18 सितंबर 2016

आश्रू गैस के प्रकार तथा उपयोग

पिछले पोस्ट में हमने  आश्रू गैस के इतिहास तथा प्रभाव (Tear Smoke)के बारे में इस पोस्ट में इस्तेमाल के अनुसार अश्रु गैस के प्रकार तथा उसका बेसिक जानकारी(Type of tear smoke aur unke basic jankari) !



जैसे की हम जानते है की आश्रू गैस का अविष्कार 1900 में हुई लेकिंन पहले ये इतना पोर्टेबल कंटेनर (Portable tear smoke)में नहीं आती थी इसके अमुख अमुख जगह पे जहा पे उपद्रवियो और डैकतो के आने का ज्यादा संभावना रहता था जैसे बैंक, सामरिक महत्व के स्थान पे  वह रखा जाता था ! और वहा के कर्चारी को इसके इस्तेमल्के बारे में बताया गया रहता है और ओ जब वैसी  परिस्थिति उत्पन्न होती थी तो ओ इसका इस्तेमाल करते थे !
Image result for tear smoke
Tear Smoke Granade(CS)
लेकिंन  समय बदलते गया और अपराध तथा अपराधियो के प्रावृति भी बदलती गई और दंगा फसाद भी किसी फिक्स्ड जगह पे न होकर बहुत से क्षेत्रो में होने लगा तो ये महसूस किया गया की अश्रु गैस दंगा फसाद या भीड़ को कम से कम जानमाल के हनी पहुचाये तितरबितर(disburement of ilegal gathering) करने का बहुत ही कारगर संसाधन है और इसलिए इसको पोर्टेबल कंटेनर में बनाने लगे  और सुरक्षा बल अपने साथ ही लेकर उपद्रवग्रस्त क्षेत्रो में जाने लगे !
बनावट या गैस  के इस्तेमाल के अनुसार आश्रू गैस दो प्रकार के होते है :
  1. ठोस गैस
  2. माया गैस 

रेंज के अनुसार आश्रू गैस के प्रकार(Range ke anusar tear smoke ke types) : ठोस गैस मुनीसन को दुरी के लिहाज से हम 3 भागो में बांटते है !
  1. नजदीक दुरी (Short Range)
  2. मध्यम रेंज (Medium Range)
  3. लम्बी रेंज (Long range)
1. नजदीक दुरी(Short Range tear smoke) के  केटेगरी में आने वाले अश्रु गैस : इस में हम उन आश्रू गैस को रखते है जिनकी रेंज 10 गज तक होती है ! जैसे की :

(a) ब्लास्ट कार्ट्रिज :बेसिक डिटेल ब्लास्ट कार्ट्रिज के 
  • बॉडी की बनावट : मेटलिक अलुमिनियम 
  • लम्बाई : 5 इंच 
  • वजन :60 ग्राम 
  • व्यास : 0.8 इंच 
  • रेंज : 3 से 4 गज 

 ब्लास्ट कार्ट्रिज का इस्तेमाल(Blast Cartridge ka istemal) :इसका इस्तेमाल हम उपद्रवीओ या गुंडों बदमासो के खिलाफ करते है ये बहुत जोर के आवाज़ के साथ फटता है जो की उनलोगों को स्टन करदेता है और कुछ डेरे के लिए उनको दहसत में दल देता है ! इसका इस्तेमाल मजमे के खिलाफ आमतौर पे नहीं करते है !
(b) गैस कार्ट्रिज(Gas Cartridge):
  • लम्बाई -8 इंच 
  • व्यास - 1.5 इंच 
  • वजन : 226.8 ग्राम 
  • बॉडी की बनावट अलुमिनियम  की होती है 
 गैस कार्ट्रिज का इस्तेमाल(Gas Cartridge ka istemal) : इस कार्ट्रिज  को फ़ेडरल रायट गैस गन से फायर करते है !इसका भी इस्तेमाल ब्लास्ट कार्ट्रिज की तरह ही किया जाता है! इसका इस्तेमाल करते समय रेंज 4 गज से ज्यादा ही रखना चाहिए यानि 4 से कम दुरी हो तो ब्लास्ट कार्ट्रिज का इस्तेमाल करना चाहिए और उससे दूर के लिए गैस कार्ट्रिज का इस्तेमाल करना चाहिए !


2. माध्यम रेंज (Medium Range tear smoke): ठोस गैस के बने उन आश्रू गैस को रखते है जो हाथ से 10 गज से लेकर 50 गज तक फेंके जाते है !
(a) सिंगल वे ग्रेनेड(Single way Granade) :
  • रंग : लाल 
  • लम्बाई भूषण  के साथ : 6इंच 
  • लम्बाई भूषण के बिना : 5 इंच 
  • वजन :17 औंस 
  • व्यास : 2.5 इंच 
  • गैस निकलने के लिए होल : 14(9 साइड में 4 upar)
  • गैस निकलने का समय : 25 से 35 सेकंड तक 
  • रेंज : 50 गज 
सिंगल वे ग्रेनेड का इस्तेमाल(Single way Granade ka prayog) :
  • मजमे के ऊपर 
  • तथा गैस टोर्च में डाल कर  

(b) थ्री वे ग्रेनेड (Three way Granade):यह टिफिन के आकर का होता है और इसके 3 टुकड़े धमाके के बाद अलग अलग गिरते है !
  • रंग : लाल (यदि CN का होगा तो नहीं तो नीला या हरा )
  • वजन : 20 औंस 
  • लम्बाई भूषण केसाथ : 6 इंच 
  • लम्बाई भूषण के बिना -5 इंच 
  • व्यास -2.5 इंच 
  • गैस निकलने के होल :22
  • गैस निकलने का समय : 20 से 25 सेकंड 
  • रेंज : 50 गज 
  • फैलाव : इसका एक टुकड़ा दुसरे से तक़रीबन 15 से 25 गज की दुरी पे गिरता है !
थ्री वे ग्रेनेड का प्रयोग  (Three way Granade ka prayog):इस ग्रेनेड को कभी भी  टोर्च में डालकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए!.
  • जब मजमा टुकडियो अलग अलग कड़ी हो तब 
  • जब मजमा औरतो और बच्चो का हो 

(c): स्वदेशी ग्रेनेड (Indigenious Grenade): यह अपने देश में ओर्दिनास फैक्ट्री का बना हुवा है यह ग्रेनेड CN गैस का है !
  • रंग : लाल 
  • लम्बाई : 4.8 इंच 
  • वजन - 540 ग्राम 
  • गैस निकलने का होल : 15
  • गैस निकलने का समय : 15 सेकंड 
  • व्यास- 2.2 इंच 
  • रेंज : 35 se 50 गज 
स्वदेशी ग्रेनेड का प्रयोग  (Indigenious Grenade prayog ):  इसका इस्तेमाल मजमे के ऊपर किआ जाता है ! अगर इस ग्रेनेड को GF राइफल पर डिस्चार्ज कैप चढ़ाकर इसमें गैस कैप के साथ 45 डिग्री एंगल से फिरे करे तो ये 200 गज तक का रेंज प्राप्त कर सकता है !


3. लॉन्ग रेंज (long range): इस केटेगरी में उन सेलो तथा ग्रेनेड को रखते है जिसका रेंज 100 से 200 गज तक होती है : इनका अपना अलग से वर्गीकरण इस प्रकार से किया जाता है
  • शोर्ट रेंज शेल (Short Range shell)
  •  लॉन्ग  रेंज शेल (Long Range shell)
(a) शोर्ट रेंज शेल (Short Range shell): इनका विवरण इस प्रकार से है :
  • रंग - लाल (यदि CN है तो )
  • लम्बाई : 8.5 इंच 
  • व्यास : 1.5 इंच
  • गैस निकलने के होल -10
  • गैस निकलने का समय - 25 से 35 सेकंड  
  • वजन - 10 औंस 
  • रेंज : 100 गज 

(a) लॉन्ग  रेंज शेल (Long Range shell): इसमें प्रोपोलेंट चार्ज की मात्र ज्यादा होने के कारन इस शैल का रेंज 200 गज तक हो जाता है !इनका विवरण इस प्रकार से है :
  • रंग - लाल (यदि CN है तो )
  • लम्बाई : 10.9 इंच 
  • व्यास : 1.5 इंच
  • गैस निकलने के होल -10
  • गैस निकलने का समय - 25 से 35 सेकंड  
  • वजन - 17 औंस 
  • रेंज डायरेक्ट  : 75 से 100 गज 
  • एंगल के साथ - 325 गज 
इस प्रकार से यहाँ आश्रू गैस केप्रकर ,रेंज तथा उनके उपयोग के बारे में संक्षिप्त जानकारी ख़त्म हुई !और उम्मीद  है की ये पोस्ट पसंद आएगा! अगर की कमेंट होतो निचे कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे !ब्लॉग को  सब्सक्राइब और अपने दोस्तों के बिच भी फेसबुक के ऊपर शेयर  कर हमलोगों को सपोर्ट  करे 

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17 सितंबर 2016

आश्रू गैस का इतिहास और इसका इस्तेमाल

पिछले पोस्ट में हमने इंसाफ राइफल के ग्रुपिंग फायर और उसके सिद्धांत के बारे में बात किये इस पोस्ट में हम दंगा को कण्ट्रोल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले आश्रू गैस के इतिहास और उसके इस्तेमाल(Tear Smoke ke itihas aur uska prabhaw) के बारे बेसिक जानकारी शेयर करेंगे !




वर्तमान समय में आंतरिक कानून तथा सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलने के रस्ते में आये दिन कोई न कोई समस्या आती रहती है और उसको कण्ट्रोल करने के लिए सुरक्षा बल को बहुत ही अहतियातन  कदम उठाना पड़ता है !
Use of  Tear Smoke
Use of  Tear Smoke
उन कदमो में एक कदम होता है की कम से कम जानमॉल का नुकशान किये दंगा फसाद को कण्ट्रोल करना !और इसके लिए बहुत से उपकरण इस्तेमाल किये जाते है जिनमे  अहम एक है आश्रू गैस(Tear Smoke) ! आश्रू गैस एक बहुत ही कारगर महत्पूर्ण साधन है जिनका इस्तमाल कर के सुरक्षाबल  लॉ एंड आर्डर की समस्या को नियंत्रित करते है ! एक महत्वपूर्ण साधन होने के कारन सुरक्षाबल के सभी जवानों से अपेक्षा रहती है की आश्रू गैस के बारे में जानकारी रखते हो!

जरुर  पढ़े :AK-47 और INSAS Rifle में कौन बेहतर ?

आश्रू गैस के इतिहास(History of tear smoke) : आश्रू गैस का अविष्कार सन 1900 में हुवा लेकिन इसका सबसे पहले इस्तेमाल फ्रांस की पुलिस ने प्रथम विश्व युद्ध के  शुरू होने से पहले की !  एक  अमेरिकन मिलिट्री ऑफिसर थे जिनको अमेरिका में राईट कण्ट्रोल साइंस का पिता कहा जाता है जिनका नाम था कर्नल अप्लगेट रेक्स(Col Applegate Rex)   ने अपनी बुक  " राईट कण्ट्रोल मैटेरियल्स और टेक्निक्स(Right Control Material aur Technical) "  में लिखा है की आश्रू गैस का इस्तेमाल प्रथम विश्व युद्ध से पहले से ही शुरू है !

फ्रांस के बाद आश्रू गैस का इस्तेमाल अमेरिका में भी असामजिक तत्वों को कण्ट्रोल करने के लिए किया जाने लगा गया ! उस समय अमेरीकामे बहुत उपद्रव हो रहा था उनलोगों का  जो सेना से निकल दिए गए थे प्रथम विश्व युद्ध समाप्ति के बाद  उसके बाद सेना से निकले गए लोगो ने अमेरिका में सरकार के खिलाफ आन्दोलन चालू  दी थी  और लूट मार शुरू कर दी उनको कण्ट्रोल करने के लिए अमेरिका ने भी प्रथम युद्ध के बाद आश्रू गैस का इस्तेमाल शुरू किया !

पहले आश्रू गैस को बैंक या सामरिक अहमियत के जगहों में रखा जाता था जिसको बैंक का क्लर्क बैठे बैठे ही इस्तेमाल कर सकता था या  सामरिक अहमियत  के जगह पे तैनात सुरक्षा जवान वाहा से इस्तेमाल कर सकता था ! यानि उस दौरान में आश्रू गैस ऐसे सूटेबल कंटेनर में नहीं की एक जगह से दुसरे जगह आसानी  से ले जाया जाय !

जरुर  पढ़े : 2" मोर्टार का पार्ट्स और टेक्निकल डाटा

लेकिन बाद में इसको  एक जगह से दुसरे जगह ले जाने लायक बनाया गया और फिर आश्रू गैस ग्रेनेड तथा शेलो में भर कर इसको पोर्टेबल बनाया गया जो की इस्तेमाल करने में असंन हो गए !

भारत में आश्रू गैस के इतिहास(Tear Soke ka itihas bharat): भारत में इस गैस की इस्तेमाल कब से शुरू हुई इसका कोई लिखित जानकारी नहीं है लेकिन ऐसा माना  जाता है की 1933 में इस गैस को सबसे पहल पंजाब में खतरनाक अपराधी तथा डकैतों को गिरफ्तार करने के लिए इस्तेमाल करने के लिए अनुमोदित किआ गया !

पंजाब पुलिस ट्रेनिंग स्कूल फिल्लौर के उस समय के प्रिन्सिप्ल स्वर्गीय FHD home को अमेरिका भेजा गया ताकि वह से अश्रु गैस के बारे में जानकारी हासिल कर के आये ! और जब ओ अमेरिका से इसके बारे में जानकारी हासिल करके आये तो उन्हें भारत सरकार का सलहाकार नियुक्त कर दिया गया जो की ओ भारत सरकार  को  आश्रू गैस के बारे में होने वाले मामलो में अवगत कराये !

1935 में एक भारत सरकार  ने आश्रू गैस को दंगा तथा भीड़ नियत्रण के लिए इस्तेमाल करने का अनुमति दी

जरुर  पढ़े : AKM का चाल और उसका पार्ट्स का नाम

अलग से ट्रेनिंग देने के लिए 1937 में एक अलग स्काउट बनाया गया जिन्हें पुलिस ट्रेनिंग स्कूल फिल्लौर(PTS Phillaour) में आश्रू गैस के हैंडलिंग के बारे में विशेष ट्रेनिंग दी गई ! और इस ट्रेनिंग के असर की सफलता को देखते हुए 1940 से पुलिस ट्रेनिं स्कूल फिल्लौर में आश्रू गैस की लगतार ट्रेनिंग कोर्सेज चालु किया गया !

देश की हालत और जरूरतों को मद्दे नजर रखते हुए 1980 से केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस फाॅर्स (CRPF) के सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज-II(Central Training College -II) में आल इंडिया पुलिस फोर्सेज के लिए आश्रू गैस की ट्रेनिंग चालु की गई जिसमे सभी राज्यों के लोकल पुलिस के जवानों को भी ट्रेनिंग दी जाती है !

पहले तो अश्रु गैस का इस्तेमाल केवल असामजिक तत्वों से निपटने के लिए किये जाते थे लेकिंग मजमे के लिहाज से सबसे पहले आश्रू गैस मजमे पर पटना में स्वतंत्रता सेनानियो के खिलाफ किआ गया !

जरुर  पढ़े : 7.62mm SLR के पार्ट्स का नाम और 7.62 mm SLRराइफल का चाल

आश्रू गैस का प्रभाव(Tear Smoke ke effect) : आश्रू गैस का प्रभाव इस प्रकार से पड़ता है !
  • आश्रू गैस का धुवा आँखों में  लगने से आखो से आशु आने लगता है !
  • आश्रू गैस से एक प्रकार की गैस निकलती है जिसकी सुगंध असहनीय होती है !
  • इसके असर से आँख , गले , नाक में जलन तथा शारीर से पसीना निकलने और जलन होने लगता है !
अश्रु गैस की बनावट : बनावट के आधार पे आश्रू गैस को दो भागो में बता जाता है !
  1. ठोस गैस : यह गैस फ़ेडरल कंपनी द्वारा 1923 में बनाया गया !
  2. माया गैस :यह गैस लिकेक्रिया लैब द्वारा 1925 में बनाया गया !
जरुर  पढ़े : AKM राइफल का बेसिक टेक्नीकल डाटा

इस प्रकार से यहाँ आश्रू गैस के इतिहास तथा उसे प्रभाव के बारेमे संक्षिप्त विब्रण समाप्त हुई ! और उम्मीद  है की ये पोस्ट पसंद आएगा! अगर की कमेंट होतो निचे कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे !ब्लॉग को  सब्सक्राइब और अपने दोस्तों के बिच भी फेसबुक के ऊपर शेयर  कर हमलोगों को सपोर्ट  करे 


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  1. 7.62 mm एसएलआर राइफल की खुबिया और खामिया
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  10. इंसास राइफल का पार्ट्स का नाम और खोलना जोड़ना

राइफल का ग्रुपिंग क्या होता है और उसका सिधांत

पिछले पोस्ट में हमने AGL के बेसिक टेक्निकल डाटा तथा पार्ट्स के नाम के बारे में जानकारी हासिल किये इस पोस्ट में हम इंसास राइफल की ग्रुपिंग क्या होता ई तथा इसका सिधांत(INSAS Rifle ki Grouping fire kya hoa hai aur grouping fire ka sidhant) !



फायरिंग किसी जवान विशेष कर  आर्म्ड के जवान के पर्सनालिटी को दर्शाता भी और पर्सनालिटी का विकाश भी करताहै ! फायरिंग एक ऐसी कला है जिसको सिखा भी जा सकता है और सघन अभ्यास से इसे अच्छा से अच्छा  भी किया जा सकता है!
Main Point of Impact
Main Point of Impact
 इसलिए अगर बेसिक ट्रेनिंग(Police Basic Training) के दौरान अगर किसी जवान की फायरिंग के टेस्ट(Firing test) में कम नंबर आता है तो उसे ये नहीं समझना चाहिए की ओ फायरिंग कर ही नहीं सकता है !बल्कि उसे ये ध्यान में रखना चाहिए की फायरिंग एक ऐसी चीज़ है जिसे अभ्यास से सिखा जा सकता है और उसे अच्छा से अच्छा बनाया भी जा सकता है !

जरुर पढ़े : 5.56 mm INSAS राइफल के मग्जिन को भरना खाली करना और रेंज लगाना

खराब फायरिंग के लिए ये जरुरी नहीं है की इसमें केवल फायरर का ही दोष है बल्कि अच्छी फायरिंग में फायरर के साथ साथ हथियार का भी बहुत ही अहम् रोल रहता है ! अगर हथियार की टुनिंग उप और जीरिंग(Tuning up and zeroing) अच्छी तरह से नहीं किया गया हो तो फायरर कितना भी कोशिश करले फायर टारगेट के पॉइंट ऑफ़ एम(Point of aim) पर नहीं लगेगी अगर कभी लग भी गई तो ये फायरर के कारन नहीं बल्कि और बहुत से कारक होते है उसके कारन लग गई होगी !

एक आर्म्ड फाॅर्स के जवान इंडोर ट्रेनिंग में कितना भी महारत हासिल कर लिया हो लेकिंग उसका फायरिंग स्किल अगर अच्छी नहीं है तो उसे ऑपरेशन के दौरान उसके अन्दर  हमेश कॉन्फिडेंस की कमी रहेगी  क्यों की ऑपरेशन के दौरान एक जवान के अंदर इतना काबिलियत होना चाहिए की ओ शूट तो कील(Shoot to kill or ek goli ek dushman) या एक गोली एक दुश्मन का उदेश्य  हासिल कर सके !

जरुर पढ़े : इंसास राइफल को भरना, खाली करना, रेडी और मेक सफे कैसे करते है

इसीलिए ये सभी फायरर की कोशिश होना चाहिए की अपनी ग्रुपिंग फायर को काफी सीरियस ले क्यों की एक अच्छा फायरबन्ने के लिए आपकी ग्रुप फायर अच्छी होनी चाहिए !

हथियार का ग्रुपिंग क्या होता है(Rifle ka grouping fire kya hota hai hai) : अगर एक फायरर अपने राइफल से तीन राउंड्स या उससे ज्यादा फायर दिए हुए उसी एक रेंज(one range), उसी एक पोजीशन(Same position) और उसी पकड़ को कायम(Same hold of weapon) रखते करता है फायर की हुई राउंड टारगेट के ऊपर जो सकल बनती है उसे ग्रुप कहते है !

ग्रुप के लिए जरुरी बाते(Grouping fire ki jaruri baten) :
  • फायरिंग (Firing)
  • तीन या उससे ज्यादा राउंड फायर करना (fire Three or more rounds 
  • अपनी राइफल से (Own weapon)
  • एक रेंज (same range)
  • एक पोजीशनतथा एक पकड़(One position) 

नार्मल ग्रुप क्या होता है(Normal group kya hota hai )  :जब एक फायरर द्वारा 100 गज से किसी भी एक फायरिंग पोजीशन से  कुछ समय के दौरान बहुत से टारगेट पे ग्रुप फायर करने के बाद उन फायर किये गए ग्रुप की औसत साइज़ को उस फायरर का  नार्मल ग्रुप साइज़ कहते है !

ग्रुप का सिधांत(Rifle ka groupig ka sidhant) :
  1. रेंज बढ़ने के साथ साथ ग्रुप की साइज़ भी बढती है!(Range increase , group size increase) 
  2. ग्रुपिंग फायर के आकार के ऊपर हथियार की  कंडीशन, अमुनिसन के कंडीशन तथा फायरर की कौसल का भी असर पड़ता है !(impact of grouping -Condition of weapon, condition of ammunition, and skill of a fire 
  3. ग्रुप टारगेट के ऊपर कही ही बन सकताहै !
  4. ग्रुपिंग फायरिंग करते समय राइफल की पकड़ और दुरुस्त शिस्त की बदली नहीं करनी चाहिए ! एक बार शिस्त ले लिया और पकड़ बना लिया उसी को कायम रखना चाहिए !
  5. ग्रुप का MPI जो बनता है ओ राइफल पर लगे गई रेंज तथा  टारगेट की एक्चुअल रेंज के ऊपर निर्भर करता है !
  6. ग्रुपिंग फायर के समय हवा तथा लाइट का कोई माफ़ी नहीं दिया जाता है !
  7. सही ग्रुपिंग के बाद ग्रुपिंग का MPI को टारगेट के किसी भी हिस्से  में शिफ्ट किया जा सकता है !

टाइप ऑफ़ ग्रुप (Type of group):
  1. पॉइंट ऑफ़ एम के निचे वर्टीकल ग्रुप(Below point of aim in vertical shape) - ऐसा ग्रुप उस समय बनता है जब फायरर हथियार को आगे की तरफ धकेलता है !
  2. पॉइंट ऑफ़ एम के ऊपर वर्टीकल ग्रुप(Above point of aim in vertical shape) - ऐसा ग्रुप उस समय बनता है जब फायरर हथियार को पीछे  की तरफ खिचता  है !
  3. दो अलग अलग ग्रुप बनाना(Distict group) : इस प्रकार का ग्रुप उस समय बनता है जब फायर राइफल को कभी टाइट और कभी लूज पकड़ बनता है !
अच्छी ग्रुपिंग फायर में हथियार और अमिनिसन के साथ साथ फायरर की खुद की काबिलियत भी बहुत अहम् रोल प्ले करता है इसीलिए बार बार और कॉन्फिडेंस के साथ प्रैक्टिस करने से ग्रुपिंग फायर को एक फायरर  बहुत हद तक सुधार सकता है !गोरुपिंग के आकार से ही एक फायरर की फायरिंग की काबिलियत का पता चलता है  जितनी छोटी ग्रुप का साइज़ होगा उतना ही अच्छा मान  जाता है !


अगर  एक फायरर अपना  फायर ग्रुप बहुत छोटा और उसकी हथियार को अच्छी तरह से ज़ेरोइंग कर दी जाय तो कोई शक नहीं है की ओ ऑपरेशन के दौरान  एक गोली एक दुश्मन का अपना मकशाद हसिलना कर सके !

इस प्रकार से यहाँ इंसास की ग्रुप फायर के बारे में जानकारी खत्म हुई और उम्मीद  है की ये पोस्ट पसंद आएगा! अगर की कमेंट होतो निचे कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे !ब्लॉग को  सब्सक्राइब और अपने दोस्तों के बिच भी फेसबुक के ऊपर शेयर  कर हमलोगों को सपोर्ट  करे 

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  5. 9 mm कार्बाइन की सफाई और रख रखाव का तरीका
  6. 9mm कार्बाइन के मगज़ीन को भरना खाली करना , 
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31 अगस्त 2016

एक मिनट ड्रिल: एक लेन में दौड़ना और रंगीन बॉल को उठाना

पिछले पोस्ट में हमने एक मिनट ड्रिल एक दुसरे के सहयता को  दीवाल क्रॉस करने के बारे में जानकारी शेयर की थी ! इस पोस्ट में हम दौड़ते हुए बेतरतीब रखे हुए बॉल को उठाने वाला एक मिनट ड्रिल(Picking a colourful ball) के बारे में जानकरी शेयर करेंगे !



ये ड्रिल को सुबह पीटी के समय कराया जा सकता है या शाम को स्पोर्ट्स के समय में कराया जा सकता है !
Picking a ball
Picking a ball
ड्रिल करने का सामान(drill ke saman) : 10-20  प्लास्टिक या टेनिस बॉल चार कलर में (5 लाल, 5 हरा , 5 नीला ,और 5 पिला ) 1 से 10 लेन मार्क(Lane mark) करले ग्राउंड के ऊपर , लेन की चौड़ाई 1.5 मीटर और लम्बाई 25-50 मीटर ग्राउंड के साइज़ के अनुसार मार्क कर ले ! जितना लेन है उतना जवान को एक साथ प्रैक्टिस कराया जा सकता है !

जरुर पढ़े : फायरमैन लिफ्ट रहत और बचाव

ड्रिल की तरतीब :ग्राउंड के साइज़ के अनुसार लेन मार्क करले और रंगीन बॉल को कही कही अलग अलग रंग के बॉल को पुरे लेन के ऊपर रख दे ! और ट्रेनिंज को उन लेन में दौड़ने के लिए बोले ! जब ट्रेनीज दौड़ रहे है उस समय उस्ताद किसी एक स्पेसिफिक कलर जैसे की लाल या नीला पुकारे गे आर ट्रेनीज को उस रंग के बॉल को उठाना है ! एक एक कर उस्ताद बॉल कलर पुकारेंगे और ट्रेनीज उस रंग के बॉल को उठाएगा ! बहुत बार ऐसा भी हो जी जिस रंग की बॉल को पुकारा गया है ओ ट्रेनीज के दौड़ते समय  पीछे  छुट गया है और  उस समय तिनी एक दुविधा में रहेगा की इस एक्सरसाइज की जल्दी से पूरा करू या पीछे मुड के जा कर उस रंग के बॉल कोउठा लायु!

ड्रिल का फायदा : ये एक मिनट  ड्रिल  सिक्यूरिटी मैन(Security man) या नार्मल पुलिस(Policeman) के जवान को कराया जय तो उसे मेंटली अलर्ट और मेंटल टफनेस और ड्रिल आसन होने के कारन उनमे एक आत्म विश्वास बढ़ता है की ओ भी जीत सकते है !
इसे भी पढ़े :
  1. एक पैर पे खड़ा होकर जूता का लेस बंधना
  2. सुई धागे से एक बटन को लगाना 
  3. सही तरह से यूनिफार्म पहनना
  4. मार्च पास्ट में गलती ढूढना!
  5.  वर्ड ऑफ़ कमांड और मार्चिंग दस्ते पे कण्ट्रोल का त्वरित अभ्यास
  6. राइफल को तेजी के साथ सफाई करना
  7. एक हाथ से राइफल के मगज़ीन को भरना
  8. बिना आवाज किये दुश्मन को सरप्राइज करना
  9. फायरिंग रेंज को फायरिंग के लिए जल्द से जल्द तैयार करना
  10. रनिंग और ओब्स्टल क्रासिंग

एक मिनट ड्रिल: एक दुसरे के सहायता से दीवाल चढ़ना

पिछले पोस्ट में हमने पार्कआवर  लेवेल-२ एक्सरसाइज के बारे में जानकारी शेयर किये है ! इस पोस्ट में मानव लैडर बनाना और उसके इस्तेमाल वाला(Human ladder banana aur uska istemal) एक मिनट ड्रिल के बारे में जानकारी शेयर करेंगे !



यह एक्सरसाइज  शारीरिक शक्ति(Physical strength), सामूहिक कार्य(Team work) तथा संसाधन का उतम इस्तेमाल(Best utilisation of available resources) का एक मिश्रण है !

Climbing wall with the help of human ladder
Climbing wall with the help of human ladder
जरुरी सामान (Human ladder drill ka Jaruri saman): 12' से 15' उच्ची दीवाल(High wall)  और 18 मीटर रस्सी(Rope)  और तीन जोड़ी जवान(three pairs Jawan) 

ड्रिल करने का तरीका(Human ladder drill ko karane ka tarika) : इस ड्रिल में तीन जोड़ी जवान 18 मीटर रस्सी(3मीटर एक जवान के हिसाब से)इस्तेमाल करते  हुए 15' उच्ची दीवाल को क्रॉस करेंगे ऊपर चढ़ कर !

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यह ड्रिल 8' दीवाल से शुरू होकर धीरे धीरे 9' , 12' और 15' तक बधाई जानी चाहिए ! पहला जवान अपने साथी जवान के हाथ के ऊपर चढ़ कर सहायत लेते हुए दीवाल के ऊपर चढ़ेगा फिर ओ ऊपर जाके रस्सी को पकड़ेगा और उस रस्सी का सहायता लेकर बाकि जवान दीवाल के उसपार जायेंगे !

इस ड्रिल के फायदे(Human ladder drill ka fayda) : इस ड्रिल से जवान के फिजिकल स्ट्रेंथ के साथ साथ आपसी कोआर्डिनेशन और कोऑपरेशन बढती है ! और किसी खाई तथा चार दिवारी में फंस जाने पे उसे बहार निकल की कला मिलती है !

ये कोई जरुरी नहीं है की इसमें बताई गई दीवाल की उचाई तथा रस्सी की लम्बाई वैसी ही हो इसके अपने जरुरत के अनुसार बदली किया जा सकता है !

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इस प्रकार से यहाँ एक मिनट ड्रिल मानव लैडर(Human ladder) बना के दीवाल पार करने का पोस्ट समाप्त हुई !
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एक मिनट ड्रिल: पार्कआवर लेवल-2 एक्सरसाइज

पिछले पोस्ट में  हमने एक मिनट  ड्रिल  फिजिकल कोआर्डिनेशन  साथ  बारे   में हम एक मिनट ड्रिल परकौर लेवल -2(Parkour level-2)  एक्सरसाइज  जानकारी तथा एक्सरसाइज  कंडक्ट (Parkour level-2 exercise aur conduct karane ka tarika)  कैसे कराते  उसके बारे में जानकारी  शेयर करेंगे !



 वैसे तो हमने अपने पिछले में जिस ड्रिल के बारे में जिक्र किये है ओ परकौर लेवल -I में आता है  उसी लिहाज से ये एक्सरसाइज उससे थोडा सा कठिन और थोडा  भिन्न है! परकौर(Parkour )एक्सरसाइज मिलिट्री ट्रेनिंग का एक हिस्सा है जिसके अन्दर ट्रेनीज  के ऑब्सटक्ल को कैसे क्लियर करते हुए एक जगह से दुसरे जगह जल्दी से जल्दी पहुचते है !


Parkour Level-2 Exercise
Parkour Level-2 Exercise
जरुरी के सामान (necessary items) : इस एक्सरसाइज को कॉम्बैट ड्रेस में कराया जाता है और इसके लिए जरुरी सामान है की खुला ग्राउंड हो जिसके अन्दर भिन्न  भिन्न तरह के  मानव निर्मित और प्राकृतिक ओब्सटकल उपलब्ध हो !
ड्रिल करने की तरतीब(Drill conduct karane ka tarika) : इस ड्रिल में हम केवल मानव निर्मित(Man made) ही नहीं बल्कि प्राकृतिक ओब्सतक्ल को भी निगोसियेट(Obstacle negotiate) करते है जैसे की झाडिया, जंगले पेड़ पौधे , लकड़ी के बाली(boulders), दिवाल, गढ्ढा बार्बेड वायर इत्यादि ! को एक साथ बने हुई टीम के साथ दिए हुए टाइम में क्लियर करना होता है ! इस ड्रिल से ये सिखने को मिलता है किस एक साथ बहुत साडी बढाओ को कैसे क्रॉस करते है !
 
इस ड्रिल के फायदे(Is  drill ke fayde) :यह ड्रिल जंगल और शहरी इलाके के अन्दर ऑपरेशन कंडक्ट करने में सहायक होते जैसे किसी खतरनाक अपराधी या टेररिस्ट को पीछा (pursuing dangerous target)करते वक्त जब ओ इधर से उधर भाग रहा हो !
 
इस ड्रिल के इस्तेमाल(Parkour drill is use) : इस ड्रिल को क्विक रिस्पांस टीम(QRT) के ट्रेनिंग के पार्ट बनाना चाहिए और  उन ट्रेनिंज जो एंटी टेररिस्ट ऑपरेशन(Anti terrorist training) के लिए तैयार किया जा रहे है उनको इसका फ्रीक्वेंट प्रैक्टिस करना जाना चाहिए !

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इस प्रकार से यहाँ बाधा क्लियर करने सम्बंधित लेवल-2 की एक मिनट ड्रिल समाप्त होई उम्मीद है की ये ये पोस्ट आप को काम आएगी !अगर की कमेंट होतो निचे कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे !ब्लॉग को  सब्सक्राइब और अपने दोस्तों के बिच भी फेसबुक के ऊपर शेयर  कर हमलोगों को सपोर्ट  करे
 
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इसे भी  पढ़े :
  1. एक मिनट ड्रिल क्या है? और  इसके फायदे 
  2. एक मिनट ड्रिल कैसे कराये?
  3. एक मिनट ड्रिल का उदेश क्या है?
  4. One Minute Drill training करने का तरीका 
  5. एक मिनट ड्रिल का क्लासिफिकेशन
  6.  ड्रेस बदलना थोड़े समय में 
  7. एक पैर पे खड़ा होकर जूता का लेस बंधना
  8. सुई धागे से एक बटन को लगाना 
  9. सही तरह से यूनिफार्म पहनना
  10. मार्च पास्ट में गलती ढूढना!


29 अगस्त 2016

स्मोक और इल्लू बम का चाल और बेसिक डाटा

पिछले पोस्ट में हमने 51mm मोर्टार के  हाई एक्सप्लोसिव बम  के चाल के बारे में जानकारी प्राप्त किये इस पोस्ट में हम 51 mm मोर्टार  में इस्तेमाल होने वाले स्मोक तथा इल्लुमिनेसन बम के चाल(smoke bomb aur ILL bomb ki chal) तथा बेसिक डाटा का बारे में जानकारी शेयर करेंगे !

जैसे की हम जानते है की 51mm मोर्टार  में पांच तरह के बम फायर किये जाते है उन्ही पांच में से आज हम स्मोक बम और इल्लू बम के बारे में  बात करेंगे और पहले स्मोक बम !
Smoke and ILL Bomb
Smoke and ILL Bomb


स्मोक बम का इस्तेमाल(Smoke bomb ka use) : इस बम का इस्तेमाल अपनी टुकड़ी की किसी ऑपरेशन के दौरान करने वाले   हरकत को छुपाने की लिए इस्तेमाल करते है की दुश्मन हमारी  नफरी के ऊपर निशाना लगाकर फायर न कर सके ! इस को फायर करने से एक धुआ  का पर्दा बन जाता है जिससे दुश्मन की नजरो से अपनी नफरी को छुपाव मिल जाता है और ओ अपना मूवमेंट आसानी से कर लेते है !


स्मोक बम का पहचान(Smoke bomb ka pahchan) :  ऊपर से फ्यूज नहीं होता है , इसका बॉडी का रंग हरा होता है और बम के बॉडी में स्मोक लिखा रहता है !जिससे हम पहचानते है की ये स्मोक बम है !
  स्मोक बम का टेक्निकल डाटा(Smoke bomb ka technical data) :
  • वजन( smoke bomb ka weight) : 980 gm
  • लम्बाई(smoke bomb ka lambai) : 283 mm
  • मिनिमम रेंज(smoke bomb ka minimum range)(: 180 मीटर 
  • मैक्सिमम रेंज(smoke bomb ka maximum range) : 850 मीटर 
  • धुआ  देने का समय(smoke bomb ka smoke dene ka samay) : 2 मिनट 
  • रेट ऑफ़ फायर(smoke bomb ka rate of fire): नार्मल :8 बम/मिनट  इनटेन्स : 12 बम /मिनट 
  • मैक्सिमम डिया9smoke bomb ka maximum daimeter): 50.8 mm
  • फिलिंग वजन(smoke bomb ka filling weight) : 450 gm
  • मजल वेलोसिटी(smoke bomb ka muzzle velocity) : 110 मीटर/सेकंड 
स्मोक बम का हिस्से पुर्जे(smoke bomb ka parts ka name) :
  • नोज कैप (Nose cap)
  • डिले पल्लेट(Delay pallet)
  • प्रिम्मिंग कम्पोजीशन(Primming composition)
  • क्लोजिंग डिस्क(Closing disk) 
  • टेल यूनिट (Tail unit)
  • गन पाउडर (Gun Powder) 

स्मोक बम का चाल(smoke bomb ka chaal) : फायर होने से चिंगारी पैदा होता है ! चिंगारी क्लोजिंग डिस्क से गन पाउडर में आग लगा देता है ! आग फिर गन पाउडर में जाती है और  इसे जला देती है , जिससे डिले पल्लेट जल जाता है ! डिले पल्लेट के जलने से प्रिमिंग कम्पोजीशन और स्मोक कम्पोजीशन में आग पकड़ लेता है और बम धुआ देना  सुरु कर देता है !यह क्लोजिंग डिस्क  के द्वारा निकलता है ! 

नोट(note) :बम को आग लगाने वाले पुर्जे बम के बेस में होते है और कार्ट्रिज बम को धकेलने के अलावा आग लगाने का काम भी करते है ! डिले पलेट की  की वजह से धुआ 6 सेकंड तक बहार नहीं निकलता है !

इल्लुमिनेसन बम की इस्तेमाल(ILL bomb ka use) : जैसे की स्मोक बम से अपनी हरकत छुपाने के लिए करते है ताकि हमारा दुश्मन हम पे निशाना लगा के फायर न कर सके! उसी तरह से इस बम का इस्तेमाल कम रौशनी के समय छुपे हुए दुशमन को निशाना ले कर बर्बाद करने के लिए किया जाता है ! यह बम रात के समय में रौशनी देने के काम आता है ! 


इल्लुमिनेसन बम  का पहचान(ILL bomb ka pahchan) : यह बम सफ़ेद रंग का होता है और इसके बॉडी के ऊपर ILL लिखा रहता है जिससे इसकी पहचान होती है ! ILL - Illumination का शोर्ट फॉर्म है जिसका अर्थ होता है रौशनी से किसी चीज़ को चमका  देना !

इल्लुमिनेसन बम का टेक्निकल डाटा(ILL bomb ka technical data) :
  • वजन(ILL bomb ka wight) : 925 gm
  • रौशनी देने का समय(ILL bomb ka light dee ka samay) : 35 सेकंड 
  • मीन लुमिनोसिटी(रौशनी की चमक)(ILL bom ka light ka takat) : 2.5 लाख कांडला 
  • रेट ऑफ़ डिसेंट9ILL bomb ka rate of desent) : 3 मीटर /सेकंड 
  • पॉइंट ऑफ़ ब्रुस्त ज़मीं कूपर(ILL bomb ka point of brust jamin ke upar) : 150 +- 30 मीटर 
  • रेंज(ILL bomb ka range) : 900 मीटर 
  • इल्लुमिनेसन एरिया(ILL bomb ka ka light dene ka area) :400 मीटर डिया

इल्लुमिनेसन बम  का चाल(ILL bomb ka ka chal) : फायर होने से कार्ट्रिज से चिंगारी पैदा होती है जो की क्लोजिंग डिस्क से गुजरकर डिले चार्ज से होती हुई गन पाउडर के ब्रुस्टिंग चार्ज(Gun powder brusting charge) को आग लगा देती है ! इससे फ्लायेर(flare) पैदा होता है और फ्लायेर एक छोटा पैराशूट के साथ  लगा होता है ! फ्लायेर और पैराशूट जब बम से बहार निकलते है टी पैराशूट जल्दी ही खुल जाता और फ्लायेर उसके निचे हवा में लटकाने लता है ! साथ ही रौशनी देने लगता है ! रौशनी तक़रीबन 35 सेकंड तक रहती है  जो की बहुत ही चमकीली होता है उसके अन्दर सभी चीज़े साफ साफ दिखाई देने लगती है 


इस प्रकार से यहाँ स्मोक बम तथा इल्लुमिनेसन बम के बारे में बेसिक जानकारी ख़त्म हुई ! उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! अगर की कमेंट होतो निचे कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे !ब्लॉग को  सब्सक्राइब और अपने दोस्तों के बिच भी फेसबुक के ऊपर शेयर  कर हमलोगों को सपोर्ट  करे 
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  7. AKM का चाल और उसका पार्ट्स का नाम
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  9. 2" मोर्टार का पार्ट्स और टेक्निकल डाटा
  10. AK-47 और INSAS Rifle में कौन बेहतर ?


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