के सिद्धांत  से सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

इन्हें भी  पढ़े :

  1. पुलिस ड्यूटी
  2. फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट में होनेवाली कुछ कॉमन गलतिया
  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
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  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

20 दिसंबर 2021

आपराध शास्त्र तथा अपराध शास्त्र का पुलिस के लिए महत्व

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने हथकड़ी तथा एस्कॉर्ट गार्ड के बारे में जानकारी प्राप्त की और अब इस ब्लॉग पोस्ट में हम जानेगे की पुलिस के लिए अपराध शास्त्र की जानकारी होना क्यों जरुरी है(Police ke lie Apradh Shastr ka Mahatw) ! तो इस विषय को हम निम्न शीर्ष के अंतर्गत जानेगे :

अपराध शास्त्र
अपराध शास्त्र

1.अपराध शास्त्र क्या है(Apradh shastr Kya hai) :अपराध शास्त्र की वह शाखा है जिसमें अपराध एवं अपराधी बनने के कारणों उनके उपचार एवं निवारण के तरीकों का अध्ययन किया जाता है। 

2. अपराध शास्त्र का क्षेत्र(Apradh shastr ka area)

  • अपराध क्या है?
  •  अपराध एवं अपराधिक व्यवहार के क्या कारण हैं ?
  • अपराधों का निवारण कैसे किया जा सकता है वर्तमान में इसमें दंड के साथ-साथ सुधारवादी दृष्टिकोण पर विशेष बल दिया जाता है। 

3. अपराध की परिभाषा(Apradh ki Paribhasha): किसी समय में लागू किसी कानून के अंतर्गत जिस कार्य को करने की मनाही है उसे करना या जिस कार्य के करने के लिए व्यक्ति अबैद्ध  है उसे ना करना अपराध है। दोनों ही दशाओं में यह दंडनीय है। 

4.अपराध के कारक: अपराध के लिए कोई एक कारण अकेले जिम्मेदार नहीं होता बल्कि इसके पीछे कई कारण मिलकर जिम्मेदार होते हैं। 

(a)जैविक कारक(Biological Factors) :

  • अनुवांशिकता माता-पिता तथा अन्य पूर्वजों से हस्तांतरित होने वाले गुण दोष। 
  • अंत स्रावी ग्रंथियों में दोष
  • शारीरिक रचना 

(b).मनोवैज्ञानिक कारक(Psychological Factors) :

  • मानसिक दुर्बलता सही व गलत में भेद करने में अक्षम
  • मानसिक विकार: उत्साह मनोवृति  मनोग्रस्त बाध्यता  प्रतिक्रियाएं(Obsessive Compulsive Reactions) कलैपटॉपमेंमियां, पायरोमानिया आसयोजन व्यक्तित्व विकास सामाजिकता लैंगिक विचलन नशे का आदी होना। 
  • अज्ञानता: नैतिक शिक्षा का अभाव अपराध व कानूनों के बारे में जानकारी ना होना कानूनों का भय ना होना पीड़ित व्यक्ति द्वारा सुरक्षा के उपाय ना करना व संभावित अपराधियों को आकर्षित करना। 
(c).आर्थिक कारक(Economic Factors): 

  • बेरोजगारी व गरीबी 
  • भौतिकवाद 
  • धन इकट्ठा करने की लालसा। धन की असमान वितरण 

(d)सामाजिक कारक (Social Factors)

  • खराब परिवारिक बातावरण 
  •  वर्ग संघर्ष अमीर व गरीब के बीच या जातियों के बीच। 
  • समाजिक प्रतियोगिता। 
  • अंधविश्वास। 
  • बुरी संगत व स्लम बस्तियों जैसा खराब बताबरण। 

(e)राजनैतिक कारक(Political Factors) 

  • अपराधिक राजनीतिक गठजोड़। 
  • राजनीतिक प्रतिद्वंदता 
  • अपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने की इच्छा में कमी। 
  • विधि पालक संस्थाओं के कार्यों में राजनीतिक नेताओं का हस्तक्षेप  । 

5.अपराधियों का निवारण 

दंड :दंड राज्य द्वारा कानूनी विरोधी कार्यो के लिए अपराधी को दी जाने वाली पीड़ा या कष्ट है। 

आधुनिक धारणा क्योंकि अपराध के लिए केवल व्यक्तिगत कारण ही नहीं बल्कि परिस्थितियां भी जिम्मेदार होती है इसीलिए अपराध को कम से कम दंड देकर सुधारने का प्रयास करना चाहिए। 

6.दंड का उद्देश्य :

  • मानवीय व्यवहार पर नियंत्रण करने के लिए दंड का भय। 
  • अपराधी का सुधार कारावास में नैतिक आध्यात्मिक व व्यवसायिक शिक्षा। अपराधी को समाज में पुनर्वास के लिए तैयार रखना। 
  • सामाजिक सुरक्षा कारावास में होने के कारण समाज को और ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाता सकता।
  • प्रतिरोध आत्मक उपाय उन लोगों में दंड का भय पैदा करना ताकि वे अपराध ना करें। 
  • क्षतिपूर्ति जुर्माना आदि लगाकर पीड़ित व्यक्तियों को क्षतिपूर्ति अपराधी को दंड मिलने से पीड़ित को मानसिक संतुष्टि। 

7.अपराधियों को सुधार एवं उपचार :चुकी अपराध के लिए कई प्रकार की मानसिक बीमारियां, व्यक्तित्व विकार व सामाजिक समायोजन भी जिम्मेदार होते हैं। इसीलिए अपराधियों को एक मानसिक रोगी मानकर उनका उपचार करना चाहिए। 

  • परिवीक्षा (Probations): दोषसिद्ध  अपराधी के दंड को निलंबित या स्थगित करके उसे जेल में दूषित वातावरण से बचाकर समाज में रहकर सुधारने का अवसर देना। 
  • पैरोल(Parole):जेल में संतोषजनक एवं अच्छा व्यवहार करने वाले दोषसिद्ध  अपराधी को सजा का कुछ भाग पूरा करने के बाद कुछ शर्तों के अधीन मुक्त कर देना ! जेल मैनुअल में प्रधान।

8. सुधारात्मक संस्थाएं 

  • बाल अपराधियों से संबंधित संस्थाएं :किशोर गृह, विशेष गृह ,प्रवेक्षण गृह  । किशोर न्याय अधिनियम 1986 के तहत स्कूली शिक्षा के साथ-साथ व्यवसायिक शिक्षा व चरित्र विकास की व्यवस्था। 
  • महिलाओं के लिए नारी निकेतन :निर्मल छाया ,अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956 की धारा 21 के अनुसार 
  • गैर सरकारी संस्थाओं ज्योति प्रयास। 
9. अन्य उपाय:

  • घर का स्वच्छ स्वस्थ वातावरण। 
  • अच्छा स्कूल अच्छी संगत नैतिक शिक्षा व कानूनों के बारे में जानकारी। 
  • स्वस्थ मनोरंजन। 
  • मानसिक बीमारियों का इलाज। 
  • आर्थिक सहायता के लिए प्रयास 
  • संप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के प्रयास 
  • परामर्श व मार्गदर्शन। 
  • दीवानी व फौजदारी सभी कानूनों को का ठीक प्रकार लागू करना। 
  • अपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने का प्रयास। 
10.पुलिस कर्मियों के लिए अपराध शास्त्र का महत्व :

  • अपराधियों के व्यवहार को समझने में सहायक। 
  • अपराध का मकसद ढूंढने में सहायक। 
  • अपराध के संभावित पीड़ितों को अनुमान लगाने में सहायक। 
  • किसी क्षेत्र विशेष के अपराध जन्म कारकों को समझ कर उनके रोकथाम के उपाय अपनाने में सहायक
  • अपराधियों के प्रति पुलिसकर्मियों के दृष्टिकोण से उचित विकास में सहायक। 
  • अपराध के पीड़ितों के साथ उचित व्यवहार करने में मार्ग मार्गदर्शक 
इस प्रकार से आपराध शास्त्र तथा अपराध शास्त्र का पुलिस के लिए महत्व  से सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !
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