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28 मई 2017

रेकॉइल ऑपरेशन के सिद्धांत तथा लॉन्ग रेकॉइल और शोर्ट रेकॉइल क्या होता है ?

पिछले कुछ पोस्टो में हमने ब्लो बैक सिद्धांत  के बारे में बाते किये जिसमे लास्ट पोस्ट डिलेड ब्लो बैक के सिद्धांत के  बारे में था! इस पोस्ट में हम रेकॉइल ऑपरेशन के सिद्धांत(Recoil Operation ke siddhant) के बारे में जानेगे !


हम अपने स्कूली शिक्षा के दौरान न्यूटन के गति के नियम में जरुर पढ़ा है जिसमे न्यूटन का तीसरा नियम कहता  है की "प्रत्येक क्रिया की विपरीत दिशा में बराबर की प्रतिक्रिया होता है " उसी की तरह  राइफल से  राउंड  आगे की दिशा में तेजी  गति करती है , जसकी सामान प्रतिक्रिया ब्रीच ब्लाक फेस पर आता  है !

ब्रीच ब्लाक गुण बॉडी में लॉक होता है अतः यह प्रतिक्रिया हथियार को स्थान्तरित होकर हथियार पीछे की हरकत करता है जिसे रेकॉइल कहते है ! यह फायरर को कंधे पर महसूस होता है !

जरुर पढ़े : डीलेड ब्लो बैक कैसे काम करता है ?

रेकॉइल ऑपरेशन में साइकिल ऑफ़ ऑपरेशन को पूरा करने के लिए उर्जा , बुलेट के आगे की दिशा में प्राप्त संवेग के प्रतिक्रिया स्वरुप बैरल तथा ब्रीच ब्लाक के पीछे की दिशा में गति करने से मिलती है !

इस पोस्ट के में हम निम्न विषयों के बारे में जानेगे :
  1. लॉन्ग रेकॉइल क्या होता है ?(Long Recoil ka siddhant kya hota hai )
  2. शोर्ट रेकॉइल क्या होता है ?(Short Recoil ka siddhant kya hota hai )
  3. लॉन्ग और शोर्ट रेकॉइल में अंतर ?(Long ttha short recoil me kya natar hai )
रेकॉइल ऑपरेशन के सिद्दांत में बैरल को आगे-पीछे की हरकत करने के लिए मुक्त(Free float) रखा जाता है  और ब्रीच ब्लाक को बैरल के साथ लॉक करते है ताकि मेकानिकल सेफ्टी प्राप्त हो सके ! बैरल तथा ब्रीच ब्लाक का लॉक बैरल में सेफ प्रेशर बन्ने के बाद खोल जाता है और बैरल अपनी स्प्रिंग के मदद से अपनी पूर्वे स्थिति में
आ जाती है ! 

पीछे जाता ब्रीच ब्लाक साइकिल ऑफ़ ऑपरेशन की तमाम क्रियाएँ पूर्ण कर वापस आगे आता है और नया राउंड चैम्बर में लोड करके फिर बैरल के साथ लॉक होकर हथियार को फायर के लिए तैयार करता है ! 
रेकॉइल ऑपरेशन दो प्रकार की होती है 
  •  लॉन्ग रेकॉइल(Long Recoil )
  • शोर्ट रेकॉइल  ?(Short Recoil  )

1.  लॉन्ग रेकॉइल क्या होता है ?(Long Recoil ka siddhant kya hota hai ):
बैरल तथा ब्रीच ब्लाक , लॉक हालत में एक बिना फायर हुए राउंड की लम्बाई से ज्यादा दुरी तय करते है ! उसे हम लॉन्ग रेकॉइल कहते है ! ऐसे हथियार की एक्यूरेसी कम , सेफ्टी अच्छी तथा रेट ऑफ़ फायर कम होता है ! जैसे लॉन्ग रेंज आर्टिलरी की गुण , ब्राउनिंग .303 आटोमेटिक राइफल !












2. शोर्ट रेकॉइल क्या होता है ?(Short Recoil ka siddhant kya hota hai )
 बैरल तथा ब्रीच ब्लाक, लॉक हालत में एक बिना फायर हुए राउंड की लम्बाई से कम दुरी तय करते है उसे हम शोर्ट रेकॉइल कहते है ! इन हथियारों में बैरल तथा ब्रीच ब्लाक का लॉक जल्दी खुलता है एक्यूरेसी अच्छी होती और अच्चा रेट ऑफ़ फायर मिलता है ! जैसे 9 mm ब्राउनिंग पिस्टल, 9 mm पिस्टल बरेटा आदि !












3. लॉन्ग और शोर्ट रेकॉइल में अंतर?(Long aur short recoil me kya anatar hai )

लॉन्ग रेकॉइल :-
  • ब्रेकच ब्लाक लॉक हालत में बिना फायर राउंड से ज्यादा दुरी तय करते है 
  • एक्यूरेसी कम होती है 
  • रेट ऑफ़ फायर कम होता है 
  • सेफ्टी अच्छी रहती है 

शोर्ट रेकॉइल :
  • ब्रेकच ब्लाक लॉक हालत में बिना फायर राउंड से कम  दुरी तय करते है 
  • एक्यूरेसी अच्छी  होती है 
  • रेट ऑफ़ फायर ठीक  होता है 
  • सेफ्टी थोड़ी कम  रहती है 
इस प्रकार से आप रेकॉइल ऑपरेशन सिद्धांत के बारेमे आप एक संक्षेप्त जानकारी प्राप्त किया उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! इस पोस्ट के बारे में कोई सुझाव और कमेंट हो तो निचे कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे !इस पोस्ट को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे और अच्छे लिखने के लिए !

इन्हें भी पढ़े :

  1. 9 mm कार्बाइन मचिन या सब मचिन गन का इतिहास और खुबिया
  2. 9mm कार्बाइन का टेक्नीकल डाटा -II
  3. 9 mm कार्बाइन मचिन का बेसिक टेक्नीकल डाटा -I
  4. 5.56 mm INSAS LMG का बेसिक डाटा और स्पेसिफिकेशन
  5. इंसास राइफल का पार्ट्स का नाम और खोलना जोड़ना
  6. इंसास राइफल के डेलाइट टेलीस्कोपिक और पैसिव साईट का डिटेल.
  7. AKM राइफल का बेसिक टेक्नीकल डाटा
  8. 7.62mm SLR के पार्ट्स का नाम और 7.62 mm SLRराइफल का चाल
  9. एंगल ऑफ़ डिपार्चर और एंगल ऑफ़ एलिवेशन क्या होता है
  10. आटोमेटिक हथियारों का चाल और सिद्धांत

27 मई 2017

डीलेड ब्लो बैक कैसे काम करता है ?

पिछले पोस्ट में हमने इंटीग्रेटेड वेपन ट्रेनिंग (IWT) चलाने का तरीका  के बारे में हमने बात किये ! इस पोस्ट में हम ब्लो डीलेड ब्लो बैक कैसे काम करता  है (Delayed Blow back kaise kaam karta hai)के बारे में जानेगे !



एक जवान को हथियार के चाल और उसके मेच्निस्म की जानकारी होनी चाहिए ताकि उस हथियार में पड़नेवाली किसी भी रोक के कारन को अच्छे से समझ सके और उसे दूर कर सके क्यों की हम जानते है की ऑपरेशन के दौरान जवान को खुद अकेले ही सभी करवाई करनी पड़ती है वह न तो अर्मोरेर होता है न ही कोई और बल्कि खुद ही उसे सभी प्रकार के रोको को दूर करके लड़ाई की लड़नी पड़ती है ! इस लिए जरुरी है की एक जवान अपने पर्सनल वेपन तथा जिस किसी भी हथियार को ओ इस्तेमाल कर रहा है उसके चाल और मैकेनिज्म के बार में जानकारी रखे !

जरुर पढ़े :7. 62 mm राइफल में पड़ने वाले रोके कौन कौन से है ? 

जैसे की हम जानते है की ब्लो बैक निम्न तीन प्रकार के होता है :
इसमें से दो के बारे में हम पिछले  पोस्ट में  जान चुके है इसe इस पोस्ट में हम केवल डिलेड ब्लो बैक के बारे में जानेगे !
डिलेड ब्लो बैक कैसे काम करता है उदाहरण के साथ :
डीलेड ब्लो बैक
डीलेड ब्लो बैक 
इस सिद्धांत के सहायता से ब्लो बैक हथियारों में भी हाई पॉवर अम्मुनिसन का 
प्रयोग किया जा सकता है और ब्रीच ब्लाक का वजन काफी कम किआ जा सकता है ! इसमें हथियारों के ब्रीच ब्लाक में कुछ अतरिक्त सामान लगाकर ब्रीच ब्लाक के पीछे आने को उस समय तक रोकते है जब तक की बुलेट बैरल को न छोड़ दे !

उदहारणतः जर्मनी की 7.62 mm जी-3 राइफल ! इसमें ब्रीच ब्लाक की उपरी तथा निचली सतह पर दो रोलर लगते है जो की ब्रीच ब्लाक के हथियार के ब्रीच के अंतिम  किनारा(Breech end) से जाकर लगने पर स्प्रिंग की ताकत से हथियार की बॉडी में बने खांचे (Recess) में जाकर फस जाते है ! राउंड फायर होने से बने गैस के पीछे ब्रीच ब्लाक तब तक रोककर रखता है , जब तक की यह स्प्रिंग लोडेड रोलर्स बॉडी के खांचो से बहार ना आ जाये ! इसी डीले के दौरान बुलेट को छोड़ देती है और मेचानिकल सेफ्टी बन जाती है !

इस प्रकार से डिलेड ब्लो बैक (Delayed Blow Back) से सम्बंधित संक्षिप्त पोस्ट समाप्त हुई ! उम्मीद है की ये पोस्ट आपको पसंद आएगा ! अगर इस पोस्ट से सम्बंधित कोई सुझाव होतो निचे के कमेंट बॉक्स में लिखे ! इस ब्लॉग सब्सक्राइब और फेसबुक पेज को लाइक कर के हमलोगों को प्रोतोसाहित करे और अच्छा पोस्ट लिखने के लिए !

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  8. 7.62mm SLR के पार्ट्स का नाम और 7.62 mm SLRराइफल का चाल
  9. 7.62 mm MMG को खोलना और जोड़ने का तरीका
  10. 7.62 mm MMG को भरना और खाली करने का तरीका
  11. 7.62 mm MMG से फायर करने का तरीका
  12. 30 mm AGL का इतिहास और बेसिक टेक्निकल डाटा
  13. 84 mm राकेट लांचर के पार्ट्स का नाम और बेसिक टेक्निकल डाटा तथा विशेषताए

23 मई 2017

एम् पी आई और एप्लीकेशन फायर क्या होता है ?

पिछले पोस्ट में हमने ग्रुपिंग फायर तथा उसके काबिलियत के बारे में बात की ! इस पोस्ट में हम एमपीआई  क्या होता है और एप्लीकेशन फायर किसे कहते(MPI aur Application fire kya hta hai) है के बारे में जानेगे !


अच्छा फायर वही है जो अलग अलग रेंज से अपनी ग्रुप की काबिलियत को कायम रखने क्लासिफिकेशन फायर के दौरान सटीक फायर कैसे करे इसकी जानकारी होनी चाहिए !

जरुर पढ़े :आटोमेटिक वेपन के गैस ऑपरेशन के सिद्धांत कैसा काम करता है

इस पोस्ट में हम निम्न  विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे :
  1. ऍम पि आई क्या होता है ?(MPI Kya hota hai?)
  2. एप्लीकेशन फायर किसे कहते है ?Application fire kise kahte hai?
  3. ग्रुप की काबिलियत  और एप्लीकेशन फायर में क्या सम्बन्ध है (Group ki kabiliyat aur application fire me kya sambandh hai )
  4. एम् पि आई मालूम करने  का तरीका  MPI Malum karne ka tarika kya hai ?
1. ऍम पि आई क्या होता है ?(MPI Kya hota hai?):MPI का फुल फॉर्म होता है  मीन पॉइंट ऑफ़ इम्पैक्ट (Mean Point of impact) ! यह वह पॉइंट होता है जो की ग्रुप के सेण्टर में होता है , ग्रुप की गोलिओ की  गिर्द छोटा  दायरा  खिंचा जाये तो इस दायरे का सेण्टर ग्रौप्का एम् पि आई  होगा !

जरुर पढ़े :आटोमेटिक हथियार के गैस को रेगुलेट करने का तरीका तथा फायदे और नुकशान

2. एप्लीकेशन फायर किसे कहते है ?Application fire kise kahte hai?:  जब एक फायरर अपने ग्रुप की काबिलियत के अन्दर रहते हुए अपने ग्रुप की एम् पि आई को टारगेट के सेण्टर में लाने के  लिए फायर करता है उसको एप्लीकेशन फायर कहते है !

3.ग्रुप की काबिलियत  और एप्लीकेशन फायर में क्या सम्बन्ध है (Group ki kabiliyat aur application fire me kya sambandh hai ):  ग्रुप की काबिलियतर एप्लीकेशन फायर का आपसहट ही गहरा सम्बन्ध है ! जिसे हर  एक फायर को समझ लेना चाहिए !! अगर उसका ग्रुप की काबिलियत 5 इंच हो तो 300e वक्त गोलिया 15 इंच के एरिया में लगनी चाहिए कुछ गोलिया बुल में लगेगी और कुछ इनर में !

बशर्ते की एम् पी आई टारगेट के सेण्टर में हो इसीलिए एप्लीकेशन फायर करते समय जल्दी यह मालूम कर लेना चाहिए की ग्रुप की एम् पी आई कहा बन रही है ! अगर एम् पी आई टारगेट के सेण्टर में न हो तो इसको सेण्टर में लेन की करवाई करनी चाहिए !

जरुर पढ़े :ब्लो बैक ओपेराटेड हथियार और उसका विशेषताए

4. एम् पि आई मालूम करने  का तरीका  MPI Malum karne ka tarika kya hai ?: फायर का अच्छा नतीजा पाने के लिए फायरर को जल्दी यह मालूम कर लेना चाहिए की उसका एम् पी आई कहा बन रही है ! ताकि जल्दीi कर कर सके !

ग्रुप कम से कम दो गोलिओ का होता है ! इसलिए दो गोलिया फायर करने के बाद ही बन्ने वाली एम् पी आई  का संभावित इलाका दिया जा सकता है !इस संभावित इलाके को मालूम करने के लिए यदि फायरर उस रेंज की (जिस से वह फायर कर रहा है )अपनी ग्रुपिंग काबिलियत से आधा से थोडा आधिक  यानि उसकी ग्रुपिंग काबिलियत 300 गज पे 15 इंच है तो 8 इंच का रेडियस मानकर दोनों  गोलिओ के लगने की जगह सेण्टर मान कर एक एक त्रिज्या खिचे तो उन दोनों त्रिज्या के बीच में जो इलाका होगा एम् पी आई का संभावित इलाका होगा ! यानि इसी इलाके में कही भी एम् पी आई बननी चाहिए !

Mean Point of Impact(MPI)
Mean Point of Impact(MPI)
उदहारण : एक फायरर जिसकी ग्रुप की काबिलियत 5 इंच है वह 300 गज से 4 x 4 टारगेट पर एप्लीकेशन फायर कर रहा है उस्सोल के अनुसार से ग्रुप 300 गज पर 15 इंच होना चाहिए ! उसकी गोली 'A' और 'B' है जो आपस में तक़रीबन 12 इंच दूर है ! फायरर के ग्रुप का आधा यानि 7 इंच रेडियस मानकर 'A' और 'B' से एक-एक अर्क खिचे ! अब बननेवाले ग्रुप की एम् पी आई का संभावित इलाका ऊपर के चित्र में  C D E F है !



जरुर पढ़े :सिंपल ब्लो बैक और ब्लो बैक विथ एपीआई क्या होता है

इस प्रकार से एम् पी आई(MPI) और एप्लीकेशन फायर से सम्बंधित एक संक्षिप्त पोस्ट समाप्त हुई उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब और फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे !
इन्हें भी पढ़े :
  1. 9 mm कार्बाइन मचिन या सब मचिन गन का इतिहास और खुबिया
  2. 9mm कार्बाइन का टेक्नीकल डाटा -II
  3. 9 mm कार्बाइन मचिन का बेसिक टेक्नीकल डाटा -I
  4. 5.56 mm INSAS LMG का बेसिक डाटा और स्पेसिफिकेशन
  5. इंसास राइफल का पार्ट्स का नाम और खोलना जोड़ना
  6. इंसास राइफल के डेलाइट टेलीस्कोपिक और पैसिव साईट का डिटेल.
  7. AKM राइफल का बेसिक टेक्नीकल डाटा
  8. 7.62mm SLR के पार्ट्स का नाम और 7.62 mm SLRराइफल का चाल
  9. एंगल ऑफ़ डिपार्चर और एंगल ऑफ़ एलिवेशन क्या होता है
  10. आटोमेटिक हथियारों का चाल और सिद्धांत

22 मई 2017

ग्रुपिंग फायर क्या होता है? ग्रुपिंग की काबिलियत किसे कहते है ?

पिछले पोस्ट में हमने ब्लो बैक विथ एपीआई के बारे में जानकारी हासिल की ! इस पोस्ट में हम आम ग्रुप के सिद्धांत के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे जिसमे जानेगे की ग्रुप  फायर क्या है


एक अच्छा फायरर  बनने के लिए आम ग्रुप के सिद्धांत जानना  और उनका प्रयोग करना बहुत ही जरुरी है ! एक फायरर को याद रखना चाहिए की की 25 या 100 गज से जीरो किया गया राइफल या एलेमजी जरुरी नहीं है की दुसरे रेंजो पर साईट  के अनुसार दुरुस्त फायर करे !

 इस लिए हर जवान को इस काबिल होना चाहिए की वह अपनी गोलिओं की मार देख कर ठीक दुरुस्ती हासिल कर सके ! यह वह तभी कर सकता है जब ओ ग्रुप के सिद्धांत को भली भाति समझता हो !

इस पोस्ट में हमन आम ग्रुप के सिद्धांत से सम्बंधित निम्न विषय को जानेगे :

ज़ेरोइंग फायर
ज़ेरोइंग फायर 
  1.  ग्रुप फायर क्या है ?(Group fire kya hai?)
  2. ग्रुप की काबिलियत (group fire ki kabailiyat kya hoti hai ?)
  3. फायर से पहले दूर करने वाले दोष (Fire karne se pahle dur karne wale kaun kaun se dosh hai?)
  4. ग्रौपों के पॉइंट देने का तरीका (Groupon ke point deene ka aam tarika kya hai?)
  5. रेंज और ग्रुप में सम्बन्ध (Range aur group me kya samabandh hai)
1.  ग्रुप फायर क्या है ?(Group fire kya hai?): जब एक फायरर एक ही रेंज और एलिवेशन से एक ही जगह पर दुरुस्त शिस्त लेकर एक से ज्यादा राउंड फायर करता है तो इस तरह गोलिओं की मार से टारगेट पर जो भी खाका बनती है उसको ग्रुप कहते है !

राइफल में यह ग्रुप 5 गोलिओ का माना  जाता है ! ग्रुप की सबसे दुरी वाली गोलिओ के बीच वाले फासले को ग्रुप का साइज़ या नाप कहते है ! जो इंचो या सेंटीमीटर में नापा जाता है !

2. ग्रुप की काबिलियत (group fire ki kabailiyat kya hoti hai ?)अगर एक फायरर चाँद दिनों के अरसे के अन्दर अलग अलग मौसमी सलातों में 100 गज रेंज से कई ग्रुप फायर करे तो इन ग्रौपों का औसत नाप उसके ग्रुप की काबिलियत होगी ! इसका मतलब यह है की वह फायरर आम हालातो में लगभग उस नाप के ग्रुप बना सकता है !

3.फायर से पहले दूर करने वाले दोष (Fire karne se pahle dur karne wale kaun kaun se dosh hai?): जब फायरर को अपने ग्रुप की काबिलियत मालूम हो जाती है तो फायर करने से पहले दूर होने वाले दोषों को निकल देना चाहिए ! दूर करने वाले दोष ये है :

(a) ज़ेरोइंग : ऊपर नीछे और दाहिने बाएं की गलती दूर करने के लिए हथियारों को जीरो किया जाता है 

(b) मौसमी हक : फायरर की जिमेवारी है की गोली फायर करने से पहले हवा और रौशनी का हक़ रखकर फायर करे !

4. ग्रौपों के पॉइंट देने का आम  तरीका (Groupon ke point deene ka aam tarika kya hai?):  ग्रौपों को नम्बर इस तरीके से दिए जाते है :

(a)   4 इंच या 10 सेंटीमीटर                                                      50 पॉइंट 
(b)  5 इंच या 12.5 सेंटीमीटर                                                    48 पॉइंट 
(c)  6 इंच या 15 सेंटीमीटर                                                       46 पॉइंट 
(d)  8 इंच या 20 सेंटीमीटर                                                       42 पॉइंट
(e)  9 इंच से 10 इंच या  22.5 सेमी से 25 सेमी                           36  पॉइंट  
(f) 11  इंच से 12 इंच या  27.5 सेमी से 30 सेमी                         30 पॉइंट  
(g) 12 इंच   या  30 सेमी से ज्यादा                                          वाश आउट 

5. रेंज और ग्रुप में सम्बन्ध (Range aur group me kya samabandh hai): अपने ग्रुप की काबिलियत मालूम करने के बाद फायरर को चाहिए  की वह यह मालूम कर के की अलग अलग रेंज में उसके ग्रुप यानि गोलिओं का फैलाव कितना रहेगा ! 

क्यों की रेंज और ग्रुप में एक बहुत ही गहरा सम्बन्ध है जैसे जैसे रेंज बढेगा उसी के अनुसार ग्रुप की साइज़ भी बढ़ते जाती है यानि अगर एक फायरर का ग्रुप का साइज़ 100 गज पर 5 इंच बनती है तो वह 300 गज पे 15 इंच बनेगी !यह बात फायरर को भली बहती जानकारी होनी चाहिए नहीं तो वह समझेगा की उसका ग्रुप ख़राब होगया जब की ग्रुप रेंज के साथ बढ़ता घटता है !

इस प्रकार से ग्रुपिंग फायर तथा ग्रुप की काबिलियत से सम्बंधित पोस्ट संपत हुई उम्मीद है की यह पोस्ट आपको पसंद आएगा ! अगर इस ब्लॉग पोस्ट के बारे में कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज को लाइक कर हमलोगों को प्रोतोसाहित करे
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20 मई 2017

ब्लो बेक विथ एपीआई कैसे काम करता है तथा उसके खतरे क्या है ?

पिछले पोस्ट में हमने सिंपल ब्लो बैक और ब्लो बैक विथ एपीआई के बारे में जानकारी प्राप्त किये ! इस पोस्ट में हम एपीआई की करवाई तथा उसके खतरे ( blow back API ki karyawahi aur uske khatre)के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे !


एक जवान को हथियार के चाल और उसके मेकनिज्म की जानकारी होनी चाहिए ताकि उस हथियार में पड़नेवाली किसी भी रोक के कारन को अच्छे से समझ सके और उसे दूर कर सके क्यों की हम जानते है की ऑपरेशन के दौरान जवान को खुद अकेले ही सभी करवाई करनी पड़ती है वहा न तो अर्मोरेर होता है न ही कोई और बल्कि खुद ही उसे सभी प्रकार के रोको को दूर करके लड़ाई की लड़नी पड़ती है ! इस लिए जरुरी है की एक जवान अपने पर्सनल वेपन तथा जिस किसी भी हथियार को ओ इस्तेमाल कर रहा है उसके चाल और मैकेनिज्म के बार में जानकारी रखे !

जरुर पढ़े :आटोमेटिक वेपन के गैस ऑपरेशन के सिद्धांत कैसा काम करता है


इस पोस्ट में हम निम्न विषय के बारेमे जानकारी प्राप्त करेंगे :

  1. एपीआई की कार्यवाही ( blow back with API ki karyawahi)
  2. एपीआई के खतरे (blow back with  API ke Khatre)
1. एपीआई की कार्यवाही ( blow back with API ki karyawahi):एपीआई की karyawahi इस प्रकार से होती है 
(a) इग्निशन की छोटी हरकत (Precise movement of Ignition): एपीआई के कारन राउंड चैम्बर में बैठने से पहले फायर हो जाता है जिसे एडवांस प्राइमर इग्निशन कहते है !राउंड पहले फायर हो जाता है या करने के लिए सही समय का जरुरत होती है ! 9 mm कार्बाइन मशीन में राउंड के चैम्बर में पूरी तरह से बैठने के 0.018 सेकंड से .028 सेकंड पहले राउंड फायर हो जाता है ! इन दो टाइमो के बीच कब फायर होगा ओ इन बातो पर निर्भर करता है !
(i) चैम्बर तथा राउंड की नाप 
(ii) चैम्बर में घर्षण चैम्बर के गन्दा होने या किसी और कारन से 

(b) ब्रीच ब्लाक कभी चैम्बर से नहीं टकराता है (Breech block kabhi chamber se nahi takarata hai):फायर से पैदा हुवा गैस पहले आते हुए ब्रीच ब्लाक को धीमा करके रोकती  है तथा बाकि गैस ब्रीच ब्लाक को पीछे धकेलती है जिस्सके कारन वास्तिविक फायर के दौरान ब्रीच  ब्लाक कभी भी चैम्बर से नहीं टकराता है! यह चैम्बर तक पहुचने से  .003 इंच पहले ही पीछे का हरकत चालू कर देता है !

इसलिए खाली कार्बाइन को बार बार कॉक कर के ट्रिगर नहीं दबाना चाहिए क्यों की खाली कार्बाइन का ब्रीच ब्लाक चैम्बर से टकराएगा और जिससे चैम्बर और ब्रीच ब्लाक को नुकशान पहुच सकता है !

2. एपीआई के खतरे (blow back with  API ke Khatre):इस सिद्धांत की सफलता प्राइमर को बिलकुल सही समय पर चलने पर निर्भर है ! यानि इगिनितिओन को पहले या बाद में चलने से इस में खतरे भी है जो की निम्न है :
(a) जल्दी फायर (Jaldi fire): चैम्बर में ज्यादा गैस फौलिंग या गंदगी होने के कारन फायरिंग पिन प्राइमर पर सही समय से पहले चोट मार दे , जिसके कारन हो सकता है की अधिकतम प्रेशर उस समय बने हो ! जबकि राउंड का कमजोर हिस्सा चैम्बर से बहार ही हो ! ऐसी हालत में ब्रस्ट केस का नुक्स हो सकता है इसलिए चैम्बर को हमेशा साफ रखना चाहिए !

(b)अधिक गंदगी के कारन फायर नहीं होना (Adhik gandgi ke karan fire nahi hona): चैम्बर अधिक गन्दा हो तो राउंड चैम्बर से उतना अन्दर नहीं जायेगा जितना जाना चाहिए जिसके कारन  फायरिंग और प्राइमर (.22) कैप की सीधी में नहीं आएगी जिस कारन फायर नहीं होगा !

(c) हैण्ड चैम्बर नहीं (Hand chamber nahi): हैण्ड चैम्बर हम उसे कहते(Hand chamber kise kahte hai) है जब हम राउंड को मगज़ीन में भरने के बजाय एक एक करके चैम्बर में डालते है और फायर करते है!ऐसा करने से एपीआई के खतरा ये रहता है की इस सिद्धांत में फायर होने के बाद गैस का कुछ भाग ब्रीच ब्लाक को आगे आने से धीमा कर रोकता है और कुछ भाग उसे पीछे की और धकेलता है!

लेकिन जब हम हैण्ड चैम्बर करते है तो ब्रीच ब्लाक को धीमा कर रोकने वाली कारवाही नहीं होती है क्यों की राउंड चैम्बर में पहले से बैठा रखा है इस लिए फायर से पैदा हुई पूरी गैस दो करवाई करने के बदले एक ही करवाई करती है यानि ब्रीच ब्लाक को पीछे की ओर धकेलती है जिसके कारन से ब्रीच ब्लाक दोगुनी रफ़्तार से पीछे की हरकत करती है हो सकता है की अधितम प्रेशर बनते समय राउंड का कमजोर हिस्सा चैम्बर से बहार आ जाये इससे ब्रस्ट केस का नुक्स पड़ता है और हथियार का बॉडी ब्लज़ होकर टूट फुट हो सकती है !

इस प्रकार से यहाँ एपीआई किस प्रकार काम करता है तथा इसके खतरे क्या क्या है उससे संभंधित एक संक्षिप्त पोस्ट समाप्त हुई ! उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब और फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित करे ! 
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  1. 9 mm कार्बाइन मचिन या सब मचिन गन का इतिहास और खुबिया
  2. 9mm कार्बाइन का टेक्नीकल डाटा -II
  3. 9 mm कार्बाइन मचिन का बेसिक टेक्नीकल डाटा -I
  4. 5.56 mm INSAS LMG का बेसिक डाटा और स्पेसिफिकेशन
  5. इंसास राइफल का पार्ट्स का नाम और खोलना जोड़ना
  6. इंसास राइफल के डेलाइट टेलीस्कोपिक और पैसिव साईट का डिटेल.
  7. AKM राइफल का बेसिक टेक्नीकल डाटा
  8. 7.62mm SLR के पार्ट्स का नाम और 7.62 mm SLRराइफल का चाल
  9. एंगल ऑफ़ डिपार्चर और एंगल ऑफ़ एलिवेशन क्या होता है
  10. आटोमेटिक हथियारों का चाल और सिद्धांत

19 मई 2017

सिंपल ब्लो बैक और ब्लो बैक विथ एपीआई क्या होता है

पिछले पोस्ट में हमने ब्लो बैक के सिद्धांत पे चलने वाले हथियार तथा उनके विशेषताओ के बारे में जाना ! इस पोस्ट में हम सिम्पल ब्लो बैक तथा ब्लो बैक विथ एपीआई(Simple blow back ttha blow back with API) के बारे में जानकारी हासिल करेंगे !


एक जवान को हथियार के चाल और उसके मेच्निस्म की जानकारी होनी चाहिए ताकि उस हथियार में पड़नेवाली किसी भी रोक के कारन को अच्छे से समझ सके और उसे दूर कर सके क्यों की हम जानते है की ऑपरेशन के दौरान जवान को खुद अकेले ही सभी करवाई करनी पड़ती है वहा न तो अर्मोरेर होता है न ही कोई और बल्कि खुद ही उसे सभी प्रकार के रोको को दूर करके लड़ाई की लड़नी पड़ती है ! इस लिए जरुरी है की एक जवान अपने पर्सनल वेपन तथा जिस किसी भी हथियार को ओ इस्तेमाल कर रहा है उसके चाल और मैकेनिज्म के बार में जानकारी रखे !

जरुर पढ़े :7. 62 mm राइफल में पड़ने वाले रोके कौन कौन से है ?

इस पोस्ट में हम निम्न विषय के बारेमे जानकारी प्राप्त करेंगे :
  1. सिम्पल ब्लो बैक क्या है (Simple blow back kya hota hai?)
  2. ब्लो बैक विथ एपीआई क्या होता है (Blow back with API kya hota hai)
1. सिम्पल ब्लो बैक क्या है (Simple blow back kya hota hai?):
Simple Blow Back
Simple Blow Back
इस सिद्धांत में फायर होने से पहले राउंड चैम्बर में ठीक से बैठा होता है और ब्रीच ब्लाक स्थिर होता है ! राउंड फायर होने के बाद भारी ब्रीच ब्लाक तथा ताकतवर रीटर्निंग स्प्रिंग के मिले जुले दवाब के कारन ब्रीच ब्लाक तब तक पीछे नहीं आता है जब तक की गोली बैरल को न छोड़ दे! और सभी विशेषताए इस पोस्ट में बताई गयी विशेषताए इन हथियारों में मेकनिकल सेफ्टी प्राप्त करने में मदद करती है ! सिंपल ब्लो बैक के सिद्धांत पे चलने वाले कुछ हथियार इस प्रकार से है :
  • 9 mm स्टेन
  • 7.65 mm स्कोर्पियन मशीन पिस्टल (चेकोस्लाविया )
  • 9 mm पिस्टल उजी (इजराइल) 

2.ब्लो बैक विथ एपीआई क्या होता है (Blow back with API kya hota hai):
Blow Back with API
Blow Back with API
ब्लो बैक विथ एपीआई(Blow Back with API)में API का फुल फॉर्म(Full form of API) होता है 
एडवांस प्राइमर इग्निशन(Advance Primer Ignition)! इस सिद्धांत से चलने  वाले हथियारों में ब्रीच ब्लाक का वज़न कम करने के लिए एडवांस प्राइमर इग्निशन सिद्धांत का प्रयोग किया जाता है !

इस सिद्धांत में राउंड के चैम्बर में पूरी तरह बैठने से पहले ही राउंड का .22 कैप (Primer cap) फिक्स टाइप फायरिंग पिन से सिद्ध में आ जाता है और फायर होजाता  है! राउंड फायर होते समय ब्रीच ब्लाक अभी आगे ही जा रहा होता है !ब्रीच ब्लोक को आगे जाने का ताकत उसके ताकतवर रीटर्निंग रॉड से प्राप्त होता है और रीटर्निंग रॉड के मज्बोती से इस हथियार में मैकेनिकल सेफ्टी बनती है ! जब की सिंपल ब्लो बेक में राउंड पूरी तरह से चैम्बर में बैठने के बाद फायर होता है !

राउंड फायर होने के बाद पैदा हुए गैस दो प्रकार के काम करती है 
  • आगे जाते हुए ब्रीच ब्लाक के चाल को धीमा करना और रोकना तथा 
  • ब्रीच ब्लाक को पीछे धकेलना 
इस प्रकार से पैदा हुई गैस की आधिताकत ब्रीच ब्लाक को पीछे धकेलने में इस्तेमाल होती है इस लिए सिंपल ब्लो बैक से चलने वाले हथियारों के मुकाबले इस सिद्धांत से चलने वाले हथियारों का ब्रीच ब्लाक का वजन आधा होता है ! इस सिद्धांत से चलने वाला हथियार है जैसे 9 mm कार्बाइन 1A/1A1!

जरुर पढ़े :9 mm कार्बाइन मचिन का बेसिक टेक्नीकल डाटा -I

इस प्रकार से यहाँ सिंपल ब्लो  ब्लाक तथा ब्लो बेक विथ एपीआई के अंतर और कैसे काम करते है के बारे में एक संक्षिप्त पोस्ट समाप्त हुई उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे और अच्छे करने के लिए !
इन्हें भी पढ़े :
  1. 9 mm कार्बाइन मचिन या सब मचिन गन का इतिहास और खुबिया
  2. 9mm कार्बाइन का टेक्नीकल डाटा -II
  3. 9 mm कार्बाइन मचिन का बेसिक टेक्नीकल डाटा -I
  4. 5.56 mm INSAS LMG का बेसिक डाटा और स्पेसिफिकेशन
  5. इंसास राइफल का पार्ट्स का नाम और खोलना जोड़ना
  6. इंसास राइफल के डेलाइट टेलीस्कोपिक और पैसिव साईट का डिटेल.
  7. AKM राइफल का बेसिक टेक्नीकल डाटा
  8. 7.62mm SLR के पार्ट्स का नाम और 7.62 mm SLRराइफल का चाल
  9. 7.62 mm MMG को खोलना और जोड़ने का तरीका
  10. 7.62 mm MMG को भरना और खाली करने का तरीका
  11. 7.62 mm MMG से फायर करने का तरीका
  12. 30 mm AGL का इतिहास और बेसिक टेक्निकल डाटा
  13. 84 mm राकेट लांचर के पार्ट्स का नाम और बेसिक टेक्निकल डाटा तथा विशेषताए

13 मई 2017

ब्लो बैक ओपेराटेड हथियार और उसका विशेषताए

पिछले पोस्ट में हमने आटोमेटिक वापोंस में गैस रेगुलेशन के तरीके के बारे में हमने बात किये ! इस पोस्ट में हम ब्लो बैक ओपेरातेड हथियार और उनकी विश्ताये क्या होती है (Blow back operated hathiyar aur unki visheshtaye)के बारे में जानेगे !


एक जवान को हथियार के चाल और उसके मेच्निस्म की जानकारी होनी चाहिए ताकि उस हथियार में पड़नेवाली किसी भी रोक के कारन को अच्छे से समझ सके और उसे दूर कर सके क्यों की हम जानते है की ऑपरेशन के दौरान जवान को खुद अकेले ही सभी करवाई करनी पड़ती है वह न तो अर्मोरेर होता है न ही कोई और बल्कि खुद ही उसे सभी प्रकार के रोको को दूर करके लड़ाई की लड़नी पड़ती है ! इस लिए जरुरी है की एक जवान अपने पर्सनल वेपन तथा जिस किसी भी हथियार को ओ इस्तेमाल कर रहा है उसके चाल और मैकेनिज्म के बार में जानकारी रखे !

इस पोस्ट में हम नींम विषयों के बारे मे जानेगे :
  1. ब्लो बैक ऑपरेशन क्या है ?(Blow back operation system kya hai?)
  2. ब्लो बैक ऑपरेशन वाले हथियारों का विशेषताए (Blow back operation wale hathiyaro ka kya visheshtaye hoti hai)
  3. ब्लो बैक ऑपरेशन के प्रकार (Blow back kitne prakar ke hote hai )
1. ब्लो बैक ऑपरेशन क्या है ?(Blow back operation system kya hai?):
साधारण ब्लो बैक ऑपरेशन
साधारण ब्लो बैक ऑपरेशन 
इस सिद्धांत  में साइकिल ऑफ़ ऑपरेशन को पूरा करने के लिए  ताकत गैस द्वारा केस के बेस पर  लागए गए दबाव के करण केस द्वारा पीछे की हरकत करने से मिलती है ! इसे स्पेंट केस प्रोजेक्शन भी कहते  है !

ब्लो बैक हथियारों में ब्रीच को लॉक नहीं करते है !राउंड फायर होने से बना गैस का दबाव केस के अन्दर चारो ओर पड़ता है ! आगे की दिशा मे पड़ने  वाला दबाव बुल्लेट को बैरल में धकेलता है और पीछे के दिशा में पड़ने वाला दबाव केस को पीछे की ओर धकेलता है ! केस के साथ ब्रीच ब्लाक लगा होने के कारन चाल वाले पुर्जे पीछे की हरकत करते है और एक्सट्रैक्शन , इजेक्शन और फीड की करवाई होती है और रीटर्न  स्प्रिंग दबता है ! दबे रीटर्न स्प्रिंग की मदद से चाल वाले पुर्जे आगे जाते है और साइकिल ऑफ़ ऑपरेशन की बाकि करवाई पूरी करते है ! इस प्रकार से ब्लो बच्क्स्यस्तेम काम करता है !

2.ब्लो बैक ऑपरेशन वाले हथियारों का विशेषताए (Blow back operation wale hathiyaro ka kya visheshtaye hoti hai): ब्लो बैक वाले हथियारों में मैकेनिकल सेफ्टी प्राप्त करने के लिए  निम्नलिखित विशेषताए होती है !
  • भरी ब्रीच ब्लाक का होना !
  • ताकतवर री टर्निंग  स्प्रिंग 
  • कम लम्बाई के बैरल 
  • समनांतर चैम्बर तथा कात्रिगे केस 
  • काम पॉवर के अमुनिसन यदि 
3.ब्लो बैक ऑपरेशन के प्रकार (Blow back kitne prakar ke hote hai ): ब्लो बेक हथियार तीन भागो में बटा जा सकता  है!
  • साधारण ब्लो बेक (Simple blow back)
  • ब्लो बेक विथ एपीआई(Blow Back with API)
  • डिलेड ब्लो बेक (Delayed Blow Back)

इस प्रकार से ब्लो बैक क्या होता है और उसकी  विशेषताए के बारे में पोस्ट समाप्त हुई ! उम्मीद है की यद् पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! 

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इन्हें भी पढ़े :
  1. 9 mm कार्बाइन मचिन या सब मचिन गन का इतिहास और खुबिया
  2. 9mm कार्बाइन का टेक्नीकल डाटा -II
  3. 9 mm कार्बाइन मचिन का बेसिक टेक्नीकल डाटा -I
  4. 5.56 mm INSAS LMG का बेसिक डाटा और स्पेसिफिकेशन
  5. इंसास राइफल का पार्ट्स का नाम और खोलना जोड़ना
  6. इंसास राइफल के डेलाइट टेलीस्कोपिक और पैसिव साईट का डिटेल.
  7. AKM राइफल का बेसिक टेक्नीकल डाटा
  8. 7.62mm SLR के पार्ट्स का नाम और 7.62 mm SLRराइफल का चाल
  9. AKM का चाल और उसका पार्ट्स का नाम
  10. हरकती टारगेट पर पॉइंट ऑफ़ एम सेट करना !

10 मई 2017

आटोमेटिक हथियार के गैस को रेगुलेट करने का तरीका तथा फायदे और नुकशान

पिछले पोस्ट में हमने जाना की आटोमेटिक वेपन के गैस ऑपरेशन के सिस्टम कैसे काम करता है ! इस पोस्ट में हम जानेगे की गैस ऑपरेशन वाले हथियारों के फायदे और नुकशान क्या है(automatic hathiyaro me gas operation ka tarika, fayda aur nukshan) !


एक जवान को हथियार के चाल और उसके मेच्निस्म की जानकारी होनी चाहिए ताकि उस हथियार में पड़नेवाली किसी भी रोक के कारन को अच्छे से समझ सके और उसे दूर कर सके क्यों की हम जानते है की ऑपरेशन के दौरान जवान को खुद अकेले ही सभी करवाई करनी पड़ती है वह न तो अर्मोरेर होता है न ही कोई और बल्कि खुद ही उसे सभी प्रकार के रोको को दूर करके लड़ाई की लड़नी पड़ती है ! इस लिए जरुरी है की एक जवान अपने पर्सनल वेपन तथा जिस किसी भी हथियार को ओ इस्तेमाल कर रहा है उसके चाल और मैकेनिज्म के बार में जानकारी रखे !

इस पोस्ट में हम निम्न विषयों के बारे में जानेगे :
  1. आटोमेटिक हथियारों में गैस को कण्ट्रोल करने के तरीके क्या है ?(Automatic weapon me gas control karne ke tarike kya hai)
  2. गैस ओपेराटेड हथियार के फायदे (Gas operated weapon ke fayte kya hai )
  3. गैस ओपेराटेड हथियार के नुकशान (Gas operated weapon ke nukshan kya hai)
1. आटोमेटिक हथियारों में गैस को कण्ट्रोल करने के तरीके क्या है ?(Automatic weapon me gas control karne ke tarike kya hai):गैस कण्ट्रोल हथियारों में गैस कण्ट्रोल करने के निम्न तरीके है :

(a) एग्जॉस्ट तो अटोमोसफेयर(Exhaust to autmosphere ka tarika) :
Exhaust to atmosphere system
Exhaust to atmosphere system
इस तरीके में बैरल से गैस वेंट द्वारा सिलिंडर में ली गई गैस की मात्रा सामान रहती  है !लेकिन इससे पहले की गैस पिस्टन हेड पर दबाव डाल सके गैस की कुछ मात्रा गैस एस्केप होल से वातावरण में चली जाती है और बची हुई गैस पिस्टन हेड पर दाबाव  डालकर चाल वाले पुर्चे को पीछे की हरकत कराती है !

गैस एस्केप होल कितना खुला होगा यह रेगुलेटर की सेटिंग पर निर्भर करता है ! जैसे की 7.62 mm
एसएलआर तथा 5.56 mm इंसास राइफल  एवं एलेमजी  सिलिंडर में गैस किम मात्रा बढ़ाने के लिए गैस एस्केप होल को बंद किया जाता है !

जरुर पढ़े :51mm मोर्टार को खोलना जोड़ना और उसके पार्ट्स के नाम

(b) वेरिएबल गैस ट्रैक(Veriable gas track ka tarika) :
Variable Gas Track System
Variable Gas Track System
इस तरीके  में गैस द्वारा गैस वेंट से ली गयी गैस की मात्रा सामान नहीं होती है क्यों की रेगुलातो में अलग अलग साइज़ के 4 गैस ट्रैक(रास्ते) होते है ! बड़े साइज़ का गैस वेंट से अधिक मात्रा में गैस सिलिंडर में दाखिल करता है जिससे पिस्टन हेड पर अधिक दबाव पड़ता है ! अगर छोटे साइज़ के गैस ट्रैक , गैस वेंट के सामने होगा तो अपेक्षाकृत कास गैस सिलिंडर में दाखिल होगी ! जैसे 7.62 mm एलेमजी

जरुर पढ़े : स्मोक और इल्लू बम का चाल और बेसिक डाटा

(c) कांस्टेंट वॉल्यूम (Constant volume ka tarika):
Constant Volume Regulator
Constant Volume Regulator
इसमें कोई गैस रेगुलेटर नहीं होता और गैस वेंट से आने वाली पूरी गैस सिलिंडर में आकर पिस्टन हेड पर दबाव डालती है ! यानि सिलिंडर में आने वाली गैस की मात्र इस तरीके से अपरिवर्तित रहती है! जसे की 7.62 mm AKM राइफल !








2. गैस ओपेराटेड हथियार के फायदे (Gas operated weapon ke fayte kya hai ): गैस ओपेरातेड हथियारों के कुछ निम्नलिखित फायदे है !
  • गैस रेगुलेटर की सेटिंग  बदली करके हथियार का फायरिंग रेट बदली कर सकते है 
  • यह हथियार आम तौर पर वजन में हलके होते है !
  • इन हथियारों से अधिक रेट प्राप्त किया जा सकता है 
  • अधिक एक्यूरेट है 
  • हथियार को ऑपरेट करने के लिए काफी एनर्जी उपलब्ध है ! जिसे गैस रेगुलेटर की मदद से सही रम में इस्तेमाल कर सकते है !

3. गैस ओपेराटेड हथियार के नुकशान (Gas operated weapon ke nukshan kya hai):  गैस ओपेराटेड हथियार के कुछ एक  नुकशान निम्न है :
  • ब्रीच की ओर से निकलने वाले धुएं के करने फायरर को परेशानी होती है !अतः बंद स्थानों जैसे टैंक या अर्मौरेड पर्सनल काररीएर के अन्दर से फायर करने में असुविधा होता है !
  • ग्राम गैस पिस्टन वेंट आदि में एरोजन करती है !
  • रुकवाटे ज्यादा पड़ती है !आदि 

इस प्रकार से गैस से चलने वाले आटोमेटिक हथियारों के फायदे और नुकशान से सम्बंधित यह संक्षिप्त पोस्ट समाप्त हुई ! उम्मीद है की यद् पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! 

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  1. स्मोक और इल्लू बम का चाल और बेसिक डाटा
  2. 2" मोर्टार का परिचय,और खुबिया तथा इसकी खामिया
  3. 51 mm मोर्टार छोटी छोटी बाते
  4. 51 mm मोर्टार डिटैचमेंट का काम, बनावट और फायर कण्ट्रोल करने का तरीका
  5. 51 mm मोर्टार के भरना और खली करने का तरीका तथा बम को तैयार करना
  6. 51 mm मोर्टार का ले और फायर तथा मिस फायर पे करवाई
  7. 7.62 mm MMG के प्रकार तथा टेक्निकल डाटा 7.62 mm MMG के ?
  8. 7.62 mm MMG को खोलना और जोड़ने का तरीका
  9. 7.62 mm MMG को भरना और खाली करने का तरीका

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