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Friday, April 1, 2016

भारतीय पुलिस ऐसी क्यों है ?

जब किसी जन साधारण से पूछा जाता है की आप पुलिस की छवि  में बारे में क्या सोचते है ! आप के नजर में  भारतीय पुलिस की क्या छवि है और क्या होनी चाहिए ! ज्यादातर का कहना रहता है की सबसे बुरा महकमा अगर कोई है तो ओ पुलिस  है !

आज आम जनता की सोच है   की भारत में बेहतर खलनायक बनाने के लिए राजनीतिज्ञ और पुलिस वालो में घोर प्रतिस्पर्धा है ! किसी साल राजनेता जीत जाते है तो किसी साल पुलिस महकमा !

पर ऐसे क्यों है ! कभी तो कहा जाता है की पुलिसवाले ओवर बर्डन  ओ दिन में औसत 12-14 घटे ड्यूटी करती है उनको सही से रहने का मकान और आराम करने का समय नहीं मिलता है ! किसी भी इमरजेंसी सिचुएशन में ओ सबसे पहले आती है ! और इन सब बातो पर लोग एकमत भी है की पुलिस वाले बहुत ड्यूटी करते और बुरे हालत में है फिर भी जनता  पुलिस वालो को खलनायक क्यों समझती है !

 जनता पुलिस की इतना मेहनत करने के बाद ऐसा क्यों सोचती है!पुलिस की छवि आम जनता के बीच इतनी ख़राब क्यों है  ये सोच का विषय अभी से नहीं है! पुलिस की छवि भारत को आजादी के पहले से ख़राब है और इसके सुधार  करने के लिए समय समय समय पे  हो हल्ला होते रहता  है !

पुलिस कोम्पेनडियम में एक सर्वे छपा है जो 1979 में किया गया था उसका विषय था "Image of  the Police in India" उसमे दो पॉइंट के ऊपर आम जनता का मत जानना था ! वो पॉइंट था :

1.  भारत मेंक्या  पुलिसवाले  को  प्रोफेसनली सबसे बेईमान माना  जता है यदि हा . तो आम जनता के भीतर पुलिसे की छवी सुधरने के लिए क्या किया जाना चाहिए  !
2.  क्या पुलिस सब इंस्पेक्टर और एस एच ओ अपने पॉवर का गलत इस्तेमाल करते है यदि है तो उसको रोकने के लिए क्या करना चाहिए ?

इस सर्वे को करने के लिए चार रीजन चुने गए और एक कुछ प्रश्नों का लिस्ट बनाया गया और इन चार चुने हुवे रीजन में 1000 एक रीजन के हिसाब से टोटल 4000 questionairs भेजा गया जिस रीजन में भेज गया ओ इस प्रकार है :
Image of the police in India-survey
Source:BPR&D Compendium
और जो फाइंडिंग उस  की आई  वह इस प्रकार है :
  • उस समय  82% लोग मानते थे की पुलिस अपनी काम सीधे से नहीं करती है और तटस्थ हो कर नहीं करती है ! विशेष कर इंस्पेक्टर और उससे निचे वाले रैंक के पुलिसमैन !
  •  आम जनता ने मन में  सीनियर अधिकारी की छवी अच्छी है !
  • सब-इंस्पेक्टर और उससे निचे वाले पुलिसमैन का व्यवहार जनता के प्रति ज्यादातर धमानेवाला या घमंडी होता है ! उच्च अधिकारी अच्छे होते है 
  • पुलिसड्यूटी के दौरान आम जनता के राईट और प्रिविलेज के बारे में नहीं ख्याल रखती है !
  • आम जनता ने भरष्टाचार को  पुलिस की ख़राब छवी के पीछे का मुख्या कारण माना  और साथ में ख़राब वोर्किंग कंडीशन और लिविंग कंडीशन कम पेमेंट को भी पुलिस की खराब छवी में एक कारक  माना!
  • 71% जनता मानती है की पुलिस गरीब तबके के साथ भेदभाव करती है और 80% मानती है  की पुलिस धनी और ओहदेदार लोगो के साथ देती है !
  • पुलिस गूंडा और बदमाश लोगो को बचाती है जिसके कारन भी पुलिस की छवी ख़राब होती है !
  • पुलिस में राजनैतिक हस्तक्षेप का बहुताय !
  •  सुपरवाइजरी कंट्रोल का कम होना जिस के कारन लोअर रैंक के लोग का  गलत आदते रोकना  मुश्किल 
ये सर्वेक्षण 1979 में कराया गया  था !और इस सर्वेक्षण के जो फाइंडिंग  है ,उसके देखने के बाद ये लगता है  की उस समय की स्तिथि और आज की स्तिथि में कोई खास बदलाव नहीं आया है! आगर आज भी हम सर्वेक्षण कराये थो रिजल्ट कम बेस वैसे ही आएगा ! 

तो ऐसा क्यों है!  पुलिस ऐसी क्यों है (why police is like this?)

मेरे अनुसार पुलिस ऐसी क्यों है उस का जवाब जानने के लिए पुलिस के इतिहास में  जाना पड़ेगा !  पहले के राजा महाराजा और उसके बाद अग्रेजो ने  पुलिस क्यों रखा था ! उनके लिए पुलिस का क्या उद्देश्य था ! उनके इए बस एक ही उदेश्य था की दंडभेद भाव और दमन से आम जनता के ऊपर शासन करना और शासन बनाये रखना ! पुलिस का कार्य था केवल और केवल  शसक के हितो का ख्याल रखना ! इस चीज को अग्रेजो के शासन काल के अंतिम दिनों में जब भारतीय अपनी आजादी के लिए लड़ रहे थे उस दौरान ज्यादा इस्तेमाल हुवा! उसके लिए अंग्रेजो ने बहुत से इनाम भी दिए ! और ये साम दंडभेद,भाव , भ्रस्टाचार  पुलिस के अन्दर इतना घर कर गया कीवह  पुलिस की संस्कृति और व्यवहार व बन कर रह गयी ! 

बहुत बार हम टीवी या किसी मंच से डिबेट में सुनते है की पुलिस ऐसी इसलिए है की पुलिस हमारे समाज की प्रतिबिम्ब है यानि जैसी समाज है वासी ही पुलिस है ! क्यों की पुलिसवाले भी इसी समाज से आते है ! 
मै उस बात से सहमत नहीं ही हु अगर वैसा होता तो पहले के समय में तो भारत के लोग शांतिप्रिय और बहुत नेक थे  फिरभी पुलिस इतनी क्रूर क्यों थी ! अगर आज का ही माहौल को लेले तो ये सोचते हुवे की हमारे समाज में बहुत सारी विकृतिया आ गयी है इसलिए पुलिस ऐसी है! अगर ए बात होता तो ऊपर के सर्वेक्षण में 81% आम जनता  पुलिस से नाखुश क्यों है अगर पुलिस उनकी प्रतिबिम्ब है तो ! इससे साफ़ जाहिर होता है की पुलिस समाज की प्रतिबिम्ब न हो कर खुद पुलिस की संस्कृति और व्यवहार  का प्रतिबिम्ब है जो संस्कृति और व्व्याहर  पुलिसवालों ने अंगेजो के ज़माने में बनाया था  !

मै क्यों बल पुर्बक कह रहा हु  की पुलिस खुद की पुलिस संस्कृति की प्रतिबिम्ब है इसके पीछे यह तर्क है की 1975 में जे पि आन्दोलन हुवा था ! उसमे उस समय के युवाओ ने बढ़ चढ़ का हिस्सा लिए और वह आन्दोलन कभी सफल रहा और समाज और राजनैतिक परिदृश्य में बहुत बदलाव लाया ! आन्दोलन  ख़त्म होने के बाद बहुत से उस समय के जवानों ने  पुलिस फ़ोर्स भी ज्वाइन किया होगा! जो  लोअर रैंक से अपर  रैंक तक,  तो उनलोग ने पुलिस के अन्दर क्यों बदलाव नहीं ला सके  वो लोग क्यों पहले  पुलिसवाले थे वैसे क्यों बन कर रह गए !

 अभी पिछले सालो यानि 2011 में अन्ना आन्दोलन दिल्ली में हुवा जो करप्शन के खिलाफ था! वह आन्दोलन अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का भी ध्यान अपने और बहुत आकर्षित किया था ! टाइम्स मगज़ीन के अनुसार अन्ना आन्दोलन 2011 में विश्व के घटनावो मेसे  एक मुख्य घटना था!   उसमे भी बहुत नवजवानों ने भाग लिया  था ! उन नवजवानों में से बहुतो ने पुलिस बल ज्वाइन किया है  ! ऐसे तो मै खुद भी बहुतो को जनता भी जो अन्ना आन्दोलन में सामिल हुवे थे और आज पुलिस अधिकारी ! अन्ना आन्दोलन ज्वाइन करना कोई गलत बात नहीं थी लेकिन ओ नवजवान जो उस समाज से आया है! लेकिंग यहाँ पुलिस बल में  आ कर क्यों पुलिस समाज का बन के रह गया उसने क्यों नहीं बदलाव लाया पुलिस में ! इससे साफ जाहिर हो रहा है की पुलिस समाज का प्रतिबिम्ब नहीं है वो केवल पुलिस संस्कृति का प्रतिबिम्ब है !

कैसे सुधरेगा पुलिस छवी भारत में टोटल पुलिस बल की संख्या 2014 में  तकरीबन 13.5 लाख (source:NCRB, न्यू दिल्ली ) जो की पुरे भारत में फैला हुवा है इसलिए जैसे की समाज को सुधारने  के लिए समाज सुधारक खुद उसी समाज से आता है वैसे ही पुलिस में भी सुधार  लाने  के लिए पुलिस बल में से ही लोगो को आना पड़ेगा! नहीं तो ये इतनी मेहनत किस काम की इज्जत ने मिल पाए  !  

आज भी सर्वेक्षण बोलता है की 90% पुलिसवाले घंटा या उससे ज्यादा काम करते है और उसमे से 75% पुलिसवाले ओ है  जो साल में कोई त्यौहार नहीं मन पाते है ड्यूटी के कारण !  


उच्च पुलिस अधिकारी अगर चाह दे तो संभव है की पुलिस की छवी सुधर जाए  ऐसा मै इसलिए कह रहा हु  की मै भी अपने सर्विस काल में देखा हु जब भी कोई ईमानदार अधिकारी आता  है उसके निचे कामकरने वाले आपने आप सुधर जाते है और अपनी कार्यशैली बदल देते ! भले ही वैसे अधिकारी से पुलिस बल के लोग नाखुश रहते है लेकिन जानता खुश राहती  और ओ पुलिस बल को  एक इज्जत और आशा की नजर से देखने लगती है विशेषकर कमजोर तबका उसको लगने लगता है की अगर कोई भी समस्या आएगी तो पुलिस बल उसका मदद करेगा ! 


अगर उच्च पुलिस पदाधिकारी पुलिस इमेज के सुधार  लाने की कोशिश नहीं करेंगेतो  तो जो ऊपर के सर्वेक्षण में बात कही गयी है की आम जनता उच्च अधिकारिओ को हाई रिगार्ड देती है और अच्छी मानती है तो ओ जनता के साथ धोखा है और अधिकारी दोहरी जीवन  जी रहे जनता के सामने कुछ और पीछे कुछ और! पुलिस में सुधार लाने के लिए एक सुधारक  से काम नहीं चलेगा बहुत से अधिकारिओ को आना पड़ेगा  ! और इसमें आम जनता को भी साथ देना पड़ेगा !

अगर आप किसी पॉइंट से सहमत नहीं है या कुछ और जोड़ना चाहते है  तो आप कमेंट बॉक्स में लिख सकते है! पुलिस से सम्बंधित कुछ  ब्लोग् पोस्ट है अगर आप उसे पढना चाहते है तो यहाँ क्लिक करे 

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