Thursday, July 13, 2017

राष्ट्रपति चुनाव और सदस्यों के वोट की वैल्यू का गणना

पिछले पोस्ट में हमने  ब्लॉग सब सेक्शन के अंतर्गत यह जाना की एस एम् एस के वर पान नम्बर और आधार नम्बर को कैसे लिंक कर सकते है ! और इस पोस्ट में हम जानेगे की भारत के राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है !



यह एक अच्छा समय है जब हम इस टॉपिक के ऊपर लिख रहे है क्यों की अभी राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है और राष्ट्रपति इलेक्शन का वोट 17 जुलाई को है !

ऐसे पुलिस ट्रेनिंग के दौरान इन जैसे टॉपिक पे लेक्चर उस समय होता है जब ट्रेनीज को पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के विषय में बताया जा रहा होता है उस दौरान चुनाव की प्रकिया और उनके शक्तियों के बारे में बताया जाता है !
इस विषय के अच्छी तरह  से समझने के लिए इस हमने तीन भागो में बनता है :
राष्ट्रपति भवन 

  1. भारत के राष्ट्रपति का चुनाव किस विधि से होता है और कौन कौन वोट करता है ?(Bharat ke president ka chunaw kisi vidhi se hota hai)
  2. राष्ट्रपति का चुनाव कौन लड़ सकता है (Rashtrapati chunaw ladne ke lie yogyta
  3. राज्यों के विधानसभा सदस्यों के वोट वैल्यू का निर्धारण कैसे किया जाता है(Bharat ke rashtrapati ke chunaw me rajyo vishan sabha sadsyo ke vot ka value ka nirdhran ki tarah se ki jati hai ) 
  4. राष्ट्रपति चुनाव में भारत के सांसदों का वोट वैल्यू का निर्धारण कैसे होता है ?: (Bharat ke rashtrapati ke chunaw me sansad sadsyo ke vot ka value ka nirdhran ki tarah se ki jati hai ) 
1. भारत के राष्ट्रपति का चुनाव किस विधि से होता है और कौन कौन वोट करता है ?(Bharat ke president ka chunaw kisi vidhi se hota hai):जैसे की हम सभी जानते है की भारतीय राष्ट्रपति की नियुक्ति एक निर्वाचन द्वारा होती है किन्तु इसकी निर्वाचन पद्धति संसार के दुसरे देशो से अलग है ! फ्रांस और अमेरिका के राष्ट्रपति के तरह ही भारत के राष्ट्रपति का चुनाव भ परोक्ष वोटिंग से होता है !

फ्रांस के राष्ट्रपति का चुनाव वहा  के संसद के द्वारा तथा अमेरिका के राष्ट्र पति का चुनाव वह के निर्वाचन मंडल के द्वारा होता है जिसके सभी सदस्य राज्यों के जनता द्वारा निर्वाचित होते है ! लेकिन भारत का राष्ट्र पति का चुनाव एक विशेष ढंग से होता है , इसका एक मात्र कारन यह है की कोई अयोग्य या अल्पमत प्राप्त व्यक्ति इस महत्वपूर्ण पद  पर आसीन न हो जाये !

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संबिधान के आर्टिकल 54 में साफ साफ दिया हुवा  है की कौन कौन प्रेसिडेंट इलेक्शन में वोट कर सकता है और उसी के अनुसार भारत के राष्ट्रपति का चुनाव भारत के संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों तथा देश के सभी राज्यों के विधान मंडल के निर्वाचित सदस्यों के बनाये गए निर्वाचन मंडल द्वरा अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के द्वारा गुप्त मतदान से होता है  ! राष्ट्रपति के चुनाव में मनोनीत सदस्यों को भाग लेने का अधिकार नहीं होता है !अतः इस पद्धति के द्वारा राष्ट्रपति के निर्वाचन में एकता रखने की व्यवस्था की गई है !

यदि उनका निर्वाचन प्रत्यक्ष रीती से होता तो उसमे और मंत्रिमंडल में संघर्ष होते रहता क्यों की दोनों को यह कहने का मौका मिल जाता की दोनों ही जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होक आये है ! फिर इससे तरह तरह उत्पन्न हो जाते इसलिए राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से होता है !

भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन में भिन्न भिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व एक पैमाने से होता है जिससे राज्यों और संघ में समतुल्यता बनी रहती है ! इसी वजह से निर्वाचक मंडल के हर एक सदस्य के मत का सामान्य मूल्य नहीं होता है !

हर एक सदस्यों के मतों की संख्या जितनी जनसँख्या का वह प्रतिनिधित्व करता है उसी के अनुपात में निश्चित की जाती है !


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2. राष्ट्रपति का चुनाव कौन लड़ सकता है (Rashtrapati chunaw ladne ke lie yogyta):
  • वह भारत का नागरिक हो 
  • जिसकी उम्र 35 साल से ऊपर हो 
  • 50 MP/MLA जो की नॉमिनेटेड न हो उसका समर्थन प्राप्त हो 
  • भारत सरकार या किसी राज्य के अन्दर किसी लाभ का पद न हो 
  • 15000 सिक्यूरिटी अमाउंट RBI में जमा किया हो 
3. राज्यों के विधानसभा सदस्यों के वोट वैल्यू का निर्धारण कैसे किया जाता है(Bharat ke rashtrapati ke chunaw me rajyo vishan sabha sadsyo ke vot ka value ka nirdhran ki tarah se ki jati hai ) :
बिधान के आर्टिकल 55  में साफ साफ दिया हुवा है इसलिए राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचन मंडल के सदस्य किस प्रकार और कितने मत देंगे उसके लिए निम्नलिखित दो सूत्र आपनाये जाते है !

(a) भारत के संसद के सदस्य और राज्यों के विधान सभाओ के सदस्यों की कुल संख्या मिलकर जितने वोट देने का अधिकार  हो उनकी संख्या एक होनी चाहिए क्यों की संघ की पार्लियामेंट के सदस्यों की संख्या विधान सभा के सदस्यों की संख्या से कम है ! इसलिए निर्वाचन मंडल के सदस्यों द्वारा दिए जानेवाले वोटो के लिए संविधान के निर्माताओ ने एक ऐसी व्यवस्था स्थापित की जिसके द्वारा जिसके द्वारा दोनो तरह के वोटो का पूर्ण जोड़ सामान हो !
उदहारण तः जैसे पार्लियामेंट के सदस्यों की संख्या 800 है और राज्यों के विधान सभा के सदस्यों की संख्या 2000 है तो विधान सभाओ के 2000 सदस्यों मेसे हर एक को 8 वोट देने का और पारलिया मेंट के हर सदस्यों को 20 वोट देने का अधिकार प्राप्त होगा ! इसके अनुसार दोनों प्रकार के सदस्यों की कुल वोटो का संख्या 1600 होगी !

(b) भारतीय संघ में मिले हुए राज्यों की जनसख्या और उनकी विधान सभाओ के सदस्यों की संख्या बराबर नहीं है और न इन दोनों का महत्व ही पूर्णतः एक सामान है  इसलिए संविधान के निर्माताओ इस बात पर ध्यान न देकर की हर राज्य को एक प्रकार का अधिकार प्राप्त हो , निम्नलिखित व्यवस्था अपनाइ:

राज्य की कुल जनसख्या को राज्यों के विधान सभाओ के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या से भाग देने पर जो भाग निकले उसको 1000 से भाग दे दिया जाय और उसके उपरांत जो भागफल निकले उतने ही मत राज्य विधान सभाओ के सदस्यों को प्राप्त होंगे !

उदहारण के लिए : राज्य के विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या मानले 300 , और जनसँख्या 3 करोड़ है तो गाड़ना इस प्रकार से की जाएगी ! गाड़ना करते समय ये ध्यान रखना पड़ता है की अगर भाग देने के बाद शेष 500 से कम हो तो भागफ ही एक सदस्य का वोट का वैल्यू होगा अगर शेषफल 500 से ज्यादा हो तो भागफल में 1 और जोड़ दिया जायेगा और वह एक सदस्य का वोट का वैल्यू होगा !

30,00,000/300  x 1/1000 = 100

इस हालत में हर एक सदस्य की वोट वैल्यू  100 होगा अगर मान ले की जनसख्या 40225947 और सदस्यों की संख्या 330 हो तो ऐसे हालत में

40225947/330  x 1/1000 = 121 + 1

चुकी यहाँ शेषफल 500 से ज्यादा बच जाता है इस लिए इसमें 1 जोड़ दिया जायेगा और इस प्रकार से प्रत्येक सदस्य का वोट वैल्यू 122 होगा !

इस समय उत्तर प्रदेश के एक विधान सभा सदी की वोट वैल्यू 208 और गोवा के सदस्य का केवल 8 है जोकि क्रमशः सबसे ज्यादा और सबसे कम है !

4. राष्ट्रपति चुनाव में भारत के सांसदों का वोट वैल्यू का निर्धारण कैसे होता है ?(Bharat ke rashtrapati ke chunaw me sansad sadsyo ke vot ka value ka nirdhran ki tarah se ki jati hai ) भारत की संसद के हर एक सदस्यों के वोट वैल्यू का निर्धारण निम्न विधि द्वारा की जाती है !

भारत संघ में मिले हुए सभी राज्यों की विधान सभा के निर्वाचित सद्यो के मतों के जोड़ को भारत की संसद के निर्वाचित सदस्यों की संख्या से भाग देने पर जो भागफल निकले वही  मत वैल्यू होता है एक संसद सदस्य के वोट का !


यदि देश के सभी विधान सभाओ के सदस्यों का कुल वोट वैल्यू 80,00,000 और पुरे राज्यों  के विधान सभा के सद्यो का कुल संख्या 1500 है तो एक संसद के वोट की वैल्यू इस प्रकार से होगा

80 00 000 /1500 = 533

यानि एक संसद सदी की वोट का वैल्यू 533 होगा !
एक्चुअल में आज भारत के एक संसद की वोट वैल्यू 708 है 

और इन वोटो का निर्धारण सन 1971 के जन गणना के अनुसार है !
इस प्रकार से राष्ट्रपति के इलेक्शन की विधि से  सम्बंधित पोस्ट समाप्त हुवा ! उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! अगर ब्लॉग या पोस्ट से सम्बंधित कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग को 
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