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Saturday, September 17, 2016

आश्रू गैस का इतिहास और इसका इस्तेमाल

पिछले पोस्ट में हमने इंसाफ राइफल के ग्रुपिंग फायर और उसके सिद्धांत के बारे में बात किये इस पोस्ट में हम दंगा को कण्ट्रोल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले आश्रू गैस के इतिहास और उसके इस्तेमाल(Tear Smoke ke itihas aur uska prabhaw) के बारे बेसिक जानकारी शेयर करेंगे !




वर्तमान समय में आंतरिक कानून तथा सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलने के रस्ते में आये दिन कोई न कोई समस्या आती रहती है और उसको कण्ट्रोल करने के लिए सुरक्षा बल को बहुत ही अहतियातन  कदम उठाना पड़ता है !
Use of  Tear Smoke
Use of  Tear Smoke
उन कदमो में एक कदम होता है की कम से कम जानमॉल का नुकशान किये दंगा फसाद को कण्ट्रोल करना !और इसके लिए बहुत से उपकरण इस्तेमाल किये जाते है जिनमे  अहम एक है आश्रू गैस(Tear Smoke) ! आश्रू गैस एक बहुत ही कारगर महत्पूर्ण साधन है जिनका इस्तमाल कर के सुरक्षाबल  लॉ एंड आर्डर की समस्या को नियंत्रित करते है ! एक महत्वपूर्ण साधन होने के कारन सुरक्षाबल के सभी जवानों से अपेक्षा रहती है की आश्रू गैस के बारे में जानकारी रखते हो!

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आश्रू गैस के इतिहास(History of tear smoke) : आश्रू गैस का अविष्कार सन 1900 में हुवा लेकिन इसका सबसे पहले इस्तेमाल फ्रांस की पुलिस ने प्रथम विश्व युद्ध के  शुरू होने से पहले की !  एक  अमेरिकन मिलिट्री ऑफिसर थे जिनको अमेरिका में राईट कण्ट्रोल साइंस का पिता कहा जाता है जिनका नाम था कर्नल अप्लगेट रेक्स(Col Applegate Rex)   ने अपनी बुक  " राईट कण्ट्रोल मैटेरियल्स और टेक्निक्स(Right Control Material aur Technical) "  में लिखा है की आश्रू गैस का इस्तेमाल प्रथम विश्व युद्ध से पहले से ही शुरू है !

फ्रांस के बाद आश्रू गैस का इस्तेमाल अमेरिका में भी असामजिक तत्वों को कण्ट्रोल करने के लिए किया जाने लगा गया ! उस समय अमेरीकामे बहुत उपद्रव हो रहा था उनलोगों का  जो सेना से निकल दिए गए थे प्रथम विश्व युद्ध समाप्ति के बाद  उसके बाद सेना से निकले गए लोगो ने अमेरिका में सरकार के खिलाफ आन्दोलन चालू  दी थी  और लूट मार शुरू कर दी उनको कण्ट्रोल करने के लिए अमेरिका ने भी प्रथम युद्ध के बाद आश्रू गैस का इस्तेमाल शुरू किया !

पहले आश्रू गैस को बैंक या सामरिक अहमियत के जगहों में रखा जाता था जिसको बैंक का क्लर्क बैठे बैठे ही इस्तेमाल कर सकता था या  सामरिक अहमियत  के जगह पे तैनात सुरक्षा जवान वाहा से इस्तेमाल कर सकता था ! यानि उस दौरान में आश्रू गैस ऐसे सूटेबल कंटेनर में नहीं की एक जगह से दुसरे जगह आसानी  से ले जाया जाय !

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लेकिन बाद में इसको  एक जगह से दुसरे जगह ले जाने लायक बनाया गया और फिर आश्रू गैस ग्रेनेड तथा शेलो में भर कर इसको पोर्टेबल बनाया गया जो की इस्तेमाल करने में असंन हो गए !

भारत में आश्रू गैस के इतिहास(Tear Soke ka itihas bharat): भारत में इस गैस की इस्तेमाल कब से शुरू हुई इसका कोई लिखित जानकारी नहीं है लेकिन ऐसा माना  जाता है की 1933 में इस गैस को सबसे पहल पंजाब में खतरनाक अपराधी तथा डकैतों को गिरफ्तार करने के लिए इस्तेमाल करने के लिए अनुमोदित किआ गया !

पंजाब पुलिस ट्रेनिंग स्कूल फिल्लौर के उस समय के प्रिन्सिप्ल स्वर्गीय FHD home को अमेरिका भेजा गया ताकि वह से अश्रु गैस के बारे में जानकारी हासिल कर के आये ! और जब ओ अमेरिका से इसके बारे में जानकारी हासिल करके आये तो उन्हें भारत सरकार का सलहाकार नियुक्त कर दिया गया जो की ओ भारत सरकार  को  आश्रू गैस के बारे में होने वाले मामलो में अवगत कराये !

1935 में एक भारत सरकार  ने आश्रू गैस को दंगा तथा भीड़ नियत्रण के लिए इस्तेमाल करने का अनुमति दी

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अलग से ट्रेनिंग देने के लिए 1937 में एक अलग स्काउट बनाया गया जिन्हें पुलिस ट्रेनिंग स्कूल फिल्लौर(PTS Phillaour) में आश्रू गैस के हैंडलिंग के बारे में विशेष ट्रेनिंग दी गई ! और इस ट्रेनिंग के असर की सफलता को देखते हुए 1940 से पुलिस ट्रेनिं स्कूल फिल्लौर में आश्रू गैस की लगतार ट्रेनिंग कोर्सेज चालु किया गया !

देश की हालत और जरूरतों को मद्दे नजर रखते हुए 1980 से केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस फाॅर्स (CRPF) के सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज-II(Central Training College -II) में आल इंडिया पुलिस फोर्सेज के लिए आश्रू गैस की ट्रेनिंग चालु की गई जिसमे सभी राज्यों के लोकल पुलिस के जवानों को भी ट्रेनिंग दी जाती है !

पहले तो अश्रु गैस का इस्तेमाल केवल असामजिक तत्वों से निपटने के लिए किये जाते थे लेकिंग मजमे के लिहाज से सबसे पहले आश्रू गैस मजमे पर पटना में स्वतंत्रता सेनानियो के खिलाफ किआ गया !

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आश्रू गैस का प्रभाव(Tear Smoke ke effect) : आश्रू गैस का प्रभाव इस प्रकार से पड़ता है !
  • आश्रू गैस का धुवा आँखों में  लगने से आखो से आशु आने लगता है !
  • आश्रू गैस से एक प्रकार की गैस निकलती है जिसकी सुगंध असहनीय होती है !
  • इसके असर से आँख , गले , नाक में जलन तथा शारीर से पसीना निकलने और जलन होने लगता है !
अश्रु गैस की बनावट : बनावट के आधार पे आश्रू गैस को दो भागो में बता जाता है !
  1. ठोस गैस : यह गैस फ़ेडरल कंपनी द्वारा 1923 में बनाया गया !
  2. माया गैस :यह गैस लिकेक्रिया लैब द्वारा 1925 में बनाया गया !
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इस प्रकार से यहाँ आश्रू गैस के इतिहास तथा उसे प्रभाव के बारेमे संक्षिप्त विब्रण समाप्त हुई ! और उम्मीद  है की ये पोस्ट पसंद आएगा! अगर की कमेंट होतो निचे कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे !ब्लॉग को  सब्सक्राइब और अपने दोस्तों के बिच भी फेसबुक के ऊपर शेयर  कर हमलोगों को सपोर्ट  करे 


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