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Wednesday, May 31, 2017

एम् एम् एस (SMS) के द्वारा अपने आधार और पान नम्बर को कैसे लिंक करे

आज हम जिस विषय के बारे में जानकारी शेयर करेंगे ओ है की मोबाइल फ़ोन यानि एस एम् एस (SMS) कर के अपना आधार कार्ड नम्बर को अपने पान कार्ड के साथ कैसे लिंक करे(Mobile ya SMS ke dwara AADHAR number aur PAN nmber ko kaise link kare ) ?


जैसे की आप पिछले कई महीनो से टीवी और न्यूज़ पेपर में ये पढ़ते होंगे की  अपना आधारकार्ड नम्बर को अपने पान कार्ड से लिंक करें नहीं तो आपका पान कार्ड वैध्य नहीं रहेगा ! उसी श्रृखला को आगे बढ़ाते हुए आयकर बिभाग ने आज एक विज्ञापन निकला है आधार और पान को लिंक करने के बारे में !
वैसे तो पहले इसको लिंक करने के लिए आपको ऑनलाइन यानि इन्टरनेट के थ्रू अपने ऑनलाइन अकाउंट के जरिये लिंक करने की व्वस्था दी  गई थी और इन्टरनेट द्वारा आधार नम्बर को पान कार्ड से कैसे लिंक(online Aadhar aur PAN Card ko link kare) करे इसके बारे में हमने एक पोस्ट भी लिखा था और उसको हमारे बहुत से रीडर्स ने पढ़ा और लाभ उठाया !

पान कार्ड (प्रतीकात्मक )
लेकिन आयकर विभाग ने अपने आयकरदाताओ   की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उस आधार नम्बर को पान से लिंक करने के लिए मोबाइल एस एम् एस के द्वारा भी सुविधा प्रदान की है !

देश के प्रमुख समाचार पत्रों में दिए गए अपने विज्ञापन में भारतीय आयकर विभाग  ने ये बताया है की आप पाने आधार नम्बर  को पान के साथ कैसे लिंक कर सकते है!
आयकर विभाग के द्वारा बतायेगाये तरीके के अनुसार आप अपने मोबाइल से एस एम् एस कर के आप आधार को लिंक करने के लिए  कैपिटल लैटर में यूआईडीपीएएन लिख कर एक ली स्थान छोड़े फायर अपनी आधार नम्र लिखे और एक खली स्थान छोड़े उसके बाद अपना पान नम्बर लिख करके 567678 या 56161 पे एस एम् एस कर दे और आप का आधार और पान नम्बर लिंक हो जायेगा !

UIDPAN  आधार नम्बर   पान नम्बर  को 567678 या 56161 पर भेज दे 

इसके आलावा आप ऑनलाइन जाके अपने अकाउंट के जरिये भी इन दोनों नम्बर को लिंक कर सकते है ! विज्ञापन में बताया गया है की निर्बाध्य रूप से इनकम टैक्स से जुडी जानकारी ऑनलाइन प्राप्त करने के लिए इन दोनों नम्बरों को जरुर लिंक करे!

वैसे  इन दोनों नम्बरों को लिंक करने के लिए नया  पान नम्बर लेते समय फॉर्म के अन्दर ही लिख देने से भी हो जायेगा या पान कार्ड रीप्रिंटिंग  वाले चेंज  रिक्वेस्ट फॉर्म में भी आधार नम्बर देने से ये दोनों नम्बर आपस में लिंक हो जायेंगे !
इस प्रकार से यहाँ आधार नम्बर और पान कार्ड को एस एम् एस के द्वारा कैसे लिंक करे से सम्बंधित पोस्ट समाप्त हुई ! यह एक छोटा पोस्ट था उम्मीद है की पोअस्त जरुर पसंद आएगा ! अगर कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज लाइक कर के हमलोगों को और अच्छा करने के लिए प्रोतोसाहित करे !


इसे भी पढ़े :


  1. स्मोक और इल्लू बम का चाल और बेसिक डाटा
  2. 2" मोर्टार का परिचय,और खुबिया तथा इसकी खामिया
  3. 51 mm मोर्टार छोटी छोटी बाते
  4. 51 mm मोर्टार डिटैचमेंट का काम, बनावट और फायर कण्ट्रोल करने का तरीका
  5. 51 mm मोर्टार के भरना और खली करने का तरीका तथा बम को तैयार करना
  6. 51 mm मोर्टार का ले और फायर तथा मिस फायर पे करवाई
  7. 7.62 mm MMG के प्रकार तथा टेक्निकल डाटा 7.62 mm MMG के ?
  8. 7.62 mm MMG को खोलना और जोड़ने का तरीका
  9. 7.62 mm MMG को भरना और खाली करने का तरीका

फील्ड फोर्टीफीकेसन में इस्तेमाल होने वाले फौजी टेकटिकल शब्दों का क्या मतलब

पिछले पोस्ट में हमने वेपन ट्रेनिंग कैसे चलाया जाता है उसके कुछ तरीको के बारे में बात किये इस पोस्ट में हम फील्ड फोर्टीफीकेसन में इस्तेमाल होने वाले तथा कुछ और फौजी टेकटिकल शब्दों का क्या मतलब होता है तथा उसका  इस्तेमाल के बारे में जानेगे !

फौजी टेक्टिकल शब्दों हम बहुत बार आर्म्ड फ़ोर्स के सीनियर ऑफिसर के ब्रीफिंग अक्सर सुना करते है उन शब्दों का मतलब काया होता उसी के बारे में हम यहाँ जानेगे !

 जरुर पढ़े : पेट्रोलिंग और नाईट पेट्रोलिंग और उसके टास्क और नफरी

इस पोस्ट में हम निम्नलिखित शब्दों का मतलब जानेगे :

  1. फील्ड फोर्टीफिकेसन क्या होता है ?(filed fortification kya hota hai?)
  2. फायर ट्रेंच क्या होता है ?(Fire trench kya hota hai)
  3. वेपन पिट क्या होता है ?(Weapon pit kya hota hai)
  4. शेल्टर ट्रेंच क्या होता है ?(Shelter trench kya hota hai)
  5. स्लिट ट्रेंच क्या होता है ?(Slit trench kya hota hai)
  6. घेरा क्या होता है ?(Ghera/envolpment kya hota hai)
  7. एस्केप और इन्भेन्सं क्या होता है ?(Escape and envasion kya hota hai)
  8. फॉर्म बेस क्या है ?(Form base kya hai?)
1. फील्ड फोर्टीफिकेसन क्या होता है ?(filed fortification kya hota hai?): जमीन पर मोर्चे खोदने या खुदाई नही की जा सके तो दुसरे किस्म के मोर्चे बनाने को हम फील्ड फोर्टीफिकेसन कहते है 

2. फायर ट्रेंच क्या होता है ?(Fire trench kya hota hai): जमीन की सतह से निचे खोदा हुवा वह मोर्चा जहा से एक या  एक से ज्यादा जवान अपने जातीय हथियार और एलेमजी का कारगर फायर डाल सकते है !

3.वेपन पिट क्या होता है ?(Weapon pit kya hota hai): जमीन सतह से निचे खोदा हुवा वह मोर्चा जहा से एलेमजी , जातीय हथियारों के अलावा दुसरे हथियारों से भी फायर किया जाता है जैसे , मोर्टार पिट, एलेमजी पिट यदि !




4. शेल्टर ट्रेंच क्या होता है ?(Shelter trench kya hota hai): ऐसा मोर्चा जिसमे छुपने से स्प्लिन्टर , हवा में फटने वाला बम या नजदीक गिरे हुए बम से बचाव हो सकता हो !

5.  स्लिट ट्रेंच क्या होता है ?(Slit trench kya hota hai): जमीन की सतह से निचे खोदा हुवा मोर्चा जहा पर थोड़ी दे रुकने के दौरान हवाई हमले से बचाव मिल सकता है ! जब फायर ट्रेंच खोदने की जरुरत नही है तब स्लिट ट्रेंच बनाया जायेगा ( जैसे हार्बर )

6. घेरा क्या होता है ?(Ghera/envolpment kya hota hai): घेरा एक वह हमले का तरीका है जिसमे बड़ा हमला पीछे से शत्रु के विथ्द्र्वल और सप्लाई का रास्ता काटने के लिए किया जाता है जबकि सामने से भी उसे रोके रखने के लिए छोटा हमला किआ जाता है और इसप्रकार घेर लिया जाता है !

7. एस्केप और इन्भेन्सं क्या होता है ?(Escape and envasion kya hota hai): वह करवाई जिसमे अपनी फ़ौज के आदमी या चुने हुए लोग, कैद होने पर अपना  के इलाके जिन पर दुश्मन ने कब्ज़ा कर लिया हो से भाग कर  अपने इलाके में आ जाते है , जिन पर किसी का भी कब्ज़ा नहीं हो ! साथ ही रस्ते में पकडे जाने से बचाव भी हो !




8. फॉर्म बेस क्या है ?(Form base kya hai?): ऐसी टेक्टिकल अहमियत वाली जमीन जिस पर अपनी फौजों का कब्ज़ा होने से कमांडर की तजबीज अच्छी तरह से अमल में ली ज सके ! 

इस प्रकार से यहाँ फिलेद फोर्टी फिकेशन में इस्तेमाल होने वाले कुछ फौजी टेक्टिकल शब्दों  के  अर्थ (Fauji tactical shabdo ka arth) से सम्बंधित एक संक्षिप्त पोस्ट समाप्त हुई ! उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! इस पोस्ट से सम्बंधित कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को  प्रोतोसाहित करे !


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  1. टेक्टिकल वर्ड्स और उसका मतलब हिंदी में -II
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  5. पेट्रोलिंग पार्टी को ब्रीफिंग देने का तरीका ?
  6. अम्बुश का परिभाषा और अम्बुश की पार्टिया
  7. अम्बुश  की पार्टियो को ब्रीफिंग देने के तरीका
  8. फायर कण्ट्रोल आर्डर और फायर डिसिप्लिन क्या है ?
  9. सेक्शन बैटल ड्रिल और उसे सफल बनाने वाली बातें
  10. 4 बाते शत्रु के कारगर फायर के अंदर आने पे करनी चाहिए

Monday, May 29, 2017

हथियारों की ट्रेनिंग देने का बेसिक पुराना तरीका

पिछले पोस्ट में हमने इंटीग्रेटेड वेपन ट्रेनिंग के बारे में जानकारी प्राप्त कर चुके है ! इस पोस्ट में हम बेसिक वेपन ट्रेनिगं चलने के बारे में जानकरी प्राप्त करेंगे !


जैसे की हम जानते है की आर्म्ड फ़ोर्स के जवानों को हथियार की सिखाली देने का मात्र उद्देश्य यह है की जवान लड़ाई या किसी ऑपरेशन के दौरान शत्रु पर फ़तेह हासिल कर सके तथा शांति के दौरान जहा कही भी ड्यूटी कर रहा हो वाहां सही तरह से ड्यूटी करे और रक्षा करने पे पूरी तरह से काबिल हो ! ऐसे कहावत है की हथियार ही टैक्टिस को बदलते है !

जरुर पढ़े : 7.62mm SLR के पार्ट्स का नाम और 7.62 mm SLRराइफल का चाल

इस लिए यह बहुत जरुरी है की हम जवानों व ओहेदार को ऊँचे दर्जे की सिखाई दे ताकि वह लड़ाई के मैदान में हथियारों का तेजी व दुरुस्ती से इस्तेमाल कर सके !

इस पोस्ट के दौरान हम निम्न बातो के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे !

  1. ट्रेनीज का वर्गीकरण (Trainees ka classification)
  2. सही तरह के ट्रेनिंग न देने का नुकशान  (Sahi tarah ka training nahi dene ka nukshan)
  3. ट्रेनिंग देने का बेसिक पुराना तरीका (Training dene ka basic old tarika)
  4. ट्रेनिंग देने का बेसिक पुराना तरीका का फायदा (Basic old tarike ka fayda)
1.ट्रेनीज का वर्गीकरण (Trainees ka classification): फ़ोर्स में ट्रेनिंग पाने वालो का अगर वर्गीकरण करे तो मोटे तौर पर तीन हिस्सों में बाटा जा सकता है 
  • रेक्रुइट्स इसमें सीधी भारती वाले अधिकारी भी सामिल है 
  • यंग सोल्जर वह अधिकारी व जवान जो अपनी बेसिक ट्रेनिंग के बाद एक या डेढ़ साल की सर्विस कर लिए हो 
  • ट्रेन्ड सोल्जर या ओहेदेदार व जवान जिनकी सेर्चिए की अवधि 5 या 6 साल की होती है 
जरुर पढ़ेहरकती टारगेट पर पॉइंट ऑफ़ एम सेट करना !

2. सही तरह के ट्रेनिंग न देने का नुकशान  (Sahi tarah ka training nahi dene ka nukshan)जिस तरीके से रिक्रूट को सिखलाई दी जाती है उस प्रकार यंग सोल्जर को भी दिलाई जाए तो इसके चाँद नुकसान हो सकते है !
  • एक ही तरह की सिखलाई से उदासीनता आ जाएगी और वह दिलचस्पी नहीं लेंगे 
  • समय ज्यादा बर्बाद होगा 
इन दोनों को दूर करने के लिए हथियार की सिखलाई ट्रेनिंग को चलने के लिए अलग अलग तरीके बताये गए है ! कमांडर को चाहिए की अपने ट्रेनिंग ऐड ट्रेनर की संख्या और ट्रेनीज के स्तर देखकर मुनासिब तरीके चुने ! जिससे हथियार की ट्रेनिंग का अंतिम उद्देश्य एक गोली एक दुशमन प्राप्त किआ जा सके !

3. ट्रेनिंग देने का बेसिक पुराना तरीका (Training dene ka basic old tarika)
(a) सिखलाई पाने वालो की किस्मे 
  • रिक्रूट
  • रेक्रुइतो के नए ट्रेनर 
  • कठिन सब्दो को पढने के लिए जैसे राइफल /एलेमजी की चाल 
  • कोई नया हथियार फ़ोर्स में आये हो तो उसकी भी सिखलाई बेसिक पुराने तरीके से दी जाए !

(b) चलाने  का ढंग 
  • शुरु शुरू की करवाई : क्लास की गिनती ग्रौपो की बाँट , हथियार का मुलाहिजा 
  • दोहराई : सबक के साथ संम्बंध रखने वाले विषयों पर ली जाए 
  • उद्देश्य : दोहराई जाये 
  • सामान : सबक में इस्तेमाल होने वाला सामान 
  • ब्यान  : सबक के बारे में एक छोटा सा बयां 
  • तरतीब : सबक के बारे में एक छोटा सा बयाँ 
  • संक्षेप्त : मोटे तौर पर सवाल जवाब से किया जाये 
(c) प्रदर्शन : इसका मोटे प्रदर्शन किसी भी हह्तियर का सबक चलाकर दिखा दिया जाये 

4. ट्रेनिंग देने का बेसिक पुराना तरीका का फायदा (Basic old tarike ka fayda)
  • कोई चीज छुट नहीं पाती  है 
  • सबक दर्जा व चलता है 
  • मुस्किल सबक चालना आसन है 

इस प्रकार से हथियारों की ट्रेनिंग देने का बेसिक पुराना तरीका से सम्बंधित संक्षिप्त पोस्ट समाप्त हुई उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब और फेसबुक पेज लाइक करके हमलोगों को और प्रोतोसाहित  करे  !
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  1. स्मोक और इल्लू बम का चाल और बेसिक डाटा
  2. 2" मोर्टार का परिचय,और खुबिया तथा इसकी खामिया
  3. 51 mm मोर्टार छोटी छोटी बाते
  4. 51 mm मोर्टार डिटैचमेंट का काम, बनावट और फायर कण्ट्रोल करने का तरीका
  5. 51 mm मोर्टार के भरना और खली करने का तरीका तथा बम को तैयार करना
  6. 51 mm मोर्टार का ले और फायर तथा मिस फायर पे करवाई
  7. 7.62 mm MMG के प्रकार तथा टेक्निकल डाटा 7.62 mm MMG के ?
  8. 7.62 mm MMG को खोलना और जोड़ने का तरीका
  9. 7.62 mm MMG को भरना और खाली करने का तरीका  

Sunday, May 28, 2017

रेकॉइल ऑपरेशन के सिद्धांत तथा लॉन्ग रेकॉइल और शोर्ट रेकॉइल क्या होता है ?

पिछले कुछ पोस्टो में हमने ब्लो बैक सिद्धांत  के बारे में बाते किये जिसमे लास्ट पोस्ट डिलेड ब्लो बैक के सिद्धांत के  बारे में था! इस पोस्ट में हम रेकॉइल ऑपरेशन के सिद्धांत(Recoil Operation ke siddhant) के बारे में जानेगे !


हम अपने स्कूली शिक्षा के दौरान न्यूटन के गति के नियम में जरुर पढ़ा है जिसमे न्यूटन का तीसरा नियम कहता  है की "प्रत्येक क्रिया की विपरीत दिशा में बराबर की प्रतिक्रिया होता है " उसी की तरह  राइफल से  राउंड  आगे की दिशा में तेजी  गति करती है , जसकी सामान प्रतिक्रिया ब्रीच ब्लाक फेस पर आता  है !

ब्रीच ब्लाक गुण बॉडी में लॉक होता है अतः यह प्रतिक्रिया हथियार को स्थान्तरित होकर हथियार पीछे की हरकत करता है जिसे रेकॉइल कहते है ! यह फायरर को कंधे पर महसूस होता है !

जरुर पढ़े : डीलेड ब्लो बैक कैसे काम करता है ?

रेकॉइल ऑपरेशन में साइकिल ऑफ़ ऑपरेशन को पूरा करने के लिए उर्जा , बुलेट के आगे की दिशा में प्राप्त संवेग के प्रतिक्रिया स्वरुप बैरल तथा ब्रीच ब्लाक के पीछे की दिशा में गति करने से मिलती है !

इस पोस्ट के में हम निम्न विषयों के बारे में जानेगे :
  1. लॉन्ग रेकॉइल क्या होता है ?(Long Recoil ka siddhant kya hota hai )
  2. शोर्ट रेकॉइल क्या होता है ?(Short Recoil ka siddhant kya hota hai )
  3. लॉन्ग और शोर्ट रेकॉइल में अंतर ?(Long ttha short recoil me kya natar hai )
रेकॉइल ऑपरेशन के सिद्दांत में बैरल को आगे-पीछे की हरकत करने के लिए मुक्त(Free float) रखा जाता है  और ब्रीच ब्लाक को बैरल के साथ लॉक करते है ताकि मेकानिकल सेफ्टी प्राप्त हो सके ! बैरल तथा ब्रीच ब्लाक का लॉक बैरल में सेफ प्रेशर बन्ने के बाद खोल जाता है और बैरल अपनी स्प्रिंग के मदद से अपनी पूर्वे स्थिति में
आ जाती है ! 

पीछे जाता ब्रीच ब्लाक साइकिल ऑफ़ ऑपरेशन की तमाम क्रियाएँ पूर्ण कर वापस आगे आता है और नया राउंड चैम्बर में लोड करके फिर बैरल के साथ लॉक होकर हथियार को फायर के लिए तैयार करता है ! 
रेकॉइल ऑपरेशन दो प्रकार की होती है 
  •  लॉन्ग रेकॉइल(Long Recoil )
  • शोर्ट रेकॉइल  ?(Short Recoil  )

1.  लॉन्ग रेकॉइल क्या होता है ?(Long Recoil ka siddhant kya hota hai ):
बैरल तथा ब्रीच ब्लाक , लॉक हालत में एक बिना फायर हुए राउंड की लम्बाई से ज्यादा दुरी तय करते है ! उसे हम लॉन्ग रेकॉइल कहते है ! ऐसे हथियार की एक्यूरेसी कम , सेफ्टी अच्छी तथा रेट ऑफ़ फायर कम होता है ! जैसे लॉन्ग रेंज आर्टिलरी की गुण , ब्राउनिंग .303 आटोमेटिक राइफल !












2. शोर्ट रेकॉइल क्या होता है ?(Short Recoil ka siddhant kya hota hai )
 बैरल तथा ब्रीच ब्लाक, लॉक हालत में एक बिना फायर हुए राउंड की लम्बाई से कम दुरी तय करते है उसे हम शोर्ट रेकॉइल कहते है ! इन हथियारों में बैरल तथा ब्रीच ब्लाक का लॉक जल्दी खुलता है एक्यूरेसी अच्छी होती और अच्चा रेट ऑफ़ फायर मिलता है ! जैसे 9 mm ब्राउनिंग पिस्टल, 9 mm पिस्टल बरेटा आदि !












3. लॉन्ग और शोर्ट रेकॉइल में अंतर?(Long aur short recoil me kya anatar hai )

लॉन्ग रेकॉइल :-
  • ब्रेकच ब्लाक लॉक हालत में बिना फायर राउंड से ज्यादा दुरी तय करते है 
  • एक्यूरेसी कम होती है 
  • रेट ऑफ़ फायर कम होता है 
  • सेफ्टी अच्छी रहती है 

शोर्ट रेकॉइल :
  • ब्रेकच ब्लाक लॉक हालत में बिना फायर राउंड से कम  दुरी तय करते है 
  • एक्यूरेसी अच्छी  होती है 
  • रेट ऑफ़ फायर ठीक  होता है 
  • सेफ्टी थोड़ी कम  रहती है 
इस प्रकार से आप रेकॉइल ऑपरेशन सिद्धांत के बारेमे आप एक संक्षेप्त जानकारी प्राप्त किया उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! इस पोस्ट के बारे में कोई सुझाव और कमेंट हो तो निचे कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे !इस पोस्ट को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे और अच्छे लिखने के लिए !

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  2. 9mm कार्बाइन का टेक्नीकल डाटा -II
  3. 9 mm कार्बाइन मचिन का बेसिक टेक्नीकल डाटा -I
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  5. इंसास राइफल का पार्ट्स का नाम और खोलना जोड़ना
  6. इंसास राइफल के डेलाइट टेलीस्कोपिक और पैसिव साईट का डिटेल.
  7. AKM राइफल का बेसिक टेक्नीकल डाटा
  8. 7.62mm SLR के पार्ट्स का नाम और 7.62 mm SLRराइफल का चाल
  9. एंगल ऑफ़ डिपार्चर और एंगल ऑफ़ एलिवेशन क्या होता है
  10. आटोमेटिक हथियारों का चाल और सिद्धांत

Saturday, May 27, 2017

डीलेड ब्लो बैक कैसे काम करता है ?

पिछले पोस्ट में हमने इंटीग्रेटेड वेपन ट्रेनिंग (IWT) चलाने का तरीका  के बारे में हमने बात किये ! इस पोस्ट में हम ब्लो डीलेड ब्लो बैक कैसे काम करता  है (Delayed Blow back kaise kaam karta hai)के बारे में जानेगे !



एक जवान को हथियार के चाल और उसके मेच्निस्म की जानकारी होनी चाहिए ताकि उस हथियार में पड़नेवाली किसी भी रोक के कारन को अच्छे से समझ सके और उसे दूर कर सके क्यों की हम जानते है की ऑपरेशन के दौरान जवान को खुद अकेले ही सभी करवाई करनी पड़ती है वह न तो अर्मोरेर होता है न ही कोई और बल्कि खुद ही उसे सभी प्रकार के रोको को दूर करके लड़ाई की लड़नी पड़ती है ! इस लिए जरुरी है की एक जवान अपने पर्सनल वेपन तथा जिस किसी भी हथियार को ओ इस्तेमाल कर रहा है उसके चाल और मैकेनिज्म के बार में जानकारी रखे !

जरुर पढ़े :7. 62 mm राइफल में पड़ने वाले रोके कौन कौन से है ? 

जैसे की हम जानते है की ब्लो बैक निम्न तीन प्रकार के होता है :
इसमें से दो के बारे में हम पिछले  पोस्ट में  जान चुके है इसe इस पोस्ट में हम केवल डिलेड ब्लो बैक के बारे में जानेगे !
डिलेड ब्लो बैक कैसे काम करता है उदाहरण के साथ :
डीलेड ब्लो बैक
डीलेड ब्लो बैक 
इस सिद्धांत के सहायता से ब्लो बैक हथियारों में भी हाई पॉवर अम्मुनिसन का 
प्रयोग किया जा सकता है और ब्रीच ब्लाक का वजन काफी कम किआ जा सकता है ! इसमें हथियारों के ब्रीच ब्लाक में कुछ अतरिक्त सामान लगाकर ब्रीच ब्लाक के पीछे आने को उस समय तक रोकते है जब तक की बुलेट बैरल को न छोड़ दे !

उदहारणतः जर्मनी की 7.62 mm जी-3 राइफल ! इसमें ब्रीच ब्लाक की उपरी तथा निचली सतह पर दो रोलर लगते है जो की ब्रीच ब्लाक के हथियार के ब्रीच के अंतिम  किनारा(Breech end) से जाकर लगने पर स्प्रिंग की ताकत से हथियार की बॉडी में बने खांचे (Recess) में जाकर फस जाते है ! राउंड फायर होने से बने गैस के पीछे ब्रीच ब्लाक तब तक रोककर रखता है , जब तक की यह स्प्रिंग लोडेड रोलर्स बॉडी के खांचो से बहार ना आ जाये ! इसी डीले के दौरान बुलेट को छोड़ देती है और मेचानिकल सेफ्टी बन जाती है !

इस प्रकार से डिलेड ब्लो बैक (Delayed Blow Back) से सम्बंधित संक्षिप्त पोस्ट समाप्त हुई ! उम्मीद है की ये पोस्ट आपको पसंद आएगा ! अगर इस पोस्ट से सम्बंधित कोई सुझाव होतो निचे के कमेंट बॉक्स में लिखे ! इस ब्लॉग सब्सक्राइब और फेसबुक पेज को लाइक कर के हमलोगों को प्रोतोसाहित करे और अच्छा पोस्ट लिखने के लिए !

इन्हें भी पढ़े :
  1. 9 mm कार्बाइन मचिन या सब मचिन गन का इतिहास और खुबिया
  2. 9mm कार्बाइन का टेक्नीकल डाटा -II
  3. 9 mm कार्बाइन मचिन का बेसिक टेक्नीकल डाटा -I
  4. 5.56 mm INSAS LMG का बेसिक डाटा और स्पेसिफिकेशन
  5. इंसास राइफल का पार्ट्स का नाम और खोलना जोड़ना
  6. इंसास राइफल के डेलाइट टेलीस्कोपिक और पैसिव साईट का डिटेल.
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  10. 7.62 mm MMG को भरना और खाली करने का तरीका
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Wednesday, May 24, 2017

इंटीग्रेटेड वेपन ट्रेनिंग (IWT) चलाने का तरीका

पिछले पोस्ट में हमने एम् पी आई और एप्लीकेशन फायर के बारे में जानकारी हासिल की! इस पोस्ट में हम  आई डब्लू  टी (IWT- Integrated Weapon Training) लेसन चलने के तरीका !


आज काल के समय में कोई भी ऑपरेशन बहुत ही कठिन इलाके में हथियारों की तेजी और दुरुस्ती से फायर करने की काबिलियत पर ही उसकी सफलता निर्भर करती है ! इस लिए किसी भ वेपन ट्रेनिंग का मुख्या उद्देश्य यह होता है की जवानों को हथियार चलने में इस काबिल माहिर कर दिया जाय की वह हथियार को इस्तेमाल कर के दुश्मन को बर्बाद कर सके !

जरुर पढ़े :सिंपल ब्लो बैक और ब्लो बैक विथ एपीआई क्या होता है

ज्यादातर आर्म्ड फ़ोर्स के जवानों को बेसिक ट्रेनिंग के दौरान PWT(Progressive Weapon Training) के तरीका से ट्रेनिंग दिया जाता है जिसमे पूरी ट्रेनिंग एक ट्रेनिंग एरिया में ही समाप्त हो जाती है और जवान को रियल ऑपरेशन अवस्था से आवगत नहीं हो पता है !

इसी कमी को दूर करने तथा अपने जवानों को ऑपरेशन टाइप माहौल में कैसे काम किया जाता है का ट्रेनिंग देने के लिए IWT इंटीग्रेटेड वेपन ट्रेनिंग  का तरीका अपनाया गया है ! जिस में हथियार , टैक्टिस और फील्ड क्राफ्ट को एक साथ  सामिल किया जाता है! जिससे जवान को रियल ऑपरेशन का हालत महसूस हो !

इस पोस्ट के दौरन इन विषयों के बारे में  जानकारी प्राप्त करेंगे :
  1. IWT लेसन का उद्देश्य (IWT Lesson ka uddeshy)
  2. IWT लेसन चलाने  के लिए  जरुरी बातें  (IWT Lesson chalane ke lie jaruri bate)
  3. IWT लेसन का विवरण (IWT lesson ka details)
  4. IWT लेसन चलने का तरतीब (IWT Lesson chalane ka sequence)
  5. IWT लेसन को कामयाब बनाने वाली बाते (IWT Lesson ko kamyab banane wali bate)

1. IWT लेसन का उद्देश्य (IWT Lesson ka uddeshy): IWT का उद्देश्य है की हर जवान एक रियल टाइम ऑपरेशनल एरिया का माहौल देकर, उसको इस काबिल बनाया जाय  की वह टारगेट को पहचान सके, दुरुस्त फायरिंग पोजीशन का चुनाव कर सके,, फासले का सही अनुमान लगाये ,और हथियारों का सही इस्तेमाल करते, हुए तेज़ी और दुरुस्ती से दुश्मन को बर्बाद कर सके 

2. IWT लेसन चलाने  के लिए  जरुरी बातें  (IWT Lesson chalane ke lie jaruri bate): IWT लेसन चलाने के लिए कुछ मुख्य बाते इस प्रकार से है :

(a)इलाके का चुनाव और तैयारी: ट्रेनिंग के दौरान जिस टेक्टिकल हलत को बताना है उसके मुताबिक इलाके का चुनाव जरुरी है ! जैसे अगर  डिफेन्स का लेसन चलाना है तो डिफेन्स के सामने का इलाका खुला होना चाहिए ताकि अन्दर की हरकत का फायर आदि दिखाया जा सके !इलाके के चुनाव के बाद उसे लेसन  के अनुसार तैयार किया जाए जैसे ट्रेंच आदि खोदना है तो खोद लिया जाए ! वायर ओब्सटक्ल डमी माइन फील्डभी  लगाया जा सकता है !

जरुर पढ़े :आटोमेटिक हथियार के गैस को रेगुलेट करने का तरीका तथा फायदे और नुकशान

(b) दुश्मन की तैयारी: दुश्मन को टारगेट या डेमो ट्रूप्स की मदद से ज़ाहिर किया जा सकता है और दुश्मन ब्लांक राउंड , बिकोत स्ट्रिप , 90 ग्रेनेड आदि से फायर जाहिर कर सकता है !

(c) क्लास के जवानों की तैयारी: IWT लेसन ट्रेंड जवान को दिया जाता है ! इसलिए जवानों को फील्ड क्राफ्ट और टैक्टिस और हथियारों के बेसिक सिखलाई का अच्छा ज्ञान हो !

(d) अन्य सामान की तैयारी: सबक के उद्देश्य  को पूरा करने के लिए जो भी ट्रेनिंग एड्स जैसे ब्लांक राउंड, ड्रिल कार्ट्रिज, हथियार का सामान आदि का पहले से ही बंदोबस्त  कर लेना चाहिए ताकि सबक के दौरान रुकावट पेश न आये !

3. IWT लेसन का विवरण (IWT lesson ka details): IWT ट्रेनिंग के दौरान एक उच्चे दर्जे की ट्रेनिंग देने के लिए बनाया गया है ! इसे जवान को ऑपरेशन की हालत पेश करते हुए ज़मीं का दुरुस्त इस्तेमाल, टारगेट की पहचान, फासले का अनुमान और फील्ड क्राफ्ट की सभी सिखलाई शामिल हुए हथियारों की हैंडलिंग में अभ्यास दिया जाता है ! इसे लेसन  में जवान को बहुत ज्यादा दिलचस्पी होती है , क्योंकि यह अपनी काबिलियत और गलती का नतीजा उसी समाय ज़मीन र देख लेता है !

जरुर पढ़े :आटोमेटिक वेपन के गैस ऑपरेशन के सिद्धांत कैसा काम करता है

4. IWT लेसन चलने का तरतीब (IWT Lesson chalane ka sequence): क्लास को IWT लेसन चलने का तरतीब इस प्रकार से होता है ! इसके लिए क्लास के सामने पहले से मुकरर किए हुए ट्रूप्स (डेमो ट्रूप्स )
 जांचा जाता है और प्रदर्शन उस्ताद निम्न कारवाही प्रदर्शन क्लास के साथ करता है !

(a) शुरू शुरू का काम (3 मिनट ): इसमें निरक्षण , गिनती ग्रौपों की बाँट बंदोबस्ती करवाई की जाती है ! समय को बचने के लिए कामोफ्लाज और कांसिल्मेंट पहले से ही दे दिया जाता है !

(b) उद्देश्य (2 मिनट ): साफ़ छोटा होता है और उद्देश्य को दोहराया जाता है और हैंडलिंग में और भी ज्यादा अभ्यास देना है शब्द  जोड़ा जाता है !उद्देश्य के बाद सुरक्षा के लिए हिदायतों और किन बातो पर जोर दिया जायेगा यह भी बताया जाता है और उस्ताद के असेसमेंट के जो पॉइंट है उनके बारे में भी बताया जाता है

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(c)ऑपरेशन की हालत (2 मिनट): मुकरर हालत पेश किया जाता है यह असान  , सरल और जरुरत के अनुसार होना चाहिए ज्यादा लम्बा चौड़ा नहीं होना चाहिए !

(d) याद दिलाओ (5 मिनट) : सबक के दौरान होने वाली करवाई के ऊपर चाँद सवाल पूछकर क्लास को याद दिलाया जाता है ! उस्ताद को लेसन के लिए एक ही तरह के सवाल नहीं पूछना चाहिए !

(e) करवाई का अभ्यास (23 मिनट) : क्लास को मुनासिब जगह पर ले जाया जाता  है और लेसन में प्रयोग में आने वाले इलाके की हद बंधता  है और अभ्यास शुरू करता है ! साथ साथ दुश्मन (डेमो ट्रूप्स अपनी कारवाही शुरू करते है ) उस्ताद पूरी करवाई पर नगरानी करता है ! जरुरी बातो पर जोर देता है , गलती पकड़ता है गलती दूर करता है और मूल्यांकन करता है ! इसी दौरान कभी कभी उस्ताद क्लास के जवानों को भी सुपरभीजन करने के लिए नियुक्त करता है !

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(f) संक्षेप्त (4 मिनट): संक्षेप्त में क्लास के साथ अच्छे और कमजोर पॉइंट पर वाद विवाद और जवानों के मूल्यांकन का नतीजा उनको बताता है ! जवानों को पहले अपनी गलती खुद बोलने का मौका देता है इसके बाद उनकी गलती बताता है !

5.IWT लेसन को कामयाब बनाने वाली बाते (IWT Lesson ko kamyab banane wali bate): IWT ट्रेनिंग को कामयाब बनाने वाली कुछ बाते निम्न है:

(a) वास्तविकता का ध्यान रखा जाए , लेसन वास्तविक होना चाहिए जिसके लिए जरुरी है की उस्ताद और क्लास को दुश्मन , टैक्टिस , हथियार का रेंज और लड़ाई की हालातो से पूरा वाकिफ होना चाहिए !

(b) दुश्मन और स्टाफ की ब्रीफिंग : दुशमन और निरिक्षण स्टाफ डिटेल में ब्रीफ होना चाहिए जिससे की लेसन के दौरान कोई त्रुटी न रह जाये !

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(c) तैयारी: सबक के हर एक पहलु की विस्तार में तैयारी होना जरुरी है !

(d) तरतीब : सबक सदा दुरुस्त तरतीब से ही चलाया जाना चाहिए !

(e) साफ़ और छोटा होना चाहिए : उद्देश्य सदा साफ़ और छोटा होना चाहिए

(f) आसन लड़ाई की हालत : लड़ाई की हालत आसन और क्लास के मुताबिक होना चाहिए !

(g) गलती पकड़ना : पुरे सबक के दौरान गलती को पकड़ने और दूर करने में ज्यादा जोर दिया जाए ! अगर जवान फिर भी गलत करवाई करे तो उस्ताद नमूना दे !

(h) सबक पर वाद विवाद : संक्षेप्त के दौरान उस्ताद क्लास से खुद की गलती कहलायेगा , इससे हर जवान अपनी गलती महसूस करेगा और वह गलती को जल्दी से दूर करेगा !

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IWT लेसन से जवानों की लड़ाई की हालत से अच्छी वाकफियत और उसमे कारवाही  करने का अच्छा अभ्यास मिलता है !

IWT लेसन की सफलता , बहुत कुछ इस सबक के तैयारी पर निर्भर करता है ! लड़ाई की हालत में काम करने से दिलचस्पी बढती है और सिखलाई का स्तर भी उच्चा होता है !

इस प्रकार से  इंटीग्रेटेड  वेपन ट्रेनिंग (IWT) से सम्बंधित संक्षिप्त पोस्ट समाप्त हुई ! उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब  और फेसबुक पेज को लाइक  करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे !
इन्हें भी पढ़े :
  1. 9 mm कार्बाइन मचिन या सब मचिन गन का इतिहास और खुबिया
  2. 9mm कार्बाइन का टेक्नीकल डाटा -II
  3. 9 mm कार्बाइन मचिन का बेसिक टेक्नीकल डाटा -I
  4. 5.56 mm INSAS LMG का बेसिक डाटा और स्पेसिफिकेशन
  5. इंसास राइफल का पार्ट्स का नाम और खोलना जोड़ना
  6. इंसास राइफल के डेलाइट टेलीस्कोपिक और पैसिव साईट का डिटेल.
  7. AKM राइफल का बेसिक टेक्नीकल डाटा
  8. 7.62mm SLR के पार्ट्स का नाम और 7.62 mm SLRराइफल का चाल
  9. एंगल ऑफ़ डिपार्चर और एंगल ऑफ़ एलिवेशन क्या होता है
  10. आटोमेटिक हथियारों का चाल और सिद्धांत

Tuesday, May 23, 2017

एम् पी आई और एप्लीकेशन फायर क्या होता है ?

पिछले पोस्ट में हमने ग्रुपिंग फायर तथा उसके काबिलियत के बारे में बात की ! इस पोस्ट में हम एमपीआई  क्या होता है और एप्लीकेशन फायर किसे कहते(MPI aur Application fire kya hta hai) है के बारे में जानेगे !


अच्छा फायर वही है जो अलग अलग रेंज से अपनी ग्रुप की काबिलियत को कायम रखने क्लासिफिकेशन फायर के दौरान सटीक फायर कैसे करे इसकी जानकारी होनी चाहिए !

जरुर पढ़े :आटोमेटिक वेपन के गैस ऑपरेशन के सिद्धांत कैसा काम करता है

इस पोस्ट में हम निम्न  विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे :
  1. ऍम पि आई क्या होता है ?(MPI Kya hota hai?)
  2. एप्लीकेशन फायर किसे कहते है ?Application fire kise kahte hai?
  3. ग्रुप की काबिलियत  और एप्लीकेशन फायर में क्या सम्बन्ध है (Group ki kabiliyat aur application fire me kya sambandh hai )
  4. एम् पि आई मालूम करने  का तरीका  MPI Malum karne ka tarika kya hai ?
1. ऍम पि आई क्या होता है ?(MPI Kya hota hai?):MPI का फुल फॉर्म होता है  मीन पॉइंट ऑफ़ इम्पैक्ट (Mean Point of impact) ! यह वह पॉइंट होता है जो की ग्रुप के सेण्टर में होता है , ग्रुप की गोलिओ की  गिर्द छोटा  दायरा  खिंचा जाये तो इस दायरे का सेण्टर ग्रौप्का एम् पि आई  होगा !

जरुर पढ़े :आटोमेटिक हथियार के गैस को रेगुलेट करने का तरीका तथा फायदे और नुकशान

2. एप्लीकेशन फायर किसे कहते है ?Application fire kise kahte hai?:  जब एक फायरर अपने ग्रुप की काबिलियत के अन्दर रहते हुए अपने ग्रुप की एम् पि आई को टारगेट के सेण्टर में लाने के  लिए फायर करता है उसको एप्लीकेशन फायर कहते है !

3.ग्रुप की काबिलियत  और एप्लीकेशन फायर में क्या सम्बन्ध है (Group ki kabiliyat aur application fire me kya sambandh hai ):  ग्रुप की काबिलियतर एप्लीकेशन फायर का आपसहट ही गहरा सम्बन्ध है ! जिसे हर  एक फायर को समझ लेना चाहिए !! अगर उसका ग्रुप की काबिलियत 5 इंच हो तो 300e वक्त गोलिया 15 इंच के एरिया में लगनी चाहिए कुछ गोलिया बुल में लगेगी और कुछ इनर में !

बशर्ते की एम् पी आई टारगेट के सेण्टर में हो इसीलिए एप्लीकेशन फायर करते समय जल्दी यह मालूम कर लेना चाहिए की ग्रुप की एम् पी आई कहा बन रही है ! अगर एम् पी आई टारगेट के सेण्टर में न हो तो इसको सेण्टर में लेन की करवाई करनी चाहिए !

जरुर पढ़े :ब्लो बैक ओपेराटेड हथियार और उसका विशेषताए

4. एम् पि आई मालूम करने  का तरीका  MPI Malum karne ka tarika kya hai ?: फायर का अच्छा नतीजा पाने के लिए फायरर को जल्दी यह मालूम कर लेना चाहिए की उसका एम् पी आई कहा बन रही है ! ताकि जल्दीi कर कर सके !

ग्रुप कम से कम दो गोलिओ का होता है ! इसलिए दो गोलिया फायर करने के बाद ही बन्ने वाली एम् पी आई  का संभावित इलाका दिया जा सकता है !इस संभावित इलाके को मालूम करने के लिए यदि फायरर उस रेंज की (जिस से वह फायर कर रहा है )अपनी ग्रुपिंग काबिलियत से आधा से थोडा आधिक  यानि उसकी ग्रुपिंग काबिलियत 300 गज पे 15 इंच है तो 8 इंच का रेडियस मानकर दोनों  गोलिओ के लगने की जगह सेण्टर मान कर एक एक त्रिज्या खिचे तो उन दोनों त्रिज्या के बीच में जो इलाका होगा एम् पी आई का संभावित इलाका होगा ! यानि इसी इलाके में कही भी एम् पी आई बननी चाहिए !

Mean Point of Impact(MPI)
Mean Point of Impact(MPI)
उदहारण : एक फायरर जिसकी ग्रुप की काबिलियत 5 इंच है वह 300 गज से 4 x 4 टारगेट पर एप्लीकेशन फायर कर रहा है उस्सोल के अनुसार से ग्रुप 300 गज पर 15 इंच होना चाहिए ! उसकी गोली 'A' और 'B' है जो आपस में तक़रीबन 12 इंच दूर है ! फायरर के ग्रुप का आधा यानि 7 इंच रेडियस मानकर 'A' और 'B' से एक-एक अर्क खिचे ! अब बननेवाले ग्रुप की एम् पी आई का संभावित इलाका ऊपर के चित्र में  C D E F है !



जरुर पढ़े :सिंपल ब्लो बैक और ब्लो बैक विथ एपीआई क्या होता है

इस प्रकार से एम् पी आई(MPI) और एप्लीकेशन फायर से सम्बंधित एक संक्षिप्त पोस्ट समाप्त हुई उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब और फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे !
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  2. 9mm कार्बाइन का टेक्नीकल डाटा -II
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  5. इंसास राइफल का पार्ट्स का नाम और खोलना जोड़ना
  6. इंसास राइफल के डेलाइट टेलीस्कोपिक और पैसिव साईट का डिटेल.
  7. AKM राइफल का बेसिक टेक्नीकल डाटा
  8. 7.62mm SLR के पार्ट्स का नाम और 7.62 mm SLRराइफल का चाल
  9. एंगल ऑफ़ डिपार्चर और एंगल ऑफ़ एलिवेशन क्या होता है
  10. आटोमेटिक हथियारों का चाल और सिद्धांत

Monday, May 22, 2017

ग्रुपिंग फायर क्या होता है? ग्रुपिंग की काबिलियत किसे कहते है ?

पिछले पोस्ट में हमने ब्लो बैक विथ एपीआई के बारे में जानकारी हासिल की ! इस पोस्ट में हम आम ग्रुप के सिद्धांत के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे जिसमे जानेगे की ग्रुप  फायर क्या है


एक अच्छा फायरर  बनने के लिए आम ग्रुप के सिद्धांत जानना  और उनका प्रयोग करना बहुत ही जरुरी है ! एक फायरर को याद रखना चाहिए की की 25 या 100 गज से जीरो किया गया राइफल या एलेमजी जरुरी नहीं है की दुसरे रेंजो पर साईट  के अनुसार दुरुस्त फायर करे !

 इस लिए हर जवान को इस काबिल होना चाहिए की वह अपनी गोलिओं की मार देख कर ठीक दुरुस्ती हासिल कर सके ! यह वह तभी कर सकता है जब ओ ग्रुप के सिद्धांत को भली भाति समझता हो !

इस पोस्ट में हमन आम ग्रुप के सिद्धांत से सम्बंधित निम्न विषय को जानेगे :

ज़ेरोइंग फायर
ज़ेरोइंग फायर 
  1.  ग्रुप फायर क्या है ?(Group fire kya hai?)
  2. ग्रुप की काबिलियत (group fire ki kabailiyat kya hoti hai ?)
  3. फायर से पहले दूर करने वाले दोष (Fire karne se pahle dur karne wale kaun kaun se dosh hai?)
  4. ग्रौपों के पॉइंट देने का तरीका (Groupon ke point deene ka aam tarika kya hai?)
  5. रेंज और ग्रुप में सम्बन्ध (Range aur group me kya samabandh hai)
1.  ग्रुप फायर क्या है ?(Group fire kya hai?): जब एक फायरर एक ही रेंज और एलिवेशन से एक ही जगह पर दुरुस्त शिस्त लेकर एक से ज्यादा राउंड फायर करता है तो इस तरह गोलिओं की मार से टारगेट पर जो भी खाका बनती है उसको ग्रुप कहते है !

राइफल में यह ग्रुप 5 गोलिओ का माना  जाता है ! ग्रुप की सबसे दुरी वाली गोलिओ के बीच वाले फासले को ग्रुप का साइज़ या नाप कहते है ! जो इंचो या सेंटीमीटर में नापा जाता है !

2. ग्रुप की काबिलियत (group fire ki kabailiyat kya hoti hai ?)अगर एक फायरर चाँद दिनों के अरसे के अन्दर अलग अलग मौसमी सलातों में 100 गज रेंज से कई ग्रुप फायर करे तो इन ग्रौपों का औसत नाप उसके ग्रुप की काबिलियत होगी ! इसका मतलब यह है की वह फायरर आम हालातो में लगभग उस नाप के ग्रुप बना सकता है !

3.फायर से पहले दूर करने वाले दोष (Fire karne se pahle dur karne wale kaun kaun se dosh hai?): जब फायरर को अपने ग्रुप की काबिलियत मालूम हो जाती है तो फायर करने से पहले दूर होने वाले दोषों को निकल देना चाहिए ! दूर करने वाले दोष ये है :

(a) ज़ेरोइंग : ऊपर नीछे और दाहिने बाएं की गलती दूर करने के लिए हथियारों को जीरो किया जाता है 

(b) मौसमी हक : फायरर की जिमेवारी है की गोली फायर करने से पहले हवा और रौशनी का हक़ रखकर फायर करे !

4. ग्रौपों के पॉइंट देने का आम  तरीका (Groupon ke point deene ka aam tarika kya hai?):  ग्रौपों को नम्बर इस तरीके से दिए जाते है :

(a)   4 इंच या 10 सेंटीमीटर                                                      50 पॉइंट 
(b)  5 इंच या 12.5 सेंटीमीटर                                                    48 पॉइंट 
(c)  6 इंच या 15 सेंटीमीटर                                                       46 पॉइंट 
(d)  8 इंच या 20 सेंटीमीटर                                                       42 पॉइंट
(e)  9 इंच से 10 इंच या  22.5 सेमी से 25 सेमी                           36  पॉइंट  
(f) 11  इंच से 12 इंच या  27.5 सेमी से 30 सेमी                         30 पॉइंट  
(g) 12 इंच   या  30 सेमी से ज्यादा                                          वाश आउट 

5. रेंज और ग्रुप में सम्बन्ध (Range aur group me kya samabandh hai): अपने ग्रुप की काबिलियत मालूम करने के बाद फायरर को चाहिए  की वह यह मालूम कर के की अलग अलग रेंज में उसके ग्रुप यानि गोलिओं का फैलाव कितना रहेगा ! 

क्यों की रेंज और ग्रुप में एक बहुत ही गहरा सम्बन्ध है जैसे जैसे रेंज बढेगा उसी के अनुसार ग्रुप की साइज़ भी बढ़ते जाती है यानि अगर एक फायरर का ग्रुप का साइज़ 100 गज पर 5 इंच बनती है तो वह 300 गज पे 15 इंच बनेगी !यह बात फायरर को भली बहती जानकारी होनी चाहिए नहीं तो वह समझेगा की उसका ग्रुप ख़राब होगया जब की ग्रुप रेंज के साथ बढ़ता घटता है !

इस प्रकार से ग्रुपिंग फायर तथा ग्रुप की काबिलियत से सम्बंधित पोस्ट संपत हुई उम्मीद है की यह पोस्ट आपको पसंद आएगा ! अगर इस ब्लॉग पोस्ट के बारे में कोई सुझाव हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे ! इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज को लाइक कर हमलोगों को प्रोतोसाहित करे
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  2. 9mm कार्बाइन का टेक्नीकल डाटा -II
  3. 9 mm कार्बाइन मचिन का बेसिक टेक्नीकल डाटा -I
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