20 मार्च 2022

गिरफ्तारी से सम्बंधित मुख्य नियम जो सभी पुलिस मैन को जानना चाहिए

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने शिनाख्त परेड(TIP) के बारे में जानकारी प्राप्त की और अब इस ब्लॉग पोस्ट में हम गिरफ्तारी और बेल से सम्बंधित कुछ बेसिक बाते जानेगे जो की हर एक पुलिसमैन(Arrest se relate kanun jise ek policeman ko janana chahie) को जननी चाहिए !

गिरफ्तारी साधारणतः एक पुलिस या किसी कानून व्यवस्था लागु करने वाली एजेंसी के द्वारा किया जाता है लेकिन बहुत से विशेष  परिस्थिया है जहा की एक आम आदमी भी किसी व्यक्ति का  गिरफ्तारी कर सकता है !गिरफ्तारी का मतलब होता है किसी व्यक्ति की मौलिक आजादी है स्वक्छंद घुमने और कही भी अपने मर्जी  से आने जाने तथा मिलने जैसी आजादी से उसे बिमुक्त कर देना ! गिरफ्तार करलेना किसी का अपराधी होने का साबुत नहीं है  बल्कि उसे कोर्ट में साबित करना जरुरी होता है की गिरफ्तार  किया गया व्यक्ति ही गुनहगार है !

इसे भी पढ़े :इनक्वेस्ट और इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय किन किन बातो का ख्याल रखना चाहिए सभी पुलिस अधिकारी को

इस पोस्ट को अच्छी तरह से समझने के लिए हमने इसे निम्न भागो में बाँट दिया है :

Girftari se sambandhit laws
Arrest

  • गिरफ्तारी क्यों (Girftari kyo jaruri ) ?
  • गिरफ्तारी से सम्बंधित कानून(Girftari se sambandhit laws)
  • गिरफ्तारी  कौन कौन कर सकता है   (Girftari kaun kaun kar sakta hai)
1. गिरफ्तारी से सम्बंधित कानून(Girftari se sambandhit laws)
गिरफ्तारी से सम्बंधित जो मुख्य कानून है और जिसके बेस पर ही और दुसरे नियम बने है वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 22 में दिया गया है और इन्ही दोनों अनुच्छेद को ध्यान में रखते हुए और जितने भी नियम बने है ! अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 22 नाग्रिओके मौलिक अधिकार जो हमारे संविधान में दिया गया है उसके अंतर्गत आते है इसलिए अगर इन दोनों अनुच्छेद का अनुपालन सही तरीके से नहीं किया गया तो गिरफ्तार व्यक्ति भारत के उच्चतम न्यालय या उंच न्यालय में जा सकता है !
अनुच्छेद 20 के अनुसार :
  • किसी भी व्यक्ति को नियम लागु होने से पहले के गुनाह केलिए सजा नहीं दिया जा सकता है और कोई नया कानून बना के ज्यादा सजा नहीं दिया जा सकता है ! (Art-20(1))
  • किसी भी अपराधी को एक गुनाह के लिए दो बार सजा नहीं दी जाकती है !(Art-20(2))
  • किसी भी अपराधी से जबरदस्ती गुनाह काबुल नहीं कराया जा सकता है !(Art-20(3))
अनुच्छेद 22  के अनुसार :
  • गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारन,वकील रखने तथा क़ानूनी सलाह लेने का अधिकार के बारे में जानकारी देना उस गिरफ्तार व्यक्ति का मौलिक अधिकार है !(Art-22(1))
  • जो कोई व्यक्ति गिरफ्तार किया गया हो उसे 24 घंटे के अन्दर किसी मजिस्ट्रेट के सामने पेस किया जाना चाहिए बिना मजिस्ट्रेट के पास पेस किया 24 घंटे से ज्यादा नहीं रखा जा सकता है !(Art-22(2))
  • उपरोक्त दोनों बाते इन केसों में लागु नहीं होती है :(Art-22(3))
    • गिरफ्तार व्यक्ति दुश्मन देश का हो 
    • या किसी व्यक्ति को प्रिवेंटिव डीटेंसन में रखा गया हो 

2. गिरफ्तारी क्यों (Girftari kyo jaruri ) ?
किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करना उसके मौलिक अधिकारों का हनन करना होता है लेकिन कुछ ऐसे कारन होते है जिनमे गिरफ्तारी करनी पड़ती है और वह कुछ कारन इस प्रकार से है :
  • किसी व्यक्ति जिसके ऊपर अपराधिक केस रजिस्टर हुआ है और उसे कोर्ट में हाजिर करने के लिए !
  • किसी अपराधी को अपराध करने से रोकने के लिए किसी विशेष केस में 
उपरोक्त कारणों के अलावा अगर ब्यक्ति खतरनाक और उग्र परवृति का है तो उसे भी गिरफ्तार किया जा सकता है जिससे समाज को भय मुक्त बनाने के लिए करना पड़ता है ! और ऐसे करने से समाज में भय का वातावरण संपत होता है और एक अच्छा मेसेज भी जाता है !

3. गिरफ्तारी  कौन कौन कर सकता है   (Girftari kaun kaun kar sakta hai)

गिरफ्तारी दो तरह से हो सकती है :
  • वारंट के साथ 
  • वारंट के बिना 
निम्नलिखित व्यक्तिओ या अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी की जा सकती है ! ए गिरफ्तारी वारंट और बिना वारंट दोनों प्रकार के हो सकते है ! 
(a)पुलिस के द्वारा गिरफ्तारी : निम्नलिखित नियम के अंतर्गत पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है :
  • वारंट के बिना Cr.PC सेक्शन  41 और  सेक्शन . 151
  • वारंट के साथ Cr.PC Sec. 72 सेक्शन  से सेक्शन  151
  • पुलिस थाना इन चार्ज के लिखित आदेश से Cr.PC सेक्शन  55 और  सेक्शन 157
  • मजिस्ट्रेट के आदेश से Cr.PC सेक्शन  44 और असंज्ञे अपराध में Cr.PC सेक्शन  42 
(b)वरिष्ट पुलिस अधिकारी के द्वारा Cr.PC सेक्शन  36 
(c)थाना इन चार्ज के द्वारा Cr.PC सेक्शन  42
(d)एक मजिस्केट्रेट  द्वारा  Cr.PC सेक्शन  44
(e)एक मिलिट्री के कमीशंड अधिकारी के द्वारा Cr.PC सेक्शन  130 और 131
(f)एक आम आदमी के द्वारा 
  • वारंट के बिना   Cr.PC सेक्शन  43
  • वारंट के साथ Cr.PC सेक्शन  72 और 73 
  • पुलिस अधिकारी के आदेश पर Cr.PC सेक्शन  37
  • मजिस्ट्रेट के आदेश पर Cr.PC सेक्शन  37 और 44 

इस प्रकार से गिरफ्तारी  से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

इन्हें भी  पढ़े :

  1. पुलिस ड्यूटी
  2. फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट में होनेवाली कुछ कॉमन गलतिया
  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
  4. क्राइम सीन पे सबसे पहले करनेवाले काम एक पुलिस ऑफिसर के द्वारा
  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट


13 मार्च 2022

शिनाख्त परेड(TIP) की जरुरत और ध्यान देनेवाली बाते

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने इनक्वेस्ट और उसकी जरुरत के बारे में जानकारी प्राप्त  की थी और अब इस ब्लॉग पोस्ट में हम शिनाख्त परेड की जरुरत और ध्यान देनेवाली बाते जिन्हें सभी पुलिस ऑफिसर  को मालूम होनी चाहिए उसके (Test Identification Parade in hindi) के बारे में जानेगे !

पहचान परेड जाँच अधिकारी को अपने आप को किसी केस को ट्रायल के लिए  भेजने से पहले अपने आप को संतुष्ट करने के लिए एक शिनाख्त परेड है जिसके करने के बाद जाँच अधिकारी अपनी जाँच को अच्छी तरह से कोर्ट में रख सके !

इस विषय को अछि तरह से समझने के लिए हमने इसे निम्न भागो में बाँट दिया है :

Test Identification Parade
Test Identification Parade

  • शिनाख्त परेड कब  किया जाता है ?(Test of Identification Kab kiya jata hai)
  • शिनाख्त परेड क्यों किया जाता है ?(Test of Identification Kyo kiya jata hai)
  • शिनाख्त परेड कौन करता है ?(Test of Identification Kaun karta hai)
  • शिनाख्त परेड करते समय मजिस्ट्रेट को ध्यान में रखने वाली बाते (Test of Identification karte samay magistrate ko dhyan me rakhne wali baate)
  • शिनाख्त परेड करने से पहले ध्यान में रखने वाली बाते (Test of Identification karne se pahle dhyan me rakhne wali baate)

1. शिनाख्त परेड कब  किया जाता है ?(Test of Identification Kab kiya jata hai)

शिनाख्त परेड ज्यादातर अपराधिक केस में ही किया जाता है जब केस का जाँच किया जा रहा है !शिनाख्त परेड का एक अहम उद्देश्य होता है विटनेस की यदाश्य को चेक के अपराधी को पहचान करना जो की अपराधिक घटना में सम्मिलित हो ! इस प्रकार की शिनाख्त परेडसभी प्रकार की डकैती , या लोगो के समूह में उपस्थित व्यक्तियो जो किसी रायटिंग या संज्ञे अपराध में सामिल हो आदि का पहचान करने के लिए किया जाता है !

इस का एक और उद्देश्य होता है की जो गवाह है को एक मौका देना की उसे अपराधी को कभी भी मिलने पर उस अपराधी को पहचान सकता है !शिनाख्त करना एक दिमागी कार्य है जो की तथ्य और दिमाग में बने छवि जो की उसने अपराधी द्वारा परध करते समय देखा है उसके आधार पर बनती है ! इसी लिए जरुर हो की :
  • गवाह को अपराधी को देखने का मौका मिला हो 
  • अपराधी को देखते समय माकूल प्रकास और पहचान पाने जितना दुरी हो 
  • शिनाख्त परेड ज्यादा दिनों के बाद नहीं कराया जा रहा हो 
  • गवाह विश्वनीयता और देखने की शक्ति 
  • पुलिस और गवाह के बीच कोई साठ गाठ न हो 
2.शिनाख्त परेड क्यों किया जाता है ?(Test of Identification Kyo kiya jata hai)
शिनाख्त परेड दोनों प्रकार के केसों में किया जाता है ओ चाहे अपराधिक केस हो या सिविल केस जब जाँच अधिकारी किसी की पहचान करानी हो :

  • मृत्य या जिन्दा या जान या अनजान व्यक्ति को पहचान करने के लिए 
  • पकड़ी गई सम्पति, सामान या हथियार की पहचान करने के लिए 
  • फोटोग्राफ , फिंगर प्रिंट्स , फूट प्रिंट्स, हैण्ड राइटिंग या वौइस् का पहचाना कराने के लिए !
अधिकतर शिनाख्त परेड  अपराधिक केस में ही किये जाते है जिससे की अपराधी को प्रमाणितया अप्रमाणित और सामान के संदर्भ में पहचान कराया जा सके !

3. शिनाख्त परेड कौन करता है ?(Test of Identification Kaun karta hai): किसी कानून में यह नहीं लिखा हुवा है की शिनाख्त परेड कौन करा सकता है कोई ऑफिस अधिकारी भी शिनाख्त परेड करा सकता है ! शिनाख्त परेड का कोई अहमियत नहीं रहती है जब उसे पुलिस अधिकारी करे! कुछ अहमियत दी जाती है जब उसे  या कोई आम व्यक्ति करे तो  इसलिए मजिस्ट्रेट को शिनाख्त परेड करने के लिए कहा जाता है  और उनका शिनाख्त मेमो रिकॉर्ड करजाता है जो  CrPC 164 में अंतर्गत आता जाता है और  एविडेंस एक्ट सेक्शन 80 में एविडेंस  के तौर पे मान लिया जाता है !
मजिस्ट्रेट के अनुपस्थिति में पांच भी शिनाख्त परेड करा सकता है !
4. शिनाख्त परेड करते समय मजिस्ट्रेट को ध्यान में रखने वाली बाते (Test of Identification karte samay magistrate ko dhyan me rakhne wali baate)

  • शिनाख्त परेड को खुले जगह पे नहीं करना चाहिए  व्यक्ति की प्राइवेसी को बनाये रखा जाए !
  • कोई पुलिस ऑफिसर वह उपस्तिथ न रहे !
  • अगर जेल के अन्दर कराया जा रहा हो तो कोई जेल के अधिकार मजिस्ट्रेट के  आस पास न हो !
  • नॉन सस्पेक्ट को ऐसा चुनाव किया जाय जिनका कद काठी सस्पेक्ट के कद काठी के जैसा ही हो और उन्हें सस्पेक्ट के साथ मिक्स्ड करके खड़ा करे !अगर अम्भाव हो तो सस्पेक्ट और नॉन सस्पेक्ट का रेश्यो 1:9 हो !
  • मजिस्ट्रेट को यह भी सुनिश्चित करनी चाहिए की कोई एक व्यक्ति विचित्र ड्रेस ना पहना हो !
  • सस्पेक्ट से यह पूछ लेना चाहिए की उसे इन सारी प्रक्रियाओ में कोई ऑब्जेक्शन है !
  • सस्पेक्ट को शिनाख्त परेडखड़ा होने की जगह  खुद सेलेक्ट करने का मौका देना चाहिए !
  • जो गवाह शिनाख्त परेड में शिनाख्त करने आ रहा है वह सस्पेक्ट को शिनाख्त परेड पहले  नहीं देखना चाहिए !
  • गवाह से यह पूछ लेना चाहिए की क्या आप सस्पेक्ट को पहले से जानते हो !
  • एक एक करके गवाह को  शिनाख्त परेड में शिनाख्त करने के लिए बुलाना चाहिए !
  • अगर किसी भी सस्पेक्ट का कोई भी ऑब्जेक्शन शिनाख्त परेड के दौरान हो तो उसे रिकॉर्ड करी चाहिए !
  • और भी कोई बाते जो शिनाख्त परेड के सम्बन्ध में उसे भी रिकॉर्ड करी चाहिए !

5. शिनाख्त परेड करने से पहले ध्यान में रखने वाली बाते (Test of Identification karne se pahle dhyan me rakhne wali baate): सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य गवाह के द्वारा दियागया बयान जो ओ कोर्ट के अन्दर देता है !शिनाख्त  के दौरान सस्पेक्ट को गवाह पहचान करता है तो उसका ज्यादा अहमियत नहीं होती है क्यों की बहुत से चांसेस होते है की गवाह सस्पेक्ट को कोर्ट आते देख लिया ओ या कोई पहचाना करा दिया हो इसलिए यह जरुरी है को सस्पेक्ट का शिनाख्त परेड पहले ही करा ली जाये ! इस संदर्भ में उच्चतम न्यालय का रेम्श्वर सिंह बनाम स्टेट ऑफ़ जम्मू & कश्मीर (Rameswar Singh V s. State of Jammu & Kashmir reported in 1972 (SC 102)) के लॉ है! 

 इस प्रकार से यह शिनाख्त परेड से सम्बंधित यह भाग संपत हुवा शिनाख्त परेड बाकी के जो भाग है उसे अगले ब्लॉग पोस्ट में सामिल करेंगे !

इस प्रकार से  शिनाख्त परेड से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

इन्हें भी  पढ़े :

  1. पुलिस ड्यूटी
  2. फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट में होनेवाली कुछ कॉमन गलतिया
  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
  4. क्राइम सीन पे सबसे पहले करनेवाले काम एक पुलिस ऑफिसर के द्वारा
  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

06 मार्च 2022

इनक्वेस्ट और इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय किन किन बातो का ख्याल रखना चाहिए सभी पुलिस अधिकारी को

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने F.I.R. से सम्बन्धित बाते जो एक पुलिस अधिकारी को मालूम होना चाहिए उसके बारे में जानकारी प्राप्त की और इस ब्लॉग पोस्ट में हम इनक्वेस्ट (Inquest) के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे और जानेगे की इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय किन किन बातो का ख्याल रखना चाहिए(Inquest ki basic jankari aur Inquest karte samay dhyan ke rakhnewali bate jo sabhi police officer ko malum hon chahie ) !
इस विषय को अच्छे से समझने के लिए हमने इसे निम्नलिखित सब-भागो में बाँट दिया है :
Inquest kya hota hai ?
Inquest
  • इनक्वेस्ट (Inquest) क्या है ?Inquest kya hota hai ?
  • इनक्वेस्ट (Inquest) कौन करता है ?Inquest kaun karta hai?
  • इनक्वेस्ट (Inquest) के क़ानूनी प्रावधान ?Inquest ka kanuni prawdhan kya hai ?
  • इनक्वेस्ट (Inquest) कब कब किया जाता है ?Inquest kab kab kiya jata hai ?
  • इनक्वेस्ट (Inquest) कब नहीं किया जाता है ?Inquest kab nahi kiya jata hai ?
  • मृत्य शारीर को पोस्ट मोर्टेम के लिए कब भेजा जायेगा ? (Dead body ko post mortem ke lie kab
  • इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय ध्यान में रखने वाली बाते ?Inquest karte samay dhyan me rakhnewali bate
  • इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय होने वाली गलतिया Inquest karte samay hone wali common mistake
1.इनक्वेस्ट (Inquest) क्या है ?(Inquest kya hota hai ?)
इनक्वेस्ट का मलतब होता है जब मरने(Death) का कारन मालूम न होतो इन्क्वारी कर के पता लगाना !यह शब्द  अंग्रेजी लॉ (Coroner law) के Inquisition शब्द से बना है  जिसका अर्थ होता है हिंसा या अस्वाभाविक कारणों से होने वाली मृत्यु की जाँच करना ! 
2. इनक्वेस्ट (Inquest) कौन करता है ?Inquest kaun karta hai?
इनक्वेस्ट रिपोर्ट एक बहुत ही इम्पोर्टेन्ट डॉक्यूमेंट होता है जिसके द्वारा मृत्यु के करना और परिस्थियों के बारे में जानकारी मिलती !इनक्वेस्ट ऑफिसर इन चार्ज पुलिस स्टेशन या कोई और पुलिस अधिकारी जो इस कार्य में निपुण हो और उन्हें इस कार्य के लिए अधिकृत किया गया हो ! CrPc की धरा 174 के अनुसार इनक्वेस्ट रिपोर्ट में सभी प्रकार के  डेथ बॉडी(Scene of Offence) से  सम्बंधित डिटेल्स होने चाहिए!अगर मृत्यु पुलिस कस्टडी में हुई है तो इनक्वेस्ट की करवाई मजिस्ट्रेट के द्वारा किया जायेगा ! 


3. इनक्वेस्ट (Inquest) के क़ानूनी प्रावधान ?Inquest ka kanuni prawdhan kya hai ?

इनक्वेस्ट  से  रिलेटेड क़ानूनी प्रावधान CrPc की सेक्शन 174  से 176  के अन्दर दिया गया है  जिसका डिटेल्स इस प्रकार से है :
  • सेक्शन 174  CrPc के अंतर्गत :इस सेक्शन के अंतर्गत ऑफिसर इन चार्ज पुलिस स्टेशन या कोई और पुलिस अधिकारी जो विशेषकर अधिकृत किया गया हो राज्य सरकार के द्वारा की मृत्यु के कारण का पता लगाये (Investigate) करे जब :
    • मृत्यु आत्महत्या के द्वारा हुई हो,
    • या किसी दुसरे या जानवर या किसी मशीन या किसी दुर्घटना से मृत्यु हुई हो 
    • किसी ऐसी परिस्थिति में मौत हुई हो जहा की संदेह हो की मृत्यु किसी और के द्वारा की गई है !
  •  इनक्वेस्ट (Inquest) की करवाई :किसी की अचानक, अप्राकृतिक तरीके से , या संदेहात्मक मृत्यु की खबर मिलने पे , ऑफिसर-इन- चार्जसर्व प्रथम सुचना अपने एरिया के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट जो इनक्वेस्ट (Inquest) करने के लिए अधिक्रिताधिकृत है उन्हें इतला करेगे या किसी और किसी नियम या आर्डर के द्वारा कोई अलग निर्देश दिया गया हो सब डिवीज़नल मजिस्ट्रेट वह जायेंगे है मृत्य व्यक्ति का शारीर पड़ा है और वह पहुचने पर पड़ोस के दो या उससे ज्यादा रेस्पेक्ट्फुल व्यक्तिओ के उपस्थिति में मृत्य व्यक्ति शारीर केलागे हुवा घाव या कोई दूसरा तरह का इंजुरी मृत्य के शारीर  पर निशान और किसी हथियार आदि का हो सकता है ए सब पूरी डिटेल्स के साथ लिखना चाहिए और पुलिस अधिकारी और दो  सम्मानीय व्यक्ति हस्ताक्षर उस के ऊपर लेकर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को भेजना चाहिए !
  • सेक्शन 175  CrPc के अंतर्गत :इस सेक्शन के अंतर्गत एक पुलिस ऑफिसर को अधिकार देता है सेक्शन 174 CrPc के अतर्गत करवाई के लिए किसी भी व्यक्ति जिसके पास वह मानती है की उस व्यक्ति के पास उस घटना से सम्बंधित अगर कोई जानकारी है तो उसे सम्मन कर सकती है और जिन व्यक्ति को सम्मन किया गया वह बाउंड है की जाँच में सहयोग करे और सभी सवालों को जवाब दे केवल उन सवालो को छोड़ कर जिनसे उनकी खुद की दोषी सिद्ध होने की सम्भावन हो ! 
  • सेक्शन 176 CrPc के अंतर्गत: पुलिस कस्टडी या कोई औरत जो अपनी शादी के सात साल के अन्दर अत्महत्य कर्लेती है उन केसों का इनक्वेस्ट  मजिस्ट्रेट के द्वारा ही किया जायेगा जब की दुसरे केसों में यह ऑप्शनल है !और उस तरह की इनक्वेस्ट  डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट या SDM या दूसरा को मजिस्ट्रेट जिनको इस काम के लिए अधिकृत किया गया है !

4. इनक्वेस्ट (Inquest) कब कब किया जाता है ?Inquest kab kab kiya jata hai ?
सेक्शन 174  CrPc  के अंतर्गत ऑफिसर इन चार्ज पुलिस स्टेशन या कोई और पुलिस अधिकारी जो विशेषकर अधिकृत किया गया हो राज्य सरकार के द्वारा की मृत्यु के कारण का पता लगाये (Investigate) करे और इन परस्थितियो में  इनक्वेस्ट  करना कानूनन जरुरी है !  :
    • मृत्यु आत्महत्या के द्वारा हुई हो,
    • या किसी दुसरे या जानवर या किसी मशीन या किसी दुर्घटना से मृत्यु हुई हो 
    • किसी ऐसी परिस्थिति में मौत हुई हो जहा की संदेह हो की मृत्यु किसी और के द्वारा की गई है !
5. इनक्वेस्ट (Inquest) कब नहीं किया जाता है ?Inquest kab nahi kiya jata hai ?
 इनक्वेस्ट   सेक्शन 174 CrPc के अंतर्गत किया जाता है लेकिन अगर मृत्य शारीर  नहीं मिलने के सूरत में इनक्वेस्ट   नहीं किया जायगा इस सम्बन्ध में कोर्ट का साफ निर्णय है  गुलाम हसन बनाम एम्परर के में  (Ghulam Hassan Vs. emperor, 9 Cr.Ll. 105, 1908 P.RNo) 
6. मृत्य शारीर को पोस्ट मोर्टेम के लिए कब भेजा जायेगा ? (Dead body ko post mortem ke lie kab bheja jayega): इनक्वेस्ट    करने वाली अधिकारी को निम्न परिस्थियों में शारीर को पोस्ट मोर्टेम  भेजना चाहिए :
  • जब मौत के कारन में कोई शंका हो 
  • जब एक औरत अपने शादी के 7 सालो के अन्दर आत्महत्या कर लेती और परिस्थिया ऐसा शंका उत्पन्न करे के किसी और ने यह हत्या की है !
  • जब कोई औरत उसके सात साल के शादी के अंतर्गत मृत्य पाई जाती है और उसके रिलेटिव पोस्ट मोर्टेम कराने का अनुरोध करते है !
  • अगर किसी केस में एक पुलिस ऑफिसर को ए लगता है की पोस्ट मोर्टेम करना जरुरी है मृत्यु के कारन जानने के लिए तो इस परिस्थिति में भी कराया जा सकता है !
लेकिन अगर किसी केस में अगर पुलिस ऑफिसर को लगता है की मौत का कारन में कोई विरोधबहस नहीं है और मौत का कारन साफ है तो इस परिस्थिति में पोस्ट मोर्टेम नहीं भी करा सकता है !
7.इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय ध्यान में रखने वाली बाते ?Inquest karte samay dhyan me rakhnewali bate:इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय निम्न बातो का ध्यान रखना चाहिए :
  • मृत्य शारीर जहा पाया गया है उस जगह के चारो अच्छी तरह से देखे और पूरी विस्तृत में जाकारी को लिखे  अगर हो सके तो अलग अलग कोण से फोटोग्राफ ले !
  • अगर बॉडी का टुकड़े कर के अलग अलग जगह फेका गया हो तो सभी जगहों की अलग अलग इनक्वेस्ट करना चाहिए और अंत में शारीर के सभी हिस्सों को एक जगह ला कर भी इनक्वेस्ट करानी  चाहिए  !
  • सभी जगहों का फोटोग्राफी कराये 
  • अगर जरुरी हो तो डॉक्टर का भी सहायता लिया जा सकता है !
  • जहा जरुरी हो  जगह का स्केच बनाये !
  • नम्बर को नोट  करे जिस पोजीशन में बॉडी पड़ी हुई हो आजू बाजु के फिक्स्ड ऑब्जेक्ट से बॉडी की दुरी को लिखे !
  • पोजीशन ऑफ़ हाथ, पैर , हेड यदि को लिखे !
  • अगर कोई वस्तु बॉडी के पास पड़ी हो या मृत्य शारीर के द्वारा पकड़ी गई हो या शारीर पर गिरी हुई हो सब जानकारी लिखे !
  • शारीर में कैसा ड्रेस है सभी तरह के ड्रेस और  पहनने के तरीका आदि को लिखे 
  • बॉडी और क्लॉथ पर के सभी तरह के मार्क को नोट कर जैसे जला हुवा या गोली लगा हुवा !
  • सभी प्रकार के जख्म को लिखे यह बताते हुवे की यह जख तरफ और किस प्रकार से हुवा होगा !
  • सावधानीपूर्वक उसन सभी चीजो को लिखे जिससे यह पता लगाने मदद हो की मृत्यु का समय क्या होगा !
  • बॉडी के सभी अंगो को ऊपर से निचे तक देखे और किसी मिसिंग बॉडी पार्ट के बारे में लिखे !
  • बॉडी पर घडी, और आभूषण यदि के देखे और घडी के अन्दर कोई टाइम बता रहा है उसे लिखे !
  • बॉडी का फिंगर प्रिंट और नेल क्लिप्पिंग ले और अगर बॉडी ज्यादा दिन होने के कारन ख़राब हो गई हो तो डॉक्टर का सहायता लिया जा सकता है !
  • हो सके तो बॉडी का पहचान लगाये और पूरा विवरण लिखे फोटे के साथ !
  • बॉडी की पहचान हो जाने के बाद मृत्य व्यक्ति के रिश्तेदारों को इतला करे !
8..इनक्वेस्ट (Inquest) करते समय यह नहीं करना चाहिए :
  • संकोचित नहीं होना चाहिए बॉडी को पूरी तरह से अन कवर  करके पूरी तरह देखना चाहिए  
  • प्राइवेट पार्ट को चेक करने नहीं भूलना चाहिए !
  • इनक्वेस्ट रिपोर्ट लिखते समय बड़ी बड़ी मेडिकल शब्दों का इस्तेमाल से बचना चाहिए क्यों की गलत गलत मेडिकल शब्द लिखने के कारन अनावश्यक जटिलता पैदा होगा   ! 
  • यह लिखना ना भूले को मृत्य व्यक्ति कैसा ड्रेस पहना था क्यों की उससे यह पता लगाने में सहायता मिल सकती है की आत्महत्या है या हत्या विशेषकर औरतो के मामले में  !
  • बॉडी का फोटोग्राफ लिए बिना बॉडी का पोजीशन का बदली नहीं करना चाहिए !जो व्यक्तिओ ने बॉडी को पहचाना किया है उनका नाम लिखना ना भूले !
  • कोई भी बस्तु जैसे चर्को बॉडी के ऊपर न रखे बॉडी को खराब होने से रोकने के लिए  अगर जरुरी हो तो बॉडी को कपडे में लपेट कर चारकोल रखे !
इनक्वेस्ट (Inquest) रिपोर्ट लिखते समय होने वाली सामान्य गलतिया :
  • बॉडी का गलत सेक्स का लिखा जाना जैसे मर्द के जगह औरत या औरत के जगह पे मर्द 
  • व्यस्क व्यक्ति का प्रवाते पार्ट का फोरस्किन के बारे में नहीं लिख जाना की खतना हुवा या नहीं हुवा वाला बॉडी था !
  • चोट और उसका पोजीशन के बारे में गलती !
  • क्या कोई संघर्स का निशान था या नहीं 
  • आत्महत्या के केस में लार बॉडी के मुह से किस कोण से गिरा था या कोई उलटी हवी थी  !
  • आत्म हत्या के केस में बॉडी की जीभ का स्तिथि क्या था या उस पर दन्त का कट मार्क था 
  • वीर्य (Semen)  का रहना या नहीं रहना के बारे में भी नहीं लिखा रहता है !औरत के प्राइवेट पार्ट के ऊपर कोई मार्क होतो उसके बारे में पूरा डिटेल नहीं लिखना !
  • जब एक से ज्यादा बॉडी को पोस्ट मोर्टेम के लिए भेटे समय बॉडी के ऊपर proper आइडेंटिफिकेशन मार्क नहीं लिखना 
  • अगर बिना पहचान वाली बॉडी होते बॉडी के ऊपर उपस्थित मार्क जैसे कट, या मोले यदि का नहीं लिखा जाना !
  • अगर बॉडी किसी रूम के अन्दर मिला तो रूम अन्दर से या बहार से बंद था इसके बारे में डिटेल्स नहीं लिखा होना !और रूम के अन्दर के फर्नीचर और वह मौजूद डिसत्रवेंस के बारे में नहीं लिखा होना !
  • कभी कभी IO को की मार्क को चोट के रूप में मान  लेना !
  • इनक्वेस्ट के दौरान अगर कोई छोटी सी पूछताछ की गई हो जिससे यह पतालागें का कोसिस किया गया हो की मौत का क्या कर्ण हो सकता है उसके बारे में नहीं लिखा जाना भी एक गलती के रूप में ही मन जाता है  
इस प्रकार से  इनक्वेस्ट की बेसिक जानकारी से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

इन्हें भी  पढ़े :

  1. पुलिस ड्यूटी
  2. फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट में होनेवाली कुछ कॉमन गलतिया
  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
  4. क्राइम सीन पे सबसे पहले करनेवाले काम एक पुलिस ऑफिसर के द्वारा
  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

01 मार्च 2022

प्रथम सुचना रिपोर्ट(F.I.R.) तथा उससे सम्बंधित बाते जो सभी पुलिस ऑफिसर को जननी चाहिए

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने पुलिस स्टेशन के कार्य प्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त की और जाना की पुलिस स्टेशन में एक ऑफिसर इन चार्ज के अलावा कौन कौन से अधिकारी होते है और उनका क्या क्या काम होता है ! और इस नई ब्लॉग पोस्ट में हम प्रथम सुचना रिपोर्ट या ऍफ़ आई आर (F.I.R.) और उससे से सम्बंधित बाते जो की हर के पुलिस के जवान जो पुलिस स्टेशन में काम करता है उसे मालूम होना चाहिए(FIR aur usse sambandhit bate jo har policewale ko malum hona chahie )उसके बारे में जानेगे !

इस विषय को अच्छे से समझने के लिए हमने इसे निम्न भागो में बाँट दिया है 

प्रथम सुचना रिपोर्ट के लिए जरुरी बाते
FIR

  • प्रथम सुचना रिपोर्ट के लिए जरुरी बाते(Essentials of FIR) 
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट  किसी भी इंसिडेंट के इन्क्वायरी को सुरु करने का पहला रिपोर्ट होना चाहिए(First in time) !
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट अभियुक्त के द्वारा लिखाने पर (FIR by accused) 
  • स्वाम सज्ञान लेकर कर पुलिस द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट  लिखना(Information by Police officer / suo-motto registration of FIR u/s 157 Cr.PC) 
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट में होने वाली आम गलतिया जिससे की अभियुक्त बरी हो जाते है (General defects relating to the FIR which may cause acquittal)
  • एक विस्तृत प्रथम सुचना रिपोर्ट की बाते(How to make FIR comprehensive?) 
  • देरी से प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखने की समस्याए (Problem arising due to delay in registering FIR)
  • देरी से प्रथम सुचना रिपोर्ट को कोर्ट में भेजने पे समस्याए (Problem arising due to delay in sending FIR to Court and other places)
जैसे के हम जानते है की साधारणतः केवल गोपिस, या सुनी सुनाई या अफवाह CrPC के सेक्शन 154 के अंतर्गत नहीं आते है और उसके ऊपर प्रथम सुचना रिपोर्ट नहीं लिखी जा सकता है लेकिन पुलिस स्टेशन में कोई भी सुनिश्चित इनफार्मेशन किसी संज्ञेय अपराध के होने के बारे में मिलता है तो उसके ऊपर CrPC 154 के अंतर्गत प्रथम सुचना रिपोर्ट जरुर लिखी जाएगी !

1. प्रथम सुचना रिपोर्ट के लिए जरुरी बाते(Essentials of FIR) : प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखते समय निम्न बाते खा ख्याल रखना चाहिए :
  • समय लिखते समय विशेष ध्यान देना चाहिए और सभी एक्शन समय के क्रम अनुसार लिखा जाना चाहिए !
  • इधर उधर की सुनी सुनाई बाते को विशेष महत्व न देते हुए बताई गई सभी सही बाते जो की तथ्यपूर्ण हो उसे सामिल करना चाहिए !
  • जो भी इनफार्मेशन प्रथम रिपोर्ट में सामिल किया जाय ओ सभी उस संज्ञेय अपराध से सम्बंधित होने चाहिए जिसके बारे में यह प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखी जा रही है !
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट थाना इन चार्ज या उनके द्वारा नामित पुलिस ऑफिसर के द्वारा लिखा जाना चाहिए !
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट केवल और केवल लिखित ही होना चाहिए अगर किसी ने बोल कर इनफार्मेशन दे रहा है तो भी उस इनफार्मेशन को लिख कर इनफार्मेशन देने वाला व्यक्ति पढ़ कर सुनाने के बाद प्रथम सुचना में समिलित करना चाहिए !
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट इनफार्मेशन देने वाले के द्वारा हस्ताक्षरित जरुर होना चाहिए !
  • सभी प्रथम सुचना रिपोर्ट का एंट्री जनरल डैयरी में जरुर करना चाहिए !
  • अगर कोई इनफार्मेशन टेलीग्राम के द्वारा प्राप्त हुवा हो तो केवल और केवल ओरिजिनल टेलीग्राम जिसके ऊपर हस्ताक्षर या अंगूठा का मार्क होता है वही प्रथ सूचना रिपोर्ट बन सकता है लेकिन अगर एक टेलीग्राम पाने के बाद एके पुलिस ऑफिसर समझता है की टेलीग्राम में दी हुई बाते सही है तो वह स्वाम सज्ञान लेकर प्रथम सुचना रिपोर्ट लिख सकता है !वासे ही टेलीफोन से प्राप्त सुचना के ऊपर भी कर सकता है 
2. प्रथम सुचना रिपोर्ट  किसी भी इंसिडेंट के इन्क्वायरी को सुरु करने का पहला रिपोर्ट होना चाहिए(First in time):
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट वह सूचना है जो की पुलिस के सबसे पहले मिलती है न की वह सूचना जो पुलिस चाहए अपने अनुसार रिकॉर्ड कर ले  इसका मतलब यह हुवा के संज्ञेय अपराध से सम्बंधित जो जाकारी पुलिस स्टेशन में सबसे पहले मिली और जिसके ऊपर रिपोर्ट लिखा गया वही  प्रथम सुचना रिपोर्ट होगा !
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखने के बाद ही इन्वेस्टीगेशन सुरु होता है 
3. प्रथम सुचना रिपोर्ट अभियुक्त के द्वारा लिखाने पर (FIR by accused) : अगर कोई व्यक्ति खुद ही आकर अपराध स्वीकरण खुद हो करता है तो इस संदर्भ में उसके द्वारा दिया गया कोई भी बक्तब्य उसके खिलाफ साक्ष्य नहीं मन जायेगा कोर्ट के द्वारा लेकिन उसके द्वारा दिए गये सुचना के आधार पर अगर कोई साक्ष्य की डिस्कवरी होती है तो उसे साक्ष्य माना  जायेगा !

4. स्वाम सज्ञान लेकर कर पुलिस द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट  लिखना(Information by Police officer / suo-motto registration of FIR u/s 157 Cr.PC) : निम्नलिखित कुछ स्थतिया जिसमे पुलिस स्वाम संज्ञान लेकर प्रथम सुचना रिपोर्ट लिख सकती है !
  • जब पुलिस ऑफिसर को कोई गोपनीय , अज्ञात व्यक्ति के द्वारा , या टेलीग्राम या टेलीफोन के द्वारा किसी संज्ञेय अपराध की सुचना मिलती है तो पुलिस स्वाम सज्ञान लेकर प्रथम सुचना रिपोर्ट लिख सकती है !
  • जब पुलिस ड्यूटी के दौरान किसी संज्ञेय अपराध के बारे में पता चलता है !
  • या जब किसी पुलिस ऑफिसर के उपस्थिति में कोई संज्ञेय अपराध होता है!
ऊपर बताई गई परिस्थितियो में पुलिस स्वाम संज्ञान लेकर प्रथम सुचना रिपोर्ट लिख सकती है !

5. प्रथम सूचना रिपोर्ट में होने वाली आम गलतिया जिससे की अभियुक्त बरी हो जाते है (General defects relating to the FIR which may cause acquittal): प्रथम सुचना रिपोर्ट  कुछ निम्लिखित गलतिया है जिसके कारन अभियुक्त का बरी होने की संभावना ज्यादा रहती 
  • बिना किसी कारन प्रथम सुचना रिपोर्ट को लिखने में देरी करना 
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट या स्टेटमेंट के ऊपर  शिकायत कर्ता का हस्ताक्षर का न होना !
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट को कोर्ट में देरी से भेजना !
  • गवाह या धायल शिकायतकर्ता के द्वारा अपराध का पूरा विवरण न देना !
  • प्रथम सुचना रिपोर्ट के अन्दर विरोधाभाष तथ्यों का होना !
  • शिकायतकर्ता के द्वारा दिए गए तथ्यों को इन्वेस्टीगेशन और ट्रायल  के दौरान चेक नहीं करना
  • शिकायतकर्ता  जिन्होंने शिकायत की है उनकी जाँच ट्रायल के दौरान नहीं करना !
  • जिस पुलिस ऑफिसर ने शिकायत रजिस्टर की उसकी ट्रायल के दौरान एग्जामीन नहीं करना !  
  • जिस कांस्टेबल ने प्रथम सुचना रिपोर्ट कोर्ट में सबमिट  की उसकी ट्रायल के दौरान एग्जामीन नहीं करना !  
6. एक विस्तृत प्रथम सुचना रिपोर्ट की बाते(How to make FIR comprehensive?) : थाना इन चार्ज के यह सुनिश्चित  करना चाहिए की प्रथम सुचना रिपोर्ट में लिखी हुई सारी शिकायतकर्ता के द्वारा बता गयी  अनुसार है !और उन्हें अपनी ओर से कोई भी तथ्य या शब्दावली नहीं डालनी चाहिए !प्रथम सुचना रिपोर्ट की पूरी बाते शिकायत करता के द्वारा बताई गई बाते ही होने चाहिए ! प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखते समय निम्नलिखित 11 "W" का ध्यान रखना चाहिए :
  • क्या बताना चाहते हो(What information have you got to convey? )
  • बताने वाला कौन है , भुक्त भोगी , चास्म्दिद गवाह या सुनी सुनाई बात वाला(What is his capacity - eye witness victim or hear say?)
  • अपराध कौन किया होगा(Who possibly committed crime?)
  • अपराध का विक्टिम या भुक्त भोगी कौन है (Who is the victim of the crime?)
  • कब हुवा ?   (When did it occur?)
  • कहा हुवा ? (Where did it occur? (the spot)
  • क्यों हुवा ?(Why? (Motive of crime)
  • कैसे हुवा? (Which way? Describe the incident. The role played by each accused-weapon used, etc.)
  • कौन कौन वह मजूद था ?(Who else was present then?)
  • अपराध के जगह से क्या क्या ले गया गया है ? (What was taken away by the accused? (any article/property)
  • क्या साक्ष्य अपराधी द्वारा छोड़ा गया है ? What traces were left by accused? (physical clues)
उपरोक्त बातो को प्रथम सुचना रिपोर्ट लिहते समय ध्यान में रखने पर एक रिपोर्ट को सही और विस्तृत बनाया जा सकता है !
7. देरी से प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखने की समस्याए (Problem arising due to delay in registering FIR): प्रथम सुचना रिपोर्ट को देरी से लिखने पर निम्नलिखित समस्याए आ सकती है :
  • देरी से लिखी गई प्रथम सुचना रिपोर्ट सेजिसका देरी से लिखने का कोई कारन न हो तो शंका उत्पन्न करती है की की मनगढ़ंत होने के बारे में !
  • अगर देरी का  सही कारन होतो उसे सही विवरण के साथ बताना चाहिए !
8.देरी से प्रथम सुचना रिपोर्ट को कोर्ट में भेजने पे समस्याए (Problem arising due to delay in sending FIR to Court and other places): देरी से FIR कोर्ट में सबमिट करना कोई कारन नहीं हो सकता है की FIR रिजेक्ट हो जाए अगर देरी से सबमिट करने का सही कारन होतो ! इसके संदर्भ में कोर्ट के बहुत सारे निर्णय है जो की पक्ष और विपक्ष दोनों में जैसे :

  • हरपाल सिंह बनाम हिमाचल सरकार(Harpal Singh Vs. State of H.P. -AIR 1981 SC 361) का एक केस था जिसमे रेप से सम्बंधित एक FIR को 10 दिन के देरी से रजिस्टर किया गया था और उसके सम्बन्ध में जो कारन दिया गया थक की यह देरी परिवार के सदस्यों के द्वारा परिवारिक प्रेस्टीज के कारन हुवा तो उसे कोर्ट ने सही कारन मान कर परमिट किया ! 
  • जब की एक दुस्र्रे केस में रामजग (Ramjag- AIR 1974 SC 607-61) जिस में देरी के कारन को अपर्याप्त मानते हुए FIR को ख़ारिज कर दिया था !
इस लिए यह जरुरी है की सभी पुलिस ऑफिसर्स को प्रथम सुचना रिपोर्ट और उससे सम्बंधित कोर्ट के आदेश के बारे में जानकारी रखनी चाहिए और ऊपर बताई गई बाते को प्रथम सुचना रिपोर्ट लिखते समय ध्यान में रखे तो बहुत सहूलित मिलेगा !

इस प्रकार से  प्रथम सुचना रिपोर्ट तथा उससे सम्बंधित जानने वाली बाते एक पुलिस ऑफिसर   से  सम्बंधित  यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुवा !उम्मीद है की यह  पोस्ट आप को पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट होतो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग  सब्सक्राइब औत फेसबुक पर लाइक करे और हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित !

इन्हें भी  पढ़े :

  1. पुलिस ड्यूटी
  2. फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट में होनेवाली कुछ कॉमन गलतिया
  3. 6 कॉमन गलतिया अक्सर एक आई ओ सीन ऑफ़ क्राइम पे करता है
  4. क्राइम सीन पे सबसे पहले करनेवाले काम एक पुलिस ऑफिसर के द्वारा
  5. बीट और बीट पेट्रोलिंग क्या होता है ?एक बीट पट्रोलर का ड्यूटी
  6. पुलिस नाकाबंदी या रेड् क्या होता है ?नाकाबंदी और रेड के समय ध्यान में रखनेवाली बाते 
  7. निगरानी और शाडोविंग क्या होता है ? किसी के ऊपर निगरानी कब रखी जाती है ?
  8. अपराधिक सूचना कलेक्ट करने का स्त्रोत और सूचना कलेक्ट करने का तरीका
  9. चुनाव के दौरान पुलिस का कर्तव्य
  10. थाना इंचार्ज के चुनाव ड्यूटी सम्बंधित चेक लिस्ट

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